शुक्रवार, 16 अगस्त 2024

उसके बिना मेरा मन बिल्कुल भी ठीक नहीं है, पता नहीं वो कब बोलेगी | Daily Diary | Personal Diary Blog | 15 August 2024 Diary

 स्वागत है आप लोगों का मेरी डेली डायरी में, आज है 15 अगस्त 2024 तो सबसे पहले आपको स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। चलिए अब बताता हूँ कि मेरा आज का दिन कैसा बीता। आज सुबह मैं मॉर्निंग वॉक पर नहीं गया जैसा कि मैंने कल ही आपको बताया था कि मेरा मन बिल्कुल भी मॉर्निंग वॉक पर जाने का नहीं है। उसे देखने के बहाने मैं रोज सुबह जल्दी उठता और मॉर्निंग वॉक पर जाता लेकिन कल से मेरा मन ठीक नहीं है तो मॉर्निंग वॉक पर जाने का मन भी नहीं कर रहा है। मैंने मोबाइल में अलार्म भी बंद कर दिया है और आज मैं देर तक सोता रहा। सुबह जब मैं उठा तो मेरा मन बिल्कुल भी ठीक नहीं था, मुझे उसकी बहुत याद आ रही थी। सुबह मैं किसी काम से बाहर की ओर गया तो वह मुझे अपने घर के बाहर कुछ काम करते हुए दिख गई। मैंने उसे देखा तो, लेकिन इतनी गौर से नहीं देखा। मेरा मन उससे बहुत नाराज है। जैसे ही उसे एहसास हुआ कि मैं उससे कुछ दूरी पर खड़ा हूँ तो उसने मेरी और देखा और कुछ देर देखती रही, उसके बाद घर के अंदर चली गई। उसके बाद वह दो-तीन बार और आई लेकिन इस बार उसने मेरी ओर नहीं देखा क्योंकि मेरे आस-पास उसके घर के सदस्य और कुछ अन्य लोग थे, शायद इस वजह से उसने मेरी ओर नहीं देखा होगा।

          सुबह नहा धोकर नाश्ता करने के बाद कल की ही तरह आज भी मैं बाहर नहीं गया। एक मन तो कर रहा था कि बाहर जाऊं और उसे देखूं लेकिन मैंने अपना हृदय कठोर कर लिया और अपने रूम में चला गया। थोड़ी देर बाद मैं कुछ काम से दो-तीन बार बाहर गया लेकिन वह मुझे दिखाई नहीं दी। दोपहर में मैंने आज कुछ काम करने की कोशिश की और मैं कुछ हद तक इसमें सफल भी रहा लेकिन मेरा मन बिल्कुल भी अच्छा नहीं था। मैं काम करता जा रहा था और उसे याद करता जा रहा था… पता नहीं वह कैसी होगी ? शाम की चाय पीने के बाद जब मैं बाहर जा रहा था तो वह अपने गेट पर खड़ी थी। जैसे ही मैं उसके सामने से निकला तो मैंने हल्की सी नजर उसकी ओर करके देखा… वह मेरी ओर देख रही थी। लेकिन मैंने तुरंत निगाह हटा ली और आगे निकल गया। आज मैं एक बार फिर से किसी जगह अकेले में बैठ गया और वहां थोड़ी देर बाद मुझे उसकी आवाज सुनाई दी। वह अपने घर के बाहर थी लेकिन मैंने उस ओर जाना ठीक नहीं समझा। हालांकि मेरा मन तो बहुत कर रहा था कि जाकर उसे गले लगा लूं लेकिन मैंने फिर से मन को मार लिया और वहीं बैठा रहा।

             मैं शाम के समय बाहर गया और अपने दोस्तों से बातचीत की तो मेरा मन थोड़ा हल्का हुआ लेकिन उदासी मेरे मन में अभी भी थी। इस बीच वह मुझे एक दो बार और दिखाई दे गई लेकिन वह अपने काम में व्यस्त थी। इस बीच वह एक बार छत पर भी आई लेकिन उसके साथ उसके घर का कोई सदस्य भी था तो वह जल्दी ही नीचे चली गई। अब रात हो चुकी थी तो हम सभी लोग अपने-अपने घर आ गए और रात का खाना खाने के बाद एक बार फिर से मैं रोज की ही तरह बाहर निकल गया। मैं अकेला ही टहल रहा था, अभी तक मेरे दोस्त नहीं आए थे। मुझे टहलते हुए कुछ ही देर हुई थी कि मेरी नजर उसकी छत पर गई, मैंने देखा कि वह भी छत पर है। उसने मेरी ओर देखा कि मैं अकेला टहल रहा हूँ। वह भी आसपास ही टहलती रही लेकिन हममें कोई भी बातचीत नहीं हुई। मैं भी उसके पास तक नहीं गया, हालांकि बीच-बीच में मैं देखता रहा था कि वह इधर देख रही है या नहीं। वह भी ज्यादातर समय छत के इस हिस्से में टहल रही थी जिधर मैं था। मैं भी यूं ही टहलता रहा और वह भी अपनी छत पर टहलती रही। कुछ देर के लिए वह गायब हो गई तो मुझे लगा शायद नीचे चली गई होगी लेकिन थोड़ी देर बाद ही वह फिर से अपनी छत पर आ गई। मैं अकेले में जाकर बैठ गया जहां हल्का सा अंधेरा था लेकिन वह मुझे देख सकती थी। जब तक वह अपनी छत पर थी मैं वहीं बैठा रहा और जब इतनी रात हो गई कि वह नीचे चली गई होगी तो मैं वहां से उठकर अपने घर आ गया क्योंकि इस समय के बाद वह छत पर नहीं रहती और नीचे चली जाती है।

           पता नहीं उसे मेरी हालत पर तरस आ रहा है या नहीं… अब मुझसे रहा नहीं जा रहा, उससे बात करने का बहुत मन कर रहा है। कल मैं कोशिश करूंगा कि उससे कुछ बात हो। उसे देखने बाहर जाऊंगा और उससे पूछने की कोशिश करूंगा कि क्या परेशानी है.. अगर कोई समस्या है तो मुझे बताए। हो सकता है वह शुरू में ना बोले लेकिन मुझे उम्मीद है कि जो भी बात है वह मुझे बताएगी। अभी रात के 12 बज चुके हैं, तो अब मैं चलता हूँ सोने… आपसे मिलूंगा कल फिर से एक नई पोस्ट के साथ… शुभ रात्रि।

गुरुवार, 15 अगस्त 2024

उसके इस बर्ताव से मैं बुरी तरह टूट गया | Daily Diary | Personal Diary | 14 August 2024 Diary

 स्वागत है आप सभी लोगों का मेरी डेली डायरी में और आज है 14 अगस्त 2024। कुछ दिनों से एक बार फिर से मैं कोई भी पोस्ट नहीं लिख पा रहा हूँ। मेरे पिछले कुछ दिन काफी उतार-चढ़ाव वाले थे और मेरा मन एक बार फिर से खराब हो गया था। मॉर्निंग वॉक पर जाते हुए इतने दिनों में वह मुझे मुश्किल से एक या दो बार ही दिखाई दी होगी। पिछले कुछ दिनों से उसका बर्ताव मुझे कुछ ठीक नहीं लग रहा, या तो उसके मन में कुछ और चल रहा है या उसके घर की तरफ से कुछ ना कुछ परेशानी है… और आखिरकार कल मेरा दिल बुरी तरह से टूट गया।

          जैसा कि मैंने पहले भी आपको बताया था कि मैं उससे बात करने की कोशिश कर रहा हूँ क्योंकि एक जरूरी बात मुझे उससे करनी है लेकिन मुझे मौका नहीं मिल पा रहा है। उसके बर्ताव से मुझे लग रहा था कि वह शायद बात नहीं करना चाह रही है। मैंने उसके लिए एक लेटर लिखा और कल रात जब वह अपनी छत पर आई तो मैंने उसकी ओर वह लेटर फेंक दिया, लेकिन उसने उठा कर वापस छत पर से मेरी ओर वह लेटर फेंक दिया। उसकी इस हरकत से मुझे इतना बुरा लगा कि मैं इतनी बुरी तरह से टूट गया कि मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूं। कुछ देर के लिए मैं यूं ही खड़ा रहा। थोड़ी देर के बाद मैं वहीं पास में बैठ गया और मेरी आंखों में आंसू आ गए। मैं रो रहा था, हालांकि वह बाद में अपनी छत पर से मेरी ओर देख रही थी लेकिन वह क्या सोच रही थी मुझे नहीं पता। मैं बस रोए जा रहा था… मैं काफी देर यूं ही गमगीन सा बैठा रहा, उसके बाद मैं उठकर अपने घर आ गया।

           अब कल से मेरा मन इतना खराब है कि कुछ भी करने का दिल नहीं कर रहा। आज सुबह जब मैं मॉर्निंग वॉक पर गया तो वह मुझे नहीं दिखी। मैंने भी कोई खास कोशिश नहीं की उसे देखने की क्योंकि कल से मैं बुरी तरह टूट चुका हूँ। कल से बस उसकी याद सताए जा रही है… काश मैंने उससे सच्चा प्यार ना किया होता, औरों की तरह बस टाइम पास ही किया होता (जैसा कि आजकल सभी करते हैं) तो शायद मैं खुशी से रहता और मुझे कोई दुख नहीं होता। आज मैं बाहर भी नहीं गया। मॉर्निंग वॉक से वापस आने के बाद नहा धोकर नाश्ता करके मैं घर ही रहा, और जैसे रोज उसे देखने बाहर जाता हूँ आज मैं नहीं गया। आज का मेरा पूरा दिन कितना खराब बीता मैं बता नहीं सकता, मेरे पास शब्द नहीं हैं। पूरे दिन बस उसी की याद आती रही, पता नहीं उसने ऐसा क्यों किया, उसके दिल में क्या है… अगर कोई भी परेशानी है तो कम से कम मुझे बताना तो चाहिए। अगर कोई समस्या आती है तो उसका हल मिलकर ढूंढा जाता है, यूं रिश्ता खत्म नहीं किया जाता।

            शाम की चाय पीने के बाद मैं बाहर गया और उसके घर की ओर ना जाकर रास्ते में ही किसी जगह अकेले में बैठ गया और काफी देर तक यूं ही बैठा रहा। कुछ देर बाद मैं घर वापस आ गया। फिर शाम को मैं बाहर गया तो उसके घर की ओर जहाँ हम सभी लोग बैठते हैं वहाँ जाकर बैठ गया। मेरा मन ठीक नहीं था लेकिन फिर भी उसे देखने का मन कर रहा था तो बीच-बीच में मैं नजर उठाकर उसके घर की ओर देखता लेकिन वह मुझे दिखाई नहीं दी। थोड़ी देर बाद मुझे लगा जैसे उसने मुझे देखा, वह दरवाजे पर तो नहीं आई लेकिन घर के अंदर ही अंदर दरवाजे के इस ओर से उस ओर तक जाकर वापस आई। वह मेरी ओर देख रही थी, शायद यह देख रही होगी कि अब मेरा क्या हाल है। जब रात होने लगी तो मैं वापस घर आ गया और खाना खाने के बाद रोज की तरह फिर से बाहर निकल गया। मैं और मेरे दोस्त वहीं टहल रहे थे। थोड़ी देर बाद मैंने देखा कि वह अपनी छत पर आ चुकी है और जिधर हम टहल रहे थे उधर की ओर वह खड़ी थी और बीच-बीच में छत पर ही टहल रही थी। पता नहीं अब उसके मन में क्या है, उसे मेरी पहचान तो पड़ ही गई होगी कि मैं वहां पर हूँ और किस हाल में हूँ। किसी भी गपशप में मेरा मन नहीं लग रहा था तो मैं सबसे अलग कभी खड़ा होता था तो कभी टहलने लगता था। पता नहीं वह अब मुझसे बोलेगी भी या नहीं या हमारा रिश्ता यूं ही खत्म हो जाएगा।

           कुछ देर के बाद मेरे साथ के सभी लोग वहां से चले गए लेकिन मैं वहीं रहा और अकेले में बैठकर उसे याद करता रहा। वह उस समय भी छत पर ही थी लेकिन उसने मुझसे बात करने की कोई कोशिश नहीं की। कुछ देर के बाद वह दिखनी बंद हो गई, शायद नीचे चली गई होगी। मैं कुछ देर यूं ही बैठा रहा अकेले में… अंधेरे में बैठने का मन कर रहा था, सबसे अलग जहां कोई ना हो, किसी से भी बोलने का मन नहीं था। कुछ देर बैठने के बाद मैं वापस घर आ गया। एक बार तो मन किया कि मैं कुछ लिखूं लेकिन अगले ही पल सोचा कि आज नहीं कल लिखूंगा। आज मन ठीक नहीं है लेकिन फिर मैंने सोचा कि आप लोगों से अपनी बातें शेयर करूंगा तो कुछ अच्छा लगेगा और कल के चक्कर में रोज ऐसे ही समय निकलता जाएगा तो मैंने बड़ी मुश्किल से अपने मन को संभाला और यह पोस्ट लिखने बैठ गया। अपने दिल की बातें यहां लिखकर अब थोड़ा सा अच्छा लग रहा है लेकिन उसकी याद लगातार मेरे दिल में आ रही है, उसका चेहरा मेरी आंखों के सामने घूम रहा है। देखते हैं कि अब कल क्या होगा… और कल मेरा मॉर्निंग वॉक पर जाने का बिल्कुल भी मन नहीं है तो मैं कल नहीं जाऊंगा। अभी रात के 11:30 बजने वाले हैं और अब मैं सोने जा रहा हूँ, लेकिन पता नहीं नींद आएगी भी या नहीं या कितनी देर तक नहीं आएगी। अब आपसे कल मिलूंगा और कल से रोज लिखने की कोशिश करूंगा… शुभ रात्रि।

शुक्रवार, 9 अगस्त 2024

मुझे उससे कुछ जरूरी बात करनी है लेकिन मौका नहीं मिल पा रहा है | Daily Diary | Personal Daily Diary | 8 August 2024 Diary

 स्वागत है आप लोगों का फिर से मेरी एक और दैनिक डायरी पोस्ट में और आज है 8 अगस्त 2024। आज सुबह मुझे उठने में थोड़ी परेशानी हुई क्योंकि रात मैं देर से सोया था और कल मेरी नींद भी पूरी नहीं हुई थी तो सुबह अलार्म बजने पर मैं एक बार तो अलार्म बंद करके फिर से लेट गया, लेकिन अच्छा हुआ 7 मिनट बाद मेरी आँख खुल गई और मैं जल्दी से उठा। एक गिलास पानी पीकर मॉर्निंग वॉक के लिए चला गया। जब भी मैं सुबह मॉर्निंग वॉक के लिए जाता हूँ तो मुझे एक आस रहती है उसके दिखाई देने की लेकिन आज वह ना तो मुझे इधर से जाते हुए दिखाई दी और ना ही उधर से आते हुए। रात नींद पूरी न होने की वजह से मुझे मॉर्निंग वॉक पर जाकर लौटने तक थोड़ी सुस्ती सी महसूस होती रही।

           वापस आकर नहा धोकर मैंने नाश्ता किया और फिर उसे देखने की आस में बाहर निकल गया। जैसे ही मैं उसके घर के सामने पहुंचा तो वह बाहर से अपने घर के अंदर जा रही थी। अगर मैं थोड़ा और लेट हो जाता तो उसे नहीं देख पाता। जैसे ही उसने मुझे देखा तो वह समझ गई कि मैं क्यों आया हूँ। मुझे भी उसे देखकर बहुत खुशी हुई। जब वह घर के अंदर चली गई तो उसने पलट कर फिर से मेरी ओर देखा कि मैं वहीं खड़ा हूँ या नहीं और मैं तब तक वहीं खड़ा था। उसके बाद मैं वहां से वापस आ गया। वापस आकर मैंने रोज के अपने काम निपटाए और उसके बारे में सोचता रहा। मुझे उससे कुछ जरूरी बात करनी है लेकिन बात करने का मौका नहीं मिल पा रहा है।

            दोपहर का खाना खाने के बाद एक बार फिर से मैं बाहर की ओर निकल गया और उसके घर के सामने से गुजरते हुए मैंने उसके घर की ओर देखा लेकिन वह मुझे दिखाई नहीं दी, फिर मैं आगे बढ़ गया। लेकिन जब मैं उधर से लौट रहा था तो वह मुझे दिख गई, मैं वहीं खड़ा हो गया और उसे देखता रहा। हालांकि मैंने चारों ओर देख लिया था कि कहीं कोई और तो मुझे नहीं देख रहा है। दोपहर का समय था इसलिए सब अपने घरों के अंदर थे और मैं धूप में खड़ा उसे देख रहा था… मानो मुझ पर धूप का कोई असर ही नहीं हो रहा हो। उसे अभी तक यह नहीं पता था कि सामने मैं खड़ा उसे देख रहा हूँ। थोड़ी देर बाद जब उसने नजर उठा कर देखा तो मुझे देखते ही उसके चेहरे पर एक मुस्कुराहट सी आ गई। मैंने उससे इशारों में कुछ पूछने की कोशिश की, पता नहीं वह समझ पाई या नहीं क्योंकि उसने कुछ तो इशारा किया था लेकिन मैं उसके इशारे को समझ नहीं पाया। पता नहीं क्या कह रही थी। वहां ज्यादा देर खड़े होना भी ठीक नहीं था तो वह भी अंदर चली गई और मैं भी घर वापस आ गया।

                 आज मैंने फैसला किया था कि मैं दोपहर में नहीं सोऊंगा क्योंकि कुछ दिनों से दोपहर को मुझे नींद आ रही थी और दोपहर में सो जाने की वजह से मेरे काम समय से नहीं हो पा रहे थे। आज मैं अपनी कोशिश में सफल रहा। आज मैं दोपहर में नहीं सोया जिसकी वजह से मैंने जो काम सोच रखे थे वह कर लिए। शाम की चाय पीने के बाद मैं बाहर निकल गया। फिर से मैंने उसे देखने की कोशिश की। थोड़ी कोशिश के बाद वह मुझे दिख गई वह अपने घर के आंगन में लेटी थी। लेकिन उसका मुंह दूसरी ओर था तो मैंने कुछ देर उसे देखा, उसके बाद मैं वापस आकर किसी काम में लग गया। थोड़ी देर बाद मैं फिर से वहीं पहुंच गया, इस बार उसने मेरी और देखा लेकिन मेरे साथ कुछ और लोग भी बैठे थे तो वह जल्दी ही काम समाप्त करके घर के अंदर चली गई और दरवाजा बंद कर लिया। जब मुझे लगा कि मेरे साथ वाले लोग उठने वाले नहीं हैं तो मैं वहां से वापस आ गया।

          आज शाम के समय मैं थोड़ा व्यस्त रहा तो मुझे शाम के समय बाहर जाने का मौका नहीं मिला। आज मुझे गांव में ही एक दावत में जाना था। वहां से लौटते समय देर हो चुकी थी तो मुझे आभास हो गया था कि आज रात में हमारी बातें नहीं हो पाएंगी और यही हुआ। जब तक मैं वापस आता तब तक देर हो चुकी थी। शायद वह छत पर आई होगी और मुझे वहां न देखकर वापस चली गई होगी। मैं और मेरे दोस्त रोज की तरह टहलने के लिए निकल गए और जब वापस आए तो काफी समय हो चुका था तो फिर हम वहां नहीं रुके और अपने-अपने घर वापस आ गए। अब मुझे फिर से कल की प्रतीक्षा करनी होगी। अभी रात के 11:30 बज रहे हैं तो अब मैं आपसे विदा लेता हूँ, अब आपसे मुलाकात होगी कल फिर से एक और नई पोस्ट के साथ… शुभ रात्रि।

गुरुवार, 8 अगस्त 2024

अगर वो दुखी होती है तो मेरा मन भी दुखी हो जाता है | Daily Diary Blog | Personal Diary Writing | 7 August 2024

 स्वागत है आप लोगों का फिर से एक और नए ब्लॉग पोस्ट में और आज है 7 अगस्त 2024। यह ब्लॉग पोस्ट मैं काफी दिनों बाद लिख रहा हूँ। मैं काफी दिनों से कोई भी पोस्ट नहीं लिख पा रहा था क्योंकि कभी-कभी कुछ ऐसा हो जाता है कि मन नहीं लगता। मेरे साथ भी काफी दिनों से कुछ ऐसा ही चल रहा था, फिलहाल सब कुछ ठीक है। ऐसा नहीं था कि लगातार मन ठीक नहीं था, बीच-बीच में सब कुछ ठीक हो जाता था लेकिन फिर से कुछ ना कुछ ऐसा हो जाता था कि मन फिर से खराब हो जाता था। बीच में कई बार मैंने पोस्ट लिखने की कोशिश की लेकिन मन ने साथ नहीं दिया। कभी घर में चल रही कुछ दिक्कतों की वजह से मन खराब हो जाता, तो कभी उसकी वजह से मन नहीं लगता।

               पिछले दिनों उसके घर में कुछ दिक्कत हो गई थी और जब भी उसके साथ या उसके घर कोई समस्या होती है तो मेरा मन परेशान हो जाता है और फिर किसी भी काम में मेरा मन नहीं लगता। अगर वह खुश रहती है तो मेरा मन भी खुश रहता है और अगर वह किसी भी वजह से दुखी हो जाती है तो मेरा मन भी दुखी हो जाता है। पिछले काफी दिनों से यही सब कुछ चल रहा था, खैर अब कोई समस्या नहीं है उसके साथ, तो अब सब कुछ ठीक चल रहा है। कुछ दिनों के लिए हमारी बातचीत भी बंद हो गई थी और उसका मेरी ओर देखना भी बंद हो गया था, तो मैं काफी परेशान सा हो गया था। जब समस्याएं समाप्त हुईं तो सब कुछ ठीक हो गया। जब घर में कोई समस्या होती है तो किसी का भी मन परेशान हो जाता है और यही उसके साथ हो रहा था।

             रोज की तरह आज सुबह जैसे ही मैं अपने समय पर उठा और कमरे से बाहर निकल कर मैंने देखा कि तेज बारिश हो रही थी। बारिश की वजह से आज मैं मॉर्निंग वॉक पर नहीं जा पाया। यह बारिश कल रात लगभग 8 बजे से हो रही थी और आज दोपहर के 1 बजे तक बारिश होती रही। सुबह उठने के बाद बाहर बारिश होती देख मैं एक बार फिर से सो गया और जब बाद में उठा तब भी बारिश हो रही थी। अपने दैनिक कार्य निपटाने के बाद मैंने नाश्ता किया और अपने कमरे में चला गया। वहां कुछ देर काम किया और उसके बाद मुझे सुस्ती आने लगी थी, क्योंकि बाहर बारिश हो रही थी इसलिए मौसम ठंडा था तो मुझे कुछ देर के लिए झपकी लग गई। बीच में मेरी आँख खुली तो अभी तक बारिश हो ही रही थी। फिर दोपहर का खाना खाने के बाद मैं फिर से कमरे में जाकर लेट गया और मुझे नींद आ गई उसके बाद जब मेरी आँख खुली तो बारिश रुक चुकी थी।

             कल से हो रही इस बारिश की वजह से कल शाम से मैं उसे नहीं देख पाया और आज भी पूरा दिन हो गया था। बारिश रुकने के बाद शाम के समय मैं बाहर गया तो उसकी हल्की सी झलक मुझे दिखाई दी। अभी मेरे घर के अन्य काम मुझे निपटाने थे इसलिए मैं ज्यादा देर बाहर नहीं रुक सका। घर के कार्य समाप्त करने के बाद मैंने शाम की चाय पी और उसके बाद फ्री होकर बाहर चला गया। उसके घर के सामने से गुजरते हुए मुझे वह अच्छी तरह दिखाई दे गई और उसे देखकर मेरा मन खुश हो गया। अपने घर के बाहर जब वह अपना काम कर रही थी तो मैंने उससे बात करने की कोशिश की लेकिन ऐसा संभव नहीं हो पाया क्योंकि कुछ दूरी पर और भी लोग थे जो आपस में बातें कर रहे थे। तो मैंने भी उसके पास जाकर ज्यादा बात करने की कोशिश नहीं की क्योंकि वैसे ही कुछ लोग हमारे पीछे पड़े हैं, इससे उसे भी खतरा हो सकता था और उसे कोई दिक्कत हो यह मुझे मंजूर नहीं।

           रात का भोजन लेने के बाद रोज की तरह मैं टहलने के लिए बाहर चला गया, तब तक मेरे और भी दोस्त आने वाले थे। जैसे ही मैं उसके घर के सामने से निकल रहा था वह अपने घर का गेट बंद कर रही थी। मैंने उसे देख लिया था और मैं रोशनी में खड़ा हो गया ताकि वह भी मुझे देख सके और शायद उसने भी मुझे देखा, मैं उसके बाद आगे निकल गया। थोड़ी देर बाद वह अपने घर की छत पर आ गई, शायद उसने मुझे जाते हुए देख लिया था और वह समझ गई थी कि मैं कहाँ जाने वाला हूँ। जब वह अपने घर की छत पर आई तो मैंने उससे बात करने की कोशिश की लेकिन वह ज्यादा देर नहीं रुकी। शायद आसपास की छत पर कोई और व्यक्ति होगा या उसके घर से कोई और छत पर आ रहा होगा। उसके बाद मैंने उसकी काफी देर प्रतीक्षा की लेकिन फिर वह नहीं आई तो मैं समझ गया कि कल तक मुझे फिर से प्रतीक्षा करनी होगी। उसके बाद हम लोग टहलने चले गए वापस आकर कुछ देर हमने गपशप की और उसके बाद अपने-अपने घर आ गए। अभी रात के 12:00 बज चुके हैं तो अब मैं चलता हूँ सोने, अब आपसे मुलाकात होगी कल फिर से एक और नई ब्लॉग पोस्ट में… शुभ रात्रि।

मंगलवार, 6 अगस्त 2024

आज किसी काम में मन नहीं लग रहा है...उसकी याद भी ज्यादा आ रही है आज | Personal Life Blog | Personal Diary | 13 July 2024 Blog

 आज है 13 जुलाई 2024 और अभी रात के 11:15 बज रहे हैं। आज सुबह मैं अपने नियत समय पर सो कर उठा और जैसे ही अपने कमरे से बाहर निकला तो बाहर का माहौल कुछ गीला सा हो रहा था। इसका मतलब यह था कि रात में बारिश पड़ी थी, लेकिन उस समय मौसम ठीक था तो मैं मॉर्निंग वॉक पर निकल गया। रात की बारिश की ताकत का अंदाजा तब लगा जब गांव से बाहर मैंने खेतों में देखा। खेतों में फसलें बिछ गई थीं, इसका अर्थ यह था कि रात में बहुत तेज आंधी चली थी। आंधी और बारिश ने मिलकर तूफान का रूप ले लिया था, कई जगह कुछ पेड़ भी टूटे हुए पड़े थे।

               मैं मॉर्निंग वॉक से वापस आया। वह ना तो मुझे इधर से जाते हुए मिली और ना ही जब मैं उधर से आ रहा था, तब ही उसके दर्शन हुए। मैं घर वापस आ गया और थोड़ी देर बाद किसी काम से बाहर की ओर गया जैसे ही उसके घर के सामने पहुंचा, उसके दरवाजे के झरोखे से उसका चेहरा मुझे दिखाई दिया। जैसे ही मैंने उसे देखा, मेरा मन एकदम से खिल उठा। वापस आकर मैं नहा-धोकर नाश्ता करने के बाद एक बार फिर से बाहर की ओर चला गया।

             पता नहीं क्यों, आज उसे जी भर कर देखने का मन कर रहा था… शायद इसलिए क्योंकि कई दिन से हमारी बात नहीं हो पा रही है और ना ही हम एक दूसरे को ठीक से देख पा रहे हैं। जब मैं बाहर गया तो वह मुझे अपने घर के बाहर ही मिल गई और मैं उसे निहारते हुए आगे की ओर निकल गया क्योंकि ऐसे रुकना ठीक नहीं था। मैं थोड़ी देर बाद उसी रास्ते से वापस आया और एक बार फिर उसकी और देखा लेकिन इस बार उसके पास उसके परिवार के सदस्य भी थे तो मैं सीधा अपने घर चला आया। लेकिन मेरा मन कहाँ मानने वाला था… कुछ समय बिताने के बाद मैं एक बार फिर से बाहर की ओर गया और इस बार भी वह मुझे घर के बाहर ही काम करते हुए दिख गई, लेकिन उसके बिल्कुल पास उसके घर का एक सदस्य कुछ काम कर रहा था। मैं ना तो वहाँ जा पाया और ना ही किसी जगह खड़ा हो पाया। मैं दूसरी ओर निकल गया और थोड़ी देर बाद जब वापस आया तो वह अपना काम समाप्त करके घर के अंदर जा चुकी थी। मैं समझ गया कि अब वह दिखाई नहीं देगी तो मैं घर वापस आ गया।

            रात आंधी और बारिश होने की वजह से बिजली की लाइन में कई जगह फॉल्ट बन गए थे, कुछ खंभे भी टूटे थे और लाइट आने की कोई संभावना नहीं थी। आज मन थोड़ा अजीब सा हो रहा था। कभी-कभी ऐसा होता है… पता ही नहीं चलता कि मन क्या चाह रहा है, बस थोड़ा उदास, थोड़ा परेशान सा रहता है। कुछ ऐसा ही आज मेरे साथ हो रहा था और मेरे लिए यह कोई नई बात नहीं है, कभी भी मेरे साथ ऐसा हो जाता है। आज उसकी याद भी कुछ ज्यादा आ रही थी। उससे मिलने का बहुत मन था लेकिन इस समय हम दोनों के ही साथ ऐसी स्थिति है कि हमें एक-एक कदम बहुत संभाल कर रखना पड़ रहा है। आज मैं अपना कोई काम नहीं कर पाया, मन ही नहीं लग रहा था किसी काम में… पूरी दोपहर ऐसे ही निकल गई, कभी लेटता तो कभी बैठता और ना ही सोने का मन कर रहा था। शाम की चाय पीने के बाद मैं बाहर की ओर गया और संयोग से जब मैं बाहर पहुंचा, उसी समय वह अपने घर से बाहर आ रही थी कुछ काम करने के लिए। तो जब तक वह अपना काम करती रही मैं वहीं खड़े होकर उसे देखता रहा। मेरे लिए एक अच्छी बात यह भी थी कि इस समय मेरे पास किसी का फोन आया और मैं फोन पर बात करते-करते वहीं टहल रहा था, जहां से वह मुझे अच्छी तरह साफ-साफ दिखाई दे रही थी। जब तक उसने अपना काम समाप्त किया मैं उसे देखता रहा लेकिन उससे कुछ ही दूरी पर उसके घर के सदस्यों की आवाज भी आ रही थी तो वह मेरी ओर नहीं देख सकती थी और ना ही हम इशारों में कुछ बात कर सकते थे। जब वह काम समाप्त करके घर के अंदर चली गई तो मैं अपने घर वापस आ गया।

             शाम के समय मैं किसी काम से उसके घर के नजदीक था तो मुझे उसकी आवाज तो आ रही थी लेकिन वह दिखाई नहीं दे रही थी। मैंने काफी कोशिश की कि वह मुझे दिख जाए लेकिन ऐसा हो नहीं सका, फिर मैं घर वापस आ गया। शाम का समय आज यूं ही निकल गया, कुछ खास नहीं हुआ। रात का खाना खाने के बाद रोज ही की तरह मैं और मेरे दोस्त टहलने के लिए गांव से बाहर निकल गए। कुछ समय वहां बिताया, बातें कीं और उसके बाद घर वापस आ गए। जैसे ही हम गांव में पहुंचने वाले थे तभी लाइट आ गई जो कि पूरे दिन गायब रही थी। ऐसा लग रहा था जैसे आज आएगी ही नहीं लेकिन गनीमत रही की लाइट सोने से पहले आ गई। अभी रात के 11:45 बज रहे हैं और मुझे नींद आ रही है तो मैं चलता हूँ सोने, अब आपसे मुलाकात होगी कल फिर से एक और नए ब्लॉग पोस्ट के साथ… शुभ रात्रि।

मेरा आज का दिन कल से भी ज्यादा उदासी भरा रहा...| 26 October 2024 Diary

स्वागत है आप लोगों का मेरी दैनिक डायरी में, आज है 26 अक्टूबर 2024। मेरा आज का दिन बहुत ही खराब रहा जैसे कि मैंने आपको कल बताया था कि कल उसने...