स्वागत है आप लोगों का फिर से मेरी एक और दैनिक डायरी पोस्ट में और आज है 8 अगस्त 2024। आज सुबह मुझे उठने में थोड़ी परेशानी हुई क्योंकि रात मैं देर से सोया था और कल मेरी नींद भी पूरी नहीं हुई थी तो सुबह अलार्म बजने पर मैं एक बार तो अलार्म बंद करके फिर से लेट गया, लेकिन अच्छा हुआ 7 मिनट बाद मेरी आँख खुल गई और मैं जल्दी से उठा। एक गिलास पानी पीकर मॉर्निंग वॉक के लिए चला गया। जब भी मैं सुबह मॉर्निंग वॉक के लिए जाता हूँ तो मुझे एक आस रहती है उसके दिखाई देने की लेकिन आज वह ना तो मुझे इधर से जाते हुए दिखाई दी और ना ही उधर से आते हुए। रात नींद पूरी न होने की वजह से मुझे मॉर्निंग वॉक पर जाकर लौटने तक थोड़ी सुस्ती सी महसूस होती रही।
वापस आकर नहा धोकर मैंने नाश्ता किया और फिर उसे देखने की आस में बाहर निकल गया। जैसे ही मैं उसके घर के सामने पहुंचा तो वह बाहर से अपने घर के अंदर जा रही थी। अगर मैं थोड़ा और लेट हो जाता तो उसे नहीं देख पाता। जैसे ही उसने मुझे देखा तो वह समझ गई कि मैं क्यों आया हूँ। मुझे भी उसे देखकर बहुत खुशी हुई। जब वह घर के अंदर चली गई तो उसने पलट कर फिर से मेरी ओर देखा कि मैं वहीं खड़ा हूँ या नहीं और मैं तब तक वहीं खड़ा था। उसके बाद मैं वहां से वापस आ गया। वापस आकर मैंने रोज के अपने काम निपटाए और उसके बारे में सोचता रहा। मुझे उससे कुछ जरूरी बात करनी है लेकिन बात करने का मौका नहीं मिल पा रहा है।
दोपहर का खाना खाने के बाद एक बार फिर से मैं बाहर की ओर निकल गया और उसके घर के सामने से गुजरते हुए मैंने उसके घर की ओर देखा लेकिन वह मुझे दिखाई नहीं दी, फिर मैं आगे बढ़ गया। लेकिन जब मैं उधर से लौट रहा था तो वह मुझे दिख गई, मैं वहीं खड़ा हो गया और उसे देखता रहा। हालांकि मैंने चारों ओर देख लिया था कि कहीं कोई और तो मुझे नहीं देख रहा है। दोपहर का समय था इसलिए सब अपने घरों के अंदर थे और मैं धूप में खड़ा उसे देख रहा था… मानो मुझ पर धूप का कोई असर ही नहीं हो रहा हो। उसे अभी तक यह नहीं पता था कि सामने मैं खड़ा उसे देख रहा हूँ। थोड़ी देर बाद जब उसने नजर उठा कर देखा तो मुझे देखते ही उसके चेहरे पर एक मुस्कुराहट सी आ गई। मैंने उससे इशारों में कुछ पूछने की कोशिश की, पता नहीं वह समझ पाई या नहीं क्योंकि उसने कुछ तो इशारा किया था लेकिन मैं उसके इशारे को समझ नहीं पाया। पता नहीं क्या कह रही थी। वहां ज्यादा देर खड़े होना भी ठीक नहीं था तो वह भी अंदर चली गई और मैं भी घर वापस आ गया।
आज मैंने फैसला किया था कि मैं दोपहर में नहीं सोऊंगा क्योंकि कुछ दिनों से दोपहर को मुझे नींद आ रही थी और दोपहर में सो जाने की वजह से मेरे काम समय से नहीं हो पा रहे थे। आज मैं अपनी कोशिश में सफल रहा। आज मैं दोपहर में नहीं सोया जिसकी वजह से मैंने जो काम सोच रखे थे वह कर लिए। शाम की चाय पीने के बाद मैं बाहर निकल गया। फिर से मैंने उसे देखने की कोशिश की। थोड़ी कोशिश के बाद वह मुझे दिख गई वह अपने घर के आंगन में लेटी थी। लेकिन उसका मुंह दूसरी ओर था तो मैंने कुछ देर उसे देखा, उसके बाद मैं वापस आकर किसी काम में लग गया। थोड़ी देर बाद मैं फिर से वहीं पहुंच गया, इस बार उसने मेरी और देखा लेकिन मेरे साथ कुछ और लोग भी बैठे थे तो वह जल्दी ही काम समाप्त करके घर के अंदर चली गई और दरवाजा बंद कर लिया। जब मुझे लगा कि मेरे साथ वाले लोग उठने वाले नहीं हैं तो मैं वहां से वापस आ गया।
आज शाम के समय मैं थोड़ा व्यस्त रहा तो मुझे शाम के समय बाहर जाने का मौका नहीं मिला। आज मुझे गांव में ही एक दावत में जाना था। वहां से लौटते समय देर हो चुकी थी तो मुझे आभास हो गया था कि आज रात में हमारी बातें नहीं हो पाएंगी और यही हुआ। जब तक मैं वापस आता तब तक देर हो चुकी थी। शायद वह छत पर आई होगी और मुझे वहां न देखकर वापस चली गई होगी। मैं और मेरे दोस्त रोज की तरह टहलने के लिए निकल गए और जब वापस आए तो काफी समय हो चुका था तो फिर हम वहां नहीं रुके और अपने-अपने घर वापस आ गए। अब मुझे फिर से कल की प्रतीक्षा करनी होगी। अभी रात के 11:30 बज रहे हैं तो अब मैं आपसे विदा लेता हूँ, अब आपसे मुलाकात होगी कल फिर से एक और नई पोस्ट के साथ… शुभ रात्रि।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें