स्वागत है आप सभी लोगों का मेरी डेली डायरी पोस्ट में, आज है 22 सितंबर 2024। मेरा आज का दिन कल से भी ज्यादा खराब रहा। आज पूरे दिन बस नकारात्मक विचार मन में आते रहे। आज ना तो मेरी पढ़ाई हुई और ना ही मैं कोई और काम ठीक से कर पाया। आज दिन भर में मैं आधा घंटा भी नहीं पढ़ पाया।
आज मैं सुबह सो कर उठा लेकिन रोज के अपने काम से बाहर नहीं गया। उठने के बाद काफी देर तक मैं घर पर ही रहा। उसके बाद मैंने एक गिलास पानी पिया और तब बाहर गया। उसके घर के सामने से जाते हुए मैंने थोड़ा सा उसे देखने की कोशिश की लेकिन वह दिखाई नहीं दी। फिर मैं वापस आ गया लेकिन मैं जैसे ही वापस आ रहा था तो मैंने देखा कि वह दुकान पर जा रही है। मैं अपने घर चला गया और थोड़ी देर बाद ही बाहर आ गया क्योंकि वह दुकान पर से जब वापस आती तो मुझे रास्ते में मिलती। लेकिन सुबह का समय था तो कोई ना कोई रास्ते पर निकल रहा था और आसपास के घरों के बाहर भी कोई न कोई खड़ा था। जैसे ही वह वापस आई उस समय कोई व्यक्ति मेरे आस-पास था तो मैं उसे रास्ते में नहीं मिल पाया। मैं थोड़ा दूर हो गया ताकि कोई कुछ गलत ना समझे। मैंने उसकी ओर देखा तो मुझे ऐसा लगा कि वह साइड में देखते हुए मुझे देखने की कोशिश कर रही है। लेकिन हम दोनों एक दूसरे को ठीक से देख नहीं पाए। वह अपने घर चली गई, थोड़ी देर बाद मैं अभी अपने घर आ गया।
घर आने के बाद मैंने नहा धोकर नाश्ता किया और उसके बाद बाहर निकल गया। कुछ समय तक मैं बाहर रहा फिर घर वापस आ गया। वह मुझे अभी देखने को नहीं मिली थी। आज मेरा पूरा दिन बहुत ही खराब बीता। मैं समय-समय पर बाहर आता जाता रहा था लेकिन वह मुझे पूरे दिन दिखाई नहीं दी। एक बार मैं उसके घर के पास ही खड़ा था तो मुझे उसकी आवाज तो अंदर से आ रही थी लेकिन वह बाहर नहीं आई। मैंने काफी प्रतीक्षा की कि वह बाहर आए लेकिन मुझे निराश होकर वापस लौटना पड़ा। वापस आकर मैं अपने कमरे में चला गया और यूं ही लेटा रहा, उसके बारे में सोचता रहा। फिर थोड़ी देर मोबाइल चलाया और फिर पढ़ने की कोशिश की। यही वह समय था जब मैं पूरे दिन में बस एक बार ही पढ़ पाया था, वह भी आधा घंटे से भी कम समय के लिए। आज मैंने दोपहर में खाना भी नहीं खाया, मन ही नहीं कर रहा था। मैं बस यूं ही लेटा हुआ उसके ख्यालों में खोया हुआ था।
अब शाम हो चुकी थी। चाय पीने के बाद मैं फिर से बाहर गया लेकिन वह मुझे फिर भी दिखाई नहीं दी लेकिन मुझे ऐसा लगा कि जैसे उसकी आवाज मेरे कानों में आई हो। मैं वापस घर आ गया लेकिन थोड़ी देर के बाद घर के कुछ काम निपटाने के बाद फिर से बाहर चला गया और जाकर अपने नियत स्थान पर बैठ गया। उसका दरवाजा बंद था। मैं थोड़ी देर वहीं बैठा रहा, उसके बाद मुझे किसी काम से घर आना पड़ा। घर आने के बाद मैं काम में व्यस्त हो गया और फिर मुझे बाहर जाने का मौका नहीं मिला। जब रात हो चुकी थी तो मैं थोड़ी देर के लिए उसके घर के पास गया तो मैंने देखा वह छत पर थी। उसके साथ उसके घर की कुछ और महिलाएं भी थीं। अंधेरे में मुझे यह नहीं दिख रहा था कि वह मेरी ओर देख रही है या नहीं लेकिन मुझे लगा कि उसने मुझे देखा।
रात का खाना खाने के बाद मैं अपनी दिनचर्या अनुसार बाहर टहलने के लिए निकल गया। मैं अपने उसी नियत स्थान पर थोड़ी देर के लिए बैठा और उसके बाद टहलने लगा। मैंने उसका इंतजार किया लेकिन वह छत पर नहीं आई। कुछ देर के बाद मेरे और दोस्त भी आ गए, फिर हम सब वहां बातें करते रहे। मैं बार-बार उसकी छत की ओर देख रहा था कि काश वो आ जाए लेकिन वह नहीं आई। हम सभी लोग अपने-अपने घर लौट आए क्योंकि रात काफी हो चुकी थी और हमें नींद भी आ रही थी। घर आने के बाद मैंने थोड़ा सा अपना काम किया और उसके बाद मन को शांत करने के लिए मोबाइल चलाता रहा। अब जब मैं अपनी आज की डायरी लिख रहा हूँ उस समय 11:30 बज चुके हैं।
मेरा आज का दिन कल से ज्यादा खराब रहा। मुझे दिनभर निराशा घेरे रही और कई नकारात्मक विचार मन में आते रहे। कई बार मैंने मन को समझाया और शांत किया लेकिन उससे बात किए बिना मन शांत होने वाला नहीं है और अभी तक मेरी उससे बात नहीं हुई है। आज तो मैंने उसे ठीक से देखा भी नहीं। अभी रात के 12:00 बजने वाले हैं तो अब मैं चलता हूँ सोने, आपसे मिलूंगा कल फिर से एक और नई पोस्ट के साथ… शुभ रात्रि।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें