स्वागत है आप लोगों का मेरी आज की डेली डायरी पोस्ट में, आज है 14 सितंबर 2024। आज मुझे सुबह सोकर उठने में थोड़ी सी परेशानी हुई क्योंकि रात मैं काफी लेट सोया था। मुझे सुबह को जल्दी उठना होता है क्योंकि सुबह-सुबह एक निश्चित काम से उसके घर की ओर जाना होता है इसलिए कैसे भी करके मैं सुबह को समय पर उठ जाता हूँ। आज भी थोड़ी सी परेशानी के बावजूद मैं उठ गया, उसके बाद मैं काम से उसके घर की ओर गया। मुझे उम्मीद थी कि वह दिखाई देगी लेकिन आज भी मुझे नहीं दिखी, मैं वहां से घर वापस आ गया। उसके बाद भी मैंने एक दो बार और कोशिश की और उसके घर की ओर गया लेकिन फिर भी वह मुझे नहीं दिखाई दी।
मैंने नहा धोकर नाश्ता किया और इस समय तक कल की तरह एक बार फिर से बारिश शुरू हो गई थी लेकिन यह इतनी तेज नहीं थी तो मैं नाश्ता करने के बाद घर से बाहर निकल गया और उसके घर की ओर मेरे कदम बढ़ने लगे। मैं भगवान से प्रार्थना कर रहा था कि वह मुझे दिख जाए, इधर से जाते हुए तो वह मुझे नहीं दिखी लेकिन जब मैं उधर से आ रहा था और आधे रास्ते आ पाया था, अभी भी मैं उसके घर के सामने था, तो वह मुझे घर से बाहर निकलती हुई दिखाई दी तो मैं तुरंत वापस लौट गया क्योंकि वहां से मैं उसे अच्छी तरह देख सकता था और ऐसा ही हुआ लेकिन कुछ ही सेकंड हुए थे कि सामने से कोई व्यक्ति आ रहा था तो मैं ज्यादा देर वहां खड़ा नहीं हो सकता था और मैं आगे बढ़ गया। लगभग 2 मिनट के बाद मैं फिर से वापस आया लेकिन तब तक वह घर के अंदर जा चुकी थी।
आज पूरे दिन वह मुझे ज्यादा देखने को नहीं मिली। उसके बाद वह मुझे एक बार और देखने को मिली जब अपने घर के बाहर कुछ काम कर रही थी लेकिन तब भी उसके पास उसके घर का एक सदस्य खड़ा था तो मैं ना तो उसकी ओर देख सकता था और ना ही वहां रुक सकता था इसलिए मैं घर वापस आ गया। अभी दोपहर हो चुकी थी और मैं पढ़ने बैठ गया। कुछ देर पढ़ने के बाद मैं एक बार फिर से उसके घर की ओर गया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। वह दिखी ही नहीं तो मैं वापस आ गया। मैंने दोपहर का खाना खाया और कुछ देर आराम करने के बाद फिर से पढ़ने बैठ गया। पढ़ते-पढ़ते मुझे सुस्ती आने लगी थी लेकिन मुझे पढ़ाई के अलावा कुछ और काम भी करने थे तो उसके बाद मैंने अपने कुछ काम निपटाए और उसके बाद फिर से पढ़ने बैठ गया। अब मुझे फिर से सुस्ती आने लगी थी तो मैं थोड़ी देर के लिए आँखें बंद करके लेट गया और मुझे नींद आ गई।
मैं सो कर उठा और शाम की चाय पी उसके बाद फिर से मैं बाहर निकल गया और उसके घर के पास जाकर खड़ा हो गया। मुझे खड़े हुए कुछ देर हो गई थी और तभी मुझे वह अपने घर से बाहर आते हुए दिखाई दी। उसे देखकर मेरा मन प्रसन्न हो गया लेकिन मैं वहां ज्यादा देर खड़ा नहीं हो सका और मुझे अपने घर वापस आना पड़ा। आज शाम को भी जब मैं बाहर गया तो वह मुझे देखने को नहीं मिली मैं काफी देर तक गांव में बने सार्वजनिक स्थान पर बैठा रहा। वहां उस समय तक और कोई भी नहीं था। उसने ना तो दरवाजा खोलकर बाहर की ओर देखा और ना ही वह मुझे कुछ काम करते हुए दिखाई दी। पता नहीं क्यों मुझे ऐसा लग रहा है जैसे कोई ना कोई बात है जिससे वो या तो डर गई है या उससे किसी ने कुछ कहा है। कल जब वह मुझे दिखेगी तो उससे पूछूंगा कि कहीं कुछ गड़बड़ तो नहीं है।
जब मैं गांव में बने सार्वजनिक स्थान में बैठा था तो उस समय मौसम बहुत ही प्यारा हो रहा था। बारिश तो नहीं हो रही थी लेकिन धूप भी नहीं निकली, आसमान में बादल छाए हुए थे। बारिश के बाद गांव का मौसम वैसे भी सुहावना हो जाता है। चारों ओर हरे-भरे पेड़ और खेत… हरियाली देखकर मन प्रसन्न हो जाता है लेकिन मेरा मन तो उसे देखने का कर रहा था और वह मुझे दिखाई नहीं दी। मैं घर वापस आ गया। रात का खाना खाने के बाद मैं रोज की तरह फिर से टहलने के लिए बाहर चला गया। आज मुझे उम्मीद थी कि वह छत पर आएगी लेकिन वह आज भी नहीं आई। उसके ना आने से मेरे मन में यह संदेह जाग रहा है कि कहीं ना कहीं कोई गड़बड़ है। मैं कुछ देर टहला और तब तक मेरे दोस्त भी आ चुके थे। हम लोगों ने कुछ देर बातें कीं और उसके बाद हम सब अपने-अपने घर आ गए। अभी रात के 12:00 बजने वाले हैं तो अब मैं चलता हूँ सोने, आपसे मिलूंगा कल फिर से एक और नई पोस्ट के साथ… शुभ रात्रि ।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें