शुक्रवार, 1 अगस्त 2025

मेरा आज का दिन कल से भी ज्यादा उदासी भरा रहा...| 26 October 2024 Diary

स्वागत है आप लोगों का मेरी दैनिक डायरी में, आज है 26 अक्टूबर 2024। मेरा आज का दिन बहुत ही खराब रहा जैसे कि मैंने आपको कल बताया था कि कल उसने मुझे जिस तरह से नजरअंदाज किया तो मुझे लगा कि अब सब कुछ खत्म हो चुका है और तभी से मेरा मन बहुत ज्यादा उदास है। आज का दिन कल से भी ज्यादा खराब रहा। आज मैं पूरे दिन बाहर नहीं गया और मैंने उसे आज पूरे दिन नहीं देखा। सुबह उठने के बाद मैं घर पर ही रहा, बाहर नहीं गया। नहा धोकर नाश्ता करने के बाद मैं अपने कमरे में चला गया। आज मेरा अधिकतर समय मोबाइल चलाते हुए बीता।

        सुबह उठने के बाद मैं घर के बाहर खड़ा था। मुझे खड़े हुए थोड़ी देर हुई थी तभी वह मुझे अपने घर से आती हुई दिखी। वह दुकान पर जा रही थी। मैंने उसे देखते ही अपनी निगाह तुरंत हटा ली। आज मैंने उसे ना तो दुकान पर जाते हुए देखा और ना ही वहां से जब वापस आ रही थी तब देखा। वह वापस आने के बाद अपने घर चली गई। उसे देखने के लिए मुझे थोड़ा आगे जाना पड़ता क्योंकि रास्ते में एक मोड़ था, तो मैं वहां भी नहीं गया। मैंने आज उसे देखने की बिल्कुल भी कोशिश नहीं की। बस इतनी सी देर के लिए मैंने आज दिन भर में उसे देखा, उसके बाद से मैंने उसे नहीं देखा। मुझे नहीं पता आज उसने कौन से कपड़े पहने होंगे। आज दिनभर मैं अपने कमरे में रहा और मोबाइल चलाता रहा। मैंने थोड़ा काम किया और बहुत थोड़ी पढ़ाई की क्योंकि ज्यादा कुछ करने का मन नहीं कर रहा था।

          जब मैं पढ़ रहा था तो कई बार उसका नाम मेरे सामने आया और यहीं सारी गड़बड़ हो जाती है। जब भी उसका नाम सामने आता है तो उसकी याद आ जाती है। शाम के समय टीवी में समाचार देखते हुए भी उसका नाम सामने आया। मैंने खुद को संभाला और अपना ध्यान हटाने की कोशिश की। शाम की चाय पीने के बाद मैं फिर से अपने कमरे में चला गया और मोबाइल चलाने लगा। आज मैं शाम के समय भी बाहर नहीं गया। मैं खाना खाने के बाद बाहर टहलने जाता हूँ लेकिन दोपहर का खाना खाने के बाद मैं अपने कमरे में चला गया और वहीं थोड़ा सा टहल लिया। आज मेरा बोलने का भी मन नहीं कर रहा था। आज मैं पूरे दिन ज्यादा नहीं बोला। घर वालों की बातों का जवाब भी मैंने अधिकतर इशारों में ही दिया।

          रात का भोजन करने के बाद मैं बाहर गया। उसका दरवाजा बंद था। मुझे कोई उम्मीद भी नहीं थी उसके आने की, ना ही छत पर और ना ही दरवाजे पर। मैं थोड़ी देर टहलने के बाद वहीं बैठ गया। आज मैंने उसकी आवाज भी नहीं सुनी। मैं वहीं अकेला बैठा रहा। उसकी याद मेरा पीछा नहीं छोड़ रही थी। पूरे दिन लगातार उसकी याद आती रही। मेरे दिमाग के अंदर एक द्वंद्व चल रहा था, उसकी याद लगातार आ रही थी और मैं उसे दूर धकेलने की कोशिश कर रहा था। वहां से घर आने के बाद भी मैंने कोई काम नहीं किया। मन तो नहीं कर रहा था लेकिन मैंने डायरी लिखने के लिए मन पक्का किया, क्योंकि यहां अपनी भावनाएं व्यक्त करके मन थोड़ा हल्का हो जाता है। अभी रात के 11:00 बजने वाले हैं तो मैं चलता हूँ सोने, आपसे मिलूंगा कल फिर से एक और नई पोस्ट के साथ… शुभ रात्रि।


शनिवार, 26 अक्टूबर 2024

जिस तरह से उसने आज मुझे नजरअंदाज किया, ऐसा लग रहा है कि अब सब कुछ खत्म हो गया है | 25 October 2024 Diary

 स्वागत है आप सभी लोगों का मेरी दैनिक डायरी में, आज है 25 अक्टूबर 2024। आज फिर से दोपहर के बाद का दिन मेरे लिए बहुत ही खराब बीता। सुबह जब मैं काम से बाहर गया तो वह मुझे दिखाई तो नहीं दी थी लेकिन थोड़ी देर बाद मैं यूं ही उसके घर के पास जाकर खड़ा हो गया। थोड़ी देर बाद वह घर से निकल कर आई तो मैंने उसे देखा। उसने मेरी ओर नहीं देखा और थोड़ी देर बाद अंदर चली गई। मैं आज काफी देर तक वहां खड़ा रहा था और जैसे ही मैं घर आने को हुआ वह मुझे एक बार फिर से दिखाई दी। लेकिन जल्दी ही वह अंदर चली गई और मुझे पता भी नहीं चला कि वह कब अंदर की ओर चली गई। मैं घर आ गया, नहा धोकर मैंने नाश्ता किया और बाहर की ओर चला गया। मैं जाकर उसके घर के सामने दुकान पर बैठ गया। मैं बार-बार उसके दरवाजे और उसके घर के बाहर देख रहा था कि कहीं से वह आ जाए और मुझे दिख जाए। मुझे कुछ देर बैठे हुए हो गई थी। अचानक एक फेरीवाला आया और मैं सोच ही रहा था कि वह उसकी आवाज सुनकर दरवाजा खोलेगी और ऐसा ही हुआ। उसने दरवाजा खोल कर देखा लेकिन तब तक फेरीवाला आगे जा चुका था। मैंने उसे देखा, वह कुछ सेकेंड के लिए दरवाजे में रुकी और उसने देखा कि मैं वहां बैठा हूँ। उसके बाद दरवाजा बंद करके अंदर चली गई।

          थोड़ी देर बाद उसने फिर से हल्का सा दरवाजा खोला और बाहर झाँककर अंदर चली गई। मैं आज बहुत देर तक वहीं बैठा रहा था। वह एक बार फिर अपने घर के बाहर अपनी गाय नहलाने आई लेकिन उस समय उसने एक बार भी वहां नहीं देखा जहां मैं बैठा था। मैं उसे गाय नहलाते हुए देख रहा था। वह गाय को नहला कर और उसके बाद थोड़ा सा काम करके घर के अंदर चली गई। उसके बाद वह मुझे दिखाई नहीं दी। मैं वहां से उठकर अपने घर आ गया। घर आकर मैं अपने काम में लग गया। आज मैंने दोपहर का खाना काफी देरी से खाया था, लगभग दोपहर और शाम के बीच का समय था जब मैंने खाना खाया। खाना खाने के बाद मैं बाहर गया। उसके घर के सामने से जाते हुए मैंने उसे देखने की कोशिश की लेकिन वह नहीं दिखी। जैसे ही मैं थोड़ा आगे पहुंचा वह अपने पड़ोस के घर में थी और उसके दरवाजे की ओर आ रही थी। मैं उसके दरवाजे पर पहुंच चुका था और मुझे उसकी आवाज आई जैसे ही उसने वहां मुझे देखा वह तुरंत वापस हो गई और उसके बाद वह उस घर में रुकी भी नहीं। अपने घर चली गई। मैंने रुकने के लिए कहा लेकिन वह ना तो रुकी और ना ही उसने मुड़ कर देखा और अपने घर चली गई। मुझे उस समय इतना बुरा लगा कि मैं बता नहीं सकता। मुझे उस पर बहुत ज्यादा गुस्सा आया। मैं वहां से वापस आ गया।

         अब मेरा मन बहुत ज्यादा उदास हो रहा था। मुझे लग रहा था कि अब सब कुछ खत्म हो गया है। अब वह नहीं मानेगी। आज मुझे सबसे ज्यादा बुरा लग रहा था। उसे नहीं पता कि वह मेरे साथ कितना गलत कर रही है। मैं उसी के लिए यहां रुका हुआ हूँ। मैंने उसके लिए कई सारी नौकरियां छोड़ी हैं, ताकि मैं घर रहूं और उसके पास रहूं। यह सब मैंने उसे बता दिया है लेकिन शायद उसे बात की गंभीरता का एहसास नहीं है। मैं उसके लिए अपना जीवन इतने बड़े खतरे में डाल रहा हूँ लेकिन उसे कोई फर्क नहीं पड़ता। उसके प्रति आज कई सारे नकारात्मक विचार मेरे मन में आए। मैंने कई साल उसके लिए बर्बाद कर दिए, अपना कैरियर दांव पर लगा रखा है लेकिन उसे मेरे प्यार का एहसास नहीं है शायद। आज मुझे इतना गुस्सा आया कि मैंने सोचा उससे अपने बर्बाद हुए समय का बदला लूं। अगर वह किसी भी बात पर नाराज है तो उसे मुझे बताना चाहिए या घर में उससे किसी ने कुछ कहा है तो मुझसे बात तो करनी चाहिए। मैं सोच रहा हूँ कि उससे अब कभी बात ना करूँ और ना ही उसे देखूँ। अब अपने समय को अपने लिए खर्च करूँ और सही समय का इंतजार करूँ, उसे उसकी गलती का एहसास कराने के लिए।

           शाम के समय मैं बाहर तो गया लेकिन उसे देखने की मेरी कोई खास इच्छा नहीं थी। मैं काफी देर वहां बैठा रहा और उसके बाद घर आ गया। रात का भोजन करने के बाद मैं रोज की तरह टहलने बाहर चला गया और जाकर अपनी जगह बैठ गया। मुझे वहां बैठे हुए कुछ देर हो गई थी। उसका दरवाजा खुला और उसमें से वह बाहर की ओर झांकी। वह थोड़ी देर देखती रही लेकिन मैं उसकी ओर नहीं देख रहा था। हालांकि मुझे पता चल गया था कि दरवाजे पर वह झांक रही है। उस समय अंधेरा था लेकिन बल्ब की हल्की सी रोशनी वहां आ रही थी जिससे मुझे उसकी पहचान पड़ी। वह थोड़ी देर बाहर देखती रही और उसके बाद दरवाजा बंद करके अंदर चली गई। आज मैं टहलने गांव के बाहर चला गया था। मेरे साथ एक लड़का और था। हम लोग वहां से टहल कर आए और फिर आकर वहीं बैठ गए। काफी देर हमने बातें कीं। उसके बाद हम अपने अपने घर आ गए। घर आने के बाद मेरा मन कुछ भी करने का नहीं कर रहा था तो मैं मोबाइल चलाता रहा। आज मैंने अपना कोई भी काम नहीं किया और ना ही मैं पढ़ पाया। बस मैंने अपनी डायरी लिखी। अभी रात के 12:30 बज चुके हैं तो अब मैं चलता हूँ सोने, आपसे मिलूंगा कल फिर से एक और नई पोस्ट के साथ… शुभ रात्रि।

शुक्रवार, 25 अक्टूबर 2024

वो दुकान पर आयी लेकिन मैं उससे कुछ नहीं कह पाया... उसके पास आते ही मैं भूल गया कि मुझे क्या कहना है | 24 October 2024 Diary

 स्वागत है आप सभी लोगों का मेरी दैनिक डायरी में, आज है 24 अक्टूबर 2024। आज सुबह उठने के बाद मैं काम से बाहर गया। मैं उसके घर के पास खड़ा था, तभी वह पानी भरने अपने घर से बाहर आई। उस समय मैं उसे ठीक से नहीं देख पाया क्योंकि मैं काम में था और मेरे सामने उसके घर का एक सदस्य था। मैंने तिरछी निगाह से देखा, वह पानी भर रही थी। उसने मेरी ओर नहीं देखा और वह पानी भरकर घर के अंदर चली गई। थोड़ी देर बाद मैं वापस घर आ गया। घर आकर मैंने नहा धोकर नाश्ता किया और बाहर की ओर चला गया। उसके घर के सामने पहुंचकर मैंने उसे देखने की कोशिश की लेकिन वह दिखाई नहीं दी। उसके बाद मैंने एक-दो चक्कर और लगाए लेकिन वह मुझे अब भी नहीं दिखी थी। ज्यादा चक्कर लगाने भी ठीक नहीं थे क्योंकि रास्ते में एक घर के बाहर कुछ लोग काम कर रहे थे। अगर मैं ज्यादा चक्कर लगाता तो वह सोचते कि मैं इतनी बार क्यों आ रहा हूँ… और किसी न किसी की निगाह मुझ पर पड़ ही जाती कि मैं उसके घर की ओर क्यों देख रहा हूँ।

         मैं घर वापस आ गया और अपना काम करने बैठ गया। आज पूरी दोपहर मैं काम करता रहा और थोड़ा सा पढ़ा। दोपहर में भोजन करने के बाद मैं बाहर गया था लेकिन उसे नहीं देख पाया। काफी देर काम करने के बाद मेरा मन ऊब गया, फिर मैं थोड़ी देर पढ़ा और उसके बाद थोड़ा और काम किया। फिर मेरा मन कुछ भी करने का नहीं किया। मैं ऐसे ही लेटा रहा और उसके बारे में सोचता रहा। मुझे उसकी याद आ रही थी। शाम की चाय पीने के बाद मैं उसे देखने की आस में फिर एक बार बाहर चला गया लेकिन वह मुझे अब भी दिखाई नहीं दी थी। मैं थोड़ा परेशान सा हो रहा था। मैं वापस घर आ गया और थोड़ी देर बाद मैं फिर से बाहर चला गया क्योंकि मेरा मन नहीं मान रहा था। मुझे उसे देखना था। जब मैं बाहर जा रहा था तो उसके घर के सामने पहुंचकर मैंने देखा कि वह अपने घर में है। मैं उसे देखते हुए आगे चला गया और जैसे ही मैं वहां पहुंचा वह अपने घर के दरवाजे से निकल रही थी। वह दुकान पर जा रही थी। मैं बिल्कुल ठीक समय पर वहां पहुंचा। इस बार मैं उसे देखकर थोड़ा पीछे रुक गया ताकि वह दुकान पर जाए और मुझे देखकर वापस ना लौटे क्योंकि कल वह वापस लौट गई थी। जब उसने आधे से ज्यादा रास्ता तय कर लिया तो मैं आगे बढ़ गया। वह काफी देर दुकान पर रही।

           मैं सोच रहा था कि मैं रास्ते में किस जगह खड़ा होऊँ ताकि उससे कुछ बात कर सकूं और उसे अच्छे से देख सकूं। लेकिन मुझे यह भी डर था कि अगर मैं किसी जगह खड़ा हो जाता हूँ तो कहीं वह मुझे देखकर रास्ता बदलकर दूसरी ओर से ना चली जाए, इसलिए मैं ऐसी जगह खड़ा था जहां से होकर उसे जाना ही पड़ता। मैं याद कर रहा था कि मुझे उससे क्या कहना है। आस-पास कुछ लोग थे जिनकी वजह से मैं उससे बात नहीं कर पाया। मैंने कोशिश की कि उससे अपने दिल की बात कह दूं लेकिन पता नहीं आज क्या हो गया, मुझे कुछ याद ही नहीं आया कि मुझे उससे क्या कहना है। वह दुकान से वापस आई। मैं उसे देख रहा था और देखता रहा। वह अपने घर की ओर चली गई। मैं उससे कुछ भी नहीं कह पाया। अगर वे लोग वहां ना होते तो शायद कुछ कह पाता, लेकिन एक तो मुझे उनका डर था कि कहीं उन्हें आवाज ना पहुंच जाए और ऐसी स्थिति में वह भी बात करने से डरती है। मैं उसे घर जाते हुए देखता रहा। उसके जाने के बाद मैं दुकान पर पहुंच गया, जहां वह खड़ी थी। मैंने उसके दरवाजे की ओर देखा वह दरवाजे में से जाते हुए पीछे देख रही थी कि मैं अब कहां हूँ… और दरवाजा बंद करके अंदर चली गई।

            मैं अपने नियत स्थान पर जाकर बैठ गया। थोड़ी देर बाद मुझे उसकी आवाज आई। वह अपने घर के बाहर थी और अपने भतीजे को खिला रही थी। वह अपने पड़ोस के घर के दरवाजे पर आई। मैं सोच रहा था कि उसके पास तक चला जाऊं लेकिन आसपास के लोग देख लेते, इस वजह से मैं नहीं गया। थोड़ी देर बाद वह वापस चली गई और जाते हुए उसने मेरी ओर देखा कि मैं कहां बैठा हूँ। कुछ समय बाद वह फिर से बाहर आई। मैंने उससे इशारों में कुछ कहने की कोशिश की। पता नहीं उसे समझ में आया होगा या नहीं। वह वापस घर के अंदर चली गई। मैं काफी देर वहां बैठा रहा और जब रात होने लगी तो मैं उठकर घर आ गया।

          रात का भोजन करने के बाद रोज की तरह मैं बाहर टहलने चला गया। उसका दरवाजा बंद था। आज उसके पड़ोस के घर में फिर से गीत संगीत का कार्यक्रम था और मुझे उम्मीद थी कि वह आज भी जाएगी लेकिन वह आज नहीं गई। वह एक बार दरवाजे पर आई। उसका भाई मेरे आस-पास खड़ा था और उसने खाना नहीं खाया था तो वह उसे आवाज लगाने आई थी। उसने दरवाजा खोलकर उसे आवाज लगाई और उसके बाद मेरी ओर देखा और दरवाजा बंद करके अंदर चली गई। वह सोच रही होगी कि मैं रोज यहीं आता हूँ क्योंकि यह तो उसे भी पता है कि रात को यह हमारे मिलने का स्थान है। वह अपनी छत पर आती थी और मैं वहां नीचे खड़ा रहता था। उसने सोचा होगा कि ये अब भी मेरा इंतजार करता है। उसके बाद वह मुझे दिखाई नहीं दी। मुझे ऐसा लगा जैसे वह आज अपनी छत पर आई हो लेकिन उसके साथ कोई और भी था क्योंकि ऊपर से बातों की आवाज आ रही थी लेकिन मैंने उसे देखा नहीं। मैं काफी देर तक वहां बैठा रहा और उसकी प्रतीक्षा करता रहा… हो सकता है वह छत पर आए। लेकिन वह ना तो छत पर आई और ना ही उसके बाद उसने दरवाजे से देखा। जब उसके आने की संभावना समाप्त हो गई तो मैं वहां से उठकर अपने घर आ गया। घर आने के बाद मैंने थोड़ा काम किया और उसके बाद अपनी डायरी लिखने बैठ गया। अभी रात के 11:15 बजने वाले हैं तो मैं चलता हूँ सोने, आपसे मिलूंगा कल फिर से एक और नई पोस्ट के साथ… शुभ रात्रि।

गुरुवार, 24 अक्टूबर 2024

वो मेरे बिल्कुल पास आ गई थी लेकिन फिर भी मैं उसे नहीं देख पाया | 23 October 2024 Diary

 स्वागत है आप सभी लोगों का मेरी दैनिक डायरी में, आज है 23 अक्टूबर 2024। आज मैंने उसे सुबह थोड़ी देर के लिए देखा था और उसके बाद वह मुझे शाम को बहुत ही कम समय के लिए देखने को मिली। आज दिन भर में वह मुझे देखने को नहीं मिली। सुबह उठने के बाद जब मैं बाहर गया तो वह मुझे दिखाई दी, वह भी सामने से नहीं पीछे से क्योंकि वह एक घर से निकल कर अपने घर जा रही थी और मैं उसके पीछे खड़ा था। घर आने के बाद मैं फिर से उसे देखने बाहर गया और इस बार वह मुझे सामने से देखने को मिली लेकिन उसने मेरी ओर देखकर अपनी निगाह हटा ली। इस समय वह मुझे दो-तीन बार देखने को मिली थी लेकिन उसका व्यवहार रुखा था, पता नहीं उसे क्या हो गया है। आजकल ना तो वह कोई बात बताती है कि क्या हुआ है और ना ही बात करती है। मैंने दो-तीन चक्कर लगाए और हर बार उसे देखा, उसके बाद मैं घर आ गया क्योंकि बार-बार जाना ठीक नहीं था।

            आज मेरे माता-पिता बाहर गए हुए थे इसलिए मैं सारा दिन घर पर ही रहा। हालांकि बीच-बीच में मैंने उसके घर के चक्कर लगाए लेकिन वह मुझे देखने को नहीं मिली। मैं वापस घर आकर अपना काम करने बैठ गया। दोपहर के बाद मेरे माता-पिता घर आ गए। उसके बाद मैं फिर से बाहर गया लेकिन वह मुझे अभी भी देखने को नहीं मिली थी। उसके कपड़े तार पर पड़े थे। मैं घर वापस आ गया। मैंने अपना बचा हुआ काम निपटाया और उसके बाद बाहर गया। इस बार उसके कपड़े तार पर नहीं थे। वह कपड़े उतार कर रख चुकी थी लेकिन मुझे दिखाई नहीं दी। उसे देखने का मेरा बहुत मन कर रहा था। एक बार को उसकी आवाज मुझे सुनाई दी। मैंने उसे देखने की कोशिश की लेकिन वह दिखाई नहीं दी।

          शाम के समय मैं बाहर गया तो वह मुझे हल्की सी दिखाई पड़ी। इतनी हल्की कि मैं यह भी नहीं पहचान पाया कि उसने कौन से कपड़े पहने हैं। उसका दरवाजा थोड़ा खुला हुआ था। उसमें से वह मुझे नजर आई। अब मेरी बेचैनी बढ़ रही थी क्योंकि मुझे उसे देखना था। मैं वहीं बैठ गया और मोबाइल चलाने लगा। बीच-बीच में उसके दरवाजे और छत की ओर देख लेता था कि कहीं वह छत पर या अपने दरवाजे पर तो नहीं आई, लेकिन उसका दरवाजा बंद था। थोड़ी देर बाद मुझे उसकी आवाज उसके घर के बाहर से आई। मुझे लगा वह थोड़ा और आगे आएगी लेकिन वह आगे नहीं आई और थोड़ी देर बाद घर के अंदर चली गई। आज मुझे उसका व्यवहार बहुत ही अजीब लग रहा था। आज उसने मुझे देखने की कोई भी कोशिश नहीं की। जब रात होने लगी तो मैं अपने घर आ गया।

           थोड़ी देर बाद मैं किसी काम से उसके घर की ओर गया। मैंने देखा कि वह अपने घर से निकल कर आ रही है। उसने घर से निकलते हुए एक सेकंड के लिए मेरी ओर देखा और उसके बाद निगाह नीचे कर ली। उसने शायद इसलिए देखा होगा कि मैं वहां खड़ा हूँ और अगर उसे पता होता कि मैं वहां हूँ तो वह आती नहीं। लेकिन वह घर से निकल चुकी थी इसलिए उसे आना पड़ा। उसने अपना काम समाप्त किया और वापस चली गई। हालांकि उस समय उसके घर के सदस्य भी वहां थे इसलिए वह अगर देखना चाहती तब भी नहीं देख पाती और मैंने भी उसकी ओर नहीं देखा। यहां से मेरा मन दुखी हो रहा था। मैंने उसे आज ठीक से नहीं देखा है और वह बहुत अच्छा मौका था। वह मेरे बिल्कुल पास आ गई थी लेकिन उसके घर वालों की वजह से मैं उसकी ओर नहीं देख पाया। मैं घर वापस आ गया। घर वापस आने के बाद मैंने दो-तीन चक्कर और लगाए उसे देखने के लिए लेकिन मैं उसे नहीं देख पाया।

            रात का भोजन करने के बाद मैं बाहर गया। उसका दरवाजा बंद था। मैं थोड़ी देर टहलने के बाद वहीं बैठ गया। आज मेरे साथ मेरे साथी भी थे। मैं बीच-बीच में उसके दरवाजे और छत की ओर देख रहा था लेकिन वह ना तो छत पर आई और ना ही उसने दरवाजा खोल कर देखा। हम लोग काफी देर तक वहां बातें करते रहे। अचानक उसके दरवाजे पर आहट हुई। उसने दरवाजा खोला और कुछ बाहर की ओर फेंक कर हमारी ओर देखते हुए दरवाजा बंद कर लिया। वह शायद देख रही होगी कि यहां कौन-कौन हैं। मैंने उसकी काफी प्रतीक्षा की… ना तो वह अपनी छत पर आई और ना ही उसके बाद उसकी कोई आवाज सुनाई दी। कुछ समय बाद हम भी अपने-अपने घर आ गए। आज मेरा मन उसकी ओर से इतना दुखी है कि मुझे यह समझ में नहीं आ रहा है कि अब मैं क्या करूं… पता नहीं वह किस बात से नाराज है या उसके घर वालों ने उससे क्या कहा है… अगर वह बताएगी तभी तो समस्या का हल निकलेगा। अगर ज्यादा दिनों तक ऐसे ही चलता रहा तो हो सकता है मैं गुस्से में आकर कुछ कर ना बैठूँ। अब फिर से कल का इंतजार करना होगा। रोज ऐसे ही दिन निकलते जा रहे हैं। अभी रात के 11:45 बज चुके हैं तो अब मैं चलता हूँ सोने, आपसे मिलूंगा कल फिर से एक और नई पोस्ट के साथ… शुभ रात्रि।

बुधवार, 23 अक्टूबर 2024

मुझे पता था कि वो आज अपने पड़ोस में गीत-संगीत में जाएगी लेकिन उसके जाने से पहले ही मुझे घर आना पड़ा | 22 October 2024 Diary

 स्वागत है आप सभी लोगों का मेरी दैनिक डायरी में, आज है 22 अक्टूबर 2024। सुबह मैं किसी काम से उसके घर की ओर गया। मैं वहां खड़ा था और थोड़ी देर बाद ही वह अपने घर से बाहर आई। वह शायद अंदर कुछ काम कर रही थी और बाहर हाथ धोने आई थी। उसने हाथ से कुछ तो इशारा किया था, मुझे चिढ़ाया था। वह घर के अंदर चली गई, मैं वहीं बातों में लग गया। थोड़ी ही देर बाद वह फिर से बाहर आई अपने भतीजे को गोद में लेकर। आज वह मुझे खुश लग रही थी। उसने इधर देखा जहां मैं खड़ा था। मेरे साथ और भी लोग थे। वह अपने भतीजे को खिलाते हुए थोड़ा सा बनकर चल रही थी। थोड़ी देर बाद वह घर के अंदर चली गई। मैं भी घर वापस आ गया।

          नहा धोकर मैंने नाश्ता किया और गेहूं पिसवाने पड़ोस के गांव चला गया। हमारे गांव में भी गेहूं पीसने की चक्की है लेकिन गांव के काफी लोग पड़ोस के गांव में गेहूं पिसवाने जाते हैं क्योंकि वहां गेहूं पिसवाना सस्ता पड़ता है। वह चक्की सौर ऊर्जा से चलती है इसलिए उसमें तेल का कोई खर्चा नहीं होता और जबकि गांव की चक्की तेल इंजन से चलती है तो वहां ज्यादा रुपए लगते हैं और गेहूं पिसाई में भी अंतर है। पड़ोस के गांव की चक्की वाला थोड़ा बेहतर पीसता है। वहां से आने के बाद मैं अपने काम में लग गया। दोपहर का समय हो चुका था। मैंने दोपहर का भोजन किया और बाहर चला गया। मुझे पता था कि अब तक वह नहा कर घर के अंदर चली गई होगी और ऐसा ही हुआ। वह मुझे नहीं दिखी। थोड़ी देर में मैं घर वापस आ गया और आराम करने लेट गया। मुझे थोड़ी ही देर हुई थी तभी मेरे दोस्त का फोन आया। उसने बताया कि वह दुकान पर गई है। मैं जल्दी से उठा और दुकान की ओर चला गया लेकिन जब तक मैं वहां पहुंचा वह वापस अपने घर चली गई थी। मैं उसे अब भी नहीं देख पाया। सुबह से अब तक वह मुझे दिखाई नहीं दी थी और मुझे पता भी नहीं था कि आज उसने नहाने के बाद कौन से कपड़े पहने हैं। मैं वापस आ गया और अपने काम में लग गया।

          आज मैं दोपहर में नहीं सोया, अपना काम करता रहा। जब शाम की चाय का समय हुआ तो मैंने चाय पी और बाहर का एक चक्कर लगाया लेकिन वह मुझे नहीं दिखी। मैं घर वापस आ गया और फिर से काम करने बैठ गया। काम करते-करते शाम होने वाली थी। मुझे अपने खेतों पर भी जाना पड़ा। वहां से आने के बाद मैं शाम के समय बाहर गया। उसका दरवाजा आधा खुला हुआ था और आखिरकार सुबह के बाद अब शाम को वह मुझे थोड़ी सी दिखाई दी थी। आज उसने नीला सूट पहना हुआ था, हालांकि उतनी अच्छी तरह से मैं उसे अभी भी नहीं देख पाया था लेकिन मुझे इतने से ही खुशी मिल रही थी। मैं वहीं बैठा रहा। कुछ समय बाद मेरे दोस्त भी आ गए। हम सभी वहीं बैठ कर बातें करते रहे। थोड़ी-थोड़ी देर बाद वह मुझे दिखाई देती रही। कुछ समय बाद मेरे दोस्त उठ कर चले गए लेकिन मैं वहीं बैठा रहा। मैं उसके दरवाजे और छत की ओर देख रहा था, इस आस में कि वह आ जाए। थोड़ी देर बाद मेरी निगाह उसकी छत पर गई तो मैंने उसे वहां देखा। उसे वहां देखकर मुझे बहुत खुशी हुई। उसने मेरी ओर देखा तो मुझे बहुत अच्छा लगा। थोड़ी देर बाद वह छत की दूसरी तरफ चली गई। अब मैं उसे नहीं देख पा रहा था। मैंने इधर-उधर जाकर देखने की कोशिश की लेकिन वह नहीं दिखाई दी। थोड़ी देर बाद वह फिर मेरी तरफ आई और नीचे चली गई। उसके बाद वह छत पर नहीं आई। मैं अभी भी वहीं बैठा था।

           मुझे उम्मीद थी कि वह दरवाजे में आकर मुझे देखे या किसी और तरह से कहीं से भी आ जाए। इस उम्मीद में मैं वहीं बैठा था जबकि थोड़ी देर बाद रात होने वाली थी। मुझे उसकी आवाज आई। वह अपने घर के बाहर थी और यूं ही टहलते हुए ऐसी जगह आयी जहां से वह मुझे देख सकती थी। वह मुझे देखने आई और उसने देखा कि मैं अभी भी वहीं बैठा हूँ। वह देखकर वापस चली गई क्योंकि वह वहां नहीं रुक सकती थी। एक तो वह घर के बाहर थी और उसके घर के कुछ सदस्य भी उसके आसपास थे। वह देखकर अंदर चली गई। मैंने थोड़ी देर और प्रतीक्षा की, जब वह नहीं आई तो मैं अपने घर आ गया। रात का भोजन करने के बाद मैं बाहर टहलने चला गया। उसका दरवाजा बंद था। मैं वहीं टहल रहा था। थोड़ी देर बाद मुझे किसी काम से घर आना पड़ा। आज उसके पड़ोस के घर में गीत-संगीत का कार्यक्रम था और मुझे पूरी उम्मीद थी कि वह वहां जाएगी लेकिन दुर्भाग्य से जिस समय मैं काम से घर आया था उसी समय वह वहां गई थी और जब तक मैं काम समाप्त करके वापस वहां पहुंचा, वह वहां जा चुकी थी। लेकिन मैंने उसकी प्रतीक्षा की क्योंकि वह वापस भी आती, हालांकि कोई फायदा नहीं होने वाला था क्योंकि उसके साथ उसके परिवार की और महिलाएं भी होतीं। लेकिन अंधेरे में ही सही मुझे वह परछाईं की तरह तो दिखती और उसकी आवाज भी सुनने को मिल जाती। मुझे इतने से ही बहुत खुशी मिलती।

           उसके वापस आने तक मैं उसकी प्रतीक्षा करता रहा। जब वह काफी समय तक नहीं आई तो मेरा मन हुआ कि मैं घर आ जाऊं क्योंकि समय भी काफी हो चुका था लेकिन पता नहीं क्यों मैंने सोचा थोड़ी देर और रुक जाता हूँ। मैं उसकी प्रतीक्षा कर रहा था कि तभी मुझे कुछ महिलाओं की आवाज आई और उनमें से एक मीठी सी आवाज भी आई जो कि उसी की थी। मेरा वहां रुकना सफल हो गया। उसकी आवाज सुनकर मुझे बहुत अच्छा लगा, हालांकि वह मुझे दिखाई नहीं दी क्योंकि अंधेरा था। लेकिन मुझे उम्मीद है कि उसने वहां जरूर देखा होगा कि मैं वहां हूँ या नहीं क्योंकि यह तो अनुमान उसने भी लगाया होगा कि आज गीत-संगीत में उसके जाने का मुझे पता होगा। वह बातें करते हुए अपने घर चली गई। अभी काफी रात हो चुकी थी इसलिए उसके अब छत पर आने की कोई संभावना नहीं थी। मैं थोड़ी देर बाद घर वापस आ गया। अभी रात के 11:00 बज चुके हैं तो अब मैं चलता हूँ सोने, आपसे मिलूंगा कल फिर से एक और नई पोस्ट के साथ… शुभ रात्रि।

मंगलवार, 22 अक्टूबर 2024

वो दुकान पर आ रही थी लेकिन मुझे देखकर वापस लौट गई... उसने मुझे फिर से उदास कर दिया | 21 October 2024 Diary

 स्वागत है आप सभी लोगों का मेरी दैनिक डायरी में, आज है 21 अक्टूबर 2024। मेरा आज का दिन सुबह से दोपहर के बाद तक सामान्य था, ना ज्यादा अच्छा ना ज्यादा बुरा लेकिन उसके बाद से ठीक नहीं रहा। मेरा मन उदास हो रहा था। चलिए सुबह से शुरू करते हैं— आज सुबह उठने के बाद मैंने एक गिलास पानी पिया और थोड़ी देर बाद बाहर चला गया। बाहर मैं रास्ते पर पहुंचा ही था कि वह अपने घर से निकल कर अपने खेतों की ओर जा रही थी। उसने मुझे नहीं देखा क्योंकि वह आगे जा रही थी और मैं पीछे खड़ा था। मैं उसे जाते हुए देखता रहा। थोड़ी देर बाद मैं घर वापस आ गया। घर आने के बाद मैं नहाया, नाश्ता किया और उसके बाद फिर से बाहर चला गया। वह मुझे दिखाई नहीं दी। मैंने काफी कोशिश की, कई चक्कर लगाए लेकिन वह मुझे नहीं दिखी। आखिरकार मैं घर लौट आया और अपना काम करने बैठ गया।

           मैं काम कर रहा था। थोड़ी ही देर बाद मुझे किसी ने एक काम से बुला लिया। मुझे बाहर जाना पड़ा। मैंने जाते हुए भी उसे देखने की कोशिश की लेकिन वह दिखाई नहीं दी। थोड़ी देर बाद जब मैं लौट कर आ रहा था तो रास्ते में एक जगह रुक गया। वहां से उसका दरवाजा दिख रहा था। अचानक मेरी निगाह उसके दरवाजे पर गई। वहां वह खड़ी थी। वह नहा कर आयी थी क्योंकि सर पर उसने तौलिया बांधा हुआ था। वह थोड़ी देर वहां रुकी, बाहर की ओर देखा और उसके बाद दरवाजा बंद करके अंदर चली गई। मैं थोड़ी देर वहां और रुका रहा ताकि अगर वह फिर से आए तो मैं उसे देख सकूं लेकिन फिर वह नहीं आई। मैं घर वापस आ गया। अब दोपहर का समय हो चुका था। मैंने खाना खाया और एक बार फिर से बाहर की ओर गया लेकिन वह मुझे दिखाई नहीं दी। मैं घर वापस आ गया और फिर से अपने काम में लग गया। आज मैं थोड़ी देर के लिए दोपहर में सो गया और उठने के बाद फिर से मैंने अपने काम पूरे किए।

           शाम के समय जब मैं बाहर गया और वहां पहुंचा ही था कि मैंने देखा वह दरवाजा खोलकर बाहर आ रही है। लेकिन मुझे देखते ही वह वहीं रुक गई। वह दुकान पर जाने के लिए निकलने वाली थी लेकिन मुझे देखकर उसने दरवाजा बंद कर दिया और वापस चली गई। उसके बाद वह अपने दूसरे दरवाजे से निकल कर दूसरी दुकान की ओर चली गई। मैं समझ गया कि वह मेरी वजह से इधर नहीं आई। इस समय मुझे बहुत गुस्सा आया, मेरा दिमाग बहुत खराब हो गया और मेरा मन उदास होने लगा। जब वह ऐसी कोई हरकत करती है तो मुझे लगता है कि वह मुझसे प्यार नहीं करती। अगर नहीं भी करती है तो मुझे बता दे, कम से कम आगे का रास्ता साफ हो जाएगा… और एक मैं हूँ जो उसके बारे में दिन-रात सोचता रहता हूँ। उसे इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि उसके ऐसा करने से मैं कुछ भी नहीं कर पाता, मेरा कोई भी काम नहीं हो पता, ना ही मैं पढ़ पाता हूँ। इसी बात को लेकर शाम से मेरा दिमाग बहुत परेशान है और मैं कुछ भी नहीं कर पा रहा हूँ। मुझे पता था कि वह दूसरे दरवाजे से दूसरी दुकान की ओर जाएगी और मैंने उसे जाते हुए देख लिया था तो मैं वापस जाकर उसी रास्ते पर खड़ा हो गया जहां से वह वापस आती। वह वापस आई लेकिन उस समय मेरे आस-पास और भी लोग थे। हालांकि वह जिस बच्चे को लेकर आई थी अपनी गोद में, उससे बोलते हुए जा रही थी और वह मुझ पर ढालकर बोल रही थी। वह अपने घर चली गई। मैं भी वापस उसी जगह चला गया जहां मैं बैठता हूँ।

           मैं वहां जाकर बैठ गया लेकिन उसके बाद ना तो वह दरवाजे पर आई और ना ही मुझे दिखाई दी। मैं काफी देर वहां बैठा रहा। जब रात होने लगी तो मैं उठकर अपने घर आ गया। घर आने के बाद किसी काम से मैं फिर उसके घर की ओर गया। मैंने उसे देखने की कोशिश की लेकिन वह मुझे नहीं दिखी। काम समाप्त करके मैं घर वापस आ गया। रात का भोजन करने के बाद रोज की तरह मैं फिर से बाहर टहलने निकल गया और जैसे कि मुझे उम्मीद थी वैसा ही हुआ। ना तो वह छत पर आई और ना ही उसने दरवाजे से देखा। कुछ देर तक उसकी आवाज भी नहीं आई लेकिन बाद में बर्तनों के खड़कने के साथ उसकी आवाज आई और बर्तन साफ करके वह अंदर चली गई। मैं वहां अकेला उदास बैठा रहा। मुझे उसकी बहुत याद आ रही थी। मेरे साथी भी वहीं थे लेकिन मैं सबसे अलग अकेला बैठा था और उसी के बारे में सोच रहा था। मुझे शाम से बहुत बुरा लग रहा है। मैं उससे ज्यादा कुछ नहीं चाहता लेकिन क्या वह मेरे लिए इतना भी नहीं कर सकती। लेकिन कभी-कभी मुझे लगता है कि वह मुझे चिढ़ाती है और चिढ़ाने के लिए ऐसी वैसी हरकतें करती रहती है। लेकिन कभी-कभी मुझे ऐसा भी लगता है कि वह मुझसे प्यार नहीं करती। उसे मेरी कोई परवाह नहीं है। आज बहुत सारी नकारात्मक बातें मेरे दिमाग में घूमती रहीं। मैं अकेला गुमसुम सा बैठा था। एक बार मेरा रोने का भी मन किया लेकिन मैंने अपने आप को संभाल लिया। आज मैं थोड़ा जल्दी वहां से अपने घर आ गया।

           घर आने के बाद भी मेरा मन ठीक नहीं था। घरवाले टीवी पर समाचार देख रहे थे। वैसे तो मेरा कोई मन नहीं था लेकिन मैं भी वहीं बैठ गया और थोड़ी ही देर बाद समाचारों में मुझे उसका नाम सुनाई दिया। कई बार उसका नाम मेरे सामने आता रहा। मैं वहां से उठकर अलग चला गया। आज मुझे ऐसा लग रहा है जैसे मेरा मन उससे धीरे-धीरे भरने लगा है क्योंकि वह बिल्कुल भी सहयोग नहीं करती। मैं ही उसे देखने की आस लगाए रहता हूँ। वह अपनी तरफ से कोई भी कोशिश नहीं करती। मैं अपनी तरफ से कब तक कोशिश करता रहूं… लेकिन अगली बार जब मैं उसे देखता हूँ तो फिर से वही कहानी शुरू हो जाती है और मैं पिछला गुस्सा भूल जाता हूँ। पता नहीं ऐसा क्यों होता है। अब कल उससे बात करने की कोशिश करूंगा कि कम से कम वह कुछ बताए तो सही कि आखिर दिक्कत कहां है…? अभी काफी रात हो चुकी है और रात के 11:30 बजने वाले हैं। तो अब मैं चलता हूँ सोने, आपसे मिलूंगा कल फिर से एक और नई पोस्ट के साथ… शुभ रात्रि।

सोमवार, 21 अक्टूबर 2024

मैं उससे बार-बार पूछता हूँ लेकिन वो कोई जवाब नहीं देती | 20 October 2024 Diary

 स्वागत है आप सभी लोगों का मेरी दैनिक डायरी में, आज है 20 अक्टूबर 2024। आज मैं थोड़ी देरी से सो कर उठा क्योंकि कल मैं देरी से सोया था और कल मैं थका हुआ भी था। सुबह उठने के बाद आज घर पर काफी काम था। मैंने घर की धुलाई की, पोंछा लगाया यानी काम में मम्मी का हाथ बँटाया। घर के काम से निपट कर मैं खेतों पर चला गया। वहां थोड़ा सा काम था जो मैंने किया। वहां से आने के बाद मैं नहाया और नाश्ता किया। उसके बाद मैं बाहर की ओर चला गया। रास्ते में जाते हुए जैसे ही उसके घर के सामने पहुंचा तो वह अपने दरवाजे पर कुछ काम कर रही थी। मैंने नजर घुमाकर उसकी ओर देखा लेकिन तुरंत मुझे अपनी नजर हटानी पड़ी क्योंकि उसके साथ उसकी भाभी खड़ी थीं। मैं आगे चला गया और जब थोड़ी देर बाद वापस आया तो वह वहां नहीं थी। मैं अपने घर वापस आ गया।

         घर आने के बाद मैं काम करने बैठ गया। जब दोपहर का समय हुआ तो मम्मी ने खाने के लिए आवाज लगा दी। मैंने खाना खाया और बाहर टहलने चला गया। आज मैंने खाना थोड़ा जल्दी खा लिया था। बाहर जाने के बाद मैंने उसे देखने की कोशिश की। मैं उसके घर के पास भी गया जहां मैं शाम को जाता हूँ लेकिन वह मुझे दिखाई नहीं दी। हालांकि उसका दरवाजा खुला था लेकिन वह मुझे एक बार भी नजर नहीं आई। कुछ समय बाद मैं घर वापस आ गया। मैंने थोड़ी देर आराम किया और उसके बाद अपना काम करने बैठ गया। मुझे दोपहर में सुस्ती तो आ रही थी लेकिन मैं सोया नहीं। अगर मैं दिन में सो जाता हूँ तो फिर उठने के बाद मन कुछ अच्छा नहीं रहता, इसलिए मैं दिन में सोने से बचता हूँ।

          शाम की चाय पीने के बाद मैं उसे देखने बाहर चला गया। जैसे ही मैं उसके घर के सामने पहुंचा, वह अपने घर के बाहर ही अपने भतीजे को खिला रही थी। मैं वहीं रुक गया और उसे देखता रहा। उसने मेरी ओर देखा और कुछ देर देखती रही। मैं वहीं खड़ा रहा। थोड़ी देर बाद वह अंदर की ओर चली गई। मैंने थोड़ा और आगे जाकर उसे देखने की कोशिश की। वह अपने घर के अंदर थी लेकिन उसके साथ में उसकी भाभी भी थीं तो मैंने अपनी नजर तुरंत हटा ली। जब मैं थोड़ी देर बाद वापस आया तब भी वह वहीं थी। उसे देखते हुए मैं अपने घर आ गया। थोड़ी देर बाद मैं यूं ही अपने घर के बाहर खड़ा हो गया और जैसे ही मैं घर से बाहर आया, वह मुझे दुकान पर जाते हुए दिखाई दी। मैंने सोचा कि काश मैं 1 मिनट पहले आ जाता तो मुझे जाते हुए मिल जाती लेकिन मुझे इस बात का संतोष था कि वह वापस आएगी तो जरूर मिलेगी। मैं वहीं खड़ा रहा। थोड़ी देर बाद वह वापस आई तो मैंने उससे कहा कि “अब मैं किस गलती की माफी माँगूं, मैंने क्या किया है… तू कुछ बताती क्यों नहीं”। उसने कोई जवाब नहीं दिया और घर चली गई। मैं उसके पीछे-पीछे गया और उसे उसके घर जाते हुए देखता रहा। जब वह घर के अंदर चली गई तो मैं वापस अपने घर के बाहर आकर खड़ा हो गया।

         मुझे खड़े हुए थोड़ी ही देर हुई थी कि मेरी निगाह अचानक अपने दाएं और गई। मैंने देखा वह दोबारा से दुकान पर जा रही है लेकिन दुर्भाग्य से उस समय मेरे पास एक व्यक्ति खड़ा था, इसलिए वह निगाह नीचे करके दुकान पर चली गई और जब उधर से वापस आई तब भी मैं अकेला नहीं था। मुझे मन मार कर रहना पड़ा। मैं उससे कुछ नहीं कह पाया और वह अपने घर चली गई। शाम के समय जब मैं बाहर जा रहा था और उसके घर के पास पहुंचा तो वह अपने घर के बाहर काम कर रही थी। मैंने उसे देखा तो मैं वहीं रुक गया और उसकी ओर देखने लगा। काम समाप्त करके वह घर के अंदर जाने लगी। घर के अंदर जाने से पहले उसने मेरी ओर देखा और फिर घर के अंदर चली गई। जब उसने मुझे देखा तो मुझे बहुत अच्छा लगा, मुझे लग रहा है कि वह मेरे बारे में सोच रही है। उसे कुछ तो एहसास होगा मेरी परेशानी का, उसे लगता तो होगा कि मैं इससे ना बोलकर ठीक नहीं कर रही। मैं काफी देर वहीं बैठा रहा लेकिन उसके बाद वह दिखाई नहीं दी। जब रात होने लगी तो मैं उठकर अपने घर आ गया।

          रात का भोजन करने के बाद मैं हमेशा की तरह बाहर टहलने चला गया। मैं टहल रहा था और टहलते-टहलते उसके दरवाजे और छत की ओर देख रहा था। वह छत पर नहीं आई और ना ही उसने दरवाजा खोल कर देखा। मैं टहलता रहा और थोड़ी देर बाद वहीं बैठ गया। मैंने काफी देर उसकी प्रतीक्षा की। जब उसके आने की संभावना समाप्त होने लगी तो मैं वहां से उठकर अपने घर आ गया। घर आने के बाद मैंने अपने बचे हुए काम पूरे किये और उसके बाद अपनी डायरी लिखने बैठ गया। अभी रात के 11:15 बज चुके हैं तो अब मैं चलता हूँ सोने, आपसे मिलूंगा कल फिर से एक और नई पोस्ट के साथ… शुभ रात्रि।

मेरा आज का दिन कल से भी ज्यादा उदासी भरा रहा...| 26 October 2024 Diary

स्वागत है आप लोगों का मेरी दैनिक डायरी में, आज है 26 अक्टूबर 2024। मेरा आज का दिन बहुत ही खराब रहा जैसे कि मैंने आपको कल बताया था कि कल उसने...