गुरुवार, 15 अगस्त 2024

उसके इस बर्ताव से मैं बुरी तरह टूट गया | Daily Diary | Personal Diary | 14 August 2024 Diary

 स्वागत है आप सभी लोगों का मेरी डेली डायरी में और आज है 14 अगस्त 2024। कुछ दिनों से एक बार फिर से मैं कोई भी पोस्ट नहीं लिख पा रहा हूँ। मेरे पिछले कुछ दिन काफी उतार-चढ़ाव वाले थे और मेरा मन एक बार फिर से खराब हो गया था। मॉर्निंग वॉक पर जाते हुए इतने दिनों में वह मुझे मुश्किल से एक या दो बार ही दिखाई दी होगी। पिछले कुछ दिनों से उसका बर्ताव मुझे कुछ ठीक नहीं लग रहा, या तो उसके मन में कुछ और चल रहा है या उसके घर की तरफ से कुछ ना कुछ परेशानी है… और आखिरकार कल मेरा दिल बुरी तरह से टूट गया।

          जैसा कि मैंने पहले भी आपको बताया था कि मैं उससे बात करने की कोशिश कर रहा हूँ क्योंकि एक जरूरी बात मुझे उससे करनी है लेकिन मुझे मौका नहीं मिल पा रहा है। उसके बर्ताव से मुझे लग रहा था कि वह शायद बात नहीं करना चाह रही है। मैंने उसके लिए एक लेटर लिखा और कल रात जब वह अपनी छत पर आई तो मैंने उसकी ओर वह लेटर फेंक दिया, लेकिन उसने उठा कर वापस छत पर से मेरी ओर वह लेटर फेंक दिया। उसकी इस हरकत से मुझे इतना बुरा लगा कि मैं इतनी बुरी तरह से टूट गया कि मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूं। कुछ देर के लिए मैं यूं ही खड़ा रहा। थोड़ी देर के बाद मैं वहीं पास में बैठ गया और मेरी आंखों में आंसू आ गए। मैं रो रहा था, हालांकि वह बाद में अपनी छत पर से मेरी ओर देख रही थी लेकिन वह क्या सोच रही थी मुझे नहीं पता। मैं बस रोए जा रहा था… मैं काफी देर यूं ही गमगीन सा बैठा रहा, उसके बाद मैं उठकर अपने घर आ गया।

           अब कल से मेरा मन इतना खराब है कि कुछ भी करने का दिल नहीं कर रहा। आज सुबह जब मैं मॉर्निंग वॉक पर गया तो वह मुझे नहीं दिखी। मैंने भी कोई खास कोशिश नहीं की उसे देखने की क्योंकि कल से मैं बुरी तरह टूट चुका हूँ। कल से बस उसकी याद सताए जा रही है… काश मैंने उससे सच्चा प्यार ना किया होता, औरों की तरह बस टाइम पास ही किया होता (जैसा कि आजकल सभी करते हैं) तो शायद मैं खुशी से रहता और मुझे कोई दुख नहीं होता। आज मैं बाहर भी नहीं गया। मॉर्निंग वॉक से वापस आने के बाद नहा धोकर नाश्ता करके मैं घर ही रहा, और जैसे रोज उसे देखने बाहर जाता हूँ आज मैं नहीं गया। आज का मेरा पूरा दिन कितना खराब बीता मैं बता नहीं सकता, मेरे पास शब्द नहीं हैं। पूरे दिन बस उसी की याद आती रही, पता नहीं उसने ऐसा क्यों किया, उसके दिल में क्या है… अगर कोई भी परेशानी है तो कम से कम मुझे बताना तो चाहिए। अगर कोई समस्या आती है तो उसका हल मिलकर ढूंढा जाता है, यूं रिश्ता खत्म नहीं किया जाता।

            शाम की चाय पीने के बाद मैं बाहर गया और उसके घर की ओर ना जाकर रास्ते में ही किसी जगह अकेले में बैठ गया और काफी देर तक यूं ही बैठा रहा। कुछ देर बाद मैं घर वापस आ गया। फिर शाम को मैं बाहर गया तो उसके घर की ओर जहाँ हम सभी लोग बैठते हैं वहाँ जाकर बैठ गया। मेरा मन ठीक नहीं था लेकिन फिर भी उसे देखने का मन कर रहा था तो बीच-बीच में मैं नजर उठाकर उसके घर की ओर देखता लेकिन वह मुझे दिखाई नहीं दी। थोड़ी देर बाद मुझे लगा जैसे उसने मुझे देखा, वह दरवाजे पर तो नहीं आई लेकिन घर के अंदर ही अंदर दरवाजे के इस ओर से उस ओर तक जाकर वापस आई। वह मेरी ओर देख रही थी, शायद यह देख रही होगी कि अब मेरा क्या हाल है। जब रात होने लगी तो मैं वापस घर आ गया और खाना खाने के बाद रोज की तरह फिर से बाहर निकल गया। मैं और मेरे दोस्त वहीं टहल रहे थे। थोड़ी देर बाद मैंने देखा कि वह अपनी छत पर आ चुकी है और जिधर हम टहल रहे थे उधर की ओर वह खड़ी थी और बीच-बीच में छत पर ही टहल रही थी। पता नहीं अब उसके मन में क्या है, उसे मेरी पहचान तो पड़ ही गई होगी कि मैं वहां पर हूँ और किस हाल में हूँ। किसी भी गपशप में मेरा मन नहीं लग रहा था तो मैं सबसे अलग कभी खड़ा होता था तो कभी टहलने लगता था। पता नहीं वह अब मुझसे बोलेगी भी या नहीं या हमारा रिश्ता यूं ही खत्म हो जाएगा।

           कुछ देर के बाद मेरे साथ के सभी लोग वहां से चले गए लेकिन मैं वहीं रहा और अकेले में बैठकर उसे याद करता रहा। वह उस समय भी छत पर ही थी लेकिन उसने मुझसे बात करने की कोई कोशिश नहीं की। कुछ देर के बाद वह दिखनी बंद हो गई, शायद नीचे चली गई होगी। मैं कुछ देर यूं ही बैठा रहा अकेले में… अंधेरे में बैठने का मन कर रहा था, सबसे अलग जहां कोई ना हो, किसी से भी बोलने का मन नहीं था। कुछ देर बैठने के बाद मैं वापस घर आ गया। एक बार तो मन किया कि मैं कुछ लिखूं लेकिन अगले ही पल सोचा कि आज नहीं कल लिखूंगा। आज मन ठीक नहीं है लेकिन फिर मैंने सोचा कि आप लोगों से अपनी बातें शेयर करूंगा तो कुछ अच्छा लगेगा और कल के चक्कर में रोज ऐसे ही समय निकलता जाएगा तो मैंने बड़ी मुश्किल से अपने मन को संभाला और यह पोस्ट लिखने बैठ गया। अपने दिल की बातें यहां लिखकर अब थोड़ा सा अच्छा लग रहा है लेकिन उसकी याद लगातार मेरे दिल में आ रही है, उसका चेहरा मेरी आंखों के सामने घूम रहा है। देखते हैं कि अब कल क्या होगा… और कल मेरा मॉर्निंग वॉक पर जाने का बिल्कुल भी मन नहीं है तो मैं कल नहीं जाऊंगा। अभी रात के 11:30 बजने वाले हैं और अब मैं सोने जा रहा हूँ, लेकिन पता नहीं नींद आएगी भी या नहीं या कितनी देर तक नहीं आएगी। अब आपसे कल मिलूंगा और कल से रोज लिखने की कोशिश करूंगा… शुभ रात्रि।

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