स्वागत है आप सभी लोगों का मेरी आज की डेली डायरी पोस्ट में, आज है 13 सितंबर 2024। एक बार फिर से मैं कुछ दिनों से अपनी डेली डायरी नहीं लिख पाया… पता नहीं क्यों कुछ दिन का गैप हो ही जाता है। कभी एक परेशानी आ जाती है तो कभी दूसरी… और अभी भी काफी रात हो चुकी है लेकिन मैंने तय कर लिया था कि मैं आज की पोस्ट लिखकर ही सोऊंगा। तो चलिए बताता हूँ आपको आज का और पिछले दो-तीन दिन का हाल।
पिछले दो दिन से लगातार बारिश हो रही है, घर से बाहर निकलने को नहीं मिल रहा है। इतनी बारिश हो रही है कि घर में कैद होकर रहना पड़ रहा है। हालांकि मैं कहाँ मानने वाला था, शाम के समय छाता लेकर मैं बाहर निकल ही जाता था। सुबह से शाम तक पूरा दिन हो जाता था उसे देखे बिना, बहुत मन करता था उसे देखने का तो मैं बारिश में भी शाम को घर से बाहर निकल गया और मेरी यह कोशिश अच्छी भी रही क्योंकि दोनों ही दिन वह मुझे देखने को मिल गई। जब मैं उसे पूरे दिन नहीं देख पाता हूँ और शाम को उसके दर्शन होते हैं तो खुशी कई गुना बढ़ जाती है। बारिश की वजह से वह छत पर नहीं आ पा रही है और ना ही मैं उसके घर के पास जा पा रहा हूँ तो रात का मिलना तो हमारा बंद है। बड़ी मुश्किल से दिन भर में नाम मात्र के लिए वह देखने को मिलती है।
आज भी सुबह से ही बारिश हो रही थी। सुबह बारिश थोड़ी हल्की थी लेकिन इतनी भी नहीं कि बिना छाता लगाए बाहर चले जाएं… तो मैं रोज के अपने काम से घर के बाहर गया उसके घर की ओर। अपना काम समाप्त करके मुझे थोड़ी देर प्रतीक्षा करनी पड़ी और आखिरकार वह अपने घर से बाहर आई। उसने तिरछी नजरों से मेरी ओर देखा और मैं तो उसे देख ही रहा था क्योंकि कल पूरे दिन वह मुझे देखने को नहीं मिली थी और रात को भी हम नहीं मिल पाते हैं। मेरे आस-पास और भी कई लोग थे तो वह मेरी और खुलकर नहीं देख सकती थी। थोड़ी देर बाद वह घर के अंदर चली गई लेकिन मैं उसके दोबारा आने की प्रतीक्षा में वहीं खड़ा रहा और थोड़ी देर बाद वह एक बार फिर से बाहर आई लेकिन इस बार जल्दी ही चली गई और मुझे भी काफी देर हो चुकी थी तो मैं भी घर वापस आ गया। उसके बाद बारिश और भी तेज हो गई तो आज सुबह से शाम तक पूरा दिन घर में ही कैद होकर रहना पड़ा। पूरे दिन कभी तेज तो कभी हल्की लगातार बारिश होती रही।
आज मैं और दिन के मुकाबले थोड़ा और ज्यादा पढ़ा। पढ़ाई के बाद मैंने कुछ और काम निपटाए। शाम के 5 बजे के आसपास बारिश लगभग रुक चुकी थी तो मैं घर से बाहर निकल गया। जैसे ही मैं उसके घर के सामने पहुंचा सौभाग्य से वह घर के बाहर आ रही थी। मैंने उसे देखा लेकिन शायद उसने इस बार मेरी तरफ नहीं देखा क्योंकि बारिश की वजह से घर के बाहर फिसलन थी तो वह संभल-संभल कर चल रही थी। मुझे उसे देखकर बहुत खुशी हुई। मैं अपने नियत स्थान पर जाकर बैठ गया। मुझे प्रतीक्षा करनी पड़ी, आखिरकार कुछ समय के बाद उसने दरवाजे से बाहर झाँककर देखा… लेकिन इस बार भी मेरे आस-पास तीन-चार लोग और थे। हालांकि मैंने उसे देख लिया था कि वह दरवाजे से झांक कर देख रही है। उसने जल्दी ही दरवाजा बंद कर लिया। अब हल्की-हल्की बारिश फिर से शुरू हो गई थी तो मैं घर लौट आया।
रात का खाना खाने के बाद एक बार फिर से मैं बाहर चला गया। इस समय बारिश नहीं हो रही थी लेकिन कल इस समय बारिश हो रही थी तो बाहर जाने का मौका नहीं मिला था। इसका कोई फायदा नहीं हुआ क्योंकि बारिश भले ही नहीं हो रही हो लेकिन आसमान में बादल थे और इस समय लाइट की भी समस्या गांव में हो जाती है तो वह छत पर नहीं आई थी। मुझे भी ऐसा लग रहा था कि वह आज नहीं आएगी तो मैं एक नियत समय तक उसकी प्रतीक्षा करने के बाद घर वापस लौट आया। अब मन करता है कि वह रात को रोज छत पर आए। उसको रोज छत पर देखने की आदत सी हो गई है लेकिन अब कल तक प्रतीक्षा करनी पड़ेगी। अगर कल फिर से बारिश हुई तो एक बार फिर से मन मार कर घर में ही रहना पड़ेगा। जो भी होगा कल ही देखेंगे। अभी रात के 11:00 बज चुके हैं तो मैं चलता हूँ सोने, आपसे मिलूंगा कल एक और नई पोस्ट के साथ… शुभ रात्रि।
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