स्वागत है आप सभी लोगों का मेरी आज की डेली डायरी पोस्ट में, आज है 9 सितंबर 2024। काफी दिनों से मैं कोई पोस्ट नहीं लिख पाया था। कुछ दिनों पहले परिवार में मेरे ताऊ जी का देहांत हो गया था। इस दौरान ना तो परिवार का माहौल उतना अच्छा था और ना ही मेरा मन हुआ कि मैं कोई पोस्ट लिखूं। अब देहांत के बाद जो भी संस्कार होते हैं वह सब पूर्ण हो चुके हैं और परिवार में पहले जैसा माहौल धीरे-धीरे फिर से बनने लगा है। जब किसी की मृत्यु का समाचार सुनते हैं तो पता नहीं क्यों दुनिया की इस मोह माया से दूर हो जाने का मन करता है, सब कुछ बड़ा अजीब सा लगने लगता है जैसे कि दुनिया में कुछ है ही नहीं।
अभी दोपहर के 2:00 बज रहे हैं। आज मैं सुबह मॉर्निंग वॉक पर नहीं गया क्योंकि अब मैंने जाना छोड़ दिया है। मॉर्निंग वॉक पर जाते समय उसके दिखने की आस रहती थी तो मॉर्निंग वॉक पर जाने का मन भी करता था लेकिन उससे मेरी कुछ अनबन हो गई थी तो फिर मेरा मॉर्निंग वॉक पर जाने का मन भी नहीं किया और तभी से मैंने जाना बंद कर दिया। हालांकि अब सब कुछ ठीक है, उसके और मेरे बीच पहले जैसा माहौल बना हुआ है। किसी भी प्यारे से रिश्ते में यह छोटी-मोटी बातें होती रहती हैं, इससे प्रेम और बढ़ता है। मॉर्निंग वॉक पर न जाने की वजह से अब मैं जल्दी नहीं उठता। मैं थोड़ा और लेट उठता हूँ और सुबह उठने के बाद उसके घर की ओर जाता हूँ। आज जब मैं रोज के अपने काम से उसके घर की ओर गया तो मेरे पहुंचने के थोड़ी देर बाद वह अपने घर से बाहर आई थी और सुबह-सुबह उसे देखकर मेरा मन प्रसन्न हो गया। जैसे ही उसने मुझे देखा तो वह भी वहीं रुक गई लेकिन जैसे ही हम दोनों में इशारों में कुछ बात हो पाती तभी उसके घर से परिवार का एक और सदस्य बाहर आ गया। थोड़ी देर बाद वह घर के अंदर चली गई और मैं भी वापस आ गया।
उसके बाद दोपहर तक वह मुझे एक-दो बार और दिखाई दी लेकिन कोई बात नहीं हो पाई। मैंने सोचा एक घंटा पढ़ने के बाद मैं फिर से उसके घर की ओर जाऊंगा लेकिन पढ़ते-पढ़ते मुझे सुस्ती आने लगी और पता नहीं कब मेरी आंख लग गई और जब मैं उठा तो काफी देर हो चुकी थी। दोपहर का खाना खाने के बाद मैं उसके घर की ओर गया तो तब तक वह अपना सारा काम निपटाकर अपने घर के अंदर जा चुकी थी। अब उसके दिखाई देने की कोई उम्मीद नहीं थी क्योंकि आज धूप काफी तेज है और गर्मी और दिन के मुकाबले थोड़ी ज्यादा है तो वह अपने घर के अंदर आराम कर रही होगी। वहां से वापस आने के बाद मैं कुछ देर पढ़ा और उसके बाद मैंने कुछ और काम किये।
मैं शाम को रोज की तरह बाहर गया लेकिन उससे कोई बात नहीं हो पाई हालांकि वह मुझे दो-तीन बार दिखाई दी। आज उसके घर पर कुछ मेहमान आए हुए थे और मेरे साथ भी कुछ और लोग थे इसलिए हम दोनों में कोई बातचीत नहीं हो पाई। रात को वह छत पर आई। आज उसे आने में कुछ देरी हो गई थी लेकिन मैं उसकी प्रतीक्षा कर रहा था और जैसे ही वह आई उसे देखकर मैं खुश हो गया। आज मैंने फिर से उसे लेटर देने की कोशिश की। मैंने उसे इशारा किया कि मैं लेटर उसकी और फेंक दूंगा लेकिन फिर से उसने वही हरकत की। जैसे ही उसे लगा कि मैं लेटर उसकी और फेंकने वाला हूँ तो वह वहां से चली गई और उसके बाद नहीं आई। मुझे बहुत गुस्सा आया लेकिन मैं क्या कर सकता था… अगर उसे अच्छा नहीं लग रहा है तो मैं उसे लेटर नहीं दूंगा लेकिन मैं सोच रहा हूँ कि मैं उसे मनाऊंगा और उससे पूछूंगा कि आखिर क्या परेशानी है।
मैंने अपने लिए जो लक्ष्य तैयार कर रखे हैं धीरे-धीरे उन पर काम कर रहा हूँ और धीरे-धीरे ही सफलता मिल रही है जैसे कि आज मैं और दिन के मुकाबले कुछ ज्यादा पढ़ पाया। मैंने कुछ घंटे पढ़ने के लिए और कुछ घंटे अपना काम करने के लिए तय कर रखे हैं। हालांकि अभी तक मुझे उसमें सफलता नहीं मिल पा रही थी लेकिन धीरे-धीरे ही सही मैं अपने लक्ष्य की ओर बढ़ रहा हूँ। जब हम सही रास्ते पर आगे बढ़ रहे होते हैं तो हमें बहुत अच्छा लगता है। बस थोड़ी सी परेशानी उसकी तरफ से है अगर उसकी तरफ से मन उदास हो जाता है तो फिर कुछ भी करने का मन नहीं करता… ना ही पढ़ने का और ना ही कुछ काम करने का। फिलहाल काफी रात हो चुकी है, अभी रात के 11:45 हो रहे हैं तो अब मैं चलता हूँ सोने अब आप से मुलाकात होगी कल… शुभ रात्रि ।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें