स्वागत है आप सभी लोगों का मेरी आज की डेली डायरी पोस्ट में, आज है 20 सितंबर 2024। आज का दिन भी कल से कुछ खास अलग नहीं था। जैसे कि कल मेरा मन थोड़ा खराब था, आज सही होता लेकिन फिर से कल से भी ज्यादा खराब हो गया। कल मन ठीक ना होने की वजह से मैंने रात का खाना भी नहीं खाया था और दूध पीकर ही सो गया था।
आज सुबह सोकर उठने के बाद मैं काम से बाहर गया और जैसे ही उसके घर के सामने पहुंचा तो वह आज मुझे बाहर ही मिल गई। वह अपने घर के बाहर कुछ काम कर रही थी। मुझे देखकर वह थोड़ी सी मुस्कुराई। आज मेरी सुबह तो बहुत अच्छी थी और मुझे उम्मीद थी कि आज का दिन बहुत ही अच्छा बीतेगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उसके बाद मैं काम समाप्त करके घर वापस आ गया। वापस आने के बाद मैंने चाय पी और उसके बाद फिर से बाहर चला गया लेकिन इस बार वह मुझे नहीं दिखाई दी। मैं सोच कर तो यही गया था कि वह मुझे एक बार और दिखेगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। मैं वापस आ गया, नहा धोकर नाश्ता करने के बाद मैं एक बार फिर से बाहर की ओर गया। लेकिन अभी भी मुझे वह दिखाई नहीं दी थी तो मैं वापस आ गया।
मैं बैठा हुआ मोबाइल में कुछ काम कर रहा था कि तभी मेरे पास मेरे एक दोस्त का फोन आया। उसे कुछ जरूरी काम था और मुझे उसके साथ जाना था। थोड़ी देर बाद वह मोटरसाइकिल लेकर मेरे घर आ गया और हम दोनों उसके काम के सिलसिले में बाहर निकल गए। हमें वापस आने में लगभग 2 घंटे लग गए। वापस आने के बाद मैंने खाना खाया क्योंकि तब तक दोपहर हो चुकी थी। खाना खाने के बाद मैं फिर से बाहर की ओर निकल गया। समय ज्यादा हो गया था इसलिए मुझे कोई उम्मीद भी नहीं थी कि वह मुझे दिखाई देगी और ऐसा ही हुआ। मैं वापस आ गया और अपने काम में लग गया। मैंने कुछ देर काम किया और उसके बाद पढ़ने बैठ गया। आज मैं उम्मीद के अनुसार नहीं पढ़ पाया। पढ़ते-पढ़ते मुझे सुस्ती आने लगी तो मैं आंखें बंद करके लेट गया और मुझे झपकी लग गई।
जब मैं उठा तो शाम की चाय तैयार थी। मैंने चाय पी और उसके बाद फिर से पढ़ने बैठ गया। मैं थोड़ा ही पढ़ा था कि फिर मुझे एक काम याद आ गया और उसके बाद मैंने वह काम निपटाया, तब तक शाम हो चुकी थी। मैं बाहर निकल गया अपने उसी नियत स्थान पर बैठने के लिए। जैसे ही मैं वहां पहुंचा वह मुझे छत पर दिखाई दी लेकिन जैसे ही उसने मुझे देखा वह नीचे चली गई। बस यहीं से मेरा दिमाग सनक गया। मैंने थोड़ा आगे जाकर देखा तो उसके सामने की छत पर एक और लड़का था। अब मेरा दिमाग खराब हो गया। मुझे ऐसा लग रहा है कि कहीं वह मुझे धोखा तो नहीं दे रही है और अगर ऐसा है तो उसे मुझे बता देना चाहिए क्योंकि झूठ मुझे बिल्कुल बर्दाश्त नहीं है। जो भी बात है सच-सच बता दे तो ज्यादा अच्छा है क्योंकि झूठ की बुनियाद पर मैं कोई भी रिश्ता नहीं रखना चाहता। झूठे रिश्ते से ज्यादा अच्छा है सच बोलकर रिश्ता खत्म कर देना। मेरे मन में बार-बार सवाल उठ रहे थे कि वह मुझे देखकर नीचे क्यों चली गई जबकि अब तक वह यहीं बैठी थी और वह लड़का अपनी छत से थोड़ा आगे के हिस्से में जहां से उसकी छत थोड़ी और पास हो जाती है उधर की तरफ था। मेरे मन में दूसरा सवाल यह आया कि अगर सब कुछ ठीक है तो वह नीचे गई ही क्यों…? और भी न जाने कितनी तरह के सवालों से मेरा दिमाग परेशान हो गया।
मैं वहीं बैठ गया। मुझे बहुत गुस्सा आ रहा था और उदासी एकदम चरम पर पहुंच चुकी थी। उसके नीचे आने के बाद मुझे उसकी आवाज़ आती रही। वह बच्चे को खिला रही थी लेकिन उसने ना तो दरवाजा खोलकर मुझे देखा और ना ही मुझे वह दिखाई दी। फिर जब शाम होने लगी तो मैं वहां से उठकर घर आ गया। मुझे कुछ भी अच्छा नहीं लग रहा था, मैं बस यूं ही गुमसुम सा बैठा था। मैंने रात का खाना खाया और रोज की तरह बाहर टहलने निकल गया। मुझे उम्मीद थी कि आज वह नहीं आएगी और ऐसा ही हुआ। आज वह छत पर नहीं आई। मैं थोड़ी देर टहलने के बाद वहीं बैठ गया। आज मेरा मन बिल्कुल खराब था और अभी भी है, तो मैं आज जल्दी ही वहां से घर आ गया। घर आने के बाद मैंने अपना कुछ काम किया और पढ़ने का तो सवाल ही नहीं उठता क्योंकि मन बिल्कुल भी ठीक नहीं है। उसके बाद मैं अपनी डायरी लिखने बैठ गया क्योंकि यहां आप लोगों से अपने सारे दिन का हाल बता कर और अपने दिल की बातें कहकर मन कुछ हल्का हो जाता है।
अब उससे मिलकर सारी बातें साफ करूंगा। उससे पूछूंगा कि तेरे मन में क्या है… जो भी कुछ मन में है, बता दे। मैं भगवान से प्रार्थना करता हूँ कि सब कुछ ठीक हो। कुछ भी गलत ना हो। वैसे जरुरी नहीं है कि जैसा मैं सोच रहा हूँ वैसा ही हो क्योंकि वह अक्सर शाम को छत पर चली जाती है, रोज तो नहीं लेकिन कभी-कभी टहलने के लिए। क्योंकि उस समय भी वह अपने भतीजे को खिला रही थी और इससे पहले ऐसा कुछ नहीं हुआ तो हो सकता है यह मेरा भ्रम हो। खैर जो भी है बात तो करनी ही पड़ेगी। अभी रात के 11:00 बजने वाले हैं तो अब मैं चलता हूँ सोने, आपसे मिलूंगा कल फिर से एक और नई पोस्ट के साथ… शुभ रात्रि।
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