सोमवार, 30 सितंबर 2024

वो मुझे देखकर दूर हट गई...| Daily Personal Diary | 29 September 2024 Diary

 स्वागत है आप लोगों का मेरी डेली डायरी में, आज है 29 सितंबर 2024। सुबह उठने के बाद मैं बाहर गया। मुझे थोड़ी ही देर हुई थी कि वह घर से बाहर निकलती हुई मुझे दिखाई दी। मैंने उससे इशारों में पूछा कि क्या परेशानी चल रही है… लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया और घर के अंदर चली गई। थोड़ी देर बाद मैं वापस घर आ गया। घर आने के कुछ देर बाद मैं फिर से बाहर गया लेकिन इस बार वह मुझे दिखाई नहीं दी।

           नाश्ता करने के बाद मैं बाहर गया तो मुझे उसकी आहट सुनाई दी। वह अभी दिखी नहीं थी। थोड़ी देर बाद वह मुझे घर के बाहर दिख गई। वह कुछ काम करने की तैयारी में थी। मैंने उसे देखा और फिर से अपनी झुँझलाहट उसके सामने रखी लेकिन उसे कोई फर्क नहीं पड़ा। उसकी इस हरकत से मन बहुत उदास हो जाता है लेकिन इससे यह भी पता चलता है कि उसे उसके घर वालों ने काफी कुछ कहा है। मैं वहीं आसपास टहलता रहा और उसे काम करते हुए आते जाते देखता रहा। उसके सामने उसके परिवार के और भी सदस्य थे इसलिए उसने मेरी ओर नहीं देखा और वह काम करती रही। थोड़ी देर बाद मुझे लगा कि यहां और ज्यादा रुकना ठीक नहीं है तो मैं घर वापस आ गया। 

          वापस आने के बाद मैंने कुछ देर पढ़ाई की और मुझे फिर से नींद आने लगी क्योंकि मेरी नींद पूरी नहीं हो पा रही है। रात को मैं देर से सोता हूँ और सुबह जल्दी उठ जाता हूँ। जब मुझे लगा कि अब पढ़ने का कोई फायदा नहीं है तो मैं सो गया। वैसे तो मैं सो रहा था लेकिन बीच-बीच में मेरी नींद खुल रही थी क्योंकि मेरे कुछ काम अधूरे पड़े हुए थे और उनकी चिंता मेरे दिमाग में थी। आखिरकार मैं उठ ही गया और अपने अधूरे पड़े काम निपटाए, उसके बाद फिर से पढ़ाई की।

           मैं शाम की चाय पी रहा था कि मुझे उसकी आवाज सुनाई दी। वह दुकान की ओर जा रही थी। मैंने जल्दी-जल्दी चाय पी और बाहर आकर खड़ा हो गया। थोड़ी देर बाद वह दुकान से वापस आ रही थी और मेरे पास आने पर मुझसे दूर सड़क की दूसरी तरफ हो गई। मुझे बहुत बुरा लगा, हालांकि मैंने उससे पूछा कि आखिर मैंने ऐसा क्या कर दिया है जो तुम मुझसे नहीं बोल रही लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया और सीधी घर की ओर चली गई। उसके बाद मैं भी अपने घर के अंदर आ गया। थोड़ी देर बाद मैं बाहर की ओर निकल गया और जैसे ही मैं थोड़ा आगे पहुंचा उसके पड़ोस के घर से मुझे उसकी आवाज आ रही थी। मैं वहीं रुक गया। जैसे ही उसने मुझे देखा थोड़ी देर बाद वहां से उठकर अपने घर चली गई। वह शायद किसी काम से आई होगी और इतनी जल्दी ना भी जाती पर थोड़ी देर बाद तो चली ही जाती लेकिन मुझे देखकर और जल्दी चली गई। उसे लगा होगा कहीं मैं उसके पास तक ना आ जाऊं और फिर से कोई नई मुसीबत खड़ी ना हो जाए। जैसे ही वह उस घर से निकली, मैं उसके घर के सामने पहुंच गया और उसे घर के अंदर जाते हुए देखता रहा। उसके बाद मैं अपने घर वापस आ गया।

            शाम के समय मैं बाहर गया और मैंने देखा उसका दरवाजा खुला हुआ था और उसमें से वह अपने घर के अंदर काम करती हुई मुझे दिख रही थी। मैंने कुछ देर उसे देखने की कोशिश की लेकिन थोड़ी देर बाद वहां मेरे अन्य साथी भी आ गए। उसके बाद हम सब लोग वहीं बैठकर बातें करने लगे। जब रात होने लगी तो मैं किसी काम से घर वापस आ गया और मैंने वह काम निपटाया उसके बाद फिर से बाहर की ओर चला गया। तब तक वहां कोई नहीं था। उसका दरवाजा अभी थोड़ा खुला हुआ था। मैं वहीं बैठ गया। अभी रात हो चुकी थी। मैं बैठा रहा और उसके दरवाजे की ओर देखता रहा। वह मुझे आते-जाते दिख रही थी लेकिन वह दरवाजे पर नहीं आई और ना ही उसने इधर की ओर देखा। कुछ समय बाद मैं उठकर अपने घर आ गया। आज मेरे मन में फिर से एक उदासी थी। उससे बात करने का बहुत मन कर रहा है। आज दोपहर में उसने जिस तरह से मुझसे दूर हटने की कोशिश की, मैं बहुत उदास हो गया। मुझे लगा कि वह मुझसे नाराज है लेकिन कम से कम यह भी तो बताए कि मैंने किया क्या है… मेरी वजह से शायद उसके घर वालों ने उसे डांटा है लेकिन इसमें मेरी क्या गलती है… मैं तो हर परेशानी में उसके साथ हूँ।

           रात का खाना खाने के बाद रोज की तरह मैं टहलने निकल गया और आज की रात भी पहले की तरह खाली-खाली सी गुजर रही थी। उसके छत पर आने की वैसे तो मुझे कोई उम्मीद नहीं थी लेकिन आज दिन में उसने जो बर्ताव किया उससे मुझे यह महसूस हो गया कि वह अब काफी दिन तक छत पर नहीं आएगी, हालांकि मैं उसकी छत की ओर देखता रहा था। मुझे अच्छा लगता है उसकी प्रतीक्षा करना… कभी ना कभी तो आएगी। वह आज भी नहीं आई। मैं वहीं बैठा रहा और उसके बारे में सोचता रहा। जब रात काफी होने लगी तो मैं उठकर घर आ गया। घर आने के बाद मैंने अपने बाकी बचे काम निपटाए और उसके बाद डायरी लिखने बैठ गया। अभी रात के 12:00 बजने वाले हैं तो अब मैं चलता हूँ सोने, आपसे मिलूंगा कल फिर से एक और नई पोस्ट के साथ… शुभ रात्रि।

रविवार, 29 सितंबर 2024

उसे देखकर आज मेरे शरीर में एक अजीब सी कंपन महसूस हो रही थी | Daily Diary | 28 September 2024 Diary

 स्वागत है आप लोगों का मेरी डेली डायरी में, आज है 28 सितंबर 2024। सुबह उठने के बाद मैं बाहर गया और जैसे ही उसके घर के सामने पहुंचा, वह मुझे अपने घर के बाहर ही दिख गई। वह कुछ काम कर रही थी। मैंने उसे देखा और सुबह-सुबह उसे देखकर मुझे बहुत खुशी हुई। उसने मुझे देख लिया था लेकिन आसपास और भी लोग थे। उसके घर के कुछ सदस्य भी थे। इसलिए उसने यह तो देख लिया था कि मैं आ रहा हूँ लेकिन उसके बाद नहीं देखा। वह काम करती रही और मैं बीच-बीच में उसे देखता रहा क्योंकि लगातार देखना परेशानी का कारण बन सकता था। कुछ समय बाद उसने फिर से मेरी ओर देखा और शायद उसे मेरी उदासी समझ में आ रही होगी क्योंकि यह तो उसे भी पता है की कई दिन से हमारी कोई बातचीत नहीं हुई है और मैं बहुत परेशान हूँ। वह अपना काम समाप्त करके घर की ओर जाने लगी और अंदर जाने से पहले अपने दरवाजे के बाहर उसने एक बार और मेरी ओर देखा। उसके इस तरह देखने से मेरी परेशानी कुछ कम हुई क्योंकि मुझे लगा कि उसे मेरी चिंता है। उसके बाद मैं घर वापस आ गया।

         घर आने के बाद नहा धोकर मैंने नाश्ता किया। आज मैं उसके बाद बाहर नहीं जा सका इसलिए वह मुझे उसके बाद देखने को नहीं मिली। मैं पढ़ने बैठ गया और उसके बाद घर के अन्य काम किये। दोपहर के समय खाना खाने के बाद मैं बाहर गया लेकिन वह मुझे नहीं मिली। उसके कपड़े तार पर सूख रहे थे, इसलिए मैं समझ गया था कि वह नहा चुकी है और अब घर के अंदर होगी। दोपहर का समय है इसलिए खाना खाने के बाद आराम कर रही होगी और उसके बाहर आने की कोई उम्मीद नहीं थी। थोड़ी देर बाद मैं वापस घर आ गया। घर आने के बाद मैंने थोड़ी देर अपना कुछ काम किया और उसके बाद पढ़ने बैठ गया। आज मुझे पढ़ते-पढ़ते नींद आने लगी थी क्योंकि रात मेरी नींद पूरी नहीं हुई थी। इसलिए मैं आज दोपहर में सो गया और जब उठा तब तक शाम की चाय का समय हो चुका था। उसके बाद मैंने चाय पी और आज मैं काफी देर तक बाहर नहीं गया था।

             शाम के समय आज मैं बहुत थोड़ी देर के लिए बाहर गया था और अपने रोज के बैठने के स्थान पर आज नहीं गया। उससे पहले ही एक जगह बैठ गया। आज मुझे उसकी बहुत याद आ रही थी। मैं जब रास्ते में था तो मुझे उसकी आवाज आ रही थी। वह अपने घर के बाहर अपने परिवार के सदस्यों के साथ बातचीत कर रही थी। मैं उसकी आवाज सुनता रहा लेकिन मैं उसे झाँककर नहीं देख सकता था। मैं वहीं बैठ गया। थोड़ी देर बाद वह अपने पड़ोस के घर में गई और मैंने सोच लिया था कि अब मैं उसे देखकर ही जाऊंगा, तो मैंने उसे देखने की कोशिश की और वह मुझे दिख गई। वह थोड़ी देर के लिए किसी काम से अपने पड़ोस के घर आई थी। मैं बाहर से ही उसे देख रहा था। थोड़ी देर बाद वापस चली गई। मुझे ऐसा लगा जैसे उसने मुझे देख लिया है कि मैं बाहर खड़ा हूँ लेकिन उसने पूरी तरह से मेरी ओर नहीं देखा था। जब वह वापस जाने लगी तो मैं उसके घर के सामने पहुंच गया और मैं उसे घर के अंदर जाते हुए देख रहा था। जब वह अपने घर के अंदर चली गई तो मैं वहां से वापस आ गया।

        रात का खाना खाने के बाद रोज की तरह मैं टहलने बाहर निकल गया। वह आज भी छत पर नहीं आई। पता नहीं और कब तक मुझे उसकी प्रतीक्षा करनी पड़ेगी। आज मुझे अपने अंदर काफी उदासी महसूस हो रही है। उसकी बार-बार याद आ रही है। आज दोपहर से लेकर रात तक मुझे उसका नाम कहीं ना कहीं या तो सुनाई पड़ रहा है या दिखाई दे रहा है। जब मैं पढ़ रहा था तो उसका नाम कई बार मुझे लिखा हुआ दिखाई दिया। जब मैं टीवी देख रहा था तो समाचारों में उसका नाम बार-बार सुनाई पड़ रहा था। घर वाले टीवी पर एक फिल्म देख रहे थे और संयोग से उसमें एक हीरोइन का नाम वही था जो उसका नाम है तो मुझे बार-बार उसका नाम सुनने को मिल रहा था। मैंने कहीं सुना है कि अगर आपको किसी का नाम कहीं लिखा हुआ दिखाई दे या आपको सुनने को मिले तो उस समय वह व्यक्ति भी आपके बारे में सोच रहा होता है… अब पता नहीं यह बात कितनी सच है।

           बाहर से वापस आने के बाद मैंने अपना बाकी बचा काम निपटाया और उसके बाद अपनी आज की डायरी लिखने बैठ गया। आज मुझे उसकी बहुत ज्यादा याद आ रही है और दोपहर के समय जब मैंने उसे देखा था, उस समय मेरे शरीर में एक अजीब सी कंपन हो रही थी। पता नहीं वह मुझसे कब बात करेगी। अभी रात के 12:00 बज चुके हैं तो चलिए मैं चलता हूँ सोने, आपसे मिलूंगा कल फिर से एक और नई पोस्ट के साथ… शुभ रात्रि।

शनिवार, 28 सितंबर 2024

उसके बिना छत सूनी सी लगती है | Daily Diary | 27 September 2024 Diary | Personal Diary

 स्वागत है आप लोगों का मेरी डेली डायरी में, आज है 27 सितंबर 2024। कई दिन से मेरी नींद पूरी नहीं हो पा रही है, रात भी नहीं हुई थी तो आज सुबह मुझे उठने में फिर से थोड़ी परेशानी हुई लेकिन मैं समय पर उठ गया। मुझे सुस्ती आ रही थी तो मैं उठने के बाद कुछ देर ऐसे ही बैठा रहा, उसके बाद मैंने एक कप चाय पी और बाहर निकल गया। मेरा बहुत मन हो रहा था उसे देखने का और अगर वह सुबह-सुबह दिख जाती है तो मुझे दिनभर अच्छा लगता है लेकिन वह मुझे नहीं दिखी। मैं घर वापस आ गया। थोड़ी देर के बाद मैं फिर से बाहर गया और जैसे ही मैं थोड़ा आगे पहुंचा तो उसके पड़ोस के घर से मुझे उसकी आवाज आ रही थी। मैंने कोशिश की उसे देखने की लेकिन वह नजर नहीं आई। लेकिन जब मैं उधर से वापस आ रहा था तो वह पड़ोस के घर से निकलकर अपने घर की ओर जा रही थी। मैंने उसे देखा लेकिन उसने मेरी ओर नहीं देखा, हालांकि उसे पता चल गया था कि कुछ दूरी पर मैं जा रहा हूँ।

             आज सुबह-सुबह मुझे अपने पड़ोस के एक चाचा जी को छोड़ने के लिए स्टेशन तक जाना पड़ा। मैं उन्हें स्टेशन पर छोड़कर वापस आया और वापस आकर, नहा धोकर नाश्ता किया उसके बाद मैं फिर से बाहर की ओर निकल गया। बाहर जाकर फिर से मैंने उसे देखने की कोशिश की लेकिन वह नहीं दिखी। मैं वापस आ गया और अपना काम करने लगा। कुछ देर काम करने के बाद मैं पढ़ने बैठ गया। आज फिर से पढ़ने के दौरान मुझे सुस्ती आ रही थी और मेरी आंखें बार-बार बंद हो रही थीं। हालांकि मैं पढ़ता रहा लेकिन सुस्ती की वजह से कुछ समझ में नहीं आ रहा था तो मैं उठकर बाहर चला गया ताकि दिमाग कुछ ताजा हो सके। जब मैं बाहर चला ही गया था तो उसके घर के सामने जाकर मैंने उसे देखने की एक बार और कोशिश की लेकिन इस बार भी वह मुझे नहीं दिखी। थोड़ी देर बाद मैं वापस आ गया और फिर से पढ़ने बैठ गया।

          दोपहर हो चुकी थी। खाना खाने के बाद रोज की तरह मैं बाहर निकल गया। जब मैंने उसके घर की ओर देखा तो मुझे लगा कि वह इस समय मुझे दिख सकती है क्योंकि अभी तक तार पर उसने सूखने के लिए कपड़े नहीं डाले थे। मैं काफी देर वहीं रुका रहा और टहलता रहा। मैंने सोचा आज मैं उसे देखकर ही जाऊंगा। थोड़ी देर बाद मुझे उसकी आवाज आई लेकिन वह मुझे दिखाई नहीं दी। उस समय मैं उसके घर के सामने नहीं आ सकता था क्योंकि मेरे साथ एक अन्य व्यक्ति भी था तो मुझे वहीं रुकना पड़ा। कुछ समय बाद जब मैं वापस आया तो तब तक उसके कपड़े तार पर पड़े थे। मैं समझ गया कि वह कपड़े तार पर डालकर अंदर चली गई है और इस तरह उसे देखने से मैं फिर से चूक गया। मैं घर वापस आ गया और पढ़ने बैठ गया। आज मन थोड़ा सा उदास हो रहा था। मैंने पढ़ाई बंद की और ऐसे ही बैठा रहा। पता नहीं क्यों कुछ भी करने का मन नहीं कर रहा था।

          मैं काफी देर ऐसे ही बैठा रहा। मुझे उसकी बहुत याद आ रही थी। वह मुझे कई दिन से ठीक से देखने को नहीं मिली है। बहुत दूर से ही दिखती है, पास से देखने का कोई मौका मुझे नहीं मिला है। ऐसे ही सोचते सोचते काफी समय बीत गया। फिर मैंने मन को समझाया और पढ़ने बैठ गया। एक क्लास समाप्त करने के बाद मैं अपने दूसरे काम में लग गया। मैंने बारी-बारी से कुछ देर पढ़ाई की और कुछ देर काम किया। शाम की चाय का समय हो गया था। मैंने चाय पी और उसके बाद अपना बाकी बचा काम निपटाया। काम करने के बाद मैं बाहर की ओर निकल गया और जाकर उसके घर के पास एक जगह खड़ा हो गया। मैंने देखा उस समय तक वह घर के बाहर काम समाप्त करके अंदर जा चुकी थी। मैंने कुछ देर उसकी प्रतीक्षा की कि वह दोबारा बाहर आए लेकिन वह नहीं आई। कुछ समय बाद मैं घर वापस आ गया।

            शाम हो चुकी थी। मैं रोज की तरह बाहर चला गया और जाकर मैंने देखा… उसका दरवाजा खुला हुआ है लेकिन वह कहीं नजर नहीं आ रही थी। थोड़ी देर बाद वह मुझे नजर आई। उसे देखने के बाद मेरा मन और ज्यादा उदास हो रहा था क्योंकि मेरा बहुत मन था उससे बात करने का और इस समय पता नहीं उसके साथ क्या परेशानी चल रही है। मैं उससे ना तो मिल पा रहा हूँ और ना ही बात कर पा रहा हूँ और वह भी ज्यादा कुछ नहीं कर पा रही है। पता नहीं यह समस्या कब ठीक होगी। मैंने उस समय उसे थोड़ी-थोड़ी देर बाद दो-तीन बार और देखा लेकिन वह अभी भी मेरी तरफ नहीं देख रही है। पता नहीं उसके घर वालों ने उससे क्या कह दिया है। थोड़ी देर बाद मैं घर वापस आ गया और फिर बाहर नहीं गया।

            रात का खाना खाने के बाद मैं टहलने के लिए बाहर चला गया। मैं जाकर अपने स्थान पर बैठ गया। थोड़ी देर बैठने के बाद मैं टहलने लगा। मैंने देखा उसकी छत पर कोई तो है लेकिन वह नहीं है। वे उसके परिवार के कुछ सदस्य थे। इस समय अंधेरी रात हो रही है तो साफ-साफ देखना संभव नहीं है। उसे छत पर देखने का मेरा बहुत मन कर रहा था। पता नहीं वह छत पर कब आएगी। उस समय मैं फिर से उदास हो रहा था। कुछ देर टहलने के बाद मैं वापस वहीं बैठ गया। उसकी छत की ओर देखा तो वहां कोई नहीं था। मुझे उसकी छत सूनी-सूनी सी लग रही थी। मेरा मन कर रहा था कि वह अभी छत पर आ जाए या अपना दरवाजा खोलकर मेरे पास आ जाए। उसके आने की कोई उम्मीद नहीं थी लेकिन फिर भी मैं उसकी रोज प्रतीक्षा करता हूँ, मुझे अच्छा लगता है। कुछ समय बाद मैं घर आ गया। आज मैं घर जल्दी आ गया था। घर आकर मैंने बाकी बचे अपने काम निपटाए। आज उसकी याद मुझे लगातार आ रही है। मुझे अंदर से थोड़ा गुस्सा भी आ रहा है उसके घर वालों पर और थोड़ा सा उस पर भी।

         अभी रात के 11:30 बज चुके हैं और अभी मुझे सोने जाना है क्योंकि कल मुझे सुबह जल्दी उठना है, तो अब मैं चलता हूँ सोने… आपसे मिलूंगा कल फिर से एक और नई पोस्ट के साथ… शुभ रात्रि।

शुक्रवार, 27 सितंबर 2024

वो आधे बंद दरवाजे में से मुझे देख लेती थी... उसके देखने के तरीके में मुझे शिकायत दिख रही है | Daily Diary | 26 September Diary

 स्वागत है आप लोगों का मेरी डेली डायरी में, आज है 26 सितंबर 2024। जब मैं सुबह सो कर उठा तो मुझे उठने में आज फिर से परेशानी हुई क्योंकि रात मेरी नींद पूरी नहीं हुई थी। रात मैं 1:00 बजे के बाद सोया था। 1:00 बजे तो मैं सोने के लिए बिस्तर पर गया था और उसके बहुत देर बाद मुझे नींद आई होगी क्योंकि मुझे करवटें बदलते बदलते काफी देर हो चुकी थी और पता नहीं कब नींद आई। सुबह अपने नियत समय से पहले ही मेरी आंख खुल गई थी। मैं रात पूरी नींद नहीं ले पाया और आज मैं दिन में भी नहीं सोया।

         सुबह मैं सो कर उठा और उठने के कुछ देर बाद काम से बाहर गया। उसके घर की ओर जाते हुए मेरी निगाहें उसे ही तलाश रही थीं क्योंकि मुझे उसकी बहुत चिंता हो रही है… पता नहीं वह कैसी होगी, उसे किसी ने कुछ कहा तो नहीं है। मुझे थोड़ी देर प्रतीक्षा करनी पड़ी। कुछ समय बाद वह घर से बाहर आई। मैंने उसे देखा तो मुझे बहुत अच्छा महसूस हुआ। उसने भी थोड़ी देर के लिए मेरी ओर देखा और उसकी नजरों में मुझे अभी कुछ शिकायत नजर आ रही है। उसके बाद वह घर के अंदर चली गई। मैंने थोड़ी देर और प्रतीक्षा की लेकिन वह बाहर नहीं आई। फिर मैं वापस घर आ गया। उसके बाद मैंने एक-दो चक्कर और लगाए उसके घर की ओर लेकिन वह मुझे देखने को नहीं मिली। फिर मैं घर आ गया और नहा धोकर नाश्ता करने के बाद एक बार फिर से बाहर आया लेकिन वह मुझे अभी भी दिखाई नहीं दी। मैं वापस घर लौट आया और पढ़ने बैठ गया।

          मैं कुछ देर पढ़ा और उसके बाद मैंने अपने कुछ अन्य काम किये। रात नींद पूरी न होने की वजह से मुझे दिन में सुस्ती आ रही थी लेकिन मैंने तय कर लिया था कि मैं आज दिन में नहीं सोऊंगा क्योंकि मुझे पढ़ाई भी करनी थी और मेरे अन्य काम भी बचे हुए थे जो कि हर हाल में करने थे। मैं बारी-बारी से कभी पढ़ता तो कभी अपने काम करता। इसी तरह दोपहर हो गई। मैंने दोपहर का खाना खाया और उसके बाद बाहर चला गया। जब मैं उसके घर के पास पहुंचा तो मुझे उसकी आवाज सुनाई दी। वह अपने दरवाजे पर थी और उसे देखने के लिए मुझे घूम कर दूसरी ओर से जाना पड़ता जो कि उस समय संभव नहीं था क्योंकि वहां और भी कई लोग थे। मुझे उसकी आवाज सुनकर ही संतोष करना पड़ा। वह मुझे देखने को नहीं मिली। थोड़ी देर बाद मैं घर वापस आ गया। मैंने फिर से कुछ देर पढ़ाई की और उसके बाद अपने कुछ काम निपटाए। दोपहर भर यही सिलसिला चलता रहा।

           मैं दोपहर को एक बार और बाहर गया और इस बार वह मुझे देखने को मिल गई। अपने गीले कपड़े जो उसने तार पर सूखने के लिए डाले हुए थे वह सूख चुके थे, और उन्हें उतार कर रख रही थी। मैंने कुछ देर उसे देखा। उसने भी मुझे देख लिया था लेकिन वह अभी मजबूर है। मैं उसे तार पर से कपड़े उतारते हुए देख रहा था। कपड़े उतारने के बाद वह घर के अंदर चली गई और मैं अपने घर वापस आ गया। शाम की चाय का समय हो गया था। मैंने चाय पी और उसके बाद फिर से पढ़ने बैठ गया क्योंकि अभी शाम को मेरे बाहर जाने का समय नहीं हुआ था। कुछ समय पढ़ाई करने के बाद मैंने अपने कुछ और काम किये।

         अब शाम हो चुकी थी और यह समय था मेरे बाहर जाने का, तो मैं घर से बाहर की ओर निकल गया… अपने उसी नियत स्थान पर बैठने के लिए और आज जैसे ही मैं वहां पहुंचा वह मुझे दरवाजे पर खड़ी मिल गई। वह अपनी एक सहेली से बात कर रही थी। जैसे ही मैंने उसे देखा, मैं एकदम से खुश हो गया और मोबाइल चलाते हुए मैं उसे देखता रहा। उसने मुझे देखा और थोड़ी देर बाद दरवाजा आधा बंद कर लिया। वह आधे बंद दरवाजे में से ही झाँककर मुझे देख लेती थी। थोड़ी देर वहां बातें करने के बाद वह और उसकी सहेली अंदर की ओर हो गए और दरवाजा बंद कर लिया। अब उसके फिर से आने की कोई संभावना नहीं थी। मैं कुछ देर वहीं खड़ा रहा उसके बाद घर से मेरा बुलावा आ गया और मैं वापस घर आ गया।

        रात का खाना खाने के बाद आज मैं और मेरे साथी टहलने के लिए गांव से बाहर निकल गए और जब हम वहां से वापस लौटे तो कुछ देर के लिए अपने नियत स्थान पर बैठ गए। उसके छत पर आने की कोई संभावना नहीं थी और अगर आती भी तो हम लोग बातचीत नहीं कर पाते क्योंकि मेरे साथी वहां बैठे थे। हम कुछ देर वहां बैठे बातें करते रहे और उसके बाद मुझे नींद आने लगी क्योंकि रात नींद पूरी न होने की वजह से मेरी आंखों में नींद भरी थी। मैं घर वापस आ गया। घर आने के बाद मैंने अपने आज के बाकी बचे काम निपटाए और उसके बाद मैंने अपनी आज की डायरी लिखनी शुरू की। हालांकि मुझे एक बार को लगा कि मैं आज ना तो कुछ काम कर पाऊंगा और ना ही डायरी लिख पाऊंगा क्योंकि मुझे नींद भी आ रही थी और शायद इसी वजह से मन नहीं कर रहा था। लेकिन मैंने अपने मन को मजबूत किया और अपने लक्ष्य पर फोकस किया और काम करने के बाद डायरी लिखने बैठ गया। अभी रात के 11:15 बजने वाले हैं और मुझे आज काफी नींद आ रही है तो मैं चलता हूँ सोने, आपसे मिलूंगा कल फिर से एक और नई पोस्ट के साथ… शुभ रात्रि।

गुरुवार, 26 सितंबर 2024

उसने मेरी ओर इस तरह से देखा जैसे वो सहमी हुई है | Daily Diary | 25 September 2024 Diary | Personal Diary

 स्वागत है आप लोगों का मेरी डेली डायरी में, आज है 25 सितंबर 2024। रोज की तरह आज सुबह मैं अपने समय पर उठा लेकिन आज कोई काम नहीं था इसलिए उस समय मैं बाहर नहीं गया। सुस्ती उतारने के लिए मैंने एक कप चाय पी और फिर थोड़ी देर बाद बाहर की ओर निकल गया। रास्ते में मुझे उसकी आवाज सुनाई दी, मैंने गौर से सुना तो वह अपने पड़ोस के घर में किसी काम से आई थी। मैं वहीं रुक गया। मैंने उसे देखने की कोशिश की लेकिन वह पता नहीं कहां खड़ी थी, मुझे दिखाई नहीं दे रही थी लेकिन उसकी आवाज बराबर आ रही थी। मैं वहीं खड़ा रहा। थोड़ी देर बाद जब वह अपने घर जाने लगी तो मुझे दिखाई दी। मैं तुरंत वापस हो गया क्योंकि मुझे उसके घर के सामने पहुंचना था ताकि वह अपने घर जाते हुए दिखाई दे। जैसे ही मैं उसके घर के सामने पहुंचा, वह अपने घर जा रही थी। मैं तो उसे देख रहा था लेकिन उसने मुझे नहीं देखा और उसे पता भी नहीं चला कि मैं यहां हूँ। वह अपने घर के अंदर चली गई, उसके बाद मैंने थोड़ी देर और प्रतीक्षा की फिर मैं घर वापस आ गया।

          घर आकर मैंने घर के कुछ काम किये और उसके बाद मैं अपने घर के बाहर यूं ही खड़ा था कि तभी मुझे किसी ने कुछ काम से बुला लिया। तो इस तरह से मुझे एक बार फिर उसके घर के सामने से जाने का मौका मिला और जैसे ही मैं उसके घर के सामने पहुंचने ही वाला था कि वह मुझे अपने घर से बाहर निकलती हुई दिखाई दी। कुछ कदम चलने के बाद में जैसे ही उसके घर के सामने पहुंचा तो मैंने उसकी ओर देखा तो वह मेरी ओर ही देख रही थी। मैं सीधा आगे निकल गया और जिसने मुझे बुलाया था उसके पास जाकर उसका काम किया। मुझे घर लौटने में थोड़ी देर हो गई थी। घर आकर मैं नहाया धोया और उसके बाद नाश्ता किया। थोड़ी देर बाद मुझे किसी काम से फिर बाहर की ओर जाना पड़ा और इस बार भी जैसे ही मैं उसके घर के सामने पहुंचा तो वह मुझे अपने घर के बाहर ही कुछ काम करते हुए दिख गई। उसने मेरी ओर देखा तो मैंने यह महसूस किया कि वह थोड़ी परेशान सी है। मैंने उससे इशारों में पूछना चाहा कि क्या परेशानी है… लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया और घर के अंदर चली गई। वह काफी दुखी है। मैं आगे बढ़ गया और काम समाप्त करके वापस घर आ गया।

          वापस आकर मैं पढ़ने बैठ गया। थोड़ी देर पढ़ने के बाद मुझे सुस्ती आने लगी तो मैं लेट गया और मुझे नींद आ गई। थोड़ी देर बाद मेरी आंख खुली तो मैं फिर से पढ़ने बैठ गया। दोपहर का समय हो चुका था। मैंने खाना खाया और इस बार मुझे बाहर जाने का मौका नहीं मिला क्योंकि आज बारिश हो रही थी। सुबह से मौसम साफ था लेकिन अचानक बादल आए और बारिश शुरू हो गई तो मैं अपने कमरे में जाकर आराम करने लगा। अब मैं बाहर तो नहीं जा सकता था क्योंकि बारिश हो रही थी तो मैंने कुछ देर आराम करने के बाद पढ़ाई की और उसके बाद अपने कुछ काम किये। शाम तक यूं ही चलता रहा। जब शाम की चाय का समय हो गया तो मैंने चाय पी और उसके बाद फिर से अपने काम में लग गया।

           अब शाम हो चुकी थी और मेरे बाहर जाने का समय हो चुका था तो मैं बाहर की ओर निकल गया। जब मैं बाहर पहुंचा तो मुझे थोड़ी देर ही हुई थी कि मैंने देखा वह अपनी छत पर है। लेकिन मुझसे पहले शायद उसने मुझे देख लिया था और वह तभी नीचे चली गई। उसके बाद मैंने उसे छत पर देखने की काफी कोशिश की लेकिन वह नजर नहीं आई। आज मेरा मन उदास हो रहा था। कुछ समय बाद मैं घर वापस आ गया।

           अब रात हो चुकी थी। मैंने रात का खाना खाया और रोज की तरह टहलने निकल गया और जाकर अपने नियत स्थान पर थोड़ी देर के लिए बैठा, उसके बाद टहलने लगा। अब कुछ दिन तक उसके छत पर आने की कोई उम्मीद नहीं है और आज भी कुछ ऐसा ही हुआ, वह छत पर नहीं आई। मैं कुछ देर टहलता रहा, उसके बाद वहीं बैठ गया। मैंने सोचा कि थोड़ी देर उसकी प्रतीक्षा ही कर लेता हूँ, क्या पता आ ही जाए। हालांकि मुझे उसके आने की कोई भी उम्मीद नहीं थी लेकिन मुझे उसकी प्रतीक्षा करना अच्छा लग रहा था। जब रात काफी होने लगी तो मैं घर वापस आ गया। घर आकर मैं अपने काम में लग गया और आज मुझे काफी रात हो चुकी है। अभी रात का 1:00 बजने वाला है और अभी मुझे नींद नहीं आ रही है। लेकिन अगर मैं देर तक जागता रहा तो सुबह नहीं उठ पाऊंगा इसलिए अब मैं चलता हूँ सोने, आपसे मिलूंगा कल फिर से एक और नई पोस्ट के साथ… शुभ रात्रि।

बुधवार, 25 सितंबर 2024

आज उसने दरवाजा खोल कर बाहर देखा... वो काफी डरी हुई है | Daily Diary | 24 September Diary

 स्वागत है आप सभी लोगों का मेरी डेली डायरी में, आज है 24 सितंबर 2024। आज सुबह एक बार फिर से कल की तरह मेरी आंख उठने के नियत समय से पहले ही खुल गई और मुझे नींद नहीं आ रही थी लेकिन फिर भी मैं आंखें बंद करके लेटा रहा। जब मेरी आंख खुली तो मुझे एक और नई चिंता ने घेर रखा था शायद इसी वजह से मेरी आंख जल्दी खुल गई। मैंने कोशिश की कि मुझे फिर से नींद आ जाए लेकिन ऐसा नहीं हुआ। थोड़ी देर बाद मेरे उठने का समय हो गया। मैं उठा और थोड़ी देर बाद काम से बाहर गया। उसके घर की ओर जाते हुए मैंने उसे देखने की कोशिश की लेकिन वह मुझे दिखाई नहीं दी, मैं काम समाप्त करके घर वापस आ गया।

          नहा धोकर मैंने नाश्ता किया और बाहर निकल गया। रास्ते में उसके घर के सामने जाते हुए मैंने एक बार फिर से कोशिश की कि वह मुझे दिख जाए लेकिन फिर से मैं उसे नहीं देख पाया। जब वह मुझे काफी देर तक नहीं दिखती है तो मुझे उसके बारे में चिंता होने लगती है। थोड़ी देर बाद मैं वापस आ गया और पढ़ने बैठ गया। कुछ देर पढ़ने के बाद मैं उठा और बाहर चला गया क्योंकि आज मुझे लग रहा था कि वह मुझे इस समय दिख जाएगी। यह उसके घर के सारे काम धंधे निपटा कर नहा धोकर आराम करने का वक्त था तो मुझे लग रहा था कि वह नहाने जाते हुए या उसके बाद कपड़े धोकर तार पर डालते हुए कभी ना कभी तो मुझे दिखेगी। इसी आस में मैं बाहर निकल गया और सौभाग्य से मैं उसके घर के सामने जैसे ही पहुंचा वह मुझे दिख गई। वह अभी-अभी नहा कर आई थी। जैसा मैंने सोचा था ठीक वैसा ही हुआ। मैं उसे देखकर खुश हो गया। जब उसे लगा कि मैं कहीं दूर से उसे देख रहा हूँ तो उसने थोड़ा सा मेरी और देखा और अपनी निगाह हटा ली। अभी भी वह घर की बातों से परेशान है और उसके व्यवहार में यह साफ झलकता है। थोड़ी देर बाद वह अंदर चली गई। मैंने उसके बाद थोड़ी और प्रतीक्षा की कि वो फिर से बाहर आए लेकिन वह नहीं आई। कुछ देर बाद मैं घर वापस आ गया।

           अब दोपहर हो चुकी थी। मैंने कुछ देर पढ़ाई की और उसके बाद जब दोपहर के खाने का समय हो गया तो मैं खाना खाकर एक बार फिर से बाहर टहलने निकल गया। लेकिन अब उसके दिखने की कोई उम्मीद नहीं थी। मैं कुछ देर बाद घर वापस आ गया और पढ़ने बैठ गया। थोड़ी देर पढ़ने के बाद मैंने अपने दूसरे काम किये। 2 दिन से मुझे ठीक से नींद नहीं आ रही थी, इसकी वजह से मेरी नींद पूरी नहीं हो पा रही थी तो आज दोपहर में मैं कुछ देर के लिए सो गया। जब मैं सो कर उठा तो चाय बन चुकी थी। मैंने चाय पी और थोड़ी देर मोबाइल में कुछ काम किया। उसके बाद मैं बाहर निकल गया और उसके घर के पास ही एक जगह जाकर खड़ा हो गया, जहां से उसके दिखने की उम्मीद थी। मुझे खड़े हुए कुछ देर हो गई थी और मेरी निगाहें उसी के इंतजार में थीं। थोड़ी देर बाद वह किसी काम से अपने घर के बाहर आई। मैंने उसे देखा तो मुझे काफी अच्छा लगा लेकिन उसने मेरी ओर नहीं देखा। शायद उसके आसपास कोई और होगा। वह घर के अंदर चली गई। मैं कुछ देर तक वहीं खड़ा रहा, जब मुझे लगा कि अब वह बाहर नहीं आएगी तो मैं भी घर वापस आ गया।

          शाम का समय था। मैं रोज की तरह उसी जगह जाकर बैठ गया जहां हम सभी लोग शाम के समय मिलते हैं। हम सभी लोग बैठकर बातें कर रहे थे। थोड़ी देर बाद मैंने देखा कि उसका दरवाजा थोड़ा सा खुला हुआ है और उसमें से वह मुझे अपने घर काम करते हुए दिख रही थी, लेकिन इतनी अच्छी तरह से नहीं। बस मुझे उसकी पहचान पड़ रही थी कि वही है। वह अपने घर काम कर रही थी और काम करते मैं उसे देख रहा था। मुझे इतने में ही बड़ी खुशी मिल रही थी। थोड़ी देर बाद दरवाजा बंद हो गया। कुछ देर बाद हम सभी लोग गांव से बाहर टहलने निकल गए और जब वहां से लौटे तो शाम हो चुकी थी, फिर मैं घर वापस आ गया।

             रात का भोजन लेने के बाद मैं टहलने निकल गया। मैं टहलते हुए ही मोबाइल में कुछ काम कर रहा था और साथ ही साथ उसके दरवाजे की ओर भी देख रहा था कि काश वो दरवाजा खोलकर बाहर देखे। मुझे इतना तो पता चल रहा था कि वह अपने घर कुछ काम कर रही है क्योंकि यह खाने का समय होता है तो खाना खाने के बाद शायद बर्तन साफ कर रही थी। मुझे टहलते हुए कुछ देर हो गई थी। थोड़ी देर बाद अचानक दरवाजा खुला और यह वही थी। उसने देखा और तुरंत दरवाजा बंद कर लिया। इससे मुझे एहसास हो गया कि वह काफी डरी हुई है। लेकिन मुझे इस बात की खुशी है कि कम से कम उसने आज दरवाजा खोल कर देखा तो… कुछ दिनों में सब ठीक हो जाएगा। उसके बाद जैसे कि मुझे उम्मीद थी, वह छत पर नहीं आई।

           कुछ समय बाद मेरे अन्य साथी भी वहां आ गए फिर हम वहां बैठकर बातें करने लगे। जब रात काफी होने लगी तो हम अपने-अपने घर आ गए। घर आकर मैंने अपना बाकी बचा काम निपटाया और मुझे काम करते-करते 11 बज गए थे। अभी रात के 11:30 बज चुके हैं और मुझे नींद भी आने लगी है तो अब मैं चलता हूँ सोने, आपसे मिलूंगा कल फिर से एक और नई पोस्ट के साथ… शुभरात्रि।

मंगलवार, 24 सितंबर 2024

तो इस वजह से वो मुझसे बात नहीं कर रही है | Daily Diary | 23 September Diary

 स्वागत है आप सभी लोगों का मेरी डेली डायरी में, आज है 23 सितंबर 2024। मेरा आज का दिन काफी हद तक ठीक था अगर सुबह को छोड़ दें तो। कल के मुकाबले आज काफी अच्छा महसूस हो रहा था। आज कुछ ऐसी बात पता चली जिससे मुझे थोड़ी शांति मिली। लेकिन सुबह का समय कल जैसा ही था। अपने जागने के समय से 1 घंटा पहले ही मेरी आंख खुल गई थी और तब से मुझे नींद नहीं आ रही थी। मन में वही कल वाली बातें चल रही थीं, हालांकि उस समय काफी रात थी और मैं सोने की कोशिश कर रहा था लेकिन कल की बात को लेकर एक अजीब सी चिंता दिमाग में रह रहकर उठ रही थी और मुझे नींद नहीं आई। यही सब चलते-चलते मेरे उठने का समय हो गया।

          मैं सुबह सोकर उठा तो मन कुछ ठीक नहीं था। उठने के बाद मैं काम से बाहर गया। उसके घर की ओर जाकर मैंने उसे देखने की कोशिश की लेकिन वह दिखाई नहीं दी। काम समाप्त करके मैं वापस घर आ गया। नहा धोकर मैंने नाश्ता किया और बाहर की ओर निकल गया। आज मुझे एक और बात पता चली जिससे मेरे मन को थोड़ी शांति मिली हालांकि बात अच्छी नहीं थी। मुझे पता चला कि उसके घर में एक बार फिर से हमें लेकर कुछ बातें हुई हैं और इसी बात को लेकर वह थोड़ी परेशान हो गई है। उस दिन इसीलिए मुझे देखकर वह अपनी छत पर से नीचे चली गई थी। उस समय तक मुझे कुछ पता नहीं था तो आज जब मुझे वह बात पता चली तो मुझे समझ में आया कि वह नीचे क्यों गई थी। सावधानी बरतते हुए उसने यह कदम उठाया। अगर वह नहीं जाती और कोई हमें वहां देख लेता, उसे उसकी छत पर और मुझे थोड़ी दूरी पर बैठे हुए, तो उसे शक हो जाता। हालांकि मुझे परेशानी हो रही है लेकिन मैं उसके साथ हूँ। उसने ठीक किया। अब मुझे समझ में आ रहा है कि कुछ दिनों से वह थोड़ी अलग तरह का व्यवहार क्यों कर रही है।

           बाहर से आने के बाद मैं पढ़ने बैठ गया। कुछ देर पढ़ने के बाद मैंने घर के अन्य काम किये। दोपहर को खाना खाया और आदतन बाहर की ओर निकल गया। उसे देखने की मैंने कोशिश की लेकिन वह मुझे दिखाई नहीं दी। फिर वापस आकर मैं कुछ देर और पढ़ा, उसके बाद मैंने अपने कुछ काम किये। शाम तक यूं ही चलता रहा। शाम के समय जब मैं अपने घर पर था तो बाहर से मुझे उसकी आवाज सुनाई दी। यह आवाज इतनी साफ तो नहीं थी लेकिन मुझे लग गया था कि यह उसी की आवाज है। मैं तुरंत अपने घर से बाहर आया और सौभाग्य से यह वही थी और दुकान से घर वापस जा रही थी। मैंने उसे देखा तो मुझे बहुत खुशी हुई। जाते हुए उसने भी साइड से मेरी ओर देखा और आगे चली गई। आज पता नहीं क्यों वह मुझे बहुत अच्छी लग रही थी।

          शाम हो चुकी थी। शाम की चाय पीने के बाद मैं फिर से बाहर निकल गया और जैसे ही मैं उसके घर के पास पहुंचा, वह अपने घर के बाहर ही बच्चे को खिला रही थी। हालांकि उसके आसपास और भी लोग थे उसके घर के, लेकिन मैं थोड़ी दूरी पर था और वहां से मैं और किसी को नहीं दिख रहा था… केवल वही मुझे देख सकती थी। मैं कुछ देर वहीं खड़ा रहा और उसे देखता रहा लेकिन वहां ज्यादा देर खड़े होना ठीक नहीं था तो मैं वापस आ गया। थोड़ी देर बाद मैं फिर से बाहर की ओर गया लेकिन तब तक वह अपने घर के अंदर जा चुकी थी। मैं आगे निकल गया और कुछ देर बाद वापस आया। घर आने के बाद मैंने कुछ काम किया और उसके बाद फिर से बाहर चला गया। अब यह समय था मेरे नियत स्थान पर जाकर बैठने का क्योंकि शाम के समय हम सभी लोग वहां इकट्ठे हो जाते हैं और बातें करते रहते हैं। मैं वहां जाकर बैठ गया और मोबाइल में कुछ काम करने लगा क्योंकि अभी तक मैं अकेला बैठा था। मैं उसकी प्रतीक्षा कर रहा था कि वह दिखाई दे लेकिन वह नहीं दिखी। थोड़ी देर बाद अन्य लोग भी आ गए और हम बातें करते रहे। जब रात होने लगी तो मैं घर वापस आ गया।

         रात का खाना खाने के बाद रोज की तरह मैं बाहर टहलने निकल गया। आज की बात को लेकर मुझे लग रहा था कि अभी कुछ दिन तक वह छत पर नहीं आएगी और ऐसा ही हुआ। आज वह छत पर नहीं आई लेकिन उसके परिवार के कुछ और सदस्य छत पर थे। मैं और मेरे साथी वहीं कुछ देर टहलते रहे। उसके बाद हम चलते-चलते गांव से बाहर निकल गए और जब घर आने का समय हुआ हम लोग वापस आ गए। आज मैं अपने कुछ काम दिन में नहीं कर पाया था तो मैंने वापस आकर अपने वह काम निपटाए और अब काम निपटाने के बाद मैं यह डायरी लिख रहा हूँ। अभी रात के 11:30 बजने वाले हैं तो अब मैं चलता हूँ सोने, आपसे मिलूंगा कल फिर से एक और नई पोस्ट के साथ… शुभ रात्रि।

सोमवार, 23 सितंबर 2024

आज कल से भी ज्यादा निराशा हो रही थी... आधा घंटा भी नहीं पढ़ पाया | Daily Diary | 22 September Diary

 स्वागत है आप सभी लोगों का मेरी डेली डायरी पोस्ट में, आज है 22 सितंबर 2024। मेरा आज का दिन कल से भी ज्यादा खराब रहा। आज पूरे दिन बस नकारात्मक विचार मन में आते रहे। आज ना तो मेरी पढ़ाई हुई और ना ही मैं कोई और काम ठीक से कर पाया। आज दिन भर में मैं आधा घंटा भी नहीं पढ़ पाया।

       आज मैं सुबह सो कर उठा लेकिन रोज के अपने काम से बाहर नहीं गया। उठने के बाद काफी देर तक मैं घर पर ही रहा। उसके बाद मैंने एक गिलास पानी पिया और तब बाहर गया। उसके घर के सामने से जाते हुए मैंने थोड़ा सा उसे देखने की कोशिश की लेकिन वह दिखाई नहीं दी। फिर मैं वापस आ गया लेकिन मैं जैसे ही वापस आ रहा था तो मैंने देखा कि वह दुकान पर जा रही है। मैं अपने घर चला गया और थोड़ी देर बाद ही बाहर आ गया क्योंकि वह दुकान पर से जब वापस आती तो मुझे रास्ते में मिलती। लेकिन सुबह का समय था तो कोई ना कोई रास्ते पर निकल रहा था और आसपास के घरों के बाहर भी कोई न कोई खड़ा था। जैसे ही वह वापस आई उस समय कोई व्यक्ति मेरे आस-पास था तो मैं उसे रास्ते में नहीं मिल पाया। मैं थोड़ा दूर हो गया ताकि कोई कुछ गलत ना समझे। मैंने उसकी ओर देखा तो मुझे ऐसा लगा कि वह साइड में देखते हुए मुझे देखने की कोशिश कर रही है। लेकिन हम दोनों एक दूसरे को ठीक से देख नहीं पाए। वह अपने घर चली गई, थोड़ी देर बाद मैं अभी अपने घर आ गया।

         घर आने के बाद मैंने नहा धोकर नाश्ता किया और उसके बाद बाहर निकल गया। कुछ समय तक मैं बाहर रहा फिर घर वापस आ गया। वह मुझे अभी देखने को नहीं मिली थी। आज मेरा पूरा दिन बहुत ही खराब बीता। मैं समय-समय पर बाहर आता जाता रहा था लेकिन वह मुझे पूरे दिन दिखाई नहीं दी। एक बार मैं उसके घर के पास ही खड़ा था तो मुझे उसकी आवाज तो अंदर से आ रही थी लेकिन वह बाहर नहीं आई। मैंने काफी प्रतीक्षा की कि वह बाहर आए लेकिन मुझे निराश होकर वापस लौटना पड़ा। वापस आकर मैं अपने कमरे में चला गया और यूं ही लेटा रहा, उसके बारे में सोचता रहा। फिर थोड़ी देर मोबाइल चलाया और फिर पढ़ने की कोशिश की। यही वह समय था जब मैं पूरे दिन में बस एक बार ही पढ़ पाया था, वह भी आधा घंटे से भी कम समय के लिए। आज मैंने दोपहर में खाना भी नहीं खाया, मन ही नहीं कर रहा था। मैं बस यूं ही लेटा हुआ उसके ख्यालों में खोया हुआ था।

           अब शाम हो चुकी थी। चाय पीने के बाद मैं फिर से बाहर गया लेकिन वह मुझे फिर भी दिखाई नहीं दी लेकिन मुझे ऐसा लगा कि जैसे उसकी आवाज मेरे कानों में आई हो। मैं वापस घर आ गया लेकिन थोड़ी देर के बाद घर के कुछ काम निपटाने के बाद फिर से बाहर चला गया और जाकर अपने नियत स्थान पर बैठ गया। उसका दरवाजा बंद था। मैं थोड़ी देर वहीं बैठा रहा, उसके बाद मुझे किसी काम से घर आना पड़ा। घर आने के बाद मैं काम में व्यस्त हो गया और फिर मुझे बाहर जाने का मौका नहीं मिला। जब रात हो चुकी थी तो मैं थोड़ी देर के लिए उसके घर के पास गया तो मैंने देखा वह छत पर थी। उसके साथ उसके घर की कुछ और महिलाएं भी थीं। अंधेरे में मुझे यह नहीं दिख रहा था कि वह मेरी ओर देख रही है या नहीं लेकिन मुझे लगा कि उसने मुझे देखा।

          रात का खाना खाने के बाद मैं अपनी दिनचर्या अनुसार बाहर टहलने के लिए निकल गया। मैं अपने उसी नियत स्थान पर थोड़ी देर के लिए बैठा और उसके बाद टहलने लगा। मैंने उसका इंतजार किया लेकिन वह छत पर नहीं आई। कुछ देर के बाद मेरे और दोस्त भी आ गए, फिर हम सब वहां बातें करते रहे। मैं बार-बार उसकी छत की ओर देख रहा था कि काश वो आ जाए लेकिन वह नहीं आई। हम सभी लोग अपने-अपने घर लौट आए क्योंकि रात काफी हो चुकी थी और हमें नींद भी आ रही थी। घर आने के बाद मैंने थोड़ा सा अपना काम किया और उसके बाद मन को शांत करने के लिए मोबाइल चलाता रहा। अब जब मैं अपनी आज की डायरी लिख रहा हूँ उस समय 11:30 बज चुके हैं।

           मेरा आज का दिन कल से ज्यादा खराब रहा। मुझे दिनभर निराशा घेरे रही और कई नकारात्मक विचार मन में आते रहे। कई बार मैंने मन को समझाया और शांत किया लेकिन उससे बात किए बिना मन शांत होने वाला नहीं है और अभी तक मेरी उससे बात नहीं हुई है। आज तो मैंने उसे ठीक से देखा भी नहीं। अभी रात के 12:00 बजने वाले हैं तो अब मैं चलता हूँ सोने, आपसे मिलूंगा कल फिर से एक और नई पोस्ट के साथ… शुभ रात्रि।

रविवार, 22 सितंबर 2024

कल की बातें आज भी मेरे मन में घूमती रहीं | Daily Diary | 21 September 2024 Diary

 स्वागत है आप सभी लोगों का मेरी डेली डायरी पोस्ट में, आज है 21 सितंबर 2024। आज दिन भर मेरा मन उदास रहा, बस कल से थोड़ा सा कम उदास था लेकिन उतना भी नहीं कि मैं कुछ ठीक से कर पाता। कल की बातें मेरे दिमाग में रह रहकर घूम रही थीं और मैं जैसे ही पढ़ने बैठता, मुझे कल की बातें याद आने लगतीं। हालांकि मैंने बहुत कोशिश की कि मैं अपनी पढ़ाई और दूसरे काम ठीक से कर पाऊं। इसमें मैंने कुछ हद तक सफलता भी प्राप्त की और मैं पढ़ा भी साथ ही दूसरे काम भी किये। बस फर्क इतना था कि पढ़ने या दूसरे काम करते हुए मेरे दिमाग में लगातार कल की बातें घूमती रहीं लेकिन मैंने हार नहीं मानी और मैं पढ़ता रहा।

         सुबह सोकर उठने के बाद मैं काम से बाहर गया लेकिन आज मेरे मन में उसे देखने की कोई खास उम्मीद नहीं थी और वह मुझे आज दिखाई भी नहीं दी। मैं वापस आ गया। घर आकर नहा धोकर नाश्ता किया और उसके बाद यूं ही घर से बाहर निकल गया। उसके घर के सामने से जाते हुए आज मैंने कोई खास कोशिश नहीं की उसे देखने की और मैं सीधा निकल गया। वापस आते हुए भी ऐसा ही हुआ और वह मुझे दिखाई भी नहीं दी। मुझे कल से बहुत गुस्सा आ रहा है उस पर। मैं वापस आ गया और पढ़ने बैठ गया। आज दोपहर में मैंने ठीक से खाना भी नहीं खाया। मन ही नहीं कर रहा था। आज दिन भर बस ऐसा ही रहा, कभी मैंने पढ़ाई की तो कभी मोबाइल चलाया तो कभी बाहर निकल गया लेकिन उसकी याद मुझे बराबर आती रही क्योंकि मैं उसे सच्चे दिल से प्यार करता हूँ… उसके बारे में कभी गलत नहीं सोचता।

          ऐसे ही दिन गुजरता रहा और शाम का समय हो गया। मैंने शाम की चाय पी और थोड़ी देर फिर से पढ़ा। उसके बाद मैं बाहर चला गया। बाहर से लौटते वक्त उसके घर के सामने से जब मैं गुजर रहा था तो वह सामने ही बैठी थी। मैंने हल्की सी निगाह से उसे देखा तो वह मेरी ओर देख रही थी लेकिन मैं आगे निकल गया और घर वापस आ गया। कुछ समय घर पर ही रहा, उसके बाद मैंने घर का कुछ काम किया। अब शाम हो चुकी थी और मैं रोज की तरह अपने उस नियत स्थान की ओर निकल गया। मैं वहां जाकर बैठ गया। उसका दरवाजा बंद था और मुझे कोई ऐसी आस भी नहीं थी। मन तो कर ही रहा था उसे देखने का लेकिन वह मुझे दिखाई नहीं दी। मैं कुछ देर वहां बैठा रहा, उसके बाद जब शाम होने लगी तो मैं उठकर वापस घर आ गया।

         दिन भर मन में कई तरह के ख्याल आते रहे। कभी मन उदास हो जाता था तो कभी मैं मन को समझा लेता था और कुछ अच्छी बातें सोच कर थोड़ा अच्छा महसूस करता था। दूसरा व्यक्ति अपने आप में स्वतंत्र है वह चाहे जो कर सकता है हमारा उस पर क्या अधिकार है। जो वह चाहता है कर सकता है इसमें हम कर ही क्या सकते हैं लेकिन हम जो कर सकते हैं वह है जैसे को तैसा। सामने वाला हमारे साथ जो कर रहा है हमें भी उसके साथ वैसा ही कर देना है। जब तक अच्छा लगे अच्छे काम करते रहो अगर सामने वाले को बिल्कुल भी परवाह नहीं है आपकी भावनाओं की तो आप भी उसकी परवाह मत करो। इस दुनिया में कोई अपना नहीं होता सिर्फ अपने घर वालों को छोड़कर… इसलिए घर वालों की सेवा करो और उन्हें अच्छे से अच्छा सुख दो और अपने लक्ष्य पर फोकस करो। जो आपके साथ गलत करते हैं उनसे बदला जरूर लो क्योंकि वह जमाना चला गया जब लोग गलती करके एहसास होने के बाद क्षमा मांग लेते थे… दोबारा गलती न करने के लिए। लेकिन आजकल क्षमा मांगते हैं कि पहली गलती माफ हो जाए ताकि अगली गलती करने का रास्ता खुल जाए। इसलिए ऐसे लोगों का वह हाल करो कि दुनिया याद रखे।

         मैंने रात का खाना खाया और रोज की तरह बाहर टहलने निकल गया। मैं जाकर फिर से अपने नियत स्थान पर बैठ गया और मुझे आज भी उसके छत पर आने की कोई उम्मीद नहीं थी। लेकिन फिर भी ऐसा लगता था कि हो सकता है वह आ जाए। आज मुझे वहां बैठे हुए थोड़ी देर ही हुई थी कि बाकी लोग आ गए और मैं उनके साथ आज गांव से बाहर टहलने निकल गया। जब तक मैं लौटा, काफी देर हो चुकी थी। अगर वह आयी भी होगी तो आज मैं उसे दिखा नहीं होऊँगा और इस समय तक वह अगर आती भी तो जा चुकी होती। हम सभी लोग आकर वहीं बैठ गए और बातें करने लगे। जब रात काफी हो गई तो हम लोग वहां से उठकर अपने-अपने घर आ गए। मैंने घर आकर अपने कुछ काम किये और मैं पढ़ने की सोच रहा था लेकिन ऐसा हो नहीं पाया। इतना सब कुछ होने के बाद भी मुझे बार-बार उसी का ख्याल आ रहा है।

        अभी रात काफी हो चुकी है, रात के 12:00 बजने वाले हैं तो अब मैं चलता हूँ सोने… आपसे मिलूंगा कल फिर से एक और नई पोस्ट के साथ… शुभ रात्रि।

शनिवार, 21 सितंबर 2024

कहीं वो मुझे धोखा तो नहीं दे रही... उसकी इस हरकत से मेरा दिमाग बहुत खराब हो गया | Daily Diary | 20 September 2024 Diary

 स्वागत है आप सभी लोगों का मेरी आज की डेली डायरी पोस्ट में, आज है 20 सितंबर 2024। आज का दिन भी कल से कुछ खास अलग नहीं था। जैसे कि कल मेरा मन थोड़ा खराब था, आज सही होता लेकिन फिर से कल से भी ज्यादा खराब हो गया। कल मन ठीक ना होने की वजह से मैंने रात का खाना भी नहीं खाया था और दूध पीकर ही सो गया था।

           आज सुबह सोकर उठने के बाद मैं काम से बाहर गया और जैसे ही उसके घर के सामने पहुंचा तो वह आज मुझे बाहर ही मिल गई। वह अपने घर के बाहर कुछ काम कर रही थी। मुझे देखकर वह थोड़ी सी मुस्कुराई। आज मेरी सुबह तो बहुत अच्छी थी और मुझे उम्मीद थी कि आज का दिन बहुत ही अच्छा बीतेगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उसके बाद मैं काम समाप्त करके घर वापस आ गया। वापस आने के बाद मैंने चाय पी और उसके बाद फिर से बाहर चला गया लेकिन इस बार वह मुझे नहीं दिखाई दी। मैं सोच कर तो यही गया था कि वह मुझे एक बार और दिखेगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। मैं वापस आ गया, नहा धोकर नाश्ता करने के बाद मैं एक बार फिर से बाहर की ओर गया। लेकिन अभी भी मुझे वह दिखाई नहीं दी थी तो मैं वापस आ गया। 

            मैं बैठा हुआ मोबाइल में कुछ काम कर रहा था कि तभी मेरे पास मेरे एक दोस्त का फोन आया। उसे कुछ जरूरी काम था और मुझे उसके साथ जाना था। थोड़ी देर बाद वह मोटरसाइकिल लेकर मेरे घर आ गया और हम दोनों उसके काम के सिलसिले में बाहर निकल गए। हमें वापस आने में लगभग 2 घंटे लग गए। वापस आने के बाद मैंने खाना खाया क्योंकि तब तक दोपहर हो चुकी थी। खाना खाने के बाद मैं फिर से बाहर की ओर निकल गया। समय ज्यादा हो गया था इसलिए मुझे कोई उम्मीद भी नहीं थी कि वह मुझे दिखाई देगी और ऐसा ही हुआ। मैं वापस आ गया और अपने काम में लग गया। मैंने कुछ देर काम किया और उसके बाद पढ़ने बैठ गया। आज मैं उम्मीद के अनुसार नहीं पढ़ पाया। पढ़ते-पढ़ते मुझे सुस्ती आने लगी तो मैं आंखें बंद करके लेट गया और मुझे झपकी लग गई।

            जब मैं उठा तो शाम की चाय तैयार थी। मैंने चाय पी और उसके बाद फिर से पढ़ने बैठ गया। मैं थोड़ा ही पढ़ा था कि फिर मुझे एक काम याद आ गया और उसके बाद मैंने वह काम निपटाया, तब तक शाम हो चुकी थी। मैं बाहर निकल गया अपने उसी नियत स्थान पर बैठने के लिए। जैसे ही मैं वहां पहुंचा वह मुझे छत पर दिखाई दी लेकिन जैसे ही उसने मुझे देखा वह नीचे चली गई। बस यहीं से मेरा दिमाग सनक गया। मैंने थोड़ा आगे जाकर देखा तो उसके सामने की छत पर एक और लड़का था। अब मेरा दिमाग खराब हो गया। मुझे ऐसा लग रहा है कि कहीं वह मुझे धोखा तो नहीं दे रही है और अगर ऐसा है तो उसे मुझे बता देना चाहिए क्योंकि झूठ मुझे बिल्कुल बर्दाश्त नहीं है। जो भी बात है सच-सच बता दे तो ज्यादा अच्छा है क्योंकि झूठ की बुनियाद पर मैं कोई भी रिश्ता नहीं रखना चाहता। झूठे रिश्ते से ज्यादा अच्छा है सच बोलकर रिश्ता खत्म कर देना। मेरे मन में बार-बार सवाल उठ रहे थे कि वह मुझे देखकर नीचे क्यों चली गई जबकि अब तक वह यहीं बैठी थी और वह लड़का अपनी छत से थोड़ा आगे के हिस्से में जहां से उसकी छत थोड़ी और पास हो जाती है उधर की तरफ था। मेरे मन में दूसरा सवाल यह आया कि अगर सब कुछ ठीक है तो वह नीचे गई ही क्यों…? और भी न जाने कितनी तरह के सवालों से मेरा दिमाग परेशान हो गया।

           मैं वहीं बैठ गया। मुझे बहुत गुस्सा आ रहा था और उदासी एकदम चरम पर पहुंच चुकी थी। उसके नीचे आने के बाद मुझे उसकी आवाज़ आती रही। वह बच्चे को खिला रही थी लेकिन उसने ना तो दरवाजा खोलकर मुझे देखा और ना ही मुझे वह दिखाई दी। फिर जब शाम होने लगी तो मैं वहां से उठकर घर आ गया। मुझे कुछ भी अच्छा नहीं लग रहा था, मैं बस यूं ही गुमसुम सा बैठा था। मैंने रात का खाना खाया और रोज की तरह बाहर टहलने निकल गया। मुझे उम्मीद थी कि आज वह नहीं आएगी और ऐसा ही हुआ। आज वह छत पर नहीं आई। मैं थोड़ी देर टहलने के बाद वहीं बैठ गया। आज मेरा मन बिल्कुल खराब था और अभी भी है, तो मैं आज जल्दी ही वहां से घर आ गया। घर आने के बाद मैंने अपना कुछ काम किया और पढ़ने का तो सवाल ही नहीं उठता क्योंकि मन बिल्कुल भी ठीक नहीं है। उसके बाद मैं अपनी डायरी लिखने बैठ गया क्योंकि यहां आप लोगों से अपने सारे दिन का हाल बता कर और अपने दिल की बातें कहकर मन कुछ हल्का हो जाता है।

           अब उससे मिलकर सारी बातें साफ करूंगा। उससे पूछूंगा कि तेरे मन में क्या है… जो भी कुछ मन में है, बता दे। मैं भगवान से प्रार्थना करता हूँ कि सब कुछ ठीक हो। कुछ भी गलत ना हो। वैसे जरुरी नहीं है कि जैसा मैं सोच रहा हूँ वैसा ही हो क्योंकि वह अक्सर शाम को छत पर चली जाती है, रोज तो नहीं लेकिन कभी-कभी टहलने के लिए। क्योंकि उस समय भी वह अपने भतीजे को खिला रही थी और इससे पहले ऐसा कुछ नहीं हुआ तो हो सकता है यह मेरा भ्रम हो। खैर जो भी है बात तो करनी ही पड़ेगी। अभी रात के 11:00 बजने वाले हैं तो अब मैं चलता हूँ सोने, आपसे मिलूंगा कल फिर से एक और नई पोस्ट के साथ… शुभ रात्रि।

शुक्रवार, 20 सितंबर 2024

आज फिर से मेरा मन विचलित हो गया... पता नहीं क्यों बहुत खराब लग रहा था सब कुछ | Daily Diary | 19 September 2024 Diary

 स्वागत है आप लोगों का मेरी आज की डेली डायरी पोस्ट में, आज है 19 सितंबर 2024। मेरा आज का दिन भी कुछ खास नहीं था, बस मैंने पढ़ाई थोड़ी अच्छे से की थी लेकिन शाम के समय सब कुछ गड़बड़ हो गया और जैसे-जैसे समय आगे बढ़ा मन बिल्कुल खराब हो गया था। दिन भर दिमाग में कई तरह के विचारों का आना-जाना लगा रहा, उसमें कुछ अच्छे थे तो कुछ बुरे। बुरे यानी थोड़ी तकलीफ देने वाले, कुछ ऐसे जो कसक को और बढ़ा देते हैं।

        सुबह सो कर उठने के बाद मैं वही रोज के अपने काम से बाहर गया उसके घर की ओर। मन में एक आस थी कि उसे देख पाऊं लेकिन वो मुझे देखने को नहीं मिली। वापस आकर मैंने एक कप चाय पी और कुछ देर यूं ही टहलता रहा। उसके बाद नित्य कर्म से निपटकर नहा धोकर नाश्ता करने के बाद एक बार फिर से बाहर की ओर निकल गया लेकिन वह अब भी मुझे दिखाई नहीं दी थी। मैं वापस आया और पढ़ने बैठ गया। आज पढ़ाई में जो मैंने लक्ष्य तय किया था उसे मैंने पूरा कर लिया। कुछ देर पढ़ते-पढ़ते जब दिमाग थक सा गया तो मैं दिमाग को तरोताजा करने के लिए फिर से बाहर निकल गया और उसके घर के सामने से जाते हुए उसे देखने की कोशिश की लेकिन वह अब भी दिखाई नहीं दी। थोड़ी देर बाद मैं वापस आ गया और फिर से पढ़ने बैठ गया। आज पिताजी कहीं बाहर गए हुए थे तो घर के अन्य काम भी मुझे ही करने थे तो मैंने पढ़ाई के साथ-साथ घर के कुछ और जरूरी काम निपटाए।

          दोपहर हो चुकी थी। मम्मी ने खाना खाने के लिए बुला लिया। मैंने दोपहर का खाना खाया और रोज की तरह टहलने निकल गया। उसके घर के सामने जाकर मैंने देखा कि तार पर उसके कपड़े सूख रहे हैं। मैं समझ गया कि वह नहा कर अब घर के अंदर आराम कर रही होगी। अब वह बाहर नहीं आएगी। थोड़ी देर बाद मैं वापस आ गया और पढ़ने बैठ गया। लगभग 1 घंटा पढ़ने के बाद मैंने थोड़ी देर आराम किया और उसके बाद मेरे जो दूसरे काम थे उन्हें पूरा करने में लग गया। शाम तक यही सब चलता रहा, कभी पढ़ाई तो कभी काम।

             अब शाम हो चुकी थी। मैंने शाम की चाय पी और रोज की तरह बाहर चला गया और जाकर सार्वजनिक स्थान पर बैठ गया। उसका दरवाजा बंद था। मैं वहां बैठकर मोबाइल में अपना कुछ काम कर रहा था और साथ ही उसकी प्रतीक्षा भी कर रहा था। थोड़ी देर बाद मुझे उसकी आवाज सुनाई दी और तभी वह अपने घर से बाहर आई अपना कुछ काम करने के लिए… बहुत थोड़ी देर के लिए। मैंने उसे देखा और घर वापस जाते हुए उसने भी मेरी तरफ देखा। उसके बाद मुझे उसकी आवाज तो आ रही थी लेकिन वह दिखी नहीं। वह किसी बच्चे को खिला रही थी। मैं वहां बैठा उसके फिर से आने की प्रतीक्षा कर रहा था कि तभी मेरा मोबाइल बजा। मुझे घर से बुलावा आया था, उसके बाद मैं वहां से उठकर अपने घर आ गया।

          अभी शाम और रात के बीच का समय था। मैं एक बार फिर से बाहर आया और आकर इसी जगह बैठ गया। यही वह समय था जब मेरा मन थोड़ा विचलित होना शुरू हो गया था। कुछ भी अच्छा नहीं लग रहा था, मन एकदम से खराब हो रहा था लेकिन इसकी वजह मुझे पता नहीं चल पा रही थी। ऐसा मेरे साथ कई बार हो चुका है और अक्सर होता रहता है। मैं वहां जाकर अकेला बैठा रहा। इस समय मुझे उसकी बहुत याद आ रही थी क्योंकि कई दिनों से मैंने उसे ठीक से नहीं देखा है और हमारी कोई बातचीत नहीं हुई है। मैं उसके बारे में ही सोचता रहा कुछ देर के बाद जब वहां अन्य लोग आने लगे तो मैं उठकर अपने घर आ गया।

            अभी रात हो चुकी थी और यह रात के भोजन का समय था लेकिन आज खाना खाने का मेरा मन नहीं कर रहा था। पता नहीं क्यों बस दिमाग उसी के बारे में सोच रहा था और मैं बिना खाना खाये ही बाहर चला गया जैसे कि रोज खाना खाने के बाद टहलने जाता हूँ। मैं जाकर फिर से उसी जगह बैठ गया और अपना मन शांत करने के लिए मोबाइल में कुछ काम करने लगा। अभी मुझे थोड़ी ही देर हुई थी कि मुझे छत पर वह दिखाई दी। मैंने तुरंत मोबाइल बंद किया और उसकी ओर आ गया। रात के अंधेरे में उसका चेहरा तो दिखाई नहीं देता लेकिन उसके वहां होने से मुझे बहुत खुशी होती है। मैं वहां जाकर उसे देखता रहा और वह भी वहां टहलते टहलते मेरी ओर देख रही थी। आज मुझे शाम से जैसा लग रहा था मैंने उसे बता दिया। उसके वहां दिखने और उससे अपने दिल की बात कहने के बाद मुझे थोड़ा अच्छा महसूस हुआ। अभी मैं उससे कुछ और कहने वाला ही था कि वह वहां से नीचे चली गई। पता नहीं शायद नीचे से किसी की आवाज आई थी और उसे लगा होगा कि कहीं कोई ऊपर ना आ जाए। उसके बाद मैंने उसकी प्रतीक्षा की लेकिन फिर वह नहीं आई। जब रात काफी होने लगी तो मैं वहां से उठकर अपने घर आ गया।

          अभी रात के 10:30 बज रहे हैं। मैंने खाना अभी भी नहीं खाया है। पता नहीं क्यों मन नहीं कर रहा है और मैं खाऊंगा भी या नहीं मुझे पता नहीं, शायद दूध पीकर ही सो जाऊं। पता नहीं क्यों आज मन बहुत अजीब सा था। जहां तक मैं समझ पा रहा हूँ… यह उसे ठीक से ना देख पाने और उससे कोई बातचीत ना होने की वजह से हो रहा है क्योंकि बहुत दिन हो गए हैं। अब मन में कसक और गुस्सा बढ़ता जा रहा है। आज शाम के बाद से कुछ भी करने का मेरा मन नहीं कर रहा था। यहां तक कि आज की डायरी लिखने का भी बिल्कुल मन नहीं था। मैं काफी देर आंखें बंद करके यूं ही लेटा रहा और उसके बारे में सोचता रहा, लेकिन फिर मैंने बहुत कोशिशों के बाद आखिरकार डायरी लिखनी शुरू की। इसके अलावा मैं और कुछ नहीं करूंगा, ना ही पढ़ने का मन है और ना ही कुछ और काम करने का। अभी रात भी काफी हो चुकी है तो अब मैं चलता हूँ सोने, आपसे मिलूंगा कल फिर से एक और नई पोस्ट के साथ… शुभ रात्रि।

गुरुवार, 19 सितंबर 2024

शाम के समय पता नहीं क्यों मन कुछ अजीब सा हो जाता है...| अब वो बहुत कम देखने को मिल रही है | Daily Diary | 18 September 2024 Diary | Personal Diary Blog

 स्वागत है आप सभी लोगों का मेरी आज की डेली डायरी पोस्ट में, आज है 18 सितंबर 2024। आज सुबह उठने में मुझे फिर से थोड़ी परेशानी हुई क्योंकि रात में नींद पूरी नहीं हुई थी लेकिन मुझे अपने समय पर उठना ही था क्योंकि रोज के अपने काम से मुझे उसके घर की ओर जाना था। सुबह-सुबह उसे देखकर बाकी पूरा दिन अच्छा बीतता है। सुबह उठने के बाद मैं उसके घर की ओर गया लेकिन आज वह मुझे देखने को नहीं मिली। मैंने थोड़ी देर प्रतीक्षा भी की लेकिन वह घर से बाहर नहीं आई, फिर मैं वहां से वापस अपने घर आ गया। आज सुबह हल्की बूंदाबांदी हुई थी लेकिन ज्यादा तेज नहीं। सुबह नहा धोकर मैंने नाश्ता किया और बाहर निकल गया। उसे देखने की आज मेरी बहुत इच्छा थी लेकिन वह मुझे दिखाई नहीं दी। थोड़े से निराश मन से मैं वापस आ गया। वापस आकर मैंने पढ़ाई की, थोड़ी देर पढ़ने के बाद मैं एक बार फिर बाहर की ओर गया और इस बार जब मैं जा रहा था तो वह अपने घर से बाहर निकल रही थी… मैंने उसे देखा लेकिन उसने मुझे नहीं देखा क्योंकि मैं थोड़ा सा छिपा हुआ था।

          कुछ देर के बाद मैं घर वापस आ गया और पढ़ने बैठ गया। पढ़ते-पढ़ते दोपहर हो चुकी थी। दोपहर का भोजन लेने के बाद आदतन मैं फिर से बाहर की ओर गया, लेकिन अब उसके दिखाई देने की कोई संभावना नहीं थी तो थोड़ी देर बाद मैं वापस आ गया और फिर से पढ़ने बैठ गया। मुझे थोड़ी-थोड़ी सुस्ती भी आ रही थी तो मैंने थोड़ी देर नींद लेना सही समझा क्योंकि ऐसे में पढ़ने का कोई फायदा नहीं था, तो मैं थोड़ी देर के लिए सो गया। लगभग 15 से 20 मिनट के बाद मेरी आंख खुल गई और एक बार फिर से मैं पढ़ने बैठ गया। मैं लगभग 3:00 बजे तक पढ़ा, उसके बाद मैंने अपने कुछ अन्य काम किये। शाम की चाय पीने के बाद मैं बाहर की ओर गया तो जब मैं उसके घर के सामने से जा रहा था, वह अपने दरवाजे पर खड़ी थी लेकिन उसके साथ में उसकी भाभी और एक अन्य व्यक्ति भी था इसलिए मैंने उसकी ओर देखकर तुरंत अपनी निगाह हटा ली और आगे निकल गया। थोड़ी देर बाद जब मैं वापस आया तो वे लोग वहीं खड़े थे तो मैं उसकी ओर देखे बिना सीधा घर आ गया।

           शाम होने वाली थी और हल्की बूंदाबांदी फिर से शुरू हो गई थी। शाम का समय ऐसा होता है जिसमें कुछ करने का मन नहीं करता… ना ही पढ़ने का और ना ही कुछ और काम करने का। मन करता है बस खाली बैठे रहो। शाम के समय मैं गांव में बने सार्वजनिक स्थान पर जाकर बैठ गया। वहां कुछ देर बैठा रहा लेकिन आज और कोई नहीं आया, मैं अकेला ही बैठा था। थोड़ी देर बाद मैं उठकर घर आ गया। मुझे उम्मीद थी कि मैं वहां बैठा रहूंगा तो कभी ना कभी वह दरवाजा खोलकर देखेगी लेकिन आज उसने ऐसा नहीं किया। घर वापस आकर मैंने शाम के समय के घर के कुछ काम किये और तब तक रात हो चुकी थी। रात का भोजन लेने के बाद रोज ही की तरह मैं बाहर टहलने निकल गया।

            टहलने के बाद अपने उसी नियत स्थान पर बैठ गया और उसकी प्रतीक्षा करने लगा कि कब वो छत पर आएगी। लेकिन आज वह छत पर नहीं आई। मैंने बहुत देर उसकी प्रतीक्षा की। जब काफी समय हो गया और उसके आने की उम्मीद समाप्त हो गई तो मैं वहां से उठकर अपने घर आ गया। इस तरह आज भी वह मुझे ज्यादा देखने को नहीं मिली। घर आकर मुझे अपने काम करते-करते अभी 11:00 बज चुके हैं। तो कुछ ऐसा था मेरा आज का दिन, ना ज्यादा अच्छा ना ज्यादा बुरा। तो चलिए अब मैं चलता हूँ सोने, आपसे मुलाकात होगी कल फिर से एक और नई पोस्ट के साथ… शुभ रात्रि।

बुधवार, 18 सितंबर 2024

वो मुझे चिढ़ाने का कोई मौका नहीं छोड़ती...| Daily Diary | 17 September 2024 Diary

 स्वागत है आप सभी लोगों का मेरी आज की डेली डायरी में, आज है 17 सितंबर 2024। सुबह उठने के बाद रोज का जो मेरा काम होता है मैंने वह किया और इस काम के बहाने मुझे उसके घर की ओर जाना होता है। यहीं मौका मिलता है उसे देखने का, लेकिन आज वह मुझे दिखाई नहीं दी और मैं काम समाप्त करके वापस घर आ गया। उसके बाद नित्य कर्म से निपट कर नहा-धोकर मैंने नाश्ता किया और एक बार फिर से उसे देखने के लिए बाहर की ओर चल दिया लेकिन इस बार भी वह दिखाई नहीं दी। मैं फिर से वापस आ गया और पढ़ने बैठ गया। लगभग एक घंटा पढ़ने के बाद मैं फिर से उठा और बाहर की ओर चल दिया और इस बार भी मेरा यह प्रयास विफल रहा। वह अभी भी घर के अंदर ही थी और उसे बिना देखे ही मैं फिर से वापस आ गया। घर आने के बाद मैंने घर का कुछ काम किया और फिर से पढ़ने बैठ गया।

           दोपहर हो चुकी थी। मैंने दोपहर का भोजन किया और रोज की तरह फिर से बाहर चला गया। वह मुझे अभी भी दिखाई नहीं दी थी लेकिन घर के आंगन में उसके कपड़े सूख रहे थे, इसका मतलब था कि वह थोड़ी देर पहले ही नहा कर आई होगी और गीले कपड़े सूखने के लिए तार पर डालकर घर के अंदर चली गई होगी। मैं वापस आ गया और फिर से पढ़ने बैठ गया। मैं पढ़ ही रहा था कि मम्मी ने मुझे किसी काम के लिए आवाज लगा दी तो मैं उठकर अपने कमरे से बाहर आ गया। मैं अपना काम कर ही रहा था कि मुझे उसकी आवाज सुनाई दी। मैंने तुरंत पलट कर पीछे देखा तो सामने से वह आ रही थी। वह अपने घर आए हुए मेहमान के किसी बच्चे को दुकान से कुछ सामान दिलाने जा रही थी। उसके घर से दुकान का रास्ता हमारे घर के सामने से होकर जाता है। उसने मुझे चिढ़ाते हुए कुछ कहा… वह अक्सर ऐसा करती है, मुझे चिढ़ाने का कोई मौका नहीं छोड़ती और उसका चिढ़ाना मुझे बहुत अच्छा लगता है। जब भी मुझे मौका मिलता है तो मैं भी उसे चिढ़ाता रहता हूँ।

             दोपहर का समय था इसलिए हमारे आसपास और कोई नहीं था तो मैंने उससे बात करने की कोशिश की। हम दोनों एक जगह रुक कर बातें नहीं कर सकते थे क्योंकि किसी के भी आने का खतरा था तो उसके चलते-चलते ही मैंने उससे बातें कीं। जब तक वह दुकान से वापस अपने घर नहीं चली गई, मैं वहीं खड़ा रहा और वह दुकान पर जाते हुए मेरी ओर देख रही थी। उसके जाने के बाद मैं घर के अंदर आ गया। अब मैं फिर से पढ़ने बैठ रहा था लेकिन मेरा मन नहीं कर रहा था। बार-बार उसी की याद आ रही थी, ऐसा लग रहा था जैसे वो अभी आ जाए और मैं उससे ढेर सारी बातें करूं। वह मुझे दोबारा से देखने को मिले लेकिन ऐसा संभव नहीं था, मैंने मन को समझाया और पढ़ने बैठ गया। पढ़ाई के बाद मैंने अपने कुछ दूसरे काम किये और तब तक शाम होने वाली थी।

           शाम के समय चाय पीने के बाद मैं बाहर निकल गया। उसके घर के सामने से जाते हुए मुझे उसकी आवाज सुनाई दी। मैंने उसकी ओर देखना चाहा लेकिन वहां उसके घर के कुछ सदस्य और कुछ मेहमान खड़े थे तो मुझे अपनी नजर वहां से हटानी पड़ी। मैं वहां नहीं देख सकता था और सीधा निकल गया। कुछ समय बाद मैं वापस आया तब भी वह लोग वहीं खड़े थे तो मुझे बिना कोई हरकत किये घर वापस आना पड़ा। आज शाम के समय अचानक बारिश आ गई जबकि दिनभर तेज धूप खिली थी। इस बारिश ने सब कुछ बिगाड़ दिया क्योंकि शाम के समय ही उसके दिखाई देने का मौका बढ़ जाता है लेकिन इस बारिश ने सारा खेल बिगाड़ दिया और शाम तक बारिश होती रही। शाम के समय जब बारिश थोड़ी हल्की हुई तो मैं बाहर निकल गया लेकिन वह मुझे दिखाई नहीं दी तो मैं वापस आया और घर का कुछ काम किया।

           रात का खाना खाने के बाद रोज ही की तरह मैं बाहर टहलने निकल गया। आज मेरे साथ कई और लोग भी थे, जैसे ही मैं अपने नियत स्थान पर पहुंचा वे लोग वहीं बैठे थे। मुझे लग रहा था कि जब वह छत पर आएगी तो मैं उससे कैसे बातें करूंगा लेकिन आज वह छत पर आई ही नहीं क्योंकि बारिश का मौसम था। ऐसे में उसके घर वाले उससे सवाल करते कि ऐसे मौसम में छत पर क्यों जा रही है इसलिए वह आज नहीं आई। इस तरह से आज वह मुझे दिन भर में मात्र एक बार देखने को मिली, वह भी बहुत थोड़ी देर के लिए। कुछ देर बातें करने के बाद हम लोग अपने-अपने घर आ गए। घर आकर मैंने अपना कुछ काम किया। अभी रात के 11:30 बजने वाले हैं तो अब मैं चलता हूँ सोने, आपसे मुलाकात होगी कल फिर से एक और नई पोस्ट के साथ… शुभ रात्रि।

मंगलवार, 17 सितंबर 2024

आज वो मेला देखने गई... और रात को छत पर भी आयी | Daily Diary Blog | 16 September Diary

 स्वागत है आप सभी लोगों का मेरी आज की डेली डायरी पोस्ट में, आज है 16 सितंबर 2024। मेरा आज का दिन भी पहले जैसे दिनों की तरह ही था, आज कोई खास नहीं हुआ बस शाम को या कह सकते हैं रात में एक बहुत अच्छी बात हुई जो मैं आपसे आगे शेयर करूंगा। सुबह उठने के बाद मैं किसी काम से पड़ोस के गांव गया था। जब मैं रास्ते में जा रहा था तो मैंने देखा कि सड़क में एक गड्ढा है जो आधी सड़क तक फैल चुका है और क्योंकि वह ज्यादा चौड़ा नहीं था इसलिए किसी को आसानी से दिखता नहीं था। उसकी लंबाई ज्यादा थी इसलिए नजदीक आने पर ही वह दिखाई देता था। जो आसपास के गांव वाले हैं उन्हें तो रोज आने-जाने की वजह से उसके बारे में पता था लेकिन जो बाहर से आने वाले हैं वे उससे अनजान थे। उस गड्ढे की वजह से दो मोटरसाइकिल वाले गिर गए, हालांकि किसी को ज्यादा चोट नहीं आई। उसके बाद पास ही के किसी व्यक्ति ने उस गड्ढे में मिट्टी डाल दी और उसे पाट दिया। लेकिन यहां सोचने वाली बात यह है कि वह गड्ढा कुछ दिनों के अंतराल के बाद बार-बार उभर आता है, प्रशासन उसका पक्का इलाज क्यों नहीं करवाता।

           वहां से आने के बाद मैं नहाया और नाश्ता किया। उसके बाद आदतन बाहर की ओर निकल गया और उसके घर के सामने जाकर उसे देखने की कोशिश की लेकिन आज भी वह मुझे नहीं दिखाई दी। थोड़ी देर बाद मैं वापस घर आ गया और पढ़ने बैठ गया। काफी देर पढ़ने के बाद मैं आंखें बंद करके आराम करने लगा मुझे नींद आने लगी, हालांकि इस बार मैं ज्यादा देर नहीं सोया, बहुत जल्दी उठ गया। अभी दोपहर हो चुकी थी और मम्मी ने खाने के लिए बुला लिया तो मैंने खाना खाया और खाना खाने के बाद एक बार फिर से बाहर की ओर निकल गया। लेकिन इस बार भी मुझे उसके दर्शन नहीं हुए और मैं खाली हाथ फिर से वापस आ गया। वापस आने के बाद मैंने कुछ अन्य काम निपटाए और फिर पढ़ने बैठ गया।

           लगभग 4:00 बजे तक मैं पढ़ता रहा। उसके बाद मैंने शाम की चाय पी और बाहर निकल गया। आज हमारे गांव का मेला था तो सड़क पर काफी चहल-पहल थी, छोटे बच्चे दोपहर से ही उस जगह का चक्कर लगा रहे थे जहां मेला लगता है। मैं गांव में बने सार्वजनिक स्थान पर जाकर बैठ गया। वहां बैठे-बैठे मेरी निगाह उसके घर के दरवाजे की ओर गई। मुझे उसकी आवाज तो आई लेकिन वह दिखाई नहीं दी। सौभाग्य से कुछ देर के बाद मुझे उसके दर्शन हुए… उसने दरवाजा खोला और बाहर देखा। वहां मैं बैठा हुआ था और वह कुछ देर तक देखती रही। उसके हाथ में शायद कोई थैला था। कुछ देर दरवाजे पर खड़े होने के बाद वह वापस घर के अंदर चली गई। अंदर से उसकी आवाजों से मुझे एहसास हो गया था कि वह मेला देखने जाने वाली है। थोड़ी देर के बाद वह अपनी बहनों और कुछ मेहमानों के साथ मेले की तरफ चल दी और मैं उसे तब तक देखता रहा जब तक कि वह दिखाई देना बंद नहीं हो गई। मैंने इस बात का ध्यान रखा था कि और कोई मुझे उसकी तरफ देखते हुए ना देख रहा हो।

            मैं तब तक वहीं बैठा रहा जब तक कि वह मेले से वापस नहीं आ गई। उसके वापस आने पर भी मैं उसे तब तक देखता रहा जब तक वह अपने घर के अंदर नहीं चली गई। उसके साथ और लोग होने की वजह से वह मेरी ओर नहीं देख सकती थी। अभी शाम हो चुकी थी तो मैं वहां से उठकर वापस अपने घर आ गया। मैं मेला देखने नहीं गया लेकिन मेरे पिताजी मेले से खाने-पीने का सामान घर ही ले आए थे तो मैंने घर पर ही मेले को एंजॉय कर लिया।

             आज मैंने रात का खाना नहीं खाया क्योंकि मेले से आई हुई खाने-पीने की चीजें खाने के बाद फिर मन ही नहीं किया। मैं बाहर टहलने के लिए निकल गया जैसे कि रोज खाना खाने के बाद जाता हूँ, और जाकर गांव में बने उसी स्थान पर जाकर बैठ गया। आज मेरे दोस्तों में से कोई भी नहीं आया था, पता नहीं आज सब लोग कहां रह गए। मैं अकेला ही काफी देर तक वहां बैठा रहा और जैसे-जैसे समय आगे बढ़ता जा रहा था मुझे एक बार फिर से निराशा घेर रही थी क्योंकि आज भी वह छत पर नहीं आई थी। मैं आज काफी उदास था और मुझे गुस्सा भी आज बहुत ज्यादा आ रहा था, मन कर रहा था कि अभी जाकर उसे पकड़ कर लाऊं और अपने सामने बैठा दूं और उससे पूरी रात बातें करता रहूँ। मेरे वहां से घर वापस आने का समय हो चुका था और वह तब तक छत पर नहीं आई थी। मैं वापस आने ही वाला था कि मैंने सोचा… थोड़ी देर और रुक जाता हूँ, क्या पता वह आज आ ही जाए क्योंकि मेले की वजह से आज काफी देर तक घर पर मेहमानों का जमावड़ा लगा था। मैं यह सोचकर एक बार फिर से वहीं बैठ गया और मुझे थोड़ी देर ही हुई थी बैठे हुए कि वह छत पर आ गई उसे देखते ही मुझे इतनी खुशी हुई कि जैसे प्यासे को पानी मिल गया हो।

             जैसे ही वह छत पर आई मैं उसकी ओर चल दिया, वह भी वहीं टहल रही थी। मैंने उससे पूछा कि अब तक छत पर क्यों नहीं आई थी लेकिन उसने अभी तक कोई जवाब नहीं दिया था। वह अपनी छत पर टहल रही थी और मैं उसे देख रहा था लेकिन दुर्भाग्यवश इस समय बाहर से उसके घर का एक सदस्य घर जा रहा था। उसे देखकर वह वहां से नीचे चली गई और तब तक रात भी काफी हो चुकी थी इसलिए अब उसके वापस छत पर आने की कोई उम्मीद नहीं थी क्योंकि अगर वह छत पर आती तो उससे पूछा जाता कि इतनी रात में छत पर क्या करने जा रही है। लेकिन फिर भी मैंने थोड़ी देर और प्रतीक्षा की, जब मुझे एहसास हो गया कि वह नहीं आएगी तो मैं वहां से घर वापस आ गया। मुझे इस बात की खुशी है कि आज वह छत पर आई और मैंने उसे देखा, उसने भी मुझे देखा। उसके ना आने पर रोज जो मुझे उदासी होती थी आज वह उदासी नहीं हुई और मुझे अब अच्छा लग रहा है। अभी रात के 11:30 बजने वाले हैं तो अब मैं चलता हूँ सोने, आपसे मुलाकात होगी कल फिर से एक और नई पोस्ट के साथ… शुभ रात्रि।

सोमवार, 16 सितंबर 2024

मुझे उस पर कभी-कभी बहुत गुस्सा आता है | Daily Diary | 15 September 2024 Diary

 स्वागत है आप सभी लोगों का मेरी आज की डेली डायरी पोस्ट में, आज है 15 सितंबर 2024। आज मैं जब सुबह सो कर उठा तो मुझे महसूस हुआ कि मेरा मन कुछ ठीक नहीं है। पता नहीं क्यों… कुछ अजीब सा लग रहा था, पता नहीं किसी चीज का डर सा महसूस हो रहा था और यह मेरे साथ अक्सर हो जाता है। आज मैं थोड़ा लेट सो कर उठा था क्योंकि रोज सुबह जो एक निश्चित काम मुझे करना होता है आज वह नहीं करना था।  वह काम करने के लिए मुझे उसके घर की ओर जाना होता है और इस बहाने उसे देखने का मौका भी मिल जाता है लेकिन आज वह काम नहीं होना था तो मैं देर तक सोता रहा।

         सुबह उठने के बाद मैंने एक कप चाय पी और उसके बाद उसके घर की ओर चल दिया लेकिन वह मुझे दिखाई नहीं दी। वापस घर आकर, नहा-धोकर मैंने नाश्ता किया और किसी काम से बाहर गया तो रास्ते में उसके घर के सामने पहुंचते ही मैंने उसे देखने की कोशिश की लेकिन वह फिर भी दिखाई नहीं दी, हालांकि उसकी आवाज मुझे सुनाई दे रही थी। वापस घर आकर मैं पढ़ने बैठ गया। एक घंटा पढ़ने के बाद मैं एक बार फिर उसके घर की ओर गया और इस बार भी वह मुझे दिखाई नहीं दी। मैं वापस आकर एक बार फिर से पढ़ने बैठ गया।

          दोपहर होने वाली थी, मैं पढ़ रहा था और तभी मम्मी ने खाने के लिए आवाज लगा दी। खाना खाने के बाद मैं फिर से बाहर निकल गया क्योंकि खाना खाने के बाद मेरी आदत है कुछ देर टहलने की… तो मैं बाहर निकल गया। इस बहाने उसके घर के सामने से गुजरते हुए उसे देखने का बहुत मन कर रहा था। सुबह से वह दिखाई नहीं दी थी लेकिन दुर्भाग्यवश इस बार भी मैं उसे नहीं देख पाया, हालांकि इसकी उम्मीद भी कम थी क्योंकि दोपहर का समय था, वह भी खाना खाने के बाद घर के अंदर आराम कर रही होगी। मैं वापस लौट आया और पढ़ने बैठ गया। मैंने कुछ देर पढ़ाई की और फिर मुझे सुस्ती आने लगी। पता नहीं क्यों आजकल दिन में कुछ ज्यादा ही सुस्ती आ रही है। मैंने सोचा थोड़ी देर सो लेता हूँ क्योंकि रात मेरी नींद पूरी नहीं हुई थी… तो मैं आंखें बंद करके लेट गया और मुझे नींद आ गई। जब मैं उठा तो शाम के 3:30 बज रहे थे।

           आज मैंने जितना सोचा था उतना नहीं पढ़ पाया हालांकि आज मैंने अपना रोज का काम अच्छी तरह से निपटा दिया था। शाम की चाय पीने के बाद मैं एक बार फिर से बाहर की ओर निकल गया। इस बार भी मैंने उसे देखने की बहुत कोशिश की लेकिन वह मुझे दिखाई नहीं दी फिर मैं वापस आकर ऐसी जगह खड़ा हो गया जहां से उसके घर के बाहर का हिस्सा दिखाई देता है। मैं वहां खड़ा था, सौभाग्य से कुछ देर बाद वह अपने घर से बाहर आई.. उसे कुछ काम करना था और संयोग से आज मैंने और उसने एक ही रंग के कपड़े पहने हुए थे। मैंने उसे देखा तो मन को बहुत शांति मिली लेकिन उसने मेरी ओर नहीं देखा, मैं समझ गया कि उसके सामने कोई बैठा है। वह अपना काम निपटाकर घर के अंदर चली गई। मैं वहीं खड़ा कुछ देर और इंतजार करता रहा लेकिन जब मुझे एहसास हो गया कि अब वह बाहर नहीं आ पाएगी तो मैं भी घर वापस आ गया। वापस आने के बाद मैंने कुछ देर और पढ़ाई की और जब शाम का समय हो गया तो एक बार फिर मैं बाहर चला गया।

             गांव में बने सार्वजनिक स्थान पर मैं जैसे ही पहुंचा तो वहां मेरे और दोस्त भी बैठे हुए थे। हम लोग आपस में बातें कर रहे थे कि तभी अचानक मैंने देखा कि वो अपने पड़ोस के घर से निकलकर अपने घर की ओर जा रही थी। उसे देखते ही मैं खुश हो गया और मैं तिरछी निगाहों से उसकी ओर देख रहा था क्योंकि मेरे साथ और भी लोग थे। मैंने देखा कि उसने भी थोड़ी सी गर्दन टेढ़ी करके बहाने से साइड में देखते हुए मुझे देखने की कोशिश की लेकिन वह पूरी तरह से मेरी ओर नहीं देख सकती थी। वह अपने घर चली गई और हम सभी लोग वहां बातें करते रहे। थोड़ी देर के बाद वह अपनी छत पर आई और जिधर हम लोग बैठे हुए थे उधर की ओर उसने आकर देखा कि मैं वहां हूँ या नहीं। वह अपने भतीजे को गोद में खिला रही थी हालांकि वह ज्यादा देर छत पर नहीं रुकी और नीचे चली गई क्योंकि वह जितनी ज्यादा देर रूकती उतना ही किसी को शक हो सकता था कि वह छत पर क्यों टहल रही है। कुछ समय बाद हम सभी लोग घर वापस आ गए।

          रात का भोजन लेने के बाद रोज ही की तरह मैं टहलने के लिए बाहर निकल गया। आज दिन में मौसम भी बहुत अच्छा था, काफी तेज धूप निकली थी। आज मुझे एक बार फिर से पूरी उम्मीद थी कि वह छत पर आएगी लेकिन आज भी वह छत पर नहीं आई। मुझे बहुत बुरा लगा, थोड़ा गुस्सा भी आ रहा था उस पर कि उसे मेरी चिंता है या नहीं। एक तो वह आज भी दिन में कम दिखाई दी थी और कई दिन से मैं उसे सही से नहीं देख पा रहा था। वह आज भी छत पर नहीं आई लेकिन मुझे उसकी मजबूरी समझ में आ रही थी क्योंकि जब उसके छत पर आने का समय होता है उस समय उसकी भाभी छत पर आई थीं इसलिए वह नहीं आ सकी क्योंकि अगर आती भी तो वह मेरी ओर नहीं देख पाती… कोई फायदा नहीं होता। इसलिए शायद नहीं आई और जब तक उसकी भाभी नीचे गयीं तब तक काफी देर हो चुकी थी।

             मैंने फिर भी काफी देर उसकी प्रतीक्षा की… हो सकता है वह छत पर किसी न किसी बहाने आ जाए लेकिन वह नहीं आ सकी। कुछ देर प्रतीक्षा करने के बाद मैं भी घर वापस आ गया। घर आने के बाद मुझे लगभग 1 घंटा और पढ़ना था लेकिन मुझे काम करने में कुछ देरी हो गई और मैं नहीं पढ़ पाया। इसकी भरपाई मैं कल करने की कोशिश करूंगा। अभी रात के 11:00 बज रहे हैं तो अब मैं चलता हूँ सोने, आपसे मुलाकात होगी कल फिर से एक और नई पोस्ट के साथ… शुभ रात्रि।

रविवार, 15 सितंबर 2024

आज भी रात में वो छत पर नहीं आयी | Daily Diary | 14 September Diary

 स्वागत है आप लोगों का मेरी आज की डेली डायरी पोस्ट में, आज है 14 सितंबर 2024। आज मुझे सुबह सोकर उठने में थोड़ी सी परेशानी हुई क्योंकि रात मैं काफी लेट सोया था। मुझे सुबह को जल्दी उठना होता है क्योंकि सुबह-सुबह एक निश्चित काम से उसके घर की ओर जाना होता है इसलिए कैसे भी करके मैं सुबह को समय पर उठ जाता हूँ। आज भी थोड़ी सी परेशानी के बावजूद मैं उठ गया, उसके बाद मैं काम से उसके घर की ओर गया। मुझे उम्मीद थी कि वह दिखाई देगी लेकिन आज भी मुझे नहीं दिखी, मैं वहां से घर वापस आ गया। उसके बाद भी मैंने एक दो बार और कोशिश की और उसके घर की ओर गया लेकिन फिर भी वह मुझे नहीं दिखाई दी।

          मैंने नहा धोकर नाश्ता किया और इस समय तक कल की तरह एक बार फिर से बारिश शुरू हो गई थी लेकिन यह इतनी तेज नहीं थी तो मैं नाश्ता करने के बाद घर से बाहर निकल गया और उसके घर की ओर मेरे कदम बढ़ने लगे। मैं भगवान से प्रार्थना कर रहा था कि वह मुझे दिख जाए, इधर से जाते हुए तो वह मुझे नहीं दिखी लेकिन जब मैं उधर से आ रहा था और आधे रास्ते आ पाया था, अभी भी मैं उसके घर के सामने था, तो वह मुझे घर से बाहर निकलती हुई दिखाई दी तो मैं तुरंत वापस लौट गया क्योंकि वहां से मैं उसे अच्छी तरह देख सकता था और ऐसा ही हुआ लेकिन कुछ ही सेकंड हुए थे कि सामने से कोई व्यक्ति आ रहा था तो मैं ज्यादा देर वहां खड़ा नहीं हो सकता था और मैं आगे बढ़ गया। लगभग 2 मिनट के बाद मैं फिर से वापस आया लेकिन तब तक वह घर के अंदर जा चुकी थी।

          आज पूरे दिन वह मुझे ज्यादा देखने को नहीं मिली। उसके बाद वह मुझे एक बार और देखने को मिली जब अपने घर के बाहर कुछ काम कर रही थी लेकिन तब भी उसके पास उसके घर का एक सदस्य खड़ा था तो मैं ना तो उसकी ओर देख सकता था और ना ही वहां रुक सकता था इसलिए मैं घर वापस आ गया। अभी दोपहर हो चुकी थी और मैं पढ़ने बैठ गया। कुछ देर पढ़ने के बाद मैं एक बार फिर से उसके घर की ओर गया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। वह दिखी ही नहीं तो मैं वापस आ गया। मैंने दोपहर का खाना खाया और कुछ देर आराम करने के बाद फिर से पढ़ने बैठ गया। पढ़ते-पढ़ते मुझे सुस्ती आने लगी थी लेकिन मुझे पढ़ाई के अलावा कुछ और काम भी करने थे तो उसके बाद मैंने अपने कुछ काम निपटाए और उसके बाद फिर से पढ़ने बैठ गया। अब मुझे फिर से सुस्ती आने लगी थी तो मैं थोड़ी देर के लिए आँखें बंद करके लेट गया और मुझे नींद आ गई।

             मैं सो कर उठा और शाम की चाय पी उसके बाद फिर से मैं बाहर निकल गया और उसके घर के पास जाकर खड़ा हो गया। मुझे खड़े हुए कुछ देर हो गई थी और तभी मुझे वह अपने घर से बाहर आते हुए दिखाई दी। उसे देखकर मेरा मन प्रसन्न हो गया लेकिन मैं वहां ज्यादा देर खड़ा नहीं हो सका और मुझे अपने घर वापस आना पड़ा। आज शाम को भी जब मैं बाहर गया तो वह मुझे देखने को नहीं मिली मैं काफी देर तक गांव में बने सार्वजनिक स्थान पर बैठा रहा। वहां उस समय तक और कोई भी नहीं था। उसने ना तो दरवाजा खोलकर बाहर की ओर देखा और ना ही वह मुझे कुछ काम करते हुए दिखाई दी। पता नहीं क्यों मुझे ऐसा लग रहा है जैसे कोई ना कोई बात है जिससे वो या तो डर गई है या उससे किसी ने कुछ कहा है। कल जब वह मुझे दिखेगी तो उससे पूछूंगा कि कहीं कुछ गड़बड़ तो नहीं है।

         जब मैं गांव में बने सार्वजनिक स्थान में बैठा था तो उस समय मौसम बहुत ही प्यारा हो रहा था। बारिश तो नहीं हो रही थी लेकिन धूप भी नहीं निकली, आसमान में बादल छाए हुए थे। बारिश के बाद गांव का मौसम वैसे भी सुहावना हो जाता है। चारों ओर हरे-भरे पेड़ और खेत… हरियाली देखकर मन प्रसन्न हो जाता है लेकिन मेरा मन तो उसे देखने का कर रहा था और वह मुझे दिखाई नहीं दी। मैं घर वापस आ गया। रात का खाना खाने के बाद मैं रोज की तरह फिर से टहलने के लिए बाहर चला गया। आज मुझे उम्मीद थी कि वह छत पर आएगी लेकिन वह आज भी नहीं आई। उसके ना आने से मेरे मन में यह संदेह जाग रहा है कि कहीं ना कहीं कोई गड़बड़ है। मैं कुछ देर टहला और तब तक मेरे दोस्त भी आ चुके थे। हम लोगों ने कुछ देर बातें कीं और उसके बाद हम सब अपने-अपने घर आ गए। अभी रात के 12:00 बजने वाले हैं तो अब मैं चलता हूँ सोने, आपसे मिलूंगा कल फिर से एक और नई पोस्ट के साथ… शुभ रात्रि ।

शनिवार, 14 सितंबर 2024

लगातार हो रही बारिश ने घर में कैद कर दिया.... लेकिन उसे देखे बिना मन कहाँ मानने वाला था | Daily Diary | 13 September 2024 Diary

 स्वागत है आप सभी लोगों का मेरी आज की डेली डायरी पोस्ट में, आज है 13 सितंबर 2024। एक बार फिर से मैं कुछ दिनों से अपनी डेली डायरी नहीं लिख पाया… पता नहीं क्यों कुछ दिन का गैप हो ही जाता है। कभी एक परेशानी आ जाती है तो कभी दूसरी… और अभी भी काफी रात हो चुकी है लेकिन मैंने तय कर लिया था कि मैं आज की पोस्ट लिखकर ही सोऊंगा। तो चलिए बताता हूँ आपको आज का और पिछले दो-तीन दिन का हाल।

          पिछले दो दिन से लगातार बारिश हो रही है, घर से बाहर निकलने को नहीं मिल रहा है। इतनी बारिश हो रही है कि घर में कैद होकर रहना पड़ रहा है। हालांकि मैं कहाँ मानने वाला था, शाम के समय छाता लेकर मैं बाहर निकल ही जाता था। सुबह से शाम तक पूरा दिन हो जाता था उसे देखे बिना, बहुत मन करता था उसे देखने का तो मैं बारिश में भी शाम को घर से बाहर निकल गया और मेरी यह कोशिश अच्छी भी रही क्योंकि दोनों ही दिन वह मुझे देखने को मिल गई। जब मैं उसे पूरे दिन नहीं देख पाता हूँ और शाम को उसके दर्शन होते हैं तो खुशी कई गुना बढ़ जाती है। बारिश की वजह से वह छत पर नहीं आ पा रही है और ना ही मैं उसके घर के पास जा पा रहा हूँ तो रात का मिलना तो हमारा बंद है। बड़ी मुश्किल से दिन भर में नाम मात्र के लिए वह देखने को मिलती है।

          आज भी सुबह से ही बारिश हो रही थी। सुबह बारिश थोड़ी हल्की थी लेकिन इतनी भी नहीं कि बिना छाता लगाए बाहर चले जाएं… तो मैं रोज के अपने काम से घर के बाहर गया उसके घर की ओर। अपना काम समाप्त करके मुझे थोड़ी देर प्रतीक्षा करनी पड़ी और आखिरकार वह अपने घर से बाहर आई। उसने तिरछी नजरों से मेरी ओर देखा और मैं तो उसे देख ही रहा था क्योंकि कल पूरे दिन वह मुझे देखने को नहीं मिली थी और रात को भी हम नहीं मिल पाते हैं। मेरे आस-पास और भी कई लोग थे तो वह मेरी और खुलकर नहीं देख सकती थी। थोड़ी देर बाद वह घर के अंदर चली गई लेकिन मैं उसके दोबारा आने की प्रतीक्षा में वहीं खड़ा रहा और थोड़ी देर बाद वह एक बार फिर से बाहर आई लेकिन इस बार जल्दी ही चली गई और मुझे भी काफी देर हो चुकी थी तो मैं भी घर वापस आ गया। उसके बाद बारिश और भी तेज हो गई तो आज सुबह से शाम तक पूरा दिन घर में ही कैद होकर रहना पड़ा। पूरे दिन कभी तेज तो कभी हल्की लगातार बारिश होती रही।

            आज मैं और दिन के मुकाबले थोड़ा और ज्यादा पढ़ा। पढ़ाई के बाद मैंने कुछ और काम निपटाए। शाम के 5 बजे के आसपास बारिश लगभग रुक चुकी थी तो मैं घर से बाहर निकल गया। जैसे ही मैं उसके घर के सामने पहुंचा सौभाग्य से वह घर के बाहर आ रही थी। मैंने उसे देखा लेकिन शायद उसने इस बार मेरी तरफ नहीं देखा क्योंकि बारिश की वजह से घर के बाहर फिसलन थी तो वह संभल-संभल कर चल रही थी। मुझे उसे देखकर बहुत खुशी हुई। मैं अपने नियत स्थान पर जाकर बैठ गया। मुझे प्रतीक्षा करनी पड़ी, आखिरकार कुछ समय के बाद उसने दरवाजे से बाहर झाँककर देखा… लेकिन इस बार भी मेरे आस-पास तीन-चार लोग और थे। हालांकि मैंने उसे देख लिया था कि वह दरवाजे से झांक कर देख रही है। उसने जल्दी ही दरवाजा बंद कर लिया। अब हल्की-हल्की बारिश फिर से शुरू हो गई थी तो मैं घर लौट आया।

        रात का खाना खाने के बाद एक बार फिर से मैं बाहर चला गया। इस समय बारिश नहीं हो रही थी लेकिन कल इस समय बारिश हो रही थी तो बाहर जाने का मौका नहीं मिला था। इसका कोई फायदा नहीं हुआ क्योंकि बारिश भले ही नहीं हो रही हो लेकिन आसमान में बादल थे और इस समय लाइट की भी समस्या गांव में हो जाती है तो वह छत पर नहीं आई थी। मुझे भी ऐसा लग रहा था कि वह आज नहीं आएगी तो मैं एक नियत समय तक उसकी प्रतीक्षा करने के बाद घर वापस लौट आया। अब मन करता है कि वह रात को रोज छत पर आए। उसको रोज छत पर देखने की आदत सी हो गई है लेकिन अब कल तक प्रतीक्षा करनी पड़ेगी। अगर कल फिर से बारिश हुई तो एक बार फिर से मन मार कर घर में ही रहना पड़ेगा। जो भी होगा कल ही देखेंगे। अभी रात के 11:00 बज चुके हैं तो मैं चलता हूँ सोने, आपसे मिलूंगा कल एक और नई पोस्ट के साथ… शुभ रात्रि।

मेरा आज का दिन कल से भी ज्यादा उदासी भरा रहा...| 26 October 2024 Diary

स्वागत है आप लोगों का मेरी दैनिक डायरी में, आज है 26 अक्टूबर 2024। मेरा आज का दिन बहुत ही खराब रहा जैसे कि मैंने आपको कल बताया था कि कल उसने...