स्वागत है आप लोगों का मेरी डेली डायरी में, आज है 15 अगस्त 2024 तो सबसे पहले आपको स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। चलिए अब बताता हूँ कि मेरा आज का दिन कैसा बीता। आज सुबह मैं मॉर्निंग वॉक पर नहीं गया जैसा कि मैंने कल ही आपको बताया था कि मेरा मन बिल्कुल भी मॉर्निंग वॉक पर जाने का नहीं है। उसे देखने के बहाने मैं रोज सुबह जल्दी उठता और मॉर्निंग वॉक पर जाता लेकिन कल से मेरा मन ठीक नहीं है तो मॉर्निंग वॉक पर जाने का मन भी नहीं कर रहा है। मैंने मोबाइल में अलार्म भी बंद कर दिया है और आज मैं देर तक सोता रहा। सुबह जब मैं उठा तो मेरा मन बिल्कुल भी ठीक नहीं था, मुझे उसकी बहुत याद आ रही थी। सुबह मैं किसी काम से बाहर की ओर गया तो वह मुझे अपने घर के बाहर कुछ काम करते हुए दिख गई। मैंने उसे देखा तो, लेकिन इतनी गौर से नहीं देखा। मेरा मन उससे बहुत नाराज है। जैसे ही उसे एहसास हुआ कि मैं उससे कुछ दूरी पर खड़ा हूँ तो उसने मेरी और देखा और कुछ देर देखती रही, उसके बाद घर के अंदर चली गई। उसके बाद वह दो-तीन बार और आई लेकिन इस बार उसने मेरी ओर नहीं देखा क्योंकि मेरे आस-पास उसके घर के सदस्य और कुछ अन्य लोग थे, शायद इस वजह से उसने मेरी ओर नहीं देखा होगा।
सुबह नहा धोकर नाश्ता करने के बाद कल की ही तरह आज भी मैं बाहर नहीं गया। एक मन तो कर रहा था कि बाहर जाऊं और उसे देखूं लेकिन मैंने अपना हृदय कठोर कर लिया और अपने रूम में चला गया। थोड़ी देर बाद मैं कुछ काम से दो-तीन बार बाहर गया लेकिन वह मुझे दिखाई नहीं दी। दोपहर में मैंने आज कुछ काम करने की कोशिश की और मैं कुछ हद तक इसमें सफल भी रहा लेकिन मेरा मन बिल्कुल भी अच्छा नहीं था। मैं काम करता जा रहा था और उसे याद करता जा रहा था… पता नहीं वह कैसी होगी ? शाम की चाय पीने के बाद जब मैं बाहर जा रहा था तो वह अपने गेट पर खड़ी थी। जैसे ही मैं उसके सामने से निकला तो मैंने हल्की सी नजर उसकी ओर करके देखा… वह मेरी ओर देख रही थी। लेकिन मैंने तुरंत निगाह हटा ली और आगे निकल गया। आज मैं एक बार फिर से किसी जगह अकेले में बैठ गया और वहां थोड़ी देर बाद मुझे उसकी आवाज सुनाई दी। वह अपने घर के बाहर थी लेकिन मैंने उस ओर जाना ठीक नहीं समझा। हालांकि मेरा मन तो बहुत कर रहा था कि जाकर उसे गले लगा लूं लेकिन मैंने फिर से मन को मार लिया और वहीं बैठा रहा।
मैं शाम के समय बाहर गया और अपने दोस्तों से बातचीत की तो मेरा मन थोड़ा हल्का हुआ लेकिन उदासी मेरे मन में अभी भी थी। इस बीच वह मुझे एक दो बार और दिखाई दे गई लेकिन वह अपने काम में व्यस्त थी। इस बीच वह एक बार छत पर भी आई लेकिन उसके साथ उसके घर का कोई सदस्य भी था तो वह जल्दी ही नीचे चली गई। अब रात हो चुकी थी तो हम सभी लोग अपने-अपने घर आ गए और रात का खाना खाने के बाद एक बार फिर से मैं रोज की ही तरह बाहर निकल गया। मैं अकेला ही टहल रहा था, अभी तक मेरे दोस्त नहीं आए थे। मुझे टहलते हुए कुछ ही देर हुई थी कि मेरी नजर उसकी छत पर गई, मैंने देखा कि वह भी छत पर है। उसने मेरी ओर देखा कि मैं अकेला टहल रहा हूँ। वह भी आसपास ही टहलती रही लेकिन हममें कोई भी बातचीत नहीं हुई। मैं भी उसके पास तक नहीं गया, हालांकि बीच-बीच में मैं देखता रहा था कि वह इधर देख रही है या नहीं। वह भी ज्यादातर समय छत के इस हिस्से में टहल रही थी जिधर मैं था। मैं भी यूं ही टहलता रहा और वह भी अपनी छत पर टहलती रही। कुछ देर के लिए वह गायब हो गई तो मुझे लगा शायद नीचे चली गई होगी लेकिन थोड़ी देर बाद ही वह फिर से अपनी छत पर आ गई। मैं अकेले में जाकर बैठ गया जहां हल्का सा अंधेरा था लेकिन वह मुझे देख सकती थी। जब तक वह अपनी छत पर थी मैं वहीं बैठा रहा और जब इतनी रात हो गई कि वह नीचे चली गई होगी तो मैं वहां से उठकर अपने घर आ गया क्योंकि इस समय के बाद वह छत पर नहीं रहती और नीचे चली जाती है।
पता नहीं उसे मेरी हालत पर तरस आ रहा है या नहीं… अब मुझसे रहा नहीं जा रहा, उससे बात करने का बहुत मन कर रहा है। कल मैं कोशिश करूंगा कि उससे कुछ बात हो। उसे देखने बाहर जाऊंगा और उससे पूछने की कोशिश करूंगा कि क्या परेशानी है.. अगर कोई समस्या है तो मुझे बताए। हो सकता है वह शुरू में ना बोले लेकिन मुझे उम्मीद है कि जो भी बात है वह मुझे बताएगी। अभी रात के 12 बज चुके हैं, तो अब मैं चलता हूँ सोने… आपसे मिलूंगा कल फिर से एक नई पोस्ट के साथ… शुभ रात्रि।