स्वागत है आप लोगों का मेरी डेली डायरी में, आज है 27 सितंबर 2024। कई दिन से मेरी नींद पूरी नहीं हो पा रही है, रात भी नहीं हुई थी तो आज सुबह मुझे उठने में फिर से थोड़ी परेशानी हुई लेकिन मैं समय पर उठ गया। मुझे सुस्ती आ रही थी तो मैं उठने के बाद कुछ देर ऐसे ही बैठा रहा, उसके बाद मैंने एक कप चाय पी और बाहर निकल गया। मेरा बहुत मन हो रहा था उसे देखने का और अगर वह सुबह-सुबह दिख जाती है तो मुझे दिनभर अच्छा लगता है लेकिन वह मुझे नहीं दिखी। मैं घर वापस आ गया। थोड़ी देर के बाद मैं फिर से बाहर गया और जैसे ही मैं थोड़ा आगे पहुंचा तो उसके पड़ोस के घर से मुझे उसकी आवाज आ रही थी। मैंने कोशिश की उसे देखने की लेकिन वह नजर नहीं आई। लेकिन जब मैं उधर से वापस आ रहा था तो वह पड़ोस के घर से निकलकर अपने घर की ओर जा रही थी। मैंने उसे देखा लेकिन उसने मेरी ओर नहीं देखा, हालांकि उसे पता चल गया था कि कुछ दूरी पर मैं जा रहा हूँ।
आज सुबह-सुबह मुझे अपने पड़ोस के एक चाचा जी को छोड़ने के लिए स्टेशन तक जाना पड़ा। मैं उन्हें स्टेशन पर छोड़कर वापस आया और वापस आकर, नहा धोकर नाश्ता किया उसके बाद मैं फिर से बाहर की ओर निकल गया। बाहर जाकर फिर से मैंने उसे देखने की कोशिश की लेकिन वह नहीं दिखी। मैं वापस आ गया और अपना काम करने लगा। कुछ देर काम करने के बाद मैं पढ़ने बैठ गया। आज फिर से पढ़ने के दौरान मुझे सुस्ती आ रही थी और मेरी आंखें बार-बार बंद हो रही थीं। हालांकि मैं पढ़ता रहा लेकिन सुस्ती की वजह से कुछ समझ में नहीं आ रहा था तो मैं उठकर बाहर चला गया ताकि दिमाग कुछ ताजा हो सके। जब मैं बाहर चला ही गया था तो उसके घर के सामने जाकर मैंने उसे देखने की एक बार और कोशिश की लेकिन इस बार भी वह मुझे नहीं दिखी। थोड़ी देर बाद मैं वापस आ गया और फिर से पढ़ने बैठ गया।
दोपहर हो चुकी थी। खाना खाने के बाद रोज की तरह मैं बाहर निकल गया। जब मैंने उसके घर की ओर देखा तो मुझे लगा कि वह इस समय मुझे दिख सकती है क्योंकि अभी तक तार पर उसने सूखने के लिए कपड़े नहीं डाले थे। मैं काफी देर वहीं रुका रहा और टहलता रहा। मैंने सोचा आज मैं उसे देखकर ही जाऊंगा। थोड़ी देर बाद मुझे उसकी आवाज आई लेकिन वह मुझे दिखाई नहीं दी। उस समय मैं उसके घर के सामने नहीं आ सकता था क्योंकि मेरे साथ एक अन्य व्यक्ति भी था तो मुझे वहीं रुकना पड़ा। कुछ समय बाद जब मैं वापस आया तो तब तक उसके कपड़े तार पर पड़े थे। मैं समझ गया कि वह कपड़े तार पर डालकर अंदर चली गई है और इस तरह उसे देखने से मैं फिर से चूक गया। मैं घर वापस आ गया और पढ़ने बैठ गया। आज मन थोड़ा सा उदास हो रहा था। मैंने पढ़ाई बंद की और ऐसे ही बैठा रहा। पता नहीं क्यों कुछ भी करने का मन नहीं कर रहा था।
मैं काफी देर ऐसे ही बैठा रहा। मुझे उसकी बहुत याद आ रही थी। वह मुझे कई दिन से ठीक से देखने को नहीं मिली है। बहुत दूर से ही दिखती है, पास से देखने का कोई मौका मुझे नहीं मिला है। ऐसे ही सोचते सोचते काफी समय बीत गया। फिर मैंने मन को समझाया और पढ़ने बैठ गया। एक क्लास समाप्त करने के बाद मैं अपने दूसरे काम में लग गया। मैंने बारी-बारी से कुछ देर पढ़ाई की और कुछ देर काम किया। शाम की चाय का समय हो गया था। मैंने चाय पी और उसके बाद अपना बाकी बचा काम निपटाया। काम करने के बाद मैं बाहर की ओर निकल गया और जाकर उसके घर के पास एक जगह खड़ा हो गया। मैंने देखा उस समय तक वह घर के बाहर काम समाप्त करके अंदर जा चुकी थी। मैंने कुछ देर उसकी प्रतीक्षा की कि वह दोबारा बाहर आए लेकिन वह नहीं आई। कुछ समय बाद मैं घर वापस आ गया।
शाम हो चुकी थी। मैं रोज की तरह बाहर चला गया और जाकर मैंने देखा… उसका दरवाजा खुला हुआ है लेकिन वह कहीं नजर नहीं आ रही थी। थोड़ी देर बाद वह मुझे नजर आई। उसे देखने के बाद मेरा मन और ज्यादा उदास हो रहा था क्योंकि मेरा बहुत मन था उससे बात करने का और इस समय पता नहीं उसके साथ क्या परेशानी चल रही है। मैं उससे ना तो मिल पा रहा हूँ और ना ही बात कर पा रहा हूँ और वह भी ज्यादा कुछ नहीं कर पा रही है। पता नहीं यह समस्या कब ठीक होगी। मैंने उस समय उसे थोड़ी-थोड़ी देर बाद दो-तीन बार और देखा लेकिन वह अभी भी मेरी तरफ नहीं देख रही है। पता नहीं उसके घर वालों ने उससे क्या कह दिया है। थोड़ी देर बाद मैं घर वापस आ गया और फिर बाहर नहीं गया।
रात का खाना खाने के बाद मैं टहलने के लिए बाहर चला गया। मैं जाकर अपने स्थान पर बैठ गया। थोड़ी देर बैठने के बाद मैं टहलने लगा। मैंने देखा उसकी छत पर कोई तो है लेकिन वह नहीं है। वे उसके परिवार के कुछ सदस्य थे। इस समय अंधेरी रात हो रही है तो साफ-साफ देखना संभव नहीं है। उसे छत पर देखने का मेरा बहुत मन कर रहा था। पता नहीं वह छत पर कब आएगी। उस समय मैं फिर से उदास हो रहा था। कुछ देर टहलने के बाद मैं वापस वहीं बैठ गया। उसकी छत की ओर देखा तो वहां कोई नहीं था। मुझे उसकी छत सूनी-सूनी सी लग रही थी। मेरा मन कर रहा था कि वह अभी छत पर आ जाए या अपना दरवाजा खोलकर मेरे पास आ जाए। उसके आने की कोई उम्मीद नहीं थी लेकिन फिर भी मैं उसकी रोज प्रतीक्षा करता हूँ, मुझे अच्छा लगता है। कुछ समय बाद मैं घर आ गया। आज मैं घर जल्दी आ गया था। घर आकर मैंने बाकी बचे अपने काम निपटाए। आज उसकी याद मुझे लगातार आ रही है। मुझे अंदर से थोड़ा गुस्सा भी आ रहा है उसके घर वालों पर और थोड़ा सा उस पर भी।
अभी रात के 11:30 बज चुके हैं और अभी मुझे सोने जाना है क्योंकि कल मुझे सुबह जल्दी उठना है, तो अब मैं चलता हूँ सोने… आपसे मिलूंगा कल फिर से एक और नई पोस्ट के साथ… शुभ रात्रि।
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