शनिवार, 26 अक्टूबर 2024

जिस तरह से उसने आज मुझे नजरअंदाज किया, ऐसा लग रहा है कि अब सब कुछ खत्म हो गया है | 25 October 2024 Diary

 स्वागत है आप सभी लोगों का मेरी दैनिक डायरी में, आज है 25 अक्टूबर 2024। आज फिर से दोपहर के बाद का दिन मेरे लिए बहुत ही खराब बीता। सुबह जब मैं काम से बाहर गया तो वह मुझे दिखाई तो नहीं दी थी लेकिन थोड़ी देर बाद मैं यूं ही उसके घर के पास जाकर खड़ा हो गया। थोड़ी देर बाद वह घर से निकल कर आई तो मैंने उसे देखा। उसने मेरी ओर नहीं देखा और थोड़ी देर बाद अंदर चली गई। मैं आज काफी देर तक वहां खड़ा रहा था और जैसे ही मैं घर आने को हुआ वह मुझे एक बार फिर से दिखाई दी। लेकिन जल्दी ही वह अंदर चली गई और मुझे पता भी नहीं चला कि वह कब अंदर की ओर चली गई। मैं घर आ गया, नहा धोकर मैंने नाश्ता किया और बाहर की ओर चला गया। मैं जाकर उसके घर के सामने दुकान पर बैठ गया। मैं बार-बार उसके दरवाजे और उसके घर के बाहर देख रहा था कि कहीं से वह आ जाए और मुझे दिख जाए। मुझे कुछ देर बैठे हुए हो गई थी। अचानक एक फेरीवाला आया और मैं सोच ही रहा था कि वह उसकी आवाज सुनकर दरवाजा खोलेगी और ऐसा ही हुआ। उसने दरवाजा खोल कर देखा लेकिन तब तक फेरीवाला आगे जा चुका था। मैंने उसे देखा, वह कुछ सेकेंड के लिए दरवाजे में रुकी और उसने देखा कि मैं वहां बैठा हूँ। उसके बाद दरवाजा बंद करके अंदर चली गई।

          थोड़ी देर बाद उसने फिर से हल्का सा दरवाजा खोला और बाहर झाँककर अंदर चली गई। मैं आज बहुत देर तक वहीं बैठा रहा था। वह एक बार फिर अपने घर के बाहर अपनी गाय नहलाने आई लेकिन उस समय उसने एक बार भी वहां नहीं देखा जहां मैं बैठा था। मैं उसे गाय नहलाते हुए देख रहा था। वह गाय को नहला कर और उसके बाद थोड़ा सा काम करके घर के अंदर चली गई। उसके बाद वह मुझे दिखाई नहीं दी। मैं वहां से उठकर अपने घर आ गया। घर आकर मैं अपने काम में लग गया। आज मैंने दोपहर का खाना काफी देरी से खाया था, लगभग दोपहर और शाम के बीच का समय था जब मैंने खाना खाया। खाना खाने के बाद मैं बाहर गया। उसके घर के सामने से जाते हुए मैंने उसे देखने की कोशिश की लेकिन वह नहीं दिखी। जैसे ही मैं थोड़ा आगे पहुंचा वह अपने पड़ोस के घर में थी और उसके दरवाजे की ओर आ रही थी। मैं उसके दरवाजे पर पहुंच चुका था और मुझे उसकी आवाज आई जैसे ही उसने वहां मुझे देखा वह तुरंत वापस हो गई और उसके बाद वह उस घर में रुकी भी नहीं। अपने घर चली गई। मैंने रुकने के लिए कहा लेकिन वह ना तो रुकी और ना ही उसने मुड़ कर देखा और अपने घर चली गई। मुझे उस समय इतना बुरा लगा कि मैं बता नहीं सकता। मुझे उस पर बहुत ज्यादा गुस्सा आया। मैं वहां से वापस आ गया।

         अब मेरा मन बहुत ज्यादा उदास हो रहा था। मुझे लग रहा था कि अब सब कुछ खत्म हो गया है। अब वह नहीं मानेगी। आज मुझे सबसे ज्यादा बुरा लग रहा था। उसे नहीं पता कि वह मेरे साथ कितना गलत कर रही है। मैं उसी के लिए यहां रुका हुआ हूँ। मैंने उसके लिए कई सारी नौकरियां छोड़ी हैं, ताकि मैं घर रहूं और उसके पास रहूं। यह सब मैंने उसे बता दिया है लेकिन शायद उसे बात की गंभीरता का एहसास नहीं है। मैं उसके लिए अपना जीवन इतने बड़े खतरे में डाल रहा हूँ लेकिन उसे कोई फर्क नहीं पड़ता। उसके प्रति आज कई सारे नकारात्मक विचार मेरे मन में आए। मैंने कई साल उसके लिए बर्बाद कर दिए, अपना कैरियर दांव पर लगा रखा है लेकिन उसे मेरे प्यार का एहसास नहीं है शायद। आज मुझे इतना गुस्सा आया कि मैंने सोचा उससे अपने बर्बाद हुए समय का बदला लूं। अगर वह किसी भी बात पर नाराज है तो उसे मुझे बताना चाहिए या घर में उससे किसी ने कुछ कहा है तो मुझसे बात तो करनी चाहिए। मैं सोच रहा हूँ कि उससे अब कभी बात ना करूँ और ना ही उसे देखूँ। अब अपने समय को अपने लिए खर्च करूँ और सही समय का इंतजार करूँ, उसे उसकी गलती का एहसास कराने के लिए।

           शाम के समय मैं बाहर तो गया लेकिन उसे देखने की मेरी कोई खास इच्छा नहीं थी। मैं काफी देर वहां बैठा रहा और उसके बाद घर आ गया। रात का भोजन करने के बाद मैं रोज की तरह टहलने बाहर चला गया और जाकर अपनी जगह बैठ गया। मुझे वहां बैठे हुए कुछ देर हो गई थी। उसका दरवाजा खुला और उसमें से वह बाहर की ओर झांकी। वह थोड़ी देर देखती रही लेकिन मैं उसकी ओर नहीं देख रहा था। हालांकि मुझे पता चल गया था कि दरवाजे पर वह झांक रही है। उस समय अंधेरा था लेकिन बल्ब की हल्की सी रोशनी वहां आ रही थी जिससे मुझे उसकी पहचान पड़ी। वह थोड़ी देर बाहर देखती रही और उसके बाद दरवाजा बंद करके अंदर चली गई। आज मैं टहलने गांव के बाहर चला गया था। मेरे साथ एक लड़का और था। हम लोग वहां से टहल कर आए और फिर आकर वहीं बैठ गए। काफी देर हमने बातें कीं। उसके बाद हम अपने अपने घर आ गए। घर आने के बाद मेरा मन कुछ भी करने का नहीं कर रहा था तो मैं मोबाइल चलाता रहा। आज मैंने अपना कोई भी काम नहीं किया और ना ही मैं पढ़ पाया। बस मैंने अपनी डायरी लिखी। अभी रात के 12:30 बज चुके हैं तो अब मैं चलता हूँ सोने, आपसे मिलूंगा कल फिर से एक और नई पोस्ट के साथ… शुभ रात्रि।

शुक्रवार, 25 अक्टूबर 2024

वो दुकान पर आयी लेकिन मैं उससे कुछ नहीं कह पाया... उसके पास आते ही मैं भूल गया कि मुझे क्या कहना है | 24 October 2024 Diary

 स्वागत है आप सभी लोगों का मेरी दैनिक डायरी में, आज है 24 अक्टूबर 2024। आज सुबह उठने के बाद मैं काम से बाहर गया। मैं उसके घर के पास खड़ा था, तभी वह पानी भरने अपने घर से बाहर आई। उस समय मैं उसे ठीक से नहीं देख पाया क्योंकि मैं काम में था और मेरे सामने उसके घर का एक सदस्य था। मैंने तिरछी निगाह से देखा, वह पानी भर रही थी। उसने मेरी ओर नहीं देखा और वह पानी भरकर घर के अंदर चली गई। थोड़ी देर बाद मैं वापस घर आ गया। घर आकर मैंने नहा धोकर नाश्ता किया और बाहर की ओर चला गया। उसके घर के सामने पहुंचकर मैंने उसे देखने की कोशिश की लेकिन वह दिखाई नहीं दी। उसके बाद मैंने एक-दो चक्कर और लगाए लेकिन वह मुझे अब भी नहीं दिखी थी। ज्यादा चक्कर लगाने भी ठीक नहीं थे क्योंकि रास्ते में एक घर के बाहर कुछ लोग काम कर रहे थे। अगर मैं ज्यादा चक्कर लगाता तो वह सोचते कि मैं इतनी बार क्यों आ रहा हूँ… और किसी न किसी की निगाह मुझ पर पड़ ही जाती कि मैं उसके घर की ओर क्यों देख रहा हूँ।

         मैं घर वापस आ गया और अपना काम करने बैठ गया। आज पूरी दोपहर मैं काम करता रहा और थोड़ा सा पढ़ा। दोपहर में भोजन करने के बाद मैं बाहर गया था लेकिन उसे नहीं देख पाया। काफी देर काम करने के बाद मेरा मन ऊब गया, फिर मैं थोड़ी देर पढ़ा और उसके बाद थोड़ा और काम किया। फिर मेरा मन कुछ भी करने का नहीं किया। मैं ऐसे ही लेटा रहा और उसके बारे में सोचता रहा। मुझे उसकी याद आ रही थी। शाम की चाय पीने के बाद मैं उसे देखने की आस में फिर एक बार बाहर चला गया लेकिन वह मुझे अब भी दिखाई नहीं दी थी। मैं थोड़ा परेशान सा हो रहा था। मैं वापस घर आ गया और थोड़ी देर बाद मैं फिर से बाहर चला गया क्योंकि मेरा मन नहीं मान रहा था। मुझे उसे देखना था। जब मैं बाहर जा रहा था तो उसके घर के सामने पहुंचकर मैंने देखा कि वह अपने घर में है। मैं उसे देखते हुए आगे चला गया और जैसे ही मैं वहां पहुंचा वह अपने घर के दरवाजे से निकल रही थी। वह दुकान पर जा रही थी। मैं बिल्कुल ठीक समय पर वहां पहुंचा। इस बार मैं उसे देखकर थोड़ा पीछे रुक गया ताकि वह दुकान पर जाए और मुझे देखकर वापस ना लौटे क्योंकि कल वह वापस लौट गई थी। जब उसने आधे से ज्यादा रास्ता तय कर लिया तो मैं आगे बढ़ गया। वह काफी देर दुकान पर रही।

           मैं सोच रहा था कि मैं रास्ते में किस जगह खड़ा होऊँ ताकि उससे कुछ बात कर सकूं और उसे अच्छे से देख सकूं। लेकिन मुझे यह भी डर था कि अगर मैं किसी जगह खड़ा हो जाता हूँ तो कहीं वह मुझे देखकर रास्ता बदलकर दूसरी ओर से ना चली जाए, इसलिए मैं ऐसी जगह खड़ा था जहां से होकर उसे जाना ही पड़ता। मैं याद कर रहा था कि मुझे उससे क्या कहना है। आस-पास कुछ लोग थे जिनकी वजह से मैं उससे बात नहीं कर पाया। मैंने कोशिश की कि उससे अपने दिल की बात कह दूं लेकिन पता नहीं आज क्या हो गया, मुझे कुछ याद ही नहीं आया कि मुझे उससे क्या कहना है। वह दुकान से वापस आई। मैं उसे देख रहा था और देखता रहा। वह अपने घर की ओर चली गई। मैं उससे कुछ भी नहीं कह पाया। अगर वे लोग वहां ना होते तो शायद कुछ कह पाता, लेकिन एक तो मुझे उनका डर था कि कहीं उन्हें आवाज ना पहुंच जाए और ऐसी स्थिति में वह भी बात करने से डरती है। मैं उसे घर जाते हुए देखता रहा। उसके जाने के बाद मैं दुकान पर पहुंच गया, जहां वह खड़ी थी। मैंने उसके दरवाजे की ओर देखा वह दरवाजे में से जाते हुए पीछे देख रही थी कि मैं अब कहां हूँ… और दरवाजा बंद करके अंदर चली गई।

            मैं अपने नियत स्थान पर जाकर बैठ गया। थोड़ी देर बाद मुझे उसकी आवाज आई। वह अपने घर के बाहर थी और अपने भतीजे को खिला रही थी। वह अपने पड़ोस के घर के दरवाजे पर आई। मैं सोच रहा था कि उसके पास तक चला जाऊं लेकिन आसपास के लोग देख लेते, इस वजह से मैं नहीं गया। थोड़ी देर बाद वह वापस चली गई और जाते हुए उसने मेरी ओर देखा कि मैं कहां बैठा हूँ। कुछ समय बाद वह फिर से बाहर आई। मैंने उससे इशारों में कुछ कहने की कोशिश की। पता नहीं उसे समझ में आया होगा या नहीं। वह वापस घर के अंदर चली गई। मैं काफी देर वहां बैठा रहा और जब रात होने लगी तो मैं उठकर घर आ गया।

          रात का भोजन करने के बाद रोज की तरह मैं बाहर टहलने चला गया। उसका दरवाजा बंद था। आज उसके पड़ोस के घर में फिर से गीत संगीत का कार्यक्रम था और मुझे उम्मीद थी कि वह आज भी जाएगी लेकिन वह आज नहीं गई। वह एक बार दरवाजे पर आई। उसका भाई मेरे आस-पास खड़ा था और उसने खाना नहीं खाया था तो वह उसे आवाज लगाने आई थी। उसने दरवाजा खोलकर उसे आवाज लगाई और उसके बाद मेरी ओर देखा और दरवाजा बंद करके अंदर चली गई। वह सोच रही होगी कि मैं रोज यहीं आता हूँ क्योंकि यह तो उसे भी पता है कि रात को यह हमारे मिलने का स्थान है। वह अपनी छत पर आती थी और मैं वहां नीचे खड़ा रहता था। उसने सोचा होगा कि ये अब भी मेरा इंतजार करता है। उसके बाद वह मुझे दिखाई नहीं दी। मुझे ऐसा लगा जैसे वह आज अपनी छत पर आई हो लेकिन उसके साथ कोई और भी था क्योंकि ऊपर से बातों की आवाज आ रही थी लेकिन मैंने उसे देखा नहीं। मैं काफी देर तक वहां बैठा रहा और उसकी प्रतीक्षा करता रहा… हो सकता है वह छत पर आए। लेकिन वह ना तो छत पर आई और ना ही उसके बाद उसने दरवाजे से देखा। जब उसके आने की संभावना समाप्त हो गई तो मैं वहां से उठकर अपने घर आ गया। घर आने के बाद मैंने थोड़ा काम किया और उसके बाद अपनी डायरी लिखने बैठ गया। अभी रात के 11:15 बजने वाले हैं तो मैं चलता हूँ सोने, आपसे मिलूंगा कल फिर से एक और नई पोस्ट के साथ… शुभ रात्रि।

गुरुवार, 24 अक्टूबर 2024

वो मेरे बिल्कुल पास आ गई थी लेकिन फिर भी मैं उसे नहीं देख पाया | 23 October 2024 Diary

 स्वागत है आप सभी लोगों का मेरी दैनिक डायरी में, आज है 23 अक्टूबर 2024। आज मैंने उसे सुबह थोड़ी देर के लिए देखा था और उसके बाद वह मुझे शाम को बहुत ही कम समय के लिए देखने को मिली। आज दिन भर में वह मुझे देखने को नहीं मिली। सुबह उठने के बाद जब मैं बाहर गया तो वह मुझे दिखाई दी, वह भी सामने से नहीं पीछे से क्योंकि वह एक घर से निकल कर अपने घर जा रही थी और मैं उसके पीछे खड़ा था। घर आने के बाद मैं फिर से उसे देखने बाहर गया और इस बार वह मुझे सामने से देखने को मिली लेकिन उसने मेरी ओर देखकर अपनी निगाह हटा ली। इस समय वह मुझे दो-तीन बार देखने को मिली थी लेकिन उसका व्यवहार रुखा था, पता नहीं उसे क्या हो गया है। आजकल ना तो वह कोई बात बताती है कि क्या हुआ है और ना ही बात करती है। मैंने दो-तीन चक्कर लगाए और हर बार उसे देखा, उसके बाद मैं घर आ गया क्योंकि बार-बार जाना ठीक नहीं था।

            आज मेरे माता-पिता बाहर गए हुए थे इसलिए मैं सारा दिन घर पर ही रहा। हालांकि बीच-बीच में मैंने उसके घर के चक्कर लगाए लेकिन वह मुझे देखने को नहीं मिली। मैं वापस घर आकर अपना काम करने बैठ गया। दोपहर के बाद मेरे माता-पिता घर आ गए। उसके बाद मैं फिर से बाहर गया लेकिन वह मुझे अभी भी देखने को नहीं मिली थी। उसके कपड़े तार पर पड़े थे। मैं घर वापस आ गया। मैंने अपना बचा हुआ काम निपटाया और उसके बाद बाहर गया। इस बार उसके कपड़े तार पर नहीं थे। वह कपड़े उतार कर रख चुकी थी लेकिन मुझे दिखाई नहीं दी। उसे देखने का मेरा बहुत मन कर रहा था। एक बार को उसकी आवाज मुझे सुनाई दी। मैंने उसे देखने की कोशिश की लेकिन वह दिखाई नहीं दी।

          शाम के समय मैं बाहर गया तो वह मुझे हल्की सी दिखाई पड़ी। इतनी हल्की कि मैं यह भी नहीं पहचान पाया कि उसने कौन से कपड़े पहने हैं। उसका दरवाजा थोड़ा खुला हुआ था। उसमें से वह मुझे नजर आई। अब मेरी बेचैनी बढ़ रही थी क्योंकि मुझे उसे देखना था। मैं वहीं बैठ गया और मोबाइल चलाने लगा। बीच-बीच में उसके दरवाजे और छत की ओर देख लेता था कि कहीं वह छत पर या अपने दरवाजे पर तो नहीं आई, लेकिन उसका दरवाजा बंद था। थोड़ी देर बाद मुझे उसकी आवाज उसके घर के बाहर से आई। मुझे लगा वह थोड़ा और आगे आएगी लेकिन वह आगे नहीं आई और थोड़ी देर बाद घर के अंदर चली गई। आज मुझे उसका व्यवहार बहुत ही अजीब लग रहा था। आज उसने मुझे देखने की कोई भी कोशिश नहीं की। जब रात होने लगी तो मैं अपने घर आ गया।

           थोड़ी देर बाद मैं किसी काम से उसके घर की ओर गया। मैंने देखा कि वह अपने घर से निकल कर आ रही है। उसने घर से निकलते हुए एक सेकंड के लिए मेरी ओर देखा और उसके बाद निगाह नीचे कर ली। उसने शायद इसलिए देखा होगा कि मैं वहां खड़ा हूँ और अगर उसे पता होता कि मैं वहां हूँ तो वह आती नहीं। लेकिन वह घर से निकल चुकी थी इसलिए उसे आना पड़ा। उसने अपना काम समाप्त किया और वापस चली गई। हालांकि उस समय उसके घर के सदस्य भी वहां थे इसलिए वह अगर देखना चाहती तब भी नहीं देख पाती और मैंने भी उसकी ओर नहीं देखा। यहां से मेरा मन दुखी हो रहा था। मैंने उसे आज ठीक से नहीं देखा है और वह बहुत अच्छा मौका था। वह मेरे बिल्कुल पास आ गई थी लेकिन उसके घर वालों की वजह से मैं उसकी ओर नहीं देख पाया। मैं घर वापस आ गया। घर वापस आने के बाद मैंने दो-तीन चक्कर और लगाए उसे देखने के लिए लेकिन मैं उसे नहीं देख पाया।

            रात का भोजन करने के बाद मैं बाहर गया। उसका दरवाजा बंद था। मैं थोड़ी देर टहलने के बाद वहीं बैठ गया। आज मेरे साथ मेरे साथी भी थे। मैं बीच-बीच में उसके दरवाजे और छत की ओर देख रहा था लेकिन वह ना तो छत पर आई और ना ही उसने दरवाजा खोल कर देखा। हम लोग काफी देर तक वहां बातें करते रहे। अचानक उसके दरवाजे पर आहट हुई। उसने दरवाजा खोला और कुछ बाहर की ओर फेंक कर हमारी ओर देखते हुए दरवाजा बंद कर लिया। वह शायद देख रही होगी कि यहां कौन-कौन हैं। मैंने उसकी काफी प्रतीक्षा की… ना तो वह अपनी छत पर आई और ना ही उसके बाद उसकी कोई आवाज सुनाई दी। कुछ समय बाद हम भी अपने-अपने घर आ गए। आज मेरा मन उसकी ओर से इतना दुखी है कि मुझे यह समझ में नहीं आ रहा है कि अब मैं क्या करूं… पता नहीं वह किस बात से नाराज है या उसके घर वालों ने उससे क्या कहा है… अगर वह बताएगी तभी तो समस्या का हल निकलेगा। अगर ज्यादा दिनों तक ऐसे ही चलता रहा तो हो सकता है मैं गुस्से में आकर कुछ कर ना बैठूँ। अब फिर से कल का इंतजार करना होगा। रोज ऐसे ही दिन निकलते जा रहे हैं। अभी रात के 11:45 बज चुके हैं तो अब मैं चलता हूँ सोने, आपसे मिलूंगा कल फिर से एक और नई पोस्ट के साथ… शुभ रात्रि।

बुधवार, 23 अक्टूबर 2024

मुझे पता था कि वो आज अपने पड़ोस में गीत-संगीत में जाएगी लेकिन उसके जाने से पहले ही मुझे घर आना पड़ा | 22 October 2024 Diary

 स्वागत है आप सभी लोगों का मेरी दैनिक डायरी में, आज है 22 अक्टूबर 2024। सुबह मैं किसी काम से उसके घर की ओर गया। मैं वहां खड़ा था और थोड़ी देर बाद ही वह अपने घर से बाहर आई। वह शायद अंदर कुछ काम कर रही थी और बाहर हाथ धोने आई थी। उसने हाथ से कुछ तो इशारा किया था, मुझे चिढ़ाया था। वह घर के अंदर चली गई, मैं वहीं बातों में लग गया। थोड़ी ही देर बाद वह फिर से बाहर आई अपने भतीजे को गोद में लेकर। आज वह मुझे खुश लग रही थी। उसने इधर देखा जहां मैं खड़ा था। मेरे साथ और भी लोग थे। वह अपने भतीजे को खिलाते हुए थोड़ा सा बनकर चल रही थी। थोड़ी देर बाद वह घर के अंदर चली गई। मैं भी घर वापस आ गया।

          नहा धोकर मैंने नाश्ता किया और गेहूं पिसवाने पड़ोस के गांव चला गया। हमारे गांव में भी गेहूं पीसने की चक्की है लेकिन गांव के काफी लोग पड़ोस के गांव में गेहूं पिसवाने जाते हैं क्योंकि वहां गेहूं पिसवाना सस्ता पड़ता है। वह चक्की सौर ऊर्जा से चलती है इसलिए उसमें तेल का कोई खर्चा नहीं होता और जबकि गांव की चक्की तेल इंजन से चलती है तो वहां ज्यादा रुपए लगते हैं और गेहूं पिसाई में भी अंतर है। पड़ोस के गांव की चक्की वाला थोड़ा बेहतर पीसता है। वहां से आने के बाद मैं अपने काम में लग गया। दोपहर का समय हो चुका था। मैंने दोपहर का भोजन किया और बाहर चला गया। मुझे पता था कि अब तक वह नहा कर घर के अंदर चली गई होगी और ऐसा ही हुआ। वह मुझे नहीं दिखी। थोड़ी देर में मैं घर वापस आ गया और आराम करने लेट गया। मुझे थोड़ी ही देर हुई थी तभी मेरे दोस्त का फोन आया। उसने बताया कि वह दुकान पर गई है। मैं जल्दी से उठा और दुकान की ओर चला गया लेकिन जब तक मैं वहां पहुंचा वह वापस अपने घर चली गई थी। मैं उसे अब भी नहीं देख पाया। सुबह से अब तक वह मुझे दिखाई नहीं दी थी और मुझे पता भी नहीं था कि आज उसने नहाने के बाद कौन से कपड़े पहने हैं। मैं वापस आ गया और अपने काम में लग गया।

          आज मैं दोपहर में नहीं सोया, अपना काम करता रहा। जब शाम की चाय का समय हुआ तो मैंने चाय पी और बाहर का एक चक्कर लगाया लेकिन वह मुझे नहीं दिखी। मैं घर वापस आ गया और फिर से काम करने बैठ गया। काम करते-करते शाम होने वाली थी। मुझे अपने खेतों पर भी जाना पड़ा। वहां से आने के बाद मैं शाम के समय बाहर गया। उसका दरवाजा आधा खुला हुआ था और आखिरकार सुबह के बाद अब शाम को वह मुझे थोड़ी सी दिखाई दी थी। आज उसने नीला सूट पहना हुआ था, हालांकि उतनी अच्छी तरह से मैं उसे अभी भी नहीं देख पाया था लेकिन मुझे इतने से ही खुशी मिल रही थी। मैं वहीं बैठा रहा। कुछ समय बाद मेरे दोस्त भी आ गए। हम सभी वहीं बैठ कर बातें करते रहे। थोड़ी-थोड़ी देर बाद वह मुझे दिखाई देती रही। कुछ समय बाद मेरे दोस्त उठ कर चले गए लेकिन मैं वहीं बैठा रहा। मैं उसके दरवाजे और छत की ओर देख रहा था, इस आस में कि वह आ जाए। थोड़ी देर बाद मेरी निगाह उसकी छत पर गई तो मैंने उसे वहां देखा। उसे वहां देखकर मुझे बहुत खुशी हुई। उसने मेरी ओर देखा तो मुझे बहुत अच्छा लगा। थोड़ी देर बाद वह छत की दूसरी तरफ चली गई। अब मैं उसे नहीं देख पा रहा था। मैंने इधर-उधर जाकर देखने की कोशिश की लेकिन वह नहीं दिखाई दी। थोड़ी देर बाद वह फिर मेरी तरफ आई और नीचे चली गई। उसके बाद वह छत पर नहीं आई। मैं अभी भी वहीं बैठा था।

           मुझे उम्मीद थी कि वह दरवाजे में आकर मुझे देखे या किसी और तरह से कहीं से भी आ जाए। इस उम्मीद में मैं वहीं बैठा था जबकि थोड़ी देर बाद रात होने वाली थी। मुझे उसकी आवाज आई। वह अपने घर के बाहर थी और यूं ही टहलते हुए ऐसी जगह आयी जहां से वह मुझे देख सकती थी। वह मुझे देखने आई और उसने देखा कि मैं अभी भी वहीं बैठा हूँ। वह देखकर वापस चली गई क्योंकि वह वहां नहीं रुक सकती थी। एक तो वह घर के बाहर थी और उसके घर के कुछ सदस्य भी उसके आसपास थे। वह देखकर अंदर चली गई। मैंने थोड़ी देर और प्रतीक्षा की, जब वह नहीं आई तो मैं अपने घर आ गया। रात का भोजन करने के बाद मैं बाहर टहलने चला गया। उसका दरवाजा बंद था। मैं वहीं टहल रहा था। थोड़ी देर बाद मुझे किसी काम से घर आना पड़ा। आज उसके पड़ोस के घर में गीत-संगीत का कार्यक्रम था और मुझे पूरी उम्मीद थी कि वह वहां जाएगी लेकिन दुर्भाग्य से जिस समय मैं काम से घर आया था उसी समय वह वहां गई थी और जब तक मैं काम समाप्त करके वापस वहां पहुंचा, वह वहां जा चुकी थी। लेकिन मैंने उसकी प्रतीक्षा की क्योंकि वह वापस भी आती, हालांकि कोई फायदा नहीं होने वाला था क्योंकि उसके साथ उसके परिवार की और महिलाएं भी होतीं। लेकिन अंधेरे में ही सही मुझे वह परछाईं की तरह तो दिखती और उसकी आवाज भी सुनने को मिल जाती। मुझे इतने से ही बहुत खुशी मिलती।

           उसके वापस आने तक मैं उसकी प्रतीक्षा करता रहा। जब वह काफी समय तक नहीं आई तो मेरा मन हुआ कि मैं घर आ जाऊं क्योंकि समय भी काफी हो चुका था लेकिन पता नहीं क्यों मैंने सोचा थोड़ी देर और रुक जाता हूँ। मैं उसकी प्रतीक्षा कर रहा था कि तभी मुझे कुछ महिलाओं की आवाज आई और उनमें से एक मीठी सी आवाज भी आई जो कि उसी की थी। मेरा वहां रुकना सफल हो गया। उसकी आवाज सुनकर मुझे बहुत अच्छा लगा, हालांकि वह मुझे दिखाई नहीं दी क्योंकि अंधेरा था। लेकिन मुझे उम्मीद है कि उसने वहां जरूर देखा होगा कि मैं वहां हूँ या नहीं क्योंकि यह तो अनुमान उसने भी लगाया होगा कि आज गीत-संगीत में उसके जाने का मुझे पता होगा। वह बातें करते हुए अपने घर चली गई। अभी काफी रात हो चुकी थी इसलिए उसके अब छत पर आने की कोई संभावना नहीं थी। मैं थोड़ी देर बाद घर वापस आ गया। अभी रात के 11:00 बज चुके हैं तो अब मैं चलता हूँ सोने, आपसे मिलूंगा कल फिर से एक और नई पोस्ट के साथ… शुभ रात्रि।

मंगलवार, 22 अक्टूबर 2024

वो दुकान पर आ रही थी लेकिन मुझे देखकर वापस लौट गई... उसने मुझे फिर से उदास कर दिया | 21 October 2024 Diary

 स्वागत है आप सभी लोगों का मेरी दैनिक डायरी में, आज है 21 अक्टूबर 2024। मेरा आज का दिन सुबह से दोपहर के बाद तक सामान्य था, ना ज्यादा अच्छा ना ज्यादा बुरा लेकिन उसके बाद से ठीक नहीं रहा। मेरा मन उदास हो रहा था। चलिए सुबह से शुरू करते हैं— आज सुबह उठने के बाद मैंने एक गिलास पानी पिया और थोड़ी देर बाद बाहर चला गया। बाहर मैं रास्ते पर पहुंचा ही था कि वह अपने घर से निकल कर अपने खेतों की ओर जा रही थी। उसने मुझे नहीं देखा क्योंकि वह आगे जा रही थी और मैं पीछे खड़ा था। मैं उसे जाते हुए देखता रहा। थोड़ी देर बाद मैं घर वापस आ गया। घर आने के बाद मैं नहाया, नाश्ता किया और उसके बाद फिर से बाहर चला गया। वह मुझे दिखाई नहीं दी। मैंने काफी कोशिश की, कई चक्कर लगाए लेकिन वह मुझे नहीं दिखी। आखिरकार मैं घर लौट आया और अपना काम करने बैठ गया।

           मैं काम कर रहा था। थोड़ी ही देर बाद मुझे किसी ने एक काम से बुला लिया। मुझे बाहर जाना पड़ा। मैंने जाते हुए भी उसे देखने की कोशिश की लेकिन वह दिखाई नहीं दी। थोड़ी देर बाद जब मैं लौट कर आ रहा था तो रास्ते में एक जगह रुक गया। वहां से उसका दरवाजा दिख रहा था। अचानक मेरी निगाह उसके दरवाजे पर गई। वहां वह खड़ी थी। वह नहा कर आयी थी क्योंकि सर पर उसने तौलिया बांधा हुआ था। वह थोड़ी देर वहां रुकी, बाहर की ओर देखा और उसके बाद दरवाजा बंद करके अंदर चली गई। मैं थोड़ी देर वहां और रुका रहा ताकि अगर वह फिर से आए तो मैं उसे देख सकूं लेकिन फिर वह नहीं आई। मैं घर वापस आ गया। अब दोपहर का समय हो चुका था। मैंने खाना खाया और एक बार फिर से बाहर की ओर गया लेकिन वह मुझे दिखाई नहीं दी। मैं घर वापस आ गया और फिर से अपने काम में लग गया। आज मैं थोड़ी देर के लिए दोपहर में सो गया और उठने के बाद फिर से मैंने अपने काम पूरे किए।

           शाम के समय जब मैं बाहर गया और वहां पहुंचा ही था कि मैंने देखा वह दरवाजा खोलकर बाहर आ रही है। लेकिन मुझे देखते ही वह वहीं रुक गई। वह दुकान पर जाने के लिए निकलने वाली थी लेकिन मुझे देखकर उसने दरवाजा बंद कर दिया और वापस चली गई। उसके बाद वह अपने दूसरे दरवाजे से निकल कर दूसरी दुकान की ओर चली गई। मैं समझ गया कि वह मेरी वजह से इधर नहीं आई। इस समय मुझे बहुत गुस्सा आया, मेरा दिमाग बहुत खराब हो गया और मेरा मन उदास होने लगा। जब वह ऐसी कोई हरकत करती है तो मुझे लगता है कि वह मुझसे प्यार नहीं करती। अगर नहीं भी करती है तो मुझे बता दे, कम से कम आगे का रास्ता साफ हो जाएगा… और एक मैं हूँ जो उसके बारे में दिन-रात सोचता रहता हूँ। उसे इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि उसके ऐसा करने से मैं कुछ भी नहीं कर पाता, मेरा कोई भी काम नहीं हो पता, ना ही मैं पढ़ पाता हूँ। इसी बात को लेकर शाम से मेरा दिमाग बहुत परेशान है और मैं कुछ भी नहीं कर पा रहा हूँ। मुझे पता था कि वह दूसरे दरवाजे से दूसरी दुकान की ओर जाएगी और मैंने उसे जाते हुए देख लिया था तो मैं वापस जाकर उसी रास्ते पर खड़ा हो गया जहां से वह वापस आती। वह वापस आई लेकिन उस समय मेरे आस-पास और भी लोग थे। हालांकि वह जिस बच्चे को लेकर आई थी अपनी गोद में, उससे बोलते हुए जा रही थी और वह मुझ पर ढालकर बोल रही थी। वह अपने घर चली गई। मैं भी वापस उसी जगह चला गया जहां मैं बैठता हूँ।

           मैं वहां जाकर बैठ गया लेकिन उसके बाद ना तो वह दरवाजे पर आई और ना ही मुझे दिखाई दी। मैं काफी देर वहां बैठा रहा। जब रात होने लगी तो मैं उठकर अपने घर आ गया। घर आने के बाद किसी काम से मैं फिर उसके घर की ओर गया। मैंने उसे देखने की कोशिश की लेकिन वह मुझे नहीं दिखी। काम समाप्त करके मैं घर वापस आ गया। रात का भोजन करने के बाद रोज की तरह मैं फिर से बाहर टहलने निकल गया और जैसे कि मुझे उम्मीद थी वैसा ही हुआ। ना तो वह छत पर आई और ना ही उसने दरवाजे से देखा। कुछ देर तक उसकी आवाज भी नहीं आई लेकिन बाद में बर्तनों के खड़कने के साथ उसकी आवाज आई और बर्तन साफ करके वह अंदर चली गई। मैं वहां अकेला उदास बैठा रहा। मुझे उसकी बहुत याद आ रही थी। मेरे साथी भी वहीं थे लेकिन मैं सबसे अलग अकेला बैठा था और उसी के बारे में सोच रहा था। मुझे शाम से बहुत बुरा लग रहा है। मैं उससे ज्यादा कुछ नहीं चाहता लेकिन क्या वह मेरे लिए इतना भी नहीं कर सकती। लेकिन कभी-कभी मुझे लगता है कि वह मुझे चिढ़ाती है और चिढ़ाने के लिए ऐसी वैसी हरकतें करती रहती है। लेकिन कभी-कभी मुझे ऐसा भी लगता है कि वह मुझसे प्यार नहीं करती। उसे मेरी कोई परवाह नहीं है। आज बहुत सारी नकारात्मक बातें मेरे दिमाग में घूमती रहीं। मैं अकेला गुमसुम सा बैठा था। एक बार मेरा रोने का भी मन किया लेकिन मैंने अपने आप को संभाल लिया। आज मैं थोड़ा जल्दी वहां से अपने घर आ गया।

           घर आने के बाद भी मेरा मन ठीक नहीं था। घरवाले टीवी पर समाचार देख रहे थे। वैसे तो मेरा कोई मन नहीं था लेकिन मैं भी वहीं बैठ गया और थोड़ी ही देर बाद समाचारों में मुझे उसका नाम सुनाई दिया। कई बार उसका नाम मेरे सामने आता रहा। मैं वहां से उठकर अलग चला गया। आज मुझे ऐसा लग रहा है जैसे मेरा मन उससे धीरे-धीरे भरने लगा है क्योंकि वह बिल्कुल भी सहयोग नहीं करती। मैं ही उसे देखने की आस लगाए रहता हूँ। वह अपनी तरफ से कोई भी कोशिश नहीं करती। मैं अपनी तरफ से कब तक कोशिश करता रहूं… लेकिन अगली बार जब मैं उसे देखता हूँ तो फिर से वही कहानी शुरू हो जाती है और मैं पिछला गुस्सा भूल जाता हूँ। पता नहीं ऐसा क्यों होता है। अब कल उससे बात करने की कोशिश करूंगा कि कम से कम वह कुछ बताए तो सही कि आखिर दिक्कत कहां है…? अभी काफी रात हो चुकी है और रात के 11:30 बजने वाले हैं। तो अब मैं चलता हूँ सोने, आपसे मिलूंगा कल फिर से एक और नई पोस्ट के साथ… शुभ रात्रि।

सोमवार, 21 अक्टूबर 2024

मैं उससे बार-बार पूछता हूँ लेकिन वो कोई जवाब नहीं देती | 20 October 2024 Diary

 स्वागत है आप सभी लोगों का मेरी दैनिक डायरी में, आज है 20 अक्टूबर 2024। आज मैं थोड़ी देरी से सो कर उठा क्योंकि कल मैं देरी से सोया था और कल मैं थका हुआ भी था। सुबह उठने के बाद आज घर पर काफी काम था। मैंने घर की धुलाई की, पोंछा लगाया यानी काम में मम्मी का हाथ बँटाया। घर के काम से निपट कर मैं खेतों पर चला गया। वहां थोड़ा सा काम था जो मैंने किया। वहां से आने के बाद मैं नहाया और नाश्ता किया। उसके बाद मैं बाहर की ओर चला गया। रास्ते में जाते हुए जैसे ही उसके घर के सामने पहुंचा तो वह अपने दरवाजे पर कुछ काम कर रही थी। मैंने नजर घुमाकर उसकी ओर देखा लेकिन तुरंत मुझे अपनी नजर हटानी पड़ी क्योंकि उसके साथ उसकी भाभी खड़ी थीं। मैं आगे चला गया और जब थोड़ी देर बाद वापस आया तो वह वहां नहीं थी। मैं अपने घर वापस आ गया।

         घर आने के बाद मैं काम करने बैठ गया। जब दोपहर का समय हुआ तो मम्मी ने खाने के लिए आवाज लगा दी। मैंने खाना खाया और बाहर टहलने चला गया। आज मैंने खाना थोड़ा जल्दी खा लिया था। बाहर जाने के बाद मैंने उसे देखने की कोशिश की। मैं उसके घर के पास भी गया जहां मैं शाम को जाता हूँ लेकिन वह मुझे दिखाई नहीं दी। हालांकि उसका दरवाजा खुला था लेकिन वह मुझे एक बार भी नजर नहीं आई। कुछ समय बाद मैं घर वापस आ गया। मैंने थोड़ी देर आराम किया और उसके बाद अपना काम करने बैठ गया। मुझे दोपहर में सुस्ती तो आ रही थी लेकिन मैं सोया नहीं। अगर मैं दिन में सो जाता हूँ तो फिर उठने के बाद मन कुछ अच्छा नहीं रहता, इसलिए मैं दिन में सोने से बचता हूँ।

          शाम की चाय पीने के बाद मैं उसे देखने बाहर चला गया। जैसे ही मैं उसके घर के सामने पहुंचा, वह अपने घर के बाहर ही अपने भतीजे को खिला रही थी। मैं वहीं रुक गया और उसे देखता रहा। उसने मेरी ओर देखा और कुछ देर देखती रही। मैं वहीं खड़ा रहा। थोड़ी देर बाद वह अंदर की ओर चली गई। मैंने थोड़ा और आगे जाकर उसे देखने की कोशिश की। वह अपने घर के अंदर थी लेकिन उसके साथ में उसकी भाभी भी थीं तो मैंने अपनी नजर तुरंत हटा ली। जब मैं थोड़ी देर बाद वापस आया तब भी वह वहीं थी। उसे देखते हुए मैं अपने घर आ गया। थोड़ी देर बाद मैं यूं ही अपने घर के बाहर खड़ा हो गया और जैसे ही मैं घर से बाहर आया, वह मुझे दुकान पर जाते हुए दिखाई दी। मैंने सोचा कि काश मैं 1 मिनट पहले आ जाता तो मुझे जाते हुए मिल जाती लेकिन मुझे इस बात का संतोष था कि वह वापस आएगी तो जरूर मिलेगी। मैं वहीं खड़ा रहा। थोड़ी देर बाद वह वापस आई तो मैंने उससे कहा कि “अब मैं किस गलती की माफी माँगूं, मैंने क्या किया है… तू कुछ बताती क्यों नहीं”। उसने कोई जवाब नहीं दिया और घर चली गई। मैं उसके पीछे-पीछे गया और उसे उसके घर जाते हुए देखता रहा। जब वह घर के अंदर चली गई तो मैं वापस अपने घर के बाहर आकर खड़ा हो गया।

         मुझे खड़े हुए थोड़ी ही देर हुई थी कि मेरी निगाह अचानक अपने दाएं और गई। मैंने देखा वह दोबारा से दुकान पर जा रही है लेकिन दुर्भाग्य से उस समय मेरे पास एक व्यक्ति खड़ा था, इसलिए वह निगाह नीचे करके दुकान पर चली गई और जब उधर से वापस आई तब भी मैं अकेला नहीं था। मुझे मन मार कर रहना पड़ा। मैं उससे कुछ नहीं कह पाया और वह अपने घर चली गई। शाम के समय जब मैं बाहर जा रहा था और उसके घर के पास पहुंचा तो वह अपने घर के बाहर काम कर रही थी। मैंने उसे देखा तो मैं वहीं रुक गया और उसकी ओर देखने लगा। काम समाप्त करके वह घर के अंदर जाने लगी। घर के अंदर जाने से पहले उसने मेरी ओर देखा और फिर घर के अंदर चली गई। जब उसने मुझे देखा तो मुझे बहुत अच्छा लगा, मुझे लग रहा है कि वह मेरे बारे में सोच रही है। उसे कुछ तो एहसास होगा मेरी परेशानी का, उसे लगता तो होगा कि मैं इससे ना बोलकर ठीक नहीं कर रही। मैं काफी देर वहीं बैठा रहा लेकिन उसके बाद वह दिखाई नहीं दी। जब रात होने लगी तो मैं उठकर अपने घर आ गया।

          रात का भोजन करने के बाद मैं हमेशा की तरह बाहर टहलने चला गया। मैं टहल रहा था और टहलते-टहलते उसके दरवाजे और छत की ओर देख रहा था। वह छत पर नहीं आई और ना ही उसने दरवाजा खोल कर देखा। मैं टहलता रहा और थोड़ी देर बाद वहीं बैठ गया। मैंने काफी देर उसकी प्रतीक्षा की। जब उसके आने की संभावना समाप्त होने लगी तो मैं वहां से उठकर अपने घर आ गया। घर आने के बाद मैंने अपने बचे हुए काम पूरे किये और उसके बाद अपनी डायरी लिखने बैठ गया। अभी रात के 11:15 बज चुके हैं तो अब मैं चलता हूँ सोने, आपसे मिलूंगा कल फिर से एक और नई पोस्ट के साथ… शुभ रात्रि।

रविवार, 20 अक्टूबर 2024

किसी को शक ना हो इसलिए उसने दरवाजा बंद कर दिया और दूसरी ओर से आई | 19 October 2024 diary

 स्वागत है आप लोगों का मेरी दैनिक डायरी में, आज है 19 अक्टूबर 2024। आज सुबह मैं जल्दी उठा और मैंने घर के काम निपटाए क्योंकि पिताजी की तबीयत ठीक नहीं है तो सारे काम मेरे ही जिम्मे हैं। काम निपटाने के बाद मैं बाहर गया और उसका इंतजार करने लगा। थोड़ी देर बाद वह अपने घर से बाहर आई और मैंने देखा उसके सर पर कूड़े की परात रखी थी। वह कूड़ा डालने जा रही थी। मैंने उसे पीछे से देखा। वह आगे चली गई। उसके बाद मैंने थोड़ी देर उसका इंतजार किया लेकिन वह नहीं लौटी। मैं घर वापस आ गया। थोड़ी देर बाद मैं फिर से बाहर गया उसी रास्ते पर जिस रास्ते से वह गई थी। मैंने जाकर देखा तो वह दोबारा अपने घर से जा रही थी। मैं उससे कुछ दूरी पर खड़ा था। जब वह उधर से लौट कर आई तो मैंने उसे देखा लेकिन वह उस रास्ते से ना जाकर उससे पहले ही मुड़ गई और अपने घर चली गई। उसने मेरी ओर नहीं देखा। मुझे उस समय थोड़ा बुरा लगा लेकिन आज मैंने मन को समझाया कि उसकी मर्जी है वह जो करे, जहां देखे, जब देखे… और मैं घर वापस आ गया।

           आज सुबह मुझे अपने खेतों पर भी जाना पड़ा। वहां काम समाप्त करके मैं घर वापस आया और नहा धोकर मैंने नाश्ता किया। आज मुझे काफी देर हो चुकी थी, लगभग 11 बज चुके थे। नाश्ता करने के बाद मैं दुकान से कुछ सामान खरीदने चला गया। जब मैं जा रहा था तो मैंने देखा कि वह घर के बाहर कुछ खरीद रही थी, हालांकि उसके साथ उसके घर की एक महिला और उसकी एक सहेली थी। मैंने उसे देखा और उसे देखते हुए मैं दुकान पर चला गया। मैं आज काफी देर तक उसके घर के पास बैठा रहा। वह मुझे उसके बाद कई बार दिखाई दी। वह एक बार अपने दरवाजे पर भी आई, उसने मुझे देखा कि मैं वहां बैठा हूँ। वह थोड़ी देर रुकी और वापस घर के अंदर चली गई। उसने दरवाजा बंद नहीं किया। वह थोड़ी देर बाद फिर से आई और देखकर लौट गई। थोड़ी देर बाद मैं उसके घर के और करीब आया तो मैंने दरवाजे में से देखा कि वह नहा चुकी है और अपने गीले कपड़े तार पर फैला रही है। उसकी निगाह मुझ पर नहीं पड़ी थी। मुझे वह बहुत अच्छी लग रही थी। जब मुझे काफी समय हो गया तो मैं घर लौट आया।

          आज मैंने दोपहर में खाना नहीं खाया था। घर आने के बाद मैं अपने काम में लग गया। थोड़ी देर बाद शाम की चाय का समय हो चुका था। अब मुझे थोड़ी सी भूख भी लगने लगी थी तो मैंने चाय ना पीकर आज उस समय खाना खाया। खाना खाकर थोड़ी देर आराम किया और उसके बाद घर के कुछ और काम निपटाए। उसके बाद मैंने शाम की चाय पी और बाहर चला गया। उसका दरवाजा बंद था। मैं वापस घर आ गया और लगभग आधा घंटे बाद फिर से बाहर गया। इस बार उसका दरवाजा खुला था। मैं एक जगह जाकर बैठ गया। मुझे उसकी आवाज सुनाई दे रही थी लेकिन वह दिखाई नहीं दी। थोड़ी देर बाद वह दरवाजे पर आई, थोड़ी देर रुकी और दरवाजा बंद कर लिया। मुझे आज उसकी बहुत ज्यादा याद आ रही थी। मैं अकेला गुमसुम सा बैठा था। मोबाइल चलाने का मन भी नहीं कर रहा था। मैं उसके दरवाजे की ओर देख रहा था। दरवाजा बंद करने के थोड़ी देर बाद वह घूम कर दूसरी ओर से आई और मुझे देखने लगी। लेकिन दुर्भाग्य से उसके आने से कुछ समय पहले ही मेरे पास एक व्यक्ति आकर बैठ गया था और जब वह आई तो उसने देखा कि मेरे पास कोई और बैठा है, फिर वह वापस चली गई। इस समय मुझे अच्छा लगा कि वह दरवाजा बंद करके दूसरी तरफ से मुझे देखने आई। तब मुझे समझ में आया कि उसने दरवाजा इसलिए बंद किया होगा ताकि उसके घर का कोई सदस्य ना देख ले कि मैं वहां अकेला बैठा हूँ और अगर वह दरवाजे पर होती तो उन्हें शक हो जाता, इसलिए उसने दरवाजा बंद किया और दूसरी तरफ से घूम कर आई। 

         थोड़ी देर बाद मैं घर वापस आ गया। किसी काम से उसके घर के पास फिर से गया। मुझे वहां खड़े हुए थोड़ी देर हुई थी कि वह अपने घर से निकल कर आई। वह किसी काम से आई थी और उसे मेरे पास तक आना पड़ा। हालांकि उसने मेरी ओर नहीं देखा क्योंकि वहां और भी कई लोग थे जिनमें उसके घर के लोग भी थे इसलिए वह जल्दी ही वापस चली गई। थोड़ी देर बाद मैं भी अपने घर वापस आ गया। रात का भोजन करने के बाद मैं रोज की तरह बाहर टहलने निकल गया। आज मैं वहां नहीं बैठा जहां मैं रोज बैठता हूँ। पता नहीं आज वह छत पर आई होगी या नहीं… मेरा मन था वहीं बैठने का क्योंकि मुझे तो वहीं अच्छा लगता है लेकिन आज मेरे साथी दूसरी जगह बैठे थे और मुझे मजबूरी में उन्हीं के पास बैठना पड़ा, हालांकि वहां से उसकी छत दिख रही थी। मैं थोड़ी-थोड़ी देर बाद देख लेता था लेकिन यह पता नहीं लग रहा था कि वह छत पर आई या नहीं। कुछ समय बाद मैं वहां से उठकर अपनी पुरानी जगह आ गया यानी कि उसके घर के पास। लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। अगर वह आई होगी तो चली गई होगी और उसके बाद उसके आने का समय समाप्त हो गया था। मैं वहां थोड़ी देर बैठा और उसके बाद घर वापस आ गया।

          घर वापस आने के बाद आज मेरा मन कुछ भी करने का नहीं किया। मैंने आज कोई भी काम नहीं किया। ना ही मैं आज पढ़ा। आज पूरे दिन मेरा मन कर रहा था कि मैं उसे ही याद करता रहूं, उसके बारे में ही सोचता रहूं। कभी-कभी मन करता है कि बस उसे ही याद करता रहूं, बाकी कोई भी काम ना करुं। ऐसा ही मुझे आज लग रहा है और अभी भी मैंने कोई भी काम नहीं किया। आज मैं डायरी लिखने की भी नहीं सोच रहा था। एक बार को तो मैं सोने जाने वाला था लेकिन फिर मैंने डायरी लिखने का निश्चय किया। अभी रात के 11:00 बज चुके हैं तो अब मैं चलता हूँ सोने, आपसे मिलूंगा कल फिर से एक और नई पोस्ट के साथ… शुभ रात्रि।

शनिवार, 19 अक्टूबर 2024

आज बहुत दिनों के बाद वो छत पर आयी | 18 October 2024 Diary

 स्वागत है आप लोगों का मेरी दैनिक डायरी में, आज है 18 अक्टूबर 2024। कल मैंने आपको जैसे बताया था कि मैं बाहर गया हुआ था और सुबह जाने के बाद रात को घर लौटा था, तो पूरे दिन वह मुझे देखने को नहीं मिली थी। उसके बाद मैंने सोचा कि मुझे इस रात का और इंतजार करना पड़ेगा और सुबह वह देखने को मिलेगी लेकिन आज भी वह मुझे शाम तक देखने को नहीं मिली। आज मुझे सुबह जल्दी उठना पड़ा क्योंकि पिताजी की तबीयत कल अचानक खराब हो गई थी इसलिए घर का सारा काम मुझे ही करना पड़ रहा है तो मुझे आज जल्दी उठना पड़ा। सुबह उठने के बाद मैंने घर का काम निपटाया और बाहर गया लेकिन वह मुझे देखने को नहीं मिली थी। उसके बाद मैं बाहर नहीं गया। काम निपटाने के बाद मैं नहाया और नाश्ता किया, उसके बाद बाहर गया लेकिन अब भी वह मुझे देखने को नहीं मिली… जबकि कल पूरा दिन उसे देखे बिना गुजर गया था और मुझे उम्मीद थी कि रात गुजरने के बाद सुबह वो देखने को मिल जाएगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

           दोपहर तक मैंने तीन-चार चक्कर और लगाए। हर बार उसके घर के सामने से गुजरा तो उसके घर की ओर देखता। उसके घर के बाकी सदस्य तो मुझे नजर आ रहे थे लेकिन वह कहीं नजर नहीं आ रही थी। मैं घर लौट आया और थोड़ा सा अपना काम किया, उसके बाद मुझे नींद आने लगी लेकिन मैं सोया नहीं क्योंकि मैंने अभी तक खाना नहीं खाया था। पहले मैंने दोपहर का खाना खाया और उसके बाद मुझे किसी काम से बाहर की ओर जाना पड़ा। इस बार भी मैंने उसके घर के सामने जाकर उसे देखने की कोशिश की लेकिन वह मुझे नहीं दिखी। उसके कपड़े जरूर बाहर तार पर सूख रहे थे, इसका मतलब था कि वह नहाकर घर के अंदर आराम कर रही होगी। मैं वापस घर आ गया और सो गया। जब मैं उठा तब तक चाय का वक्त हो चुका था। मैंने शाम की चाय पी और फिर से बाहर की ओर चला गया। मैं उसके घर के पास पहुंचा ही था कि मुझे उसकी आवाज आ रही थी लेकिन वह कहीं भी दिख नहीं रही थी। मैं वहीं खड़ा होकर उसके थोड़ा और आगे आने की प्रतीक्षा करने लगा। आखिरकार थोड़ी देर बाद वह मुझे दिखाई दी। कल सुबह के बाद से आज शाम को वह मुझे दिखाई दी और उसे देखकर मैं थोड़ा सा भावुक हो गया।

          वह अपने घर के बाहर बच्चों को खिला रही थी। उसने जब मुझे वहां खड़े देखा तो थोड़ा झाँककर मेरी ओर देखा। मैं थोड़ा और आगे जाना चाहता था ताकि उसे और नजदीक से देख सकूं लेकिन तभी वह घर के अंदर चली गई। मैं आगे गया तो मैंने देखा कि उसके परिवार से एक सदस्य घर के बाहर निकल कर आया है इसलिए वह घर के अंदर चली गई थी ताकि उस सदस्य को कोई शक ना हो। मैं थोड़ा आगे जाकर फिर वापस लौट आया। घर आकर मैंने अपना एक काम किया और उसके बाद जब शाम हो गई तो मैं थोड़ी देर के लिए बाहर गया। उसका दरवाजा खुला हुआ था। मैं उसके घर के पास ही खड़ा था। थोड़ी देर बाद मैंने देखा कि वह छत पर आई है। आज कई दिनों के बाद मैंने उसे छत पर देखा। वह बच्चे को खिलाते हुए छत पर टहल रही थी और बीच-बीच में छत के थोड़ा और आगे आ जाती थी, जिधर मैं खड़ा था। उसने थोड़ी देर मेरी ओर देखा और उसके बाद वापस टहलने लगी। उसे देखकर मुझे बहुत अच्छा लगा। वह थोड़ी देर छत पर रही और बाद में नीचे चली गई। मुझे भी किसी काम से घर वापस आना था तो मैं वहां से घर आ गया।

          रात का भोजन करने के बाद रोज की तरह मैं बाहर टहलने निकल गया। उसका दरवाजा बंद था और उसके घर से किसी भी तरह की कोई आवाज भी नहीं आ रही थी। मुझे लगा शायद वह सारा काम निपटा कर सोने के लिए चली गई होगी। मैं वहां टहलता रहा। कुछ समय बाद वहां मेरे और भी साथी आ गए। हम सभी वहां बातें कर रहे थे। थोड़ी देर बाद मुझे उसके घर से बर्तनों के खड़कने की आवाज आई, तब मुझे लगा कि वह अभी सोने के लिए नहीं गई है। खाना खाने के बाद बर्तन साफ कर रही है। वहां बातें करते-करते अचानक मेरी निगाह छत पर गई तो मुझे छत पर वह दिखाई दी। मैंने गौर से देखा कि यह वही है कहीं कोई और तो नहीं है, लेकिन यह वही थी। आज इतने समय बाद रात को वह छत पर आई। मुझे इतनी खुशी हुई कि मैं बयाँ नहीं कर सकता। वह छत पर आने के बाद थोड़ी देर मेरी ओर देखती रही लेकिन जब उसने देखा कि मेरे साथ और भी लोग हैं तो वह वापस चली गई। मुझे लगा कि वह थोड़ी देर बाद फिर से आएगी इसलिए मैंने अपने बाकी साथियों को आगे भेज दिया और मैं वहीं रुक गया। मैं अब अकेला था। मैंने उसकी काफी देर प्रतीक्षा की लेकिन फिर वह नहीं आई। मैं बार-बार छत की ओर देखता कि कहीं वह आई तो नहीं है लेकिन वह नहीं आई। उसे लगा होगा कि आज मेरे साथ और भी कई लोग हैं इसलिए फिर नहीं आई।

           जब उसके आने की उम्मीद समाप्त हो गई तो मैं वहां से घर आ गया। घर आने के बाद मैंने अपना बचा हुआ काम निपटाया और फिर डायरी लिखने बैठ गया। आज उसे उसकी छत पर देखकर मुझे बहुत अच्छा लगा। आज मुझे बहुत सुकून मिला कि इतने दिनों के बाद वो छत पर आयी। अब मुझे बेसब्री से कल का इंतजार है क्योंकि मुझे लग रहा है कि अब वह मुझसे बात कर लेगी। देखते हैं कल क्या होता है। अभी रात के 11:45 बजने वाले हैं तो चलिए अब मैं चलता हूँ सोने, आपसे मिलूंगा कल फिर से एक और नई पोस्ट के साथ… शुभ रात्रि।

शुक्रवार, 18 अक्टूबर 2024

मुझे पता था कि फंक्शन में जाने की वजह से आज वो मुझे देखने को नहीं मिलेगी | आज दूसरी बार मुझे आलू टिक्की अच्छी लगी | 17 October 2024 Diary

 स्वागत है आप लोगों का मेरी दैनिक डायरी में, आज है 17 अक्टूबर 2024। आज मैं एक फंक्शन में गया था। मुझे पता था कि फंक्शन में जाने की वजह से वह मुझे पूरे दिन देखने को नहीं मिलेगी क्योंकि मैं सुबह गया था और लौटते हुए मुझे रात हो चुकी थी। इसलिए सुबह जाने से पहले मैं उसे देखने बाहर गया लेकिन वह मुझे देखने को नहीं मिली। मुझे अंदर से ठीक नहीं लग रहा था क्योंकि अगर वह देखने को मिल जाती तो मुझे अच्छा लगता क्योंकि मुझे पता था आज वह मुझे देखने को नहीं मिलने वाली है। लेकिन मैं क्या करता, वापस आ गया और तैयार हुआ। मेरे साथ मेरा भाई और मेरी माता जी भी गई थीं। हम सभी लोग अपनी कार में बैठकर घर से निकले ही थे और जैसे ही उसके घर के सामने पहुंचे, वह मुझे अपने घर के बाहर दिखाई दी। उसे देखते ही मुझे ऐसा लगा मानो मुझे कितनी कीमती चीज मिल गई हो। जब हमारी कार घूम कर दूसरी ओर आयी तो वह थोड़ी और आगे आ गई और हमारी तरफ देख रही थी। मुझे उसे देखकर ऐसा लगा जैसे उसके मन में प्रश्न हो कि मैं कहां जा रहा हूँ।

           एक बार को मैंने सोचा कि मैं नहीं जाऊंगा क्योंकि जाने की वजह से उसे देखने से वंचित रह जाऊंगा लेकिन फिर मुझे जाना पड़ा। जाते-जाते मैं सोच रहा था कि आज फिर से वह मुझे पूरे दिन देखने को नहीं मिलेगी लेकिन क्या हो सकता था। हम लोग समय से पहले ही वहां पहुंच गए थे। जब खाने की बारी आई तो हमने खाना खाया और वहां के सभी व्यंजन बहुत स्वादिष्ट थे। कई बार फंक्शन में ऐसा होता है कि जल्दबाजी की वजह से कुछ चीजों में स्वाद नहीं आता लेकिन वहां सभी चीजें स्वादिष्ट थीं। आलू टिक्की जो मेरी पसंदीदा है और मैं हर फंक्शन में जरूर खाता हूँ, वह मुझे बहुत ही अच्छी लगी। ऐसा दूसरी बार हुआ है जब मुझे आलू टिक्की अच्छी लगी। इससे पहले कई साल पहले मैंने एक फंक्शन में आलू टिक्की खाई थी और वह मुझे इतनी स्वादिष्ट लगी कि मुझे अभी तक याद है। आज दूसरी बार मुझे आलू टिक्की पसंद आई। हमने वहां एंजॉय किया और फंक्शन समाप्त होने पर हम लोग घर आ गए। घर आते-आते हमें रात हो चुकी थी।

          वहां बैठे-बैठे मुझे उसका बार-बार ध्यान आ रहा था। मुझे कई बार उसकी याद आई। मैं सोच रहा था कि वह क्या कर रही होगी, कैसी होगी, अगर यहां मेरे साथ होती तो क्या होता, वह कैसी लगती…! ऐसे ही कई तरह के प्रश्न मेरे दिमाग में थे। आज फिर से मुझे उसका नाम कई जगह लिखा हुआ दिखाई दिया और उसका नाम देखते ही उसकी याद इतनी तेजी से आती है जैसे दो चुंबक एक दूसरे की ओर खिंची चली जाती हैं। मैं सोच रहा था कि अगर यहां से जल्दी जा पाए तो मैं शाम को उसे देख सकता हूँ लेकिन ऐसा संभव नहीं हो सका। कार्यक्रम में भी थोड़ी देरी हो गई, जिसकी वजह से हमें वहां थोड़ा ज्यादा रुकना पड़ा और हमें लौटते हुए रात हो गई। अब मुझे उसे देखने के लिए कल सुबह तक का इंतजार करना पड़ेगा। पता नहीं उसे आज मेरी याद आई होगी या नहीं। मुझे ऐसा लगता है कि उसने मुझे आज याद तो किया होगा।

           फंक्शन से लौट कर जब हम आए तो काफी रात हो चुकी थी इसलिए आज मैं बाहर नहीं गया। आज भूख भी उतनी ज्यादा नहीं थी तो हम लोगों ने थोड़ा-थोड़ा खाना खाया और बाहर जाने के लिए तब तक काफी देर हो चुकी थी। मैं घर में ही थोड़ा टहल लिया और उसके बाद अपने कुछ काम करने बैठ गया क्योंकि दिन भर कुछ भी काम नहीं हुआ था। थोड़ी थकान भी हो रही थी और मुझे नींद भी आ रही थी लेकिन अगर मैं अपने कुछ काम ना करूं तो थोड़ा खराब सा लगता है। इसलिए मैंने थकान और नींद को एक ओर रखकर अपना जो सबसे ज्यादा जरूरी काम था वह मैंने निपटा लिया और उसके बाद डायरी लिखने बैठ गया। डायरी लिखते-लिखते अभी रात के 11:00 बजने वाले हैं और मुझे सुबह भी जल्दी उठना है तो अब मैं चलता हूँ सोने, आपसे मिलूंगा कल फिर से एक और नई पोस्ट में… शुभ रात्रि।

गुरुवार, 17 अक्टूबर 2024

आज वो मुझे ना के बराबर देखने को मिली | 16 October 2024 Diary

 स्वागत है आप सभी लोगों का मेरी दैनिक डायरी में, आज है 16 अक्टूबर 2024। कल रात देरी से सोने की वजह से आज सुबह उठने में थोड़ी दिक्कत हुई लेकिन मैंने अलार्म लगा रखा था इसलिए मैं उठ गया क्योंकि मुझे एक काम से बाहर जाना था और यहां उसके दिखने की संभावना रहती है। मैं सुबह उठने के बाद बाहर गया लेकिन वह मुझे नहीं दिखी। पता नहीं उस समय वह सोकर उठी भी होगी या नहीं, वैसे तो उठ जाती है लेकिन आज मुझे लग रहा था कि शायद ना उठी हो। मैं घर वापस आ गया। थोड़ी देर बाद मैं फिर से बाहर गया और इस बार जब उसके घर के सामने से जा रहा था तो वह मुझे घर में चलती हुई दिखाई दी। उसे देखकर मुझे अच्छा लगा। मैं आगे निकल गया और थोड़ी ही देर बाद लौट कर फिर से आया लेकिन वह अब मुझे नहीं दिखी। आज पूरे दिन वह मुझे बहुत कम दिखाई दी। सुबह को मुश्किल से तीन-चार सेकेंड के लिए मैंने उसे देखा था और उसके बाद तीन-चार सेकेंड के लिए ही मुझे वह शाम को दिखाई दी। सुबह से शाम तक वह मुझे नहीं दिखी।

            आज मेरे माता-पिता बाहर गए हुए थे इसलिए घर में मैं अकेला था। मेरा मन भी नहीं लग रहा था। जब मैं घर में अकेला होता हूँ तो मेरा मन नहीं लगता। नहा-धोकर नाश्ता करने के बाद मैं फिर से बाहर गया लेकिन वह मुझे नहीं दिखी। थोड़ी देर बाद मैं वापस घर लौट आया। मैं थोड़ी-थोड़ी देर बाद कई बार उसे देखने की आस में बाहर जाता रहा लेकिन वह मुझे दिखाई नहीं दी। दोपहर के समय जब मैं बाहर गया तो उसके कपड़े तार पर सूख रहे थे। मैं समझ गया कि वह नहा कर घर के अंदर होगी। मैंने कोशिश की उसे देखने की लेकिन वह दिखाई नहीं दी।

            आज दोपहर में मैं दो-तीन बार थोड़ी-थोड़ी देर के लिए सोया। मेरी आंख खुल जाती थी क्योंकि मैं अकेला था और घर के भी काम मुझे ही करने थे। मेरा पूरा दिन आज ऐसे ही बीत गया। मैं थोड़ी देर के लिए पढ़ा भी था लेकिन उतना नहीं जितना मैंने सोचा। दोपहर के बाद मेरे माता-पिता घर आ गए। दोपहर के बाद मुझे उतना बाहर जाने को नहीं मिला जितना मैं बाकी दिन जाता हूँ। उनके आने के बाद मैं किसी काम से पड़ोस के गांव गया था और जब वहां से लौटा तो काफी वक्त हो चुका था। उसके बाद मुझे कुछ और काम भी करने थे लेकिन मैं समय निकालकर शाम के समय बाहर चला गया। उसका दरवाजा खुला हुआ था। मैं वहां जाकर बैठ गया। वह मुझे दरवाजे में से चलती हुई तो दिखाई दी लेकिन मुझे उसके पैर दिख रहे थे, उसका चेहरा नजर नहीं आ रहा था। थोड़ी देर बाद उसका दरवाजा बंद हो गया। मैं भी उठकर अपने घर आ गया।

            रात का भोजन करने के बाद रोज की तरह मैं टहलने बाहर चला गया। आज भी बाकी दिनों जैसा ही हाल था। ना ही वह छत पर आई… ना ही उसने दरवाजा खोल कर देखा। मैं अकेला वहां बैठा रहा और उसकी प्रतीक्षा करता रहा। मुझे उसकी याद लगातार आ रही थी। उसकी आवाज भी मुझे सुनाई नहीं दी। मैं कुछ देर वहां टहला और उसके बाद बैठ गया। थोड़ी देर मोबाइल चलाया और फिर यूं ही बैठा रहा। पता नहीं अब वह छत पर कब आएगी। मेरा उससे बात करने और देखने का बहुत मन कर रहा है। आज वह मुझे ना के बराबर दिखी थी… वह भी काफी दूर से। उसे देखने की आस में पूरा दिन ऐसे ही बीत जाता है। जब रात हो जाती है और वह मुझे देखने को नहीं मिलती तो मैं अंदर से बुरी तरह टूट जाता हूँ। मुझे बहुत गुस्सा आता है। कभी-कभी लगता है कि वह मुझसे प्यार नहीं करती… मैं ही उसके पीछे पगलाया फिरता हूँ। जब उसके आने की उम्मीद समाप्त हो गई तो मैं वहां से उठकर अपने घर आ गया। घर आकर मैंने थोड़ा सा काम किया और उसके बाद डायरी लिखने बैठ गया। आज एक बार फिर से मेरा मन डायरी लिखने का नहीं हो रहा था, लेकिन फिर मैंने मन को पक्का किया और डायरी लिखने बैठ गया। अभी रात के 11:15 बजने वाले हैं तो अब मैं चलता हूँ सोने, आपसे मिलूंगा कल फिर से एक और नई पोस्ट के साथ… शुभ रात्रि।

बुधवार, 16 अक्टूबर 2024

आज वो पूरे एक दिन के बाद दिखी... और मेरे आते ही अंदर चली गई | 15 October 2024 Diary

 स्वागत है आप सभी लोगों का मेरी दैनिक डायरी में, आज है 15 अक्टूबर 2024। कल मैं अपनी डायरी नहीं लिख पाया था क्योंकि कल मैं बाहर गया हुआ था। सुबह जाने के बाद मैं रात को घर लौटा और काफी थक चुका था इसलिए कल मैं कोई भी काम नहीं कर पाया। आज सुबह उठने के बाद जब मैं बाहर गया तो वह अपने घर के बाहर कुछ काम कर रही थी। कल मैंने पूरे दिन उसे नहीं देखा था। पूरे 1 दिन के बाद आज सुबह जब मैंने उसे देखा तो मैं बहुत खुश हुआ। वह अपना काम करती रही, उसने मेरी ओर नहीं देखा क्योंकि मेरे आस-पास और भी लोग खड़े थे। मैं लौट कर घर आ गया और थोड़ी देर बाद ही फिर से गया ताकि उसे देख सकूं लेकिन तब तक वह काम निपटाकर अपने घर के अंदर जा चुकी थी।

          कल जब मैं बाहर गया हुआ था तो मुझे कई जगह उसका नाम देखने को मिला। उसका नाम देखते ही उसकी याद और ज्यादा तेजी के साथ आती है। जब मैं वहां से लौटा तो रात हो चुकी थी इसलिए मुझे सुबह का इंतजार करना पड़ा और फिर आज सुबह वह मुझे दिखाई दी। नहा धोकर नाश्ता करने के बाद मैं जब बाहर गया तो उसके घर के पास पहुंचा ही था कि वह अपने घर के बाहर कुछ खरीद रही थी। उसके साथ उसके परिवार की और भी महिलाएं थी इसलिए मैं थोड़ी देर रुक कर वापस आ गया। थोड़ी देर बाद मैं फिर से ऐसी जगह खड़ा हो गया जहां से वह अगर अपने घर के बाहर आती तो मुझे दिख जाती। मुझे खड़े हुए कुछ ही देर हुई थी कि वह अपने घर से निकलकर किसी काम से अपने पड़ोस के घर में गई। मैं सोच रहा था कि मैं भी वहां पहुंच जाऊं लेकिन मैंने थोड़ी देर इंतजार करना उचित समझा और यह सही निर्णय था। वह थोड़ी देर बाद ही वहां से वापस आ गई। अगर मैं चला जाता तो कोई फायदा नहीं होता। मैं वहीं खड़ा था, वह एक बार फिर से अपने घर से बाहर आई और उसी घर में गई। अब की बार वह और भी जल्दी वहां से लौट आई। उसके बाद मैंने कोशिश की कि उसे फिर से देखूं। मैं उसके घर के सामने गया लेकिन फिर वह मुझे नहीं दिखी। मैं घर वापस आ गया।

          दोपहर का समय हो चुका था। मैं घर जाकर पढ़ने बैठ गया। पढ़ते-पढ़ते मुझे सुस्ती आने लगी तो मैंने एक छोटी सी झपकी ली और फिर से पढ़ाई शुरू कर दी। आज मैं ज्यादा नहीं पढ़ पाया था। आज मेरा मन थोड़ा सा विचलित हो रहा था। उसे देखने और उससे बात करने का मन कर रहा था। मैं उसके बारे में सोचता रहा। मैंने दोपहर का खाना खाया और आराम करने लेट गया। ऐसे ही उसके बारे में सोचते-सोचते काफी समय हो गया। मुझे मम्मी ने चाय के लिए आवाज लगा दी। मैंने चाय पी और फिर घर से बाहर चला गया। जब उसके घर के सामने से जा रहा था तो मैंने उसे देखने की कोशिश की लेकिन वह मुझे नहीं दिखी। जैसे ही मैं उसके पड़ोस के घर के पास पहुंचा तो मुझे वह उस घर के दरवाजे पर उस घर की महिला से बात करते हुए दिख गई। वह मेरे बहुत नजदीक थी। मैं उसी रास्ते पर था जहां उस घर का दरवाजा था। मुझे वहां देखकर वह घर के अंदर चली गई। इससे मैं समझ गया कि उसके अंदर अभी भी किसी बात को लेकर नाराजगी है। मुझे लगा कि वह अपने घर चली जाएगी लेकिन वह वहीं रुकी रही। आज हिम्मत करके मैं भी उस घर के अंदर चला गया। वह वहां कुछ सेकंड्स और रुकी, उसके बाद अपने घर चली गई और जाते-जाते बोली “मैं थोड़ी देर में आऊंगी, मुझे अभी काम याद नहीं आ रहा है भूल गई… घर जाकर काम याद करके फिर आऊंगी” और यह कहकर अपने घर चली गई। उसके बाद मैंने काफी देर उसकी प्रतीक्षा की, मैं वहीं रहा लेकिन वह फिर नहीं आई। मैं अपने घर लौट आया।

           उसके बाद मैं काम से बाहर गया तो वह मुझे अपने घर के दरवाजे पर खड़ी हुई दिखाई दी। मैंने एक दो चक्कर और लगाए। वह मुझे एक बार और मिली लेकिन उसने मुंह दूसरी तरफ घुमा लिया। उसके बाद वह मुझे फिर नहीं दिखी। शाम के समय मैं बाहर गया तो उसका दरवाजा बंद था। मैं कुछ देर वहां रुका और उसके बाद घर वापस आ गया। रात का भोजन करने के बाद मैं रोज की तरह बाहर टहलने निकल गया। उसकी छत आज भी सूनी थी। वह आज भी छत पर नहीं आई और ना ही उसका दरवाजा खुला था, बल्कि उस समय तक आज वह अपना सारा काम निपटा चुकी थी और शायद अपने घर के अंदर आराम कर रही थी क्योंकि आज मुझे उसके घर से कोई भी आवाज नहीं आई। मैं टहलकर बैठ गया और उसके दरवाजे की ओर देखता रहा। जब काफी समय हो गया और उसके आने की उम्मीद समाप्त हो गई तो मैं घर आ गया। इस समय मुझे उसकी बहुत ज्यादा याद आ रही थी। मैं एक बार फिर से अपना कोई भी काम नहीं कर पाया जबकि मैंने उसे बता रखा है कि अगर वह मुझसे नहीं बोलती है और नाराज रहती है तो मैं कुछ भी नहीं कर पाता हूँ। एक बार को तो मेरा मन डायरी लिखने का भी नहीं किया लेकिन फिर मैंने डायरी लिखनी शुरू की और आज मैं काफी लेट हो गया। अभी रात के 12:15 बजने वाले हैं, तो अब मैं चलता हूँ सोने आपसे मिलूंगा कल फिर से एक और नई पोस्ट के साथ… शुभ रात्रि।

सोमवार, 14 अक्टूबर 2024

आज का सारा दिन बहुत ही ज्यादा मायूसी में बीता | 13 October Diary

 स्वागत है आप लोगों का मेरी दैनिक डायरी में, आज है 13 अक्टूबर 2024। आज सुबह उठने के बाद रोज की तरह मैंने एक गिलास पानी पिया और बाहर की ओर निकल गया। जैसे ही मैं उसके घर के सामने पहुंचा, वह अपने घर के बाहर पानी भर रही थी। मैंने थोड़ी देर उसे देखा, फिर मैं आगे चला गया। आज मैंने उसे सुबह पहली बार जब से देखा है तब से आज मैं अंदर से बहुत ही ज्यादा उदास महसूस कर रहा हूँ। मुझे पता नहीं कि यह सब क्यों है और क्या है लेकिन आज मुझे अंदर से बहुत ही ज्यादा खराब लग रहा है। थोड़ी देर बाद मैं घर वापस आ गया। घर आकर नित्य-कर्म से निपट कर मैंने नाश्ता किया। आज मेरे माता-पिता बाहर गए हुए थे और मैं घर पर अकेला था। नाश्ता करने के बाद मैं फिर से बाहर की ओर चला गया। मैं रास्ते में खड़ा हुआ किसी से बात कर रहा था कि तभी मुझे उसकी आवाज सुनाई दी। वह अपने पड़ोस के घर में आई थी। मैं उसी घर के सामने था। आते ही वह उस घर के दरवाजे पर आई जिसके बाहर मैं खड़ा हुआ बातें कर रहा था। जैसे ही उसने दरवाजे से बाहर देखा कि मैं किसी से बातें कर रहा हूँ, वह दूसरी तरफ देखकर तुरंत पीछे हट गई। मुझे लग रहा है शायद उसने मुझे आते हुए देख लिया होगा। मैं अक्सर वहां कुछ देर के लिए रुक जाता हूँ क्योंकि वहां उसके आने की संभावना रहती है, तो हो सकता है उसने मुझे देख लिया हो और वह तुरंत उस घर में आ गई हो और उसने दरवाजे से बाहर की ओर देखा कि कहीं मैं खड़ा तो नहीं हूँ… लेकिन वहां मेरे साथ किसी और को देखकर वह वापस चली गई हो।

         थोड़ी देर बाद मुझे उस घर में जाने का मौका मिला और मैं घर के अंदर चला गया। वह वहां बातें कर रही थी। मैं किसी काम से गया था। जब मैं घर के अंदर गया तो उसका मुंह मेरी ओर था और वह जिनसे बातें कर रही थी उनका मुंह सामने की ओर था। मैंने उससे अपनी झुँझलाहट व्यक्त की। उसके चेहरे पर मुझे थोड़ा डर का भाव लगा जैसे कोई अचानक चिंतित हो जाता है। मेरे पहुंचने के थोड़ी ही देर बाद वह उठकर जाने लगी। मैंने उससे कहा “बैठो… और बातें करो”। उसने जाते हुए जवाब दिया “अब समय नहीं है घर बहुत काम है”, और वह अपने घर चली गई। थोड़ी देर बाद मैं भी अपने घर वापस आ गया।

        आज सुबह से ही मेरा मन बहुत खराब था। इस वजह से आज मैं बिल्कुल भी नहीं पढ़ पाया और ना ही अपना कोई काम कर पाया। कुछ भी करने का मन नहीं कर रहा था। पता नहीं आज क्या हो गया था। जो भी था… मुझे इतना पता है कि यह सब उसी की वजह से है। मैं ऐसे ही बैठा रहा… ना पढ़ाई की… ना कुछ काम किया। दोपहर को खाना खाने के बाद मैं फिर से बाहर गया लेकिन वह अब दिखाई नहीं दी। मैं घर वापस आ गया। उसकी याद आज बहुत ज्यादा आ रही थी। एक बार तो मैं रोने ही वाला था कि मैंने खुद को संभाल लिया। आज का पूरा दिन मेरे लिए बहुत ही खराब था। आज का पूरा दिन एक अजीब सी उदासी में बीता।

        शाम के समय मैं बाहर गया लेकिन वह मुझे दिखाई नहीं दी। उसका दरवाजा भी बंद था। मैंने काफी देर उसकी प्रतीक्षा की, जब वह दिखाई नहीं दी तो मैं घर वापस आ गया। थोड़ी देर बाद फिर किसी काम से उसके घर के पास गया। वहां मैंने काफी देर उसका इंतजार किया। उस समय उसके घर से बाहर आने की संभावना रहती है लेकिन वह नहीं आई। मैं घर वापस आ गया। मेरा मन नहीं माना तो मैं एक बार फिर से बाहर चला गया। बाहर जाने के बाद मुझे उसके घर के पास ही खड़े होने का मौका मिला। वहां मेरे साथ एक व्यक्ति और था। जहां हम खड़े थे वहां ज्यादा रोशनी नहीं थी। इस बार मैं उसके घर के बिल्कुल पास खड़ा था। वह घर से बाहर आई और उसने पानी भरा और पानी भरकर वह घर के अंदर चली गई। वह एक बार और बाहर आई। उसने देखा कि मैं वहां खड़ा हूँ और घर के अंदर चली गई।

         रात का भोजन करने के बाद रोज की तरह मैं बाहर टहलने चला गया। आज भी उसकी छत सूनी थी। मैं वहां काफी देर बैठा रहा। कभी उसकी छत की ओर देखता तो कभी उसके दरवाजे की ओर। ना तो वह छत पर आई और ना ही दरवाजे पर। उसके घर में काम करने की कुछ आवाजें मुझे सुनाई दीं। आज का दिन भी उसका इंतजार करते-करते ऐसे ही निकल गया। ना तो वह इतने अच्छे से देखने को मिली और ना ही उससे कोई बात हुई। जब घर आने का समय हुआ तो मैं घर आ गया। आज मेरे अंदर जो उथल-पुथल मची है, मैं किसी को समझा नहीं सकता। शायद कोई नहीं समझ पाएगा… लेकिन आज मैं जितना परेशान रहा हूँ अगर कोई और होता तो इतनी परेशानी में उसका दिमाग फट जाता। आज दिन भर मुझे ऐसा लगा जैसे कि कुछ बहुत गलत होने वाला है… जैसे कि मैं मरने वाला हूँ। पता नहीं आज क्या हो गया था मुझे, कुछ समझ में नहीं आया। आज घर आकर मैंने कुछ नहीं किया बस आने के बाद डायरी लिखने बैठ गया। अभी रात के 11:00 बजने वाले हैं तो चलिए अब मैं चलता हूँ सोने, आपसे मिलूंगा कल फिर से एक और नई पोस्ट के साथ… शुभ रात्रि।

रविवार, 13 अक्टूबर 2024

आज मैं दोपहर भर उसके घर के सामने बैठा रहा | 12 October 2024 Diary

 स्वागत है आप सभी लोगों का मेरी डेली डायरी में, आज है 12 अक्टूबर 2024। आज सुबह उठने के थोड़ी देर बाद मैंने रोज की तरह एक गिलास पानी पिया और उसके बाद बाहर घूमने निकल गया। वह मुझे दिखाई नहीं दी। थोड़ी देर बाद मैं घर आ गया। घर आकर नित्य-कर्म से निपटा और नहा कर नाश्ता किया। नाश्ता करने के बाद मैं फिर से बाहर गया। जब उसके घर के सामने पहुंचा तो वह अपने घर में काम कर रही थी। मैंने उसे देखा और आगे बढ़ गया। उसने मुझे नहीं देखा था। थोड़ी देर बाद फिर से वापस आया। वह अभी भी वहीं थी। मैंने थोड़ी देर रुक कर देखना चाहा लेकिन किसी के अचानक आने के डर से मैं नहीं रुका और आगे निकल आया। मैं घर आ गया और पढ़ने बैठ गया। पढ़ने के बाद मैं फिर से बाहर चला गया। इस बार भी जब मैं उसके घर के सामने था तो वह घर में कुछ काम कर रही थी। इस बार उसने मुझे देखा। मैं आगे बढ़ गया और जाकर उसके घर के पास ही एक जगह बैठ गया। वहां मेरे साथ मेरे और भी साथी थे।

           उसका दरवाजा खुला हुआ था तो मुझे उम्मीद थी कि वह मुझे दिखेगी और ऐसा ही हुआ। वह अपने घर में काम करती हुई चलते-फिरते मुझे कई बार दिखाई दी। उस समय मैं सोच रहा था कि मैं यहीं बैठा रहूं और उसे यूं ही देखता रहूं। उसने भी दरवाजे में से मेरी ओर देखा कि मैं सामने बैठा हूँ। वह कुछ खरीदने अपने घर के बाहर भी आई लेकिन उस समय उसके साथ उसके घर की महिलाएं भी थीं। वह थोड़ी देर बाद घर के अंदर चली गई। कुछ देर बाद वह किसी काम से अपनी छत पर भी आई लेकिन उसने मेरी ओर नहीं देखा और नीचे चली गई। मैं काफी देर वहां बैठा रहा। आज लगभग दोपहर का सारा समय मैंने वहीं बिता दिया था, हालांकि तब तक उसका दरवाजा बंद हो चुका था और वह घर के अंदर आराम कर रही होगी। जब दोपहर ढलने वाली थी तो हम अपने अपने घर आ गए। घर आने के बाद मैंने अपने काम किये। आज करने को काम थोड़ा ज्यादा था तो आज मैं पढ़ा नहीं, अपना काम करता रहा।

            शाम की चाय का समय हो चुका था। मम्मी ने चाय के लिए आवाज लगा दी। मैंने चाय पी और कुछ देर के लिए बाहर खड़ा हो गया। उसके बाद घर के अंदर जाकर फिर से काम किया। काम करते-करते मुझे शाम हो चुकी थी। शाम के समय मैं बाहर चला आया और जैसे ही उसके घर के सामने पहुंचा वह अपने घर में काम कर रही थी। उस समय उसका मुंह बाहर की ओर ही था उसने मेरी ओर देखा। मैंने थोड़ी देर उसे देखा और आगे निकल आया और जाकर उसके घर के पास बैठ गया। उसका दरवाजा खुला हुआ था, उसमें से वह मुझे अंदर बैठी दिख रही थी लेकिन उसका मुंह दूसरी तरफ था। मैंने कुछ देर उसे देखा और फिर एक जगह आकर बैठ गया। मुझे वह एक-दो बार और अपने घर में चलते-फिरते दिखाई दी, उसने बाहर मेरी ओर देखा। थोड़ी देर बाद मेरे पास घर से फोन पहुंच गया किसी काम के लिए तो मैं वहां से उठकर घर आ गया।

               रात का भोजन करने के बाद रोज की तरह मैं बाहर टहलने निकल गया। आज मुझे उम्मीद थी कि शायद वह छत पर आए या दरवाजा खोलकर देखे लेकिन दोनों में से कुछ भी नहीं हुआ। ना तो उसने दरवाजा खोल कर देखा और ना ही वह छत पर आई। कुछ देर टहलने के बाद मैं वहीं बैठ गया। कुछ समय बाद मेरे अन्य साथी भी आ गए। हम सभी लोग वहां बैठकर बातें करते रहे। आज मुझे नींद आ रही थी और मेरे कुछ काम भी बाकी थे तो मैं वहां से जल्दी आ गया और मेरे बाकी साथी वहीं बैठे रहे। मैंने उसका काफी देर तक इंतजार किया लेकिन वह छत पर नहीं आई। जब उसके आने की उम्मीद समाप्त हो गई तो मैं अपने घर आ गया। घर आकर मैंने अपने बाकी बचे काम निपटाए और उसके बाद डायरी लिखने बैठ गया। अभी रात के 11:15 बज चुके हैं तो अब मैं चलता हूँ सोने, आपसे मिलूंगा कल फिर से एक और नई पोस्ट के साथ… शुभ रात्रि।

शनिवार, 12 अक्टूबर 2024

आज बहुत दिनों बाद मैंने उसे इतने करीब से देखा | 11 October 2024 Diary

 स्वागत है आप सभी लोगों का मेरी डेली डायरी में, आज है 11 अक्टूबर 2024। कुछ दिनों से मेरा मन बड़ा अजीब सा हो रहा है। अंदर पता नहीं किस चीज का लेकिन एक डर जैसा लग रहा है। कुछ दिनों पहले सब ठीक था, सब कुछ अच्छा जा रहा था… मेरी पढ़ाई भी और मेरा काम भी। लेकिन अब कुछ दिनों से सब कुछ बेकार हो रहा है और मन की यह उदासी लगातार बढ़ती जा रही है। आज, कल से थोड़ी और ज्यादा मन में उदासी है। सुबह उठने के बाद मैंने एक गिलास पानी पिया और थोड़ी देर बाद रोज की तरह बाहर टहलने निकल गया, लेकिन वह मुझे दिखाई नहीं दी। थोड़ी देर बाद मैं घर वापस आ गया। 

         नित्य कर्म से निपटकर मैं नहाया और नाश्ता किया, उसके बाद घर से बाहर निकल गया। उसके घर के सामने जाते हुए मैंने उसके घर की ओर देखा तो वह मुझे घर में ही काम करती हुई दिख गई। उसे देखकर मुझे बहुत अच्छा लगा। मैं आगे निकल गया और थोड़ी देर बाद वापस आया तो वह मुझे फिर से अपने घर में चलती हुई दिखाई दी। घर आकर मैंने थोड़ी देर पढ़ाई की और उसके बाद फिर बाहर चला गया। इस बार वह मुझे दिखाई नहीं दी। घर आने के बाद मैंने अपने कुछ काम निपटाए और उसके बाद पढ़ने बैठ गया। आज दोपहर में फिर से मैं एक बार सो गया। मैंने उस समय खाना भी नहीं खाया था, फिर मुझे मम्मी ने उठाया क्योंकि खाने का समय हो चुका था। मैं उठा और सुस्ती उतारने के बाद मैंने खाना खाया। खाना खाने के बाद रोज ही की तरह फिर से बाहर टहलने निकल गया। दोपहर का समय था इसलिए उसके दिखने की कोई भी संभावना नहीं थी। मैं घर वापस आ गया।

        घर आने के बाद मैं थोड़ी देर ही पढ़ा था कि मुझे उसकी याद आने लगी और फिर मेरा पढ़ने का मन नहीं किया। मैंने अपने दूसरे काम करने की कोशिश की लेकिन उसमें भी वही हाल था। मैंने थोड़ा सा काम किया और फिर से उसके विचार मेरे मन में आने लगे। आज पता नहीं क्यों मुझे उसकी बहुत याद आ रही थी। मैंने बहुत दिनों से उससे बात नहीं की है। पिछले दिनों मुझे लगा था कि अब सब कुछ ठीक है और वह मुझसे बात करेगी लेकिन पिछले दो दिनों से उसे देखकर ऐसा लग रहा है कि फिर से कुछ ना कुछ बात हो गई है। मेरे लिए एक परेशानी यह भी है कि जब ऐसी वैसी कोई बात होती है तो मुझे उसका पता नहीं चल पाता। एक तो हमारी वैसे ही बहुत कम बात होती है और ऊपर से वह थोड़ी नाराज हो जाती है तो बोलती भी नहीं… तो मुझे किसी भी बात का पता नहीं चल पाता। मुझे पता नहीं रहता कि वह किस बात पर नाराज है या उसके घर वालों ने उसे क्या कहा है। अगर वह बताए तो आगे का रास्ता निकले और यह भी पता चले कि अब आगे क्या करना है… किस तरह से सावधानी बरतनी है…।

        मैंने शाम की चाय पी और उसके बाद किसी काम से बाहर गया। मैं जब उधर से लौट रहा था तो रास्ते में एक मोड़ पर मुझे वह मिली। मैं मोड़ के दूसरी ओर था, मुझे नहीं पता था कि मोड़ के इस तरफ से वह आ रही है। जैसे ही मैं मोड़ पर पहुंचा तो वो मेरे ठीक सामने से आ गई। यह सब इतनी तेजी से हुआ कि मैं कुछ समझ नहीं पाया और आज इतने दिनों में पहली बार वह मेरे इतने करीब से निकली। मैंने उससे कहा कि “मेरा मन बिल्कुल भी नहीं लग रहा है”, लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया और सीधे घर की ओर निकल गई। उस समय मुझे उसके चेहरे पर एक अजीब सा डर और परेशानी जैसा भाव नजर आया। ऐसा लगता है कि जरूर फिर से कोई ना कोई बात हुई है। मैं घर आ गया लेकिन उसकी याद मुझे अब और ज्यादा आने लगी।

           शाम के समय मैं रोज की तरह बाहर गया और जैसे ही वहां पहुंचा, मैंने देखा वह अपनी छत पर है। वह किसी काम से आई थी। उसके साथ उसकी भाभी भी थीं। जब मैं रास्ते में था तो मैंने देखा वह अपनी छत से किनारे पर जाकर नीचे की ओर देख रही है जहां मैं बैठता हूँ। जब मैं वहां पहुंचा तो थोड़ी देर बाद वह नीचे आ गई। मैं वहां काफी देर बैठा रहा लेकिन फिर वह मुझे नजर नहीं आई। मैं घर आ गया। थोड़ी देर बाद किसी काम से बाहर उसके घर की ओर गया। काम निपटाकर मैं बातें कर रहा था क्योंकि वहां और भी काफी लोग थे। थोड़ी देर बाद वह घर से निकल कर आई उसने एक बार भी मेरी ओर नहीं देखा। हालांकि वह मजबूर भी थी क्योंकि उसके परिवार के सदस्य भी वहां थे और उन सभी लोगों की निगाहें हम दोनों के ऊपर रहती हैं कि हम दोनों किधर देख रहे हैं। एक बार को मुझे लगा कि उसने हल्का सा मेरी ओर देखा। थोड़ी देर बाद वह वापस घर चली गई। मैं भी घर वापस आ गया।

           रात का भोजन करने के बाद रोज की तरह टहलने मैं बाहर निकल गया। मैं थोड़ी देर बैठा और उसके बाद टहलने लगा। उसकी छत आज भी सूनी थी। वह आज भी छत पर नहीं आई और ना ही दरवाजे पर उसकी कोई आहट हुई लेकिन थोड़ी देर बाद मुझे उसकी आवाज जरूर आई। वह घर के अंदर कुछ काम कर रही थी, शायद बर्तन साफ कर रही थी क्योंकि बर्तन खड़कने की आवाज आ रही थी। थोड़ी देर बाद किसी ने दरवाजा तो खोल कर देखा लेकिन मुझे ठीक से पहचान नहीं पड़ी कि वह कौन था। लेकिन वह निश्चित तौर पर उसका भाई होगा क्योंकि उसकी लंबाई इतनी नहीं है। टहलने के बाद मैं वहीं बैठकर मोबाइल में काम करने लगा। थोड़ी-थोड़ी देर बाद मैं उसकी छत की ओर देख लेता था, वहां कोई नहीं था। वह आज भी नहीं आई। एक बार फिर से मुझे उसकी प्रतीक्षा करते-करते सुबह से दोपहर, दोपहर से शाम और शाम से अब रात हो चुकी है। उससे मेरी कोई बात नहीं हुई है, ना ही वह मुझे ठीक से देखने को मिली है। इस समय मुझे उसकी बहुत ही ज्यादा याद आ रही है… इतनी कि अगर मेरा वश चले तो मैं अभी उसके घर पहुंच जाऊं और जाकर उससे लिपट जाऊं।

            आज शाम से तो मुझे उसकी याद बहुत ही ज्यादा आ रही है और अभी मेरा मन भी रोने का कर रहा है। पता नहीं वह मुझसे कब बात करेगी… कभी-कभी मन करता है कि बहुत जोर से उसका नाम चिल्लाउँ लेकिन ऐसा करना ठीक नहीं है। इससे सब कुछ खराब हो जाएगा। अभी काफी रात हो चुकी है तो चलिए मैं चलता हूँ सोने, आपसे मिलूंगा कल फिर से एक और नई पोस्ट के साथ… शुभ रात्रि।

शुक्रवार, 11 अक्टूबर 2024

रतन टाटा जी जैसा महान व्यक्ति किसी भी देश की अमूल्य धरोहर है | Ratan Tata | 10 October 2024 Diary

 स्वागत है आप लोगों का मेरी डेली डायरी में, आज है 10 अक्टूबर 2024। आज सुबह मैं सो कर उठा तो श्री रतन टाटा जी के निधन की सूचना मिली। यह सूचना मुझे मिली थी एक व्हाट्सएप ग्रुप से, लेकिन मैंने उस पर विश्वास नहीं किया क्योंकि सोशल मीडिया पर लोग फर्जी खबरें बहुत ज्यादा फैलाते हैं। मैंने विश्वसनीय स्रोत से पता किया और यह खबर सही निकली। रतन टाटा जी के लिए भारत के प्रत्येक व्यक्ति के दिल में सम्मान है और यह सम्मान ऐसे ही नहीं है… वह थे ही इतने महान। जब मैंने उनके निधन की खबर पढ़ी तो मुझे लगा जैसे भारत से एक बहुत जरूरी चीज छीन ली गई है। भारत का प्रत्येक व्यक्ति उनसे जुड़ाव महसूस करता है। ऐसा लगता है जैसे कोई अपना इस दुनिया को छोड़कर चला गया हो। लेकिन समय के आगे किसी की नहीं चलती… जिसके जाने का समय आ गया हो उसे जाना ही पड़ता है। भारतीय उद्योग जगत के लिए यह एक अपूरणीय क्षति है।

           सुबह उठने के बाद नित्य कर्म से निपट कर मैं नहाया और उसके बाद नाश्ता किया। रोज की तरह मैं बाहर निकल गया लेकिन वह मुझे दिखाई नहीं दी। मैं वापस घर आ गया। घर आकर मैं पढ़ने बैठ गया लेकिन थोड़ी देर बाद ही किसी काम से मुझे फिर बाहर जाना पड़ा और जैसे ही मैं उसके घर के सामने से जा रहा था, वह अपने घर के बाहर कुछ खरीद रही थी। उसका मुंह दूसरी तरफ था। उसने मुझे नहीं देखा लेकिन मुझे उसे देखकर बहुत अच्छा लगा। जब मैं काम समाप्त करके वापस आया तो वह वहां नहीं थी। वह घर के अंदर जा चुकी थी। घर आकर मैं पढ़ने बैठ गया। उसके बाद मैंने एक-दो चक्कर बाहर के और लगाए लेकिन वह मुझे दिखाई नहीं दी।

            मैं दोपहर के थोड़ा बाद यूं ही घर के बाहर खड़ा था कि तभी मेरी निगाह अपने बाईं ओर गई, सामने से मुझे वह दुकान पर से आती हुई दिखाई दी। पहली बार में मुझे लगा कि शायद कोई और है लेकिन जब मैंने गौर से देखा तो वह यही थी। मैं बिल्कुल ठीक समय आकर खड़ा हुआ था, अगर मैं थोड़ा भी लेट हो जाता तो वह मुझे नहीं मिलती। जब वह मेरे सामने आई तो मैंने उससे कहा कि “तू कल बहुत अच्छी लग रही थी”, क्योंकि कल मैं उससे यह नहीं कह पाया था और मैंने उससे बोला कि तू मुझसे बोल क्यों नहीं रही है लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया और निगाह नीचे करके आगे चली गई। मुझे उसके चेहरे पर कुछ परेशानी नजर आई… जैसे वह किसी बात से परेशान हो। जब वह थोड़ा आगे निकल गई तो मैं उसके पीछे गया। वह देख रही थी कि मैं पीछे हूँ या नहीं, या कहीं उसके पीछे तो नहीं आ रहा। मैंने उसे हल्की सी आवाज भी दी, उसे सुनाई तो पहुंच गई होगी लेकिन वह रुकी नहीं क्योंकि उस समय तक वह अपने घर के बाहर पहुंच चुकी थी और उसके बाद सीधे घर के अंदर चली गई। उसके बाद मैंने थोड़ा आगे जाकर उसे और देखने की कोशिश की लेकिन फिर वह नहीं दिखी। मैं घर वापस आ गया।

           उसके बाद से वह मुझे अभी तक नहीं दिखी है। मैं शाम के समय बाहर गया तो उसका दरवाजा तो खुला हुआ था लेकिन वह मुझे उसमें नजर नहीं आई। मैं वहां काफी देर बैठा रहा। उसके घर के और सदस्य तो नजर आ रहे थे लेकिन वह नजर नहीं आई। जब रात होने को आई तो मैं वहां से उठकर घर आ गया। उसे देखने और बात करने का बहुत मन कर रहा था लेकिन वह मुझे उसके बाद से दिखाई नहीं दी। मैंने रात का खाना खाया और बाहर टहलने निकल गया। रोज की तरह आज भी वह छत पर नहीं आई लेकिन घर में से मुझे उसकी आवाज जरूर सुनाई दी। मैं थोड़ा आगे जाकर उसे देखना चाहता था लेकिन मेरे साथ कुछ और लोग भी थे इसलिए मैं नहीं जा सका। मैं बहुत उदास हो जाता हूँ, जब शाम को उसके दिखने का इंतजार करूं और वह दिखाई ना दे। टहलने के बाद हम वहां बातें करने लगे और जब घर आने का समय हुआ तो हम अपने-अपने घर आ गए। घर आकर मैंने अपने बचे हुए काम किये और उसके बाद डायरी लिखने बैठ गया। अभी रात के 11:00 बजने वाले हैं तो अब मैं चलता हूँ सोने, आपसे मिलूंगा कल फिर से एक और नई पोस्ट के साथ… शुभ रात्रि।

गुरुवार, 10 अक्टूबर 2024

आज वो पीले सूट में बहुत अच्छी लग रही थी... | 9 October 2024 Diary

 स्वागत है आप लोगों का मेरी डेली डायरी में, आज है 9 अक्टूबर 2024। पता नहीं क्यों, कुछ दिन से मेरी दिनचर्या टूटती जा रही है… ना तो मैं उतना पढ़ पाता हूँ जितना सोचता हूँ और ना ही कोई और काम ढंग से हो पता है। एक अजीब सा मन हो रहा है। आज सुबह भी मैं थोड़ी देरी से सो कर उठा। उठने के थोड़ी देर बाद एक गिलास पानी पिया और उसके बाद बाहर टहलने निकल गया। वहां से वापस आने के बाद नित्य-कर्म से निपट कर नहाया और नाश्ता किया। उसके बाद फिर बाहर गया। जैसे ही मैं उसके घर के सामने पहुंचा वह अपने घर के बाहर बाल्टी में पानी भर रही थी। आज उसने पीले रंग का सूट पहन रखा था जिसमें वह मुझे आज बहुत ज्यादा प्यारी लग रही थी। यह सूट शायद नया था क्योंकि इससे पहले मैंने उसे यह सूट पहने हुए नहीं देखा था। आज मुझे वह बहुत अच्छी लग रही थी और यह बात मैं उससे कहना चाहता था लेकिन कह नहीं पाया। मैंने सोचा बाद में मौका मिलेगा लेकिन आज पूरे दिन मुझे कोई मौका नहीं मिला।

         थोड़ी देर बाद मैं घर वापस आ गया। मैंने कुछ देर पढ़ाई की और उसके बाद अपने दूसरे काम किये। दोपहर का भोजन करने के बाद मैं रोज की तरह फिर से बाहर गया लेकिन वह मुझे दिखाई नहीं दी। आज शाम तक वह मुझे नहीं दिखी थी। पता नहीं घर के अंदर क्या कर रही थी। मैं वापस घर आ गया। घर आने के बाद मैं आराम करने लेट गया और फिर थोड़ी देर बाद मुझे झपकी लग गई लेकिन मैं जल्दी ही उठ गया और अपना काम पूरा किया। उसके बाद कुछ देर पढ़ा। शाम की चाय पीने के बाद मैं फिर से बाहर गया। इस बार वह मुझे हल्की सी दिखाई दी लेकिन उसके आसपास उसके घर के लोग थे इसलिए मैं उधर नहीं देख सकता था। मैं आगे निकल गया और थोड़ी देर बाद वापस घर आ गया। घर आने के बाद मैं फिर से कुछ देर पढ़ा।

          शाम के समय रोज की तरह मैं बाहर गया। उसके घर के सामने से गुजरते हुए वह मुझे अपने घर के अंदर बैठी हुई दिखाई दी। फिर से उसके आसपास उसके घर के सदस्य थे इसलिए ना तो मैं उसे इशारों में कुछ कह सका और ना ही उसे ठीक से देख सका, मैं आगे निकल गया। मैं अपने नियत स्थान पर पहुंच गया जहां पहले से मेरे और भी साथी बैठे हुए थे। उसका दरवाजा खुला हुआ था लेकिन थोड़ी देर बाद उसने दरवाजा बंद कर लिया। मुझे वह दिख गई थी, वह खुद से आई थी दरवाजा बंद करने। मुझे लगा शायद मेरे आने की वजह से उसने दरवाजा बंद किया है क्योंकि पहले से खुला हुआ था। उस समय मुझे बहुत ज्यादा बुरा लगा, एकदम से उदासी मेरे अंदर भर गई। पता नहीं वह मुझे कभी समझ पाएगी या नहीं। वह ऐसा क्यों कर रही है। मैंने कुछ देर वहां बातें कीं लेकिन मेरा मन थोड़ा उदास था। जब रात होने वाली थी तो मैं वापस घर आ गया। घर आने के बाद उसके बारे में सोचता रहा कि वह ऐसा क्यों कर रही है। कभी-कभी मुझे लगता है कि वह मेरे बारे में उतनी गंभीर नहीं है जितना कि मैं उसके बारे में हूँ क्योंकि अगर वह मेरी तरह गंभीर होती तो मिलने या बात करने का कोई ना कोई रास्ता जरूर निकालती और मुझसे बात करना बंद नहीं करती।

           रात का भोजन करने के बाद मैं बाहर टहलने निकल गया। वहां मेरे अन्य साथी पहले से मौजूद थे। मैं थोड़ी देर टहलता रहा और टहलने के बाद उनके पास जाकर बैठ गया। हम लोग बातें करते रहे। वह आज भी छत पर नहीं आई और ना ही आज मुझे उसकी कोई आवाज उसके घर से आई। मैं बार-बार उसके दरवाजे और छत की ओर देख रहा था, लेकिन वह नहीं आई। हम लोग वहां बातें करते रहे। जब रात ज्यादा होने लगी तो हम अपने-अपने घर आ गए। घर आकर मैंने अपने दिन के बचे कुछ काम निपटाए और उसके बाद डायरी लिखने बैठ गया। अभी रात के 11:30 बजने वाले हैं तो अब मैं चलता हूँ सोने, आपसे मिलूंगा कल फिर से एक और नई पोस्ट के साथ… शुभ रात्रि।

बुधवार, 9 अक्टूबर 2024

सुबह से शाम...और शाम से रात... सारा दिन ऐसे ही गुजर जाता है उसकी आस में | 8 October 2024 Diary

 स्वागत है आप लोगों का मेरी डेली डायरी में, आज है 8 अक्टूबर 2024। आज सुबह भी मैं थोड़ी देरी से सो कर उठा। उठने के कुछ देर बाद मैंने एक गिलास पानी पिया और बाहर निकल गया। जब मैं उसके घर के सामने था तो वह अपने घर से निकलकर आ रही थी। मैंने उसे आते हुए थोड़ी देर देखा और आगे बढ़ गया। वह अपने घर से निकल कर पड़ोस में अपने चाचा जी के घर जा रही थी। मैं तुरंत वहां से थोड़ा आगे जाकर वापस हो गया और जब तक मैं आया वह अपने चाचा जी के घर के अंदर जा चुकी थी, लेकिन मुझे दरवाजे में से दिख रही थी। मैं वहां रुक नहीं सकता था तो मैं वापस घर आ गया। घर आकर नित्य-कर्म से निपट कर मैं नहाया और नाश्ता किया, उसके बाद फिर से बाहर चला गया और जब इस बार मैं उसके घर के सामने पहुंचा तो वह मुझे अपने घर में ही दरवाजे के अंदर खड़ी दिखाई दी। इस बार वह नहा चुकी थी क्योंकि वह दूसरे कपड़े पहने हुए थी। उसकी नजर मेरी ओर नहीं थी। मैंने उसे देखा, आज मुझे वह बहुत अच्छी लग रही थी। थोड़ी देर उसे निहारने के बाद मैं आगे बढ़ गया। थोड़ी देर बाद जब लौटा तो वह वहां नहीं थी, घर के अंदर जा चुकी थी।

             घर आने के बाद मैंने थोड़ी देर पढ़ाई की और उसके बाद घर के दूसरे काम पूरे किए। दोपहर का भोजन करने के बाद मैं फिर से बाहर गया लेकिन वह मुझे दिखाई नहीं दी थी। इस समय उसके दिखाई देने की कोई उम्मीद भी नहीं थी क्योंकि दोपहर का समय था और वह घर के अंदर होगी। बाहर धूप तेज थी, मैं भी थोड़ी देर बाद वापस आ गया। आज मैं दोपहर में एक बार फिर से सो गया और दोपहर में मुझे जो काम करना था, वह मैं नहीं कर पाया। मुझे उसमें फिर से देरी हुई और दोपहर के बाद मैंने वह काम किया। शाम की चाय पीने के बाद मैं बाहर गया लेकिन वह मुझे अभी भी नहीं दिखी थी, तो मैं फिर से घर वापस आ गया। घर आकर मैं पढ़ने बैठ गया। लगभग 1 घंटा पढ़ा, उसके बाद मेरा पढ़ने का मन नहीं किया। मैं उठा और धीरे-धीरे शाम हो रही थी तो मैं बाहर चला गया। जैसे ही मैं उसके घर के सामने पहुंचा वह मुझे घर के बाहर कुछ काम करते हुए दिखाई दी। मुझसे पहले ही उसने मुझे देख लिया था और जैसे ही मैंने उसे देखा उस समय वह मेरी ओर देखकर अपनी नजर दूसरी ओर घुमा रही थी क्योंकि सामने ही उसके घर का एक सदस्य था। मैं उस समय थोड़ा उदास सा था। शायद उसे उदासी मेरे चेहरे पर दिखी हो क्योंकि पिछले दो दिनों से वह मुझे ठीक से नहीं मिल पाई है।

            बाहर जाने के बाद मैं अपने नियत स्थान पर बैठ गया। उसका दरवाजा थोड़ा खुला हुआ था लेकिन वह मुझे दरवाजे में से नहीं दिखी। मैं वहीं बैठा मोबाइल में कुछ काम कर रहा था तभी कुछ और लोग वहां आ गए। हम लोगों ने वहां बैठकर बातें कीं और जब रात हो गई तो अपने-अपने घर वापस आ गए। रात का भोजन लेने के बाद एक बार फिर से मैं बाहर टहलने निकल गया। आज शाम के समय से ही मुझे अपने अंदर उदासी साफ महसूस हो रही थी। यह एक कसक थी… उसे ना देख पाने की… उससे बात ना कर पाने की… और उससे ना मिल पाने की… जब सुबह होती है तो उसे देखने की आस रहती है। धीरे-धीरे दिन निकलता जाता है और शाम हो जाती है। शाम को उसे देखने का बहुत मन होता है लेकिन जब वह शाम को भी नहीं दिखाई देती या उससे कोई बात नहीं हो पाती तो मन में उदासी बढ़ जाती है क्योंकि शाम के बाद रात हो जाती है और रात को तो दिखने का सवाल ही पैदा नहीं होता… और छत पर वह कुछ दिनों से आ नहीं रही है। आज मैं और मेरे साथी गांव से बाहर टहलने निकल गए थे। वहां से लौट कर आने के बाद हम कुछ देर वहां बैठे और उसके बाद घर आ गए। घर आने के बाद मैंने अपने बचे हुए काम किये और उसके बाद डायरी लिखने बैठ गया। अभी रात के 11:15 बजने वाले हैं। अब मैं चलता हूँ सोने, आपसे मिलूंगा कल फिर से एक और नई पोस्ट के साथ… शुभ रात्रि।


मंगलवार, 8 अक्टूबर 2024

आज हमारे खेतों पर तेंदुआ देखा गया | 7 October 2024 Diary

 स्वागत है आप सभी लोगों का मेरी डेली डायरी में, आज है 7 अक्टूबर 2024। आज मैं थोड़ा जल्दी उठ गया था क्योंकि मैं कोशिश कर रहा हूँ कि रात को जल्दी सोकर सुबह जल्दी उठ जाऊं, लेकिन अभी ऐसा होता नहीं दिख रहा है क्योंकि रात को सोने में मैं रोज लेट हो जाता हूँ… लेकिन मैं कोशिश करता रहूंगा। आज सुबह उठने के बाद मैं रोज की तरह बाहर की ओर गया और जैसे ही उसके घर के सामने पहुंचा तो वह मुझे अपने घर में काम करती हुई दिख गई। मैंने उसे देख लिया था लेकिन उसने मुझे नहीं देखा। उसे देखकर थोड़ी देर बाद मैं वापस घर आ गया। घर आने के बाद मैं नहाया और नाश्ता किया, उसके बाद फिर से बाहर चला गया। इस बार भी वह मुझे दिख गई, वह घर में कुछ काम कर रही थी लेकिन इस बार वह नहा चुकी थी। आज वह जल्दी नहा ली, पहले तो देरी से नहाती थी। उसने मुझे अभी भी नहीं देखा था और मैं उसे देखकर वापस घर आ गया।

         आज बहुत दिनों के बाद मैं अपने खेत पर गया। हमारे खेत के पास ही दूसरे खेत में आज सुबह तेंदुआ देखा गया था। काफी दिनों से गांव के चारों ओर खेतों में तेंदुआ देखा जा रहा था और आखिरकार आज वह हमारे खेत के पास ही नजर आया। मैं उसे ही देखने गया था लेकिन मुझे पहुंचने में थोड़ी देर हो गई। बाकी लोग जो वहां थे उनका शोर सुनकर वह खेतों में आगे की ओर चला गया था और उसका पीछा किसी ने नहीं किया। लगभग रोज ही तेंदुए के देखे जाने की खबर किसी न किसी गांव से आती रहती थी। कभी किसी गांव में दिखता था तो कभी किसी गांव में, और हमारे गांव के आसपास खेतों में वह किसी न किसी को नजर आ ही जाता था। हालांकि अभी उसने किसी व्यक्ति को नुकसान नहीं पहुंचाया है लेकिन वह है तो जंगली जानवर ही। हमारे यहां किसी भी जंगली जानवर का कोई खतरा नहीं रहता था लेकिन पिछले कुछ समय से तेंदुए के देखे जाने की घटनाएं सामने आ रही हैं। जब तेंदुआ अंदर खेतों की ओर चला गया तो सभी लोग वहां से अपने-अपने घर आ गए।

           घर आने के बाद मैंने थोड़ी देर पढ़ाई की और उसके बाद दोपहर का भोजन किया क्योंकि तेंदुए को देखने के चक्कर में पहले ही काफी समय हो चुका था। दोपहर का खाना खाने के बाद मैं टहलने बाहर की ओर गया। उसके घर के सामने जाकर मैंने उसे देखने की कोशिश की लेकिन वह दिखाई नहीं दी। मैं वहां से वापस घर आ गया और पढ़ने बैठ गया। कुछ देर पढ़ने के बाद मैंने अपने अन्य काम किये। आज मैं दोपहर में नहीं सोया और अपने काम निपटाता रहा। ऐसे ही शाम की चाय का समय हो गया। मैंने चाय पी और बाहर निकल आया। वह मुझे अभी भी दिखाई नहीं दी थी। आज वह मुझे बहुत ही कम दिखाई दी। पता नहीं घर के अंदर क्या करती रहती है… आज अपने घर में भी ज्यादा चलते-फिरते दिखाई नहीं दी।

          मैं शाम के समय जाकर अपने नियत स्थान पर बैठ गया। उसका दरवाजा कुछ देर के लिए बंद था तो कुछ देर के लिए खुल गया था लेकिन वह मुझे फिर भी दिखाई नहीं दी। मैं बैठकर मोबाइल में अपना कुछ काम करने लगा। जब रात होने लगी तो मैं वहां से उठकर घर आ गया। घर आने के बाद मेरा जो काम अधूरा रह गया था वह मैंने पूरा किया। रात को खाना खाने के बाद मैं फिर से टहलने बाहर निकल गया। उसका दरवाजा अभी भी बंद था और उसके घर में काम करने की भी कोई आवाज नहीं आ रही थी। मैं वहां टहलता रहा। मैंने उसकी छत की ओर देखा, वहां कोई भी नहीं था। पता नहीं मुझे रोज-रोज क्यों लगता है कि वह आज आ सकती है… लेकिन वह नहीं आती। आज भी नहीं आई। मैं थोड़ी देर टहलने के बाद वहीं बैठ गया, तभी मेरे अन्य साथी आ गए। हमने वहां कुछ देर बातें कीं। उसके बाद वो लोग टहलने गांव से बाहर चले गए लेकिन मैं नहीं गया। मैं वहीं बैठा रहा और मोबाइल चलाते हुए उसके दरवाजे और छत की ओर देखता रहा। वह आज भी नहीं आई। हालांकि एक बार मुझे उसकी आवाज जरूर सुनाई दी लेकिन वह दिखी नहीं। थोड़ी देर बाद मैं घर आ गया। घर आकर मैंने अपने बाकी बचे काम पूरे किए और उसके बाद डायरी लिखने बैठ गया। अभी रात के 11:30 बजने वाले हैं तो अब मैं चलता हूँ सोने, आपसे मिलूंगा कल फिर से एक और नई पोस्ट के साथ… शुभ रात्रि।

सोमवार, 7 अक्टूबर 2024

वो दरवाजे के सामने आई और मुझे देखा कि मैं कहाँ खड़ा हूँ... | 6 October 2024 Diary

 स्वागत है आप सभी लोगों का मेरी डेली डायरी में, आज है 6 अक्टूबर 2024। आज सुबह भी मैं कुछ देरी से उठा। उठने के थोड़ी देर बाद मैंने एक गिलास पानी पिया और उसके बाद बाहर की ओर निकल गया। मैं टहल के वापस घर आ गया लेकिन वह मुझे दिखाई नहीं दी। घर आकर मैं यूं ही बैठा था। थोड़ी देर बाद मैं अपने घर के बाहर खड़ा हो गया और जैसे ही मैंने घर के बाहर कदम रखा, वह दुकान पर जा रही थी। उसे सुबह-सुबह देखकर मैं बहुत प्रसन्न हुआ। अब मैं सोच रहा था कि मैं यही खड़ा रहूँ और उसकी प्रतीक्षा करूं या थोड़ा आगे जाकर खड़ा हो जाऊं। थोड़ा सोचने के बाद मैं आगे जाकर खड़ा हो गया क्योंकि आसपास के घरों के कुछ लोग बाहर थे तो मैं वहां से अलग हट गया। मैं ऐसी जगह खड़ा हो गया जहां से वह दुकान से वापस आते हुए मुझे मिलती। मैं वहां खड़ा था और वह दुकान से वापस आई लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। उसके पीछे-पीछे उसका भाई आ रहा था तो मैं उससे कोई बात नहीं कर सका, लेकिन आज मैंने उसके चेहरे पर देखा तो वह मुझे परेशान नहीं लग रही थी। उसके चेहरे पर मुझे ऐसी चिढ़ाने वाली बहुत हल्की सी हंसी नजर आई जैसे वह कह रही हो “लो अब कैसे करोगे बात, मेरा भाई आ रहा है पीछे”। मैं वहां से अलग हट गया था। वह अपने घर चली गई और फिर मैं भी अपने घर आ गया।

           सभी कामों से निपट कर मैं नहाया और नाश्ता किया, उसके बाद मैं बाहर की ओर चला गया। उसके घर के सामने जाकर मैंने उसे देखने की कोशिश की लेकिन उसके घर की ओर देखकर ऐसा लग रहा था जैसे वहां कोई है ही नहीं। वह कहीं भी मुझे नजर नहीं आई। मैं थोड़ी देर बाद घर वापस आ गया और पढ़ने बैठ गया। पढ़ते-पढ़ते मुझे सुस्ती आने लगी तो मैं उठकर फिर बाहर चला गया। वह मुझे अभी भी नजर नहीं आई थी। मैं घर वापस आ गया और फिर से पढ़ने बैठ गया। कुछ देर पढ़ने के बाद मैंने दूसरे काम किये। उसके बाद फिर कुछ देर पढ़ा। आज दोपहर में मैं फिर से सो गया। इस वजह से मेरा एक जरूरी काम नहीं हो पाया और उसकी मुझे बहुत ज्यादा चिंता हो रही थी। मैंने दोपहर के बाद वह काम किया जबकि मैं रोज दोपहर में ही करता हूँ। अगर मैं वह काम दोपहर में ना निपटाऊँ तो उसके बाद दूसरे कामों में मुझे देरी हो जाती है।

         शाम की चाय का समय हो चुका था। मैंने चाय पी और बाहर की ओर निकल गया। बाहर जाकर मैंने उसके घर की ओर देखा तो तार पर कोई भी कपड़ा नहीं था। वह सारे कपड़े उतार कर अंदर रख चुकी थी। वह मुझे अभी भी दिखाई नहीं दी थी। उस समय मेरे मन में एक अजीब सी उदासी उतर रही थी। एक तो हम वैसे ही कम मिल पाते हैं और बहुत कम हमारी बात हो पाती है… ऊपर से इस समय यह परेशानी चल रही है। मैं इस सबसे बहुत परेशान हो चुका हूँ और कभी-कभी बहुत ज्यादा उदास हो जाता हूँ। इतना ज्यादा कि कुछ भी करने का मन नहीं करता चाहे कितना भी जरूरी काम ही क्यों ना हो। मैं वापस घर आ गया। थोड़ी देर बाद मैं किसी काम से फिर बाहर गया। मुझे ऐसा लगा जैसे वह अपने पड़ोस के घर में हो। मुझे उसकी आवाज सुनाई दी थी। मैं अपना काम कर रहा था। थोड़ी देर बाद मुझे उसकी आवाज थोड़ी तेज सुनाई दी। मैं समझ गया कि वह यहीं है। मैं उस घर की ओर ही देख रहा था। थोड़ी देर बाद वह घर के अंदर ही दरवाजे के सामने आई क्योंकि मैं जहां खड़ा था मेरे ठीक सामने उस घर का दरवाजा था। उसने मुझे देखा और दरवाजे के एक ओर से जाकर फिर दूसरी ओर से वापस चली गई। उसे पता था कि मैं यहां हूँ इसलिए वह यह देखने आई थी कि मैं कहां खड़ा हूँ और क्या कर रहा हूँ। जब मैंने उसे देखा तो मैंने सोच लिया था कि मैं काम समाप्त करके उसके पास जाऊंगा लेकिन मुझे काम में कुछ देरी हो गई और वह वहां से अपने घर चली गई।

             शाम के समय मैं बाहर गया तो उसका दरवाजा बंद था। मैं वहां बैठा रहा लेकिन उसका दरवाजा नहीं खुला। थोड़ी देर बाद मेरे अन्य साथी भी आ गए। हम वहां बातें करते रहे। रात होने पर मैं उठकर घर आ गया। मैंने घर आकर घर का कुछ काम किया और थोड़ी देर के लिए फिर से बाहर गया। उसके घर के सामने जाकर मैंने देखा कि वह रसोई में काम कर रही है। बाहर से उसकी रसोई साफ दिखती है और क्योंकि रसोई में लाइट जलती है इसलिए वहां जो भी होता है खिड़की में से दिख जाता है। उसे देखकर मुझे बहुत अच्छा लगता है चाहे वह इसी तरह क्यों ना दिखाई दे। वह रसोई में होती है तो उसकी पहचान तो पड़ जाती है कि यह वही है लेकिन उतनी अच्छी तरह से दिखाई नहीं देती। मैं थोड़ी देर बाद घर वापस आ गया।

           रात का खाना खाने के बाद मैं फिर से टहलने के लिए बाहर चला गया। शाम से मेरा मन बिल्कुल भी ठीक नहीं था। मुझे बार-बार उसकी याद आ रही थी। कैसे भी करके अब मुझे उससे बात करनी है और मिलना है। अब मुझे भी लग रहा है कि उसे भी कोई परेशानी नहीं है लेकिन मुझे उसके ऊपर थोड़ा सा गुस्सा भी आ रहा है। मैं टहल रहा था लेकिन मन में उसी के विचार चल रहे थे। उसकी छत पर कोई नहीं था और उसका दरवाजा भी बंद था। थोड़ी देर टहलने के बाद मैं बैठ गया और मोबाइल में कुछ काम करने लगा और बार-बार उसकी छत की ओर देखता कि काश वह आ जाए या दरवाजा खोलकर ही मुझे देख ले, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। मैं बैठा रहा और उसकी प्रतीक्षा करता रहा। जब रात काफी होने लगी तो मैं उठकर अपने घर आ गया। आज घर आने के बाद भी मेरा कोई भी काम करने का मन नहीं था तो आज मैंने कुछ भी नहीं किया। अभी रात के 11:30 बज चुके हैं तो अब मैं चलता हूँ सोने, आपसे मिलूंगा कल फिर से एक और नई पोस्ट के साथ… शुभ रात्रि।

मेरा आज का दिन कल से भी ज्यादा उदासी भरा रहा...| 26 October 2024 Diary

स्वागत है आप लोगों का मेरी दैनिक डायरी में, आज है 26 अक्टूबर 2024। मेरा आज का दिन बहुत ही खराब रहा जैसे कि मैंने आपको कल बताया था कि कल उसने...