सोमवार, 16 सितंबर 2024

मुझे उस पर कभी-कभी बहुत गुस्सा आता है | Daily Diary | 15 September 2024 Diary

 स्वागत है आप सभी लोगों का मेरी आज की डेली डायरी पोस्ट में, आज है 15 सितंबर 2024। आज मैं जब सुबह सो कर उठा तो मुझे महसूस हुआ कि मेरा मन कुछ ठीक नहीं है। पता नहीं क्यों… कुछ अजीब सा लग रहा था, पता नहीं किसी चीज का डर सा महसूस हो रहा था और यह मेरे साथ अक्सर हो जाता है। आज मैं थोड़ा लेट सो कर उठा था क्योंकि रोज सुबह जो एक निश्चित काम मुझे करना होता है आज वह नहीं करना था।  वह काम करने के लिए मुझे उसके घर की ओर जाना होता है और इस बहाने उसे देखने का मौका भी मिल जाता है लेकिन आज वह काम नहीं होना था तो मैं देर तक सोता रहा।

         सुबह उठने के बाद मैंने एक कप चाय पी और उसके बाद उसके घर की ओर चल दिया लेकिन वह मुझे दिखाई नहीं दी। वापस घर आकर, नहा-धोकर मैंने नाश्ता किया और किसी काम से बाहर गया तो रास्ते में उसके घर के सामने पहुंचते ही मैंने उसे देखने की कोशिश की लेकिन वह फिर भी दिखाई नहीं दी, हालांकि उसकी आवाज मुझे सुनाई दे रही थी। वापस घर आकर मैं पढ़ने बैठ गया। एक घंटा पढ़ने के बाद मैं एक बार फिर उसके घर की ओर गया और इस बार भी वह मुझे दिखाई नहीं दी। मैं वापस आकर एक बार फिर से पढ़ने बैठ गया।

          दोपहर होने वाली थी, मैं पढ़ रहा था और तभी मम्मी ने खाने के लिए आवाज लगा दी। खाना खाने के बाद मैं फिर से बाहर निकल गया क्योंकि खाना खाने के बाद मेरी आदत है कुछ देर टहलने की… तो मैं बाहर निकल गया। इस बहाने उसके घर के सामने से गुजरते हुए उसे देखने का बहुत मन कर रहा था। सुबह से वह दिखाई नहीं दी थी लेकिन दुर्भाग्यवश इस बार भी मैं उसे नहीं देख पाया, हालांकि इसकी उम्मीद भी कम थी क्योंकि दोपहर का समय था, वह भी खाना खाने के बाद घर के अंदर आराम कर रही होगी। मैं वापस लौट आया और पढ़ने बैठ गया। मैंने कुछ देर पढ़ाई की और फिर मुझे सुस्ती आने लगी। पता नहीं क्यों आजकल दिन में कुछ ज्यादा ही सुस्ती आ रही है। मैंने सोचा थोड़ी देर सो लेता हूँ क्योंकि रात मेरी नींद पूरी नहीं हुई थी… तो मैं आंखें बंद करके लेट गया और मुझे नींद आ गई। जब मैं उठा तो शाम के 3:30 बज रहे थे।

           आज मैंने जितना सोचा था उतना नहीं पढ़ पाया हालांकि आज मैंने अपना रोज का काम अच्छी तरह से निपटा दिया था। शाम की चाय पीने के बाद मैं एक बार फिर से बाहर की ओर निकल गया। इस बार भी मैंने उसे देखने की बहुत कोशिश की लेकिन वह मुझे दिखाई नहीं दी फिर मैं वापस आकर ऐसी जगह खड़ा हो गया जहां से उसके घर के बाहर का हिस्सा दिखाई देता है। मैं वहां खड़ा था, सौभाग्य से कुछ देर बाद वह अपने घर से बाहर आई.. उसे कुछ काम करना था और संयोग से आज मैंने और उसने एक ही रंग के कपड़े पहने हुए थे। मैंने उसे देखा तो मन को बहुत शांति मिली लेकिन उसने मेरी ओर नहीं देखा, मैं समझ गया कि उसके सामने कोई बैठा है। वह अपना काम निपटाकर घर के अंदर चली गई। मैं वहीं खड़ा कुछ देर और इंतजार करता रहा लेकिन जब मुझे एहसास हो गया कि अब वह बाहर नहीं आ पाएगी तो मैं भी घर वापस आ गया। वापस आने के बाद मैंने कुछ देर और पढ़ाई की और जब शाम का समय हो गया तो एक बार फिर मैं बाहर चला गया।

             गांव में बने सार्वजनिक स्थान पर मैं जैसे ही पहुंचा तो वहां मेरे और दोस्त भी बैठे हुए थे। हम लोग आपस में बातें कर रहे थे कि तभी अचानक मैंने देखा कि वो अपने पड़ोस के घर से निकलकर अपने घर की ओर जा रही थी। उसे देखते ही मैं खुश हो गया और मैं तिरछी निगाहों से उसकी ओर देख रहा था क्योंकि मेरे साथ और भी लोग थे। मैंने देखा कि उसने भी थोड़ी सी गर्दन टेढ़ी करके बहाने से साइड में देखते हुए मुझे देखने की कोशिश की लेकिन वह पूरी तरह से मेरी ओर नहीं देख सकती थी। वह अपने घर चली गई और हम सभी लोग वहां बातें करते रहे। थोड़ी देर के बाद वह अपनी छत पर आई और जिधर हम लोग बैठे हुए थे उधर की ओर उसने आकर देखा कि मैं वहां हूँ या नहीं। वह अपने भतीजे को गोद में खिला रही थी हालांकि वह ज्यादा देर छत पर नहीं रुकी और नीचे चली गई क्योंकि वह जितनी ज्यादा देर रूकती उतना ही किसी को शक हो सकता था कि वह छत पर क्यों टहल रही है। कुछ समय बाद हम सभी लोग घर वापस आ गए।

          रात का भोजन लेने के बाद रोज ही की तरह मैं टहलने के लिए बाहर निकल गया। आज दिन में मौसम भी बहुत अच्छा था, काफी तेज धूप निकली थी। आज मुझे एक बार फिर से पूरी उम्मीद थी कि वह छत पर आएगी लेकिन आज भी वह छत पर नहीं आई। मुझे बहुत बुरा लगा, थोड़ा गुस्सा भी आ रहा था उस पर कि उसे मेरी चिंता है या नहीं। एक तो वह आज भी दिन में कम दिखाई दी थी और कई दिन से मैं उसे सही से नहीं देख पा रहा था। वह आज भी छत पर नहीं आई लेकिन मुझे उसकी मजबूरी समझ में आ रही थी क्योंकि जब उसके छत पर आने का समय होता है उस समय उसकी भाभी छत पर आई थीं इसलिए वह नहीं आ सकी क्योंकि अगर आती भी तो वह मेरी ओर नहीं देख पाती… कोई फायदा नहीं होता। इसलिए शायद नहीं आई और जब तक उसकी भाभी नीचे गयीं तब तक काफी देर हो चुकी थी।

             मैंने फिर भी काफी देर उसकी प्रतीक्षा की… हो सकता है वह छत पर किसी न किसी बहाने आ जाए लेकिन वह नहीं आ सकी। कुछ देर प्रतीक्षा करने के बाद मैं भी घर वापस आ गया। घर आने के बाद मुझे लगभग 1 घंटा और पढ़ना था लेकिन मुझे काम करने में कुछ देरी हो गई और मैं नहीं पढ़ पाया। इसकी भरपाई मैं कल करने की कोशिश करूंगा। अभी रात के 11:00 बज रहे हैं तो अब मैं चलता हूँ सोने, आपसे मुलाकात होगी कल फिर से एक और नई पोस्ट के साथ… शुभ रात्रि।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

मेरा आज का दिन कल से भी ज्यादा उदासी भरा रहा...| 26 October 2024 Diary

स्वागत है आप लोगों का मेरी दैनिक डायरी में, आज है 26 अक्टूबर 2024। मेरा आज का दिन बहुत ही खराब रहा जैसे कि मैंने आपको कल बताया था कि कल उसने...