स्वागत है आप लोगों का मेरी दैनिक डायरी में, आज है 26 अक्टूबर 2024। मेरा आज का दिन बहुत ही खराब रहा जैसे कि मैंने आपको कल बताया था कि कल उसने मुझे जिस तरह से नजरअंदाज किया तो मुझे लगा कि अब सब कुछ खत्म हो चुका है और तभी से मेरा मन बहुत ज्यादा उदास है। आज का दिन कल से भी ज्यादा खराब रहा। आज मैं पूरे दिन बाहर नहीं गया और मैंने उसे आज पूरे दिन नहीं देखा। सुबह उठने के बाद मैं घर पर ही रहा, बाहर नहीं गया। नहा धोकर नाश्ता करने के बाद मैं अपने कमरे में चला गया। आज मेरा अधिकतर समय मोबाइल चलाते हुए बीता।
सुबह उठने के बाद मैं घर के बाहर खड़ा था। मुझे खड़े हुए थोड़ी देर हुई थी तभी वह मुझे अपने घर से आती हुई दिखी। वह दुकान पर जा रही थी। मैंने उसे देखते ही अपनी निगाह तुरंत हटा ली। आज मैंने उसे ना तो दुकान पर जाते हुए देखा और ना ही वहां से जब वापस आ रही थी तब देखा। वह वापस आने के बाद अपने घर चली गई। उसे देखने के लिए मुझे थोड़ा आगे जाना पड़ता क्योंकि रास्ते में एक मोड़ था, तो मैं वहां भी नहीं गया। मैंने आज उसे देखने की बिल्कुल भी कोशिश नहीं की। बस इतनी सी देर के लिए मैंने आज दिन भर में उसे देखा, उसके बाद से मैंने उसे नहीं देखा। मुझे नहीं पता आज उसने कौन से कपड़े पहने होंगे। आज दिनभर मैं अपने कमरे में रहा और मोबाइल चलाता रहा। मैंने थोड़ा काम किया और बहुत थोड़ी पढ़ाई की क्योंकि ज्यादा कुछ करने का मन नहीं कर रहा था।
जब मैं पढ़ रहा था तो कई बार उसका नाम मेरे सामने आया और यहीं सारी गड़बड़ हो जाती है। जब भी उसका नाम सामने आता है तो उसकी याद आ जाती है। शाम के समय टीवी में समाचार देखते हुए भी उसका नाम सामने आया। मैंने खुद को संभाला और अपना ध्यान हटाने की कोशिश की। शाम की चाय पीने के बाद मैं फिर से अपने कमरे में चला गया और मोबाइल चलाने लगा। आज मैं शाम के समय भी बाहर नहीं गया। मैं खाना खाने के बाद बाहर टहलने जाता हूँ लेकिन दोपहर का खाना खाने के बाद मैं अपने कमरे में चला गया और वहीं थोड़ा सा टहल लिया। आज मेरा बोलने का भी मन नहीं कर रहा था। आज मैं पूरे दिन ज्यादा नहीं बोला। घर वालों की बातों का जवाब भी मैंने अधिकतर इशारों में ही दिया।
रात का भोजन करने के बाद मैं बाहर गया। उसका दरवाजा बंद था। मुझे कोई उम्मीद भी नहीं थी उसके आने की, ना ही छत पर और ना ही दरवाजे पर। मैं थोड़ी देर टहलने के बाद वहीं बैठ गया। आज मैंने उसकी आवाज भी नहीं सुनी। मैं वहीं अकेला बैठा रहा। उसकी याद मेरा पीछा नहीं छोड़ रही थी। पूरे दिन लगातार उसकी याद आती रही। मेरे दिमाग के अंदर एक द्वंद्व चल रहा था, उसकी याद लगातार आ रही थी और मैं उसे दूर धकेलने की कोशिश कर रहा था। वहां से घर आने के बाद भी मैंने कोई काम नहीं किया। मन तो नहीं कर रहा था लेकिन मैंने डायरी लिखने के लिए मन पक्का किया, क्योंकि यहां अपनी भावनाएं व्यक्त करके मन थोड़ा हल्का हो जाता है। अभी रात के 11:00 बजने वाले हैं तो मैं चलता हूँ सोने, आपसे मिलूंगा कल फिर से एक और नई पोस्ट के साथ… शुभ रात्रि।
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