स्वागत है आप सभी लोगों का मेरी दैनिक डायरी में, आज है 25 अक्टूबर 2024। आज फिर से दोपहर के बाद का दिन मेरे लिए बहुत ही खराब बीता। सुबह जब मैं काम से बाहर गया तो वह मुझे दिखाई तो नहीं दी थी लेकिन थोड़ी देर बाद मैं यूं ही उसके घर के पास जाकर खड़ा हो गया। थोड़ी देर बाद वह घर से निकल कर आई तो मैंने उसे देखा। उसने मेरी ओर नहीं देखा और थोड़ी देर बाद अंदर चली गई। मैं आज काफी देर तक वहां खड़ा रहा था और जैसे ही मैं घर आने को हुआ वह मुझे एक बार फिर से दिखाई दी। लेकिन जल्दी ही वह अंदर चली गई और मुझे पता भी नहीं चला कि वह कब अंदर की ओर चली गई। मैं घर आ गया, नहा धोकर मैंने नाश्ता किया और बाहर की ओर चला गया। मैं जाकर उसके घर के सामने दुकान पर बैठ गया। मैं बार-बार उसके दरवाजे और उसके घर के बाहर देख रहा था कि कहीं से वह आ जाए और मुझे दिख जाए। मुझे कुछ देर बैठे हुए हो गई थी। अचानक एक फेरीवाला आया और मैं सोच ही रहा था कि वह उसकी आवाज सुनकर दरवाजा खोलेगी और ऐसा ही हुआ। उसने दरवाजा खोल कर देखा लेकिन तब तक फेरीवाला आगे जा चुका था। मैंने उसे देखा, वह कुछ सेकेंड के लिए दरवाजे में रुकी और उसने देखा कि मैं वहां बैठा हूँ। उसके बाद दरवाजा बंद करके अंदर चली गई।
थोड़ी देर बाद उसने फिर से हल्का सा दरवाजा खोला और बाहर झाँककर अंदर चली गई। मैं आज बहुत देर तक वहीं बैठा रहा था। वह एक बार फिर अपने घर के बाहर अपनी गाय नहलाने आई लेकिन उस समय उसने एक बार भी वहां नहीं देखा जहां मैं बैठा था। मैं उसे गाय नहलाते हुए देख रहा था। वह गाय को नहला कर और उसके बाद थोड़ा सा काम करके घर के अंदर चली गई। उसके बाद वह मुझे दिखाई नहीं दी। मैं वहां से उठकर अपने घर आ गया। घर आकर मैं अपने काम में लग गया। आज मैंने दोपहर का खाना काफी देरी से खाया था, लगभग दोपहर और शाम के बीच का समय था जब मैंने खाना खाया। खाना खाने के बाद मैं बाहर गया। उसके घर के सामने से जाते हुए मैंने उसे देखने की कोशिश की लेकिन वह नहीं दिखी। जैसे ही मैं थोड़ा आगे पहुंचा वह अपने पड़ोस के घर में थी और उसके दरवाजे की ओर आ रही थी। मैं उसके दरवाजे पर पहुंच चुका था और मुझे उसकी आवाज आई जैसे ही उसने वहां मुझे देखा वह तुरंत वापस हो गई और उसके बाद वह उस घर में रुकी भी नहीं। अपने घर चली गई। मैंने रुकने के लिए कहा लेकिन वह ना तो रुकी और ना ही उसने मुड़ कर देखा और अपने घर चली गई। मुझे उस समय इतना बुरा लगा कि मैं बता नहीं सकता। मुझे उस पर बहुत ज्यादा गुस्सा आया। मैं वहां से वापस आ गया।
अब मेरा मन बहुत ज्यादा उदास हो रहा था। मुझे लग रहा था कि अब सब कुछ खत्म हो गया है। अब वह नहीं मानेगी। आज मुझे सबसे ज्यादा बुरा लग रहा था। उसे नहीं पता कि वह मेरे साथ कितना गलत कर रही है। मैं उसी के लिए यहां रुका हुआ हूँ। मैंने उसके लिए कई सारी नौकरियां छोड़ी हैं, ताकि मैं घर रहूं और उसके पास रहूं। यह सब मैंने उसे बता दिया है लेकिन शायद उसे बात की गंभीरता का एहसास नहीं है। मैं उसके लिए अपना जीवन इतने बड़े खतरे में डाल रहा हूँ लेकिन उसे कोई फर्क नहीं पड़ता। उसके प्रति आज कई सारे नकारात्मक विचार मेरे मन में आए। मैंने कई साल उसके लिए बर्बाद कर दिए, अपना कैरियर दांव पर लगा रखा है लेकिन उसे मेरे प्यार का एहसास नहीं है शायद। आज मुझे इतना गुस्सा आया कि मैंने सोचा उससे अपने बर्बाद हुए समय का बदला लूं। अगर वह किसी भी बात पर नाराज है तो उसे मुझे बताना चाहिए या घर में उससे किसी ने कुछ कहा है तो मुझसे बात तो करनी चाहिए। मैं सोच रहा हूँ कि उससे अब कभी बात ना करूँ और ना ही उसे देखूँ। अब अपने समय को अपने लिए खर्च करूँ और सही समय का इंतजार करूँ, उसे उसकी गलती का एहसास कराने के लिए।
शाम के समय मैं बाहर तो गया लेकिन उसे देखने की मेरी कोई खास इच्छा नहीं थी। मैं काफी देर वहां बैठा रहा और उसके बाद घर आ गया। रात का भोजन करने के बाद मैं रोज की तरह टहलने बाहर चला गया और जाकर अपनी जगह बैठ गया। मुझे वहां बैठे हुए कुछ देर हो गई थी। उसका दरवाजा खुला और उसमें से वह बाहर की ओर झांकी। वह थोड़ी देर देखती रही लेकिन मैं उसकी ओर नहीं देख रहा था। हालांकि मुझे पता चल गया था कि दरवाजे पर वह झांक रही है। उस समय अंधेरा था लेकिन बल्ब की हल्की सी रोशनी वहां आ रही थी जिससे मुझे उसकी पहचान पड़ी। वह थोड़ी देर बाहर देखती रही और उसके बाद दरवाजा बंद करके अंदर चली गई। आज मैं टहलने गांव के बाहर चला गया था। मेरे साथ एक लड़का और था। हम लोग वहां से टहल कर आए और फिर आकर वहीं बैठ गए। काफी देर हमने बातें कीं। उसके बाद हम अपने अपने घर आ गए। घर आने के बाद मेरा मन कुछ भी करने का नहीं कर रहा था तो मैं मोबाइल चलाता रहा। आज मैंने अपना कोई भी काम नहीं किया और ना ही मैं पढ़ पाया। बस मैंने अपनी डायरी लिखी। अभी रात के 12:30 बज चुके हैं तो अब मैं चलता हूँ सोने, आपसे मिलूंगा कल फिर से एक और नई पोस्ट के साथ… शुभ रात्रि।