स्वागत है आप लोगों का मेरी आज की डेली डायरी पोस्ट में, आज है 19 सितंबर 2024। मेरा आज का दिन भी कुछ खास नहीं था, बस मैंने पढ़ाई थोड़ी अच्छे से की थी लेकिन शाम के समय सब कुछ गड़बड़ हो गया और जैसे-जैसे समय आगे बढ़ा मन बिल्कुल खराब हो गया था। दिन भर दिमाग में कई तरह के विचारों का आना-जाना लगा रहा, उसमें कुछ अच्छे थे तो कुछ बुरे। बुरे यानी थोड़ी तकलीफ देने वाले, कुछ ऐसे जो कसक को और बढ़ा देते हैं।
सुबह सो कर उठने के बाद मैं वही रोज के अपने काम से बाहर गया उसके घर की ओर। मन में एक आस थी कि उसे देख पाऊं लेकिन वो मुझे देखने को नहीं मिली। वापस आकर मैंने एक कप चाय पी और कुछ देर यूं ही टहलता रहा। उसके बाद नित्य कर्म से निपटकर नहा धोकर नाश्ता करने के बाद एक बार फिर से बाहर की ओर निकल गया लेकिन वह अब भी मुझे दिखाई नहीं दी थी। मैं वापस आया और पढ़ने बैठ गया। आज पढ़ाई में जो मैंने लक्ष्य तय किया था उसे मैंने पूरा कर लिया। कुछ देर पढ़ते-पढ़ते जब दिमाग थक सा गया तो मैं दिमाग को तरोताजा करने के लिए फिर से बाहर निकल गया और उसके घर के सामने से जाते हुए उसे देखने की कोशिश की लेकिन वह अब भी दिखाई नहीं दी। थोड़ी देर बाद मैं वापस आ गया और फिर से पढ़ने बैठ गया। आज पिताजी कहीं बाहर गए हुए थे तो घर के अन्य काम भी मुझे ही करने थे तो मैंने पढ़ाई के साथ-साथ घर के कुछ और जरूरी काम निपटाए।
दोपहर हो चुकी थी। मम्मी ने खाना खाने के लिए बुला लिया। मैंने दोपहर का खाना खाया और रोज की तरह टहलने निकल गया। उसके घर के सामने जाकर मैंने देखा कि तार पर उसके कपड़े सूख रहे हैं। मैं समझ गया कि वह नहा कर अब घर के अंदर आराम कर रही होगी। अब वह बाहर नहीं आएगी। थोड़ी देर बाद मैं वापस आ गया और पढ़ने बैठ गया। लगभग 1 घंटा पढ़ने के बाद मैंने थोड़ी देर आराम किया और उसके बाद मेरे जो दूसरे काम थे उन्हें पूरा करने में लग गया। शाम तक यही सब चलता रहा, कभी पढ़ाई तो कभी काम।
अब शाम हो चुकी थी। मैंने शाम की चाय पी और रोज की तरह बाहर चला गया और जाकर सार्वजनिक स्थान पर बैठ गया। उसका दरवाजा बंद था। मैं वहां बैठकर मोबाइल में अपना कुछ काम कर रहा था और साथ ही उसकी प्रतीक्षा भी कर रहा था। थोड़ी देर बाद मुझे उसकी आवाज सुनाई दी और तभी वह अपने घर से बाहर आई अपना कुछ काम करने के लिए… बहुत थोड़ी देर के लिए। मैंने उसे देखा और घर वापस जाते हुए उसने भी मेरी तरफ देखा। उसके बाद मुझे उसकी आवाज तो आ रही थी लेकिन वह दिखी नहीं। वह किसी बच्चे को खिला रही थी। मैं वहां बैठा उसके फिर से आने की प्रतीक्षा कर रहा था कि तभी मेरा मोबाइल बजा। मुझे घर से बुलावा आया था, उसके बाद मैं वहां से उठकर अपने घर आ गया।
अभी शाम और रात के बीच का समय था। मैं एक बार फिर से बाहर आया और आकर इसी जगह बैठ गया। यही वह समय था जब मेरा मन थोड़ा विचलित होना शुरू हो गया था। कुछ भी अच्छा नहीं लग रहा था, मन एकदम से खराब हो रहा था लेकिन इसकी वजह मुझे पता नहीं चल पा रही थी। ऐसा मेरे साथ कई बार हो चुका है और अक्सर होता रहता है। मैं वहां जाकर अकेला बैठा रहा। इस समय मुझे उसकी बहुत याद आ रही थी क्योंकि कई दिनों से मैंने उसे ठीक से नहीं देखा है और हमारी कोई बातचीत नहीं हुई है। मैं उसके बारे में ही सोचता रहा कुछ देर के बाद जब वहां अन्य लोग आने लगे तो मैं उठकर अपने घर आ गया।
अभी रात हो चुकी थी और यह रात के भोजन का समय था लेकिन आज खाना खाने का मेरा मन नहीं कर रहा था। पता नहीं क्यों बस दिमाग उसी के बारे में सोच रहा था और मैं बिना खाना खाये ही बाहर चला गया जैसे कि रोज खाना खाने के बाद टहलने जाता हूँ। मैं जाकर फिर से उसी जगह बैठ गया और अपना मन शांत करने के लिए मोबाइल में कुछ काम करने लगा। अभी मुझे थोड़ी ही देर हुई थी कि मुझे छत पर वह दिखाई दी। मैंने तुरंत मोबाइल बंद किया और उसकी ओर आ गया। रात के अंधेरे में उसका चेहरा तो दिखाई नहीं देता लेकिन उसके वहां होने से मुझे बहुत खुशी होती है। मैं वहां जाकर उसे देखता रहा और वह भी वहां टहलते टहलते मेरी ओर देख रही थी। आज मुझे शाम से जैसा लग रहा था मैंने उसे बता दिया। उसके वहां दिखने और उससे अपने दिल की बात कहने के बाद मुझे थोड़ा अच्छा महसूस हुआ। अभी मैं उससे कुछ और कहने वाला ही था कि वह वहां से नीचे चली गई। पता नहीं शायद नीचे से किसी की आवाज आई थी और उसे लगा होगा कि कहीं कोई ऊपर ना आ जाए। उसके बाद मैंने उसकी प्रतीक्षा की लेकिन फिर वह नहीं आई। जब रात काफी होने लगी तो मैं वहां से उठकर अपने घर आ गया।
अभी रात के 10:30 बज रहे हैं। मैंने खाना अभी भी नहीं खाया है। पता नहीं क्यों मन नहीं कर रहा है और मैं खाऊंगा भी या नहीं मुझे पता नहीं, शायद दूध पीकर ही सो जाऊं। पता नहीं क्यों आज मन बहुत अजीब सा था। जहां तक मैं समझ पा रहा हूँ… यह उसे ठीक से ना देख पाने और उससे कोई बातचीत ना होने की वजह से हो रहा है क्योंकि बहुत दिन हो गए हैं। अब मन में कसक और गुस्सा बढ़ता जा रहा है। आज शाम के बाद से कुछ भी करने का मेरा मन नहीं कर रहा था। यहां तक कि आज की डायरी लिखने का भी बिल्कुल मन नहीं था। मैं काफी देर आंखें बंद करके यूं ही लेटा रहा और उसके बारे में सोचता रहा, लेकिन फिर मैंने बहुत कोशिशों के बाद आखिरकार डायरी लिखनी शुरू की। इसके अलावा मैं और कुछ नहीं करूंगा, ना ही पढ़ने का मन है और ना ही कुछ और काम करने का। अभी रात भी काफी हो चुकी है तो अब मैं चलता हूँ सोने, आपसे मिलूंगा कल फिर से एक और नई पोस्ट के साथ… शुभ रात्रि।
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