रविवार, 22 सितंबर 2024

कल की बातें आज भी मेरे मन में घूमती रहीं | Daily Diary | 21 September 2024 Diary

 स्वागत है आप सभी लोगों का मेरी डेली डायरी पोस्ट में, आज है 21 सितंबर 2024। आज दिन भर मेरा मन उदास रहा, बस कल से थोड़ा सा कम उदास था लेकिन उतना भी नहीं कि मैं कुछ ठीक से कर पाता। कल की बातें मेरे दिमाग में रह रहकर घूम रही थीं और मैं जैसे ही पढ़ने बैठता, मुझे कल की बातें याद आने लगतीं। हालांकि मैंने बहुत कोशिश की कि मैं अपनी पढ़ाई और दूसरे काम ठीक से कर पाऊं। इसमें मैंने कुछ हद तक सफलता भी प्राप्त की और मैं पढ़ा भी साथ ही दूसरे काम भी किये। बस फर्क इतना था कि पढ़ने या दूसरे काम करते हुए मेरे दिमाग में लगातार कल की बातें घूमती रहीं लेकिन मैंने हार नहीं मानी और मैं पढ़ता रहा।

         सुबह सोकर उठने के बाद मैं काम से बाहर गया लेकिन आज मेरे मन में उसे देखने की कोई खास उम्मीद नहीं थी और वह मुझे आज दिखाई भी नहीं दी। मैं वापस आ गया। घर आकर नहा धोकर नाश्ता किया और उसके बाद यूं ही घर से बाहर निकल गया। उसके घर के सामने से जाते हुए आज मैंने कोई खास कोशिश नहीं की उसे देखने की और मैं सीधा निकल गया। वापस आते हुए भी ऐसा ही हुआ और वह मुझे दिखाई भी नहीं दी। मुझे कल से बहुत गुस्सा आ रहा है उस पर। मैं वापस आ गया और पढ़ने बैठ गया। आज दोपहर में मैंने ठीक से खाना भी नहीं खाया। मन ही नहीं कर रहा था। आज दिन भर बस ऐसा ही रहा, कभी मैंने पढ़ाई की तो कभी मोबाइल चलाया तो कभी बाहर निकल गया लेकिन उसकी याद मुझे बराबर आती रही क्योंकि मैं उसे सच्चे दिल से प्यार करता हूँ… उसके बारे में कभी गलत नहीं सोचता।

          ऐसे ही दिन गुजरता रहा और शाम का समय हो गया। मैंने शाम की चाय पी और थोड़ी देर फिर से पढ़ा। उसके बाद मैं बाहर चला गया। बाहर से लौटते वक्त उसके घर के सामने से जब मैं गुजर रहा था तो वह सामने ही बैठी थी। मैंने हल्की सी निगाह से उसे देखा तो वह मेरी ओर देख रही थी लेकिन मैं आगे निकल गया और घर वापस आ गया। कुछ समय घर पर ही रहा, उसके बाद मैंने घर का कुछ काम किया। अब शाम हो चुकी थी और मैं रोज की तरह अपने उस नियत स्थान की ओर निकल गया। मैं वहां जाकर बैठ गया। उसका दरवाजा बंद था और मुझे कोई ऐसी आस भी नहीं थी। मन तो कर ही रहा था उसे देखने का लेकिन वह मुझे दिखाई नहीं दी। मैं कुछ देर वहां बैठा रहा, उसके बाद जब शाम होने लगी तो मैं उठकर वापस घर आ गया।

         दिन भर मन में कई तरह के ख्याल आते रहे। कभी मन उदास हो जाता था तो कभी मैं मन को समझा लेता था और कुछ अच्छी बातें सोच कर थोड़ा अच्छा महसूस करता था। दूसरा व्यक्ति अपने आप में स्वतंत्र है वह चाहे जो कर सकता है हमारा उस पर क्या अधिकार है। जो वह चाहता है कर सकता है इसमें हम कर ही क्या सकते हैं लेकिन हम जो कर सकते हैं वह है जैसे को तैसा। सामने वाला हमारे साथ जो कर रहा है हमें भी उसके साथ वैसा ही कर देना है। जब तक अच्छा लगे अच्छे काम करते रहो अगर सामने वाले को बिल्कुल भी परवाह नहीं है आपकी भावनाओं की तो आप भी उसकी परवाह मत करो। इस दुनिया में कोई अपना नहीं होता सिर्फ अपने घर वालों को छोड़कर… इसलिए घर वालों की सेवा करो और उन्हें अच्छे से अच्छा सुख दो और अपने लक्ष्य पर फोकस करो। जो आपके साथ गलत करते हैं उनसे बदला जरूर लो क्योंकि वह जमाना चला गया जब लोग गलती करके एहसास होने के बाद क्षमा मांग लेते थे… दोबारा गलती न करने के लिए। लेकिन आजकल क्षमा मांगते हैं कि पहली गलती माफ हो जाए ताकि अगली गलती करने का रास्ता खुल जाए। इसलिए ऐसे लोगों का वह हाल करो कि दुनिया याद रखे।

         मैंने रात का खाना खाया और रोज की तरह बाहर टहलने निकल गया। मैं जाकर फिर से अपने नियत स्थान पर बैठ गया और मुझे आज भी उसके छत पर आने की कोई उम्मीद नहीं थी। लेकिन फिर भी ऐसा लगता था कि हो सकता है वह आ जाए। आज मुझे वहां बैठे हुए थोड़ी देर ही हुई थी कि बाकी लोग आ गए और मैं उनके साथ आज गांव से बाहर टहलने निकल गया। जब तक मैं लौटा, काफी देर हो चुकी थी। अगर वह आयी भी होगी तो आज मैं उसे दिखा नहीं होऊँगा और इस समय तक वह अगर आती भी तो जा चुकी होती। हम सभी लोग आकर वहीं बैठ गए और बातें करने लगे। जब रात काफी हो गई तो हम लोग वहां से उठकर अपने-अपने घर आ गए। मैंने घर आकर अपने कुछ काम किये और मैं पढ़ने की सोच रहा था लेकिन ऐसा हो नहीं पाया। इतना सब कुछ होने के बाद भी मुझे बार-बार उसी का ख्याल आ रहा है।

        अभी रात काफी हो चुकी है, रात के 12:00 बजने वाले हैं तो अब मैं चलता हूँ सोने… आपसे मिलूंगा कल फिर से एक और नई पोस्ट के साथ… शुभ रात्रि।

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