गुरुवार, 19 सितंबर 2024

शाम के समय पता नहीं क्यों मन कुछ अजीब सा हो जाता है...| अब वो बहुत कम देखने को मिल रही है | Daily Diary | 18 September 2024 Diary | Personal Diary Blog

 स्वागत है आप सभी लोगों का मेरी आज की डेली डायरी पोस्ट में, आज है 18 सितंबर 2024। आज सुबह उठने में मुझे फिर से थोड़ी परेशानी हुई क्योंकि रात में नींद पूरी नहीं हुई थी लेकिन मुझे अपने समय पर उठना ही था क्योंकि रोज के अपने काम से मुझे उसके घर की ओर जाना था। सुबह-सुबह उसे देखकर बाकी पूरा दिन अच्छा बीतता है। सुबह उठने के बाद मैं उसके घर की ओर गया लेकिन आज वह मुझे देखने को नहीं मिली। मैंने थोड़ी देर प्रतीक्षा भी की लेकिन वह घर से बाहर नहीं आई, फिर मैं वहां से वापस अपने घर आ गया। आज सुबह हल्की बूंदाबांदी हुई थी लेकिन ज्यादा तेज नहीं। सुबह नहा धोकर मैंने नाश्ता किया और बाहर निकल गया। उसे देखने की आज मेरी बहुत इच्छा थी लेकिन वह मुझे दिखाई नहीं दी। थोड़े से निराश मन से मैं वापस आ गया। वापस आकर मैंने पढ़ाई की, थोड़ी देर पढ़ने के बाद मैं एक बार फिर बाहर की ओर गया और इस बार जब मैं जा रहा था तो वह अपने घर से बाहर निकल रही थी… मैंने उसे देखा लेकिन उसने मुझे नहीं देखा क्योंकि मैं थोड़ा सा छिपा हुआ था।

          कुछ देर के बाद मैं घर वापस आ गया और पढ़ने बैठ गया। पढ़ते-पढ़ते दोपहर हो चुकी थी। दोपहर का भोजन लेने के बाद आदतन मैं फिर से बाहर की ओर गया, लेकिन अब उसके दिखाई देने की कोई संभावना नहीं थी तो थोड़ी देर बाद मैं वापस आ गया और फिर से पढ़ने बैठ गया। मुझे थोड़ी-थोड़ी सुस्ती भी आ रही थी तो मैंने थोड़ी देर नींद लेना सही समझा क्योंकि ऐसे में पढ़ने का कोई फायदा नहीं था, तो मैं थोड़ी देर के लिए सो गया। लगभग 15 से 20 मिनट के बाद मेरी आंख खुल गई और एक बार फिर से मैं पढ़ने बैठ गया। मैं लगभग 3:00 बजे तक पढ़ा, उसके बाद मैंने अपने कुछ अन्य काम किये। शाम की चाय पीने के बाद मैं बाहर की ओर गया तो जब मैं उसके घर के सामने से जा रहा था, वह अपने दरवाजे पर खड़ी थी लेकिन उसके साथ में उसकी भाभी और एक अन्य व्यक्ति भी था इसलिए मैंने उसकी ओर देखकर तुरंत अपनी निगाह हटा ली और आगे निकल गया। थोड़ी देर बाद जब मैं वापस आया तो वे लोग वहीं खड़े थे तो मैं उसकी ओर देखे बिना सीधा घर आ गया।

           शाम होने वाली थी और हल्की बूंदाबांदी फिर से शुरू हो गई थी। शाम का समय ऐसा होता है जिसमें कुछ करने का मन नहीं करता… ना ही पढ़ने का और ना ही कुछ और काम करने का। मन करता है बस खाली बैठे रहो। शाम के समय मैं गांव में बने सार्वजनिक स्थान पर जाकर बैठ गया। वहां कुछ देर बैठा रहा लेकिन आज और कोई नहीं आया, मैं अकेला ही बैठा था। थोड़ी देर बाद मैं उठकर घर आ गया। मुझे उम्मीद थी कि मैं वहां बैठा रहूंगा तो कभी ना कभी वह दरवाजा खोलकर देखेगी लेकिन आज उसने ऐसा नहीं किया। घर वापस आकर मैंने शाम के समय के घर के कुछ काम किये और तब तक रात हो चुकी थी। रात का भोजन लेने के बाद रोज ही की तरह मैं बाहर टहलने निकल गया।

            टहलने के बाद अपने उसी नियत स्थान पर बैठ गया और उसकी प्रतीक्षा करने लगा कि कब वो छत पर आएगी। लेकिन आज वह छत पर नहीं आई। मैंने बहुत देर उसकी प्रतीक्षा की। जब काफी समय हो गया और उसके आने की उम्मीद समाप्त हो गई तो मैं वहां से उठकर अपने घर आ गया। इस तरह आज भी वह मुझे ज्यादा देखने को नहीं मिली। घर आकर मुझे अपने काम करते-करते अभी 11:00 बज चुके हैं। तो कुछ ऐसा था मेरा आज का दिन, ना ज्यादा अच्छा ना ज्यादा बुरा। तो चलिए अब मैं चलता हूँ सोने, आपसे मुलाकात होगी कल फिर से एक और नई पोस्ट के साथ… शुभ रात्रि।

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