स्वागत है आप लोगों का मेरी डेली डायरी में, आज है 29 सितंबर 2024। सुबह उठने के बाद मैं बाहर गया। मुझे थोड़ी ही देर हुई थी कि वह घर से बाहर निकलती हुई मुझे दिखाई दी। मैंने उससे इशारों में पूछा कि क्या परेशानी चल रही है… लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया और घर के अंदर चली गई। थोड़ी देर बाद मैं वापस घर आ गया। घर आने के कुछ देर बाद मैं फिर से बाहर गया लेकिन इस बार वह मुझे दिखाई नहीं दी।
नाश्ता करने के बाद मैं बाहर गया तो मुझे उसकी आहट सुनाई दी। वह अभी दिखी नहीं थी। थोड़ी देर बाद वह मुझे घर के बाहर दिख गई। वह कुछ काम करने की तैयारी में थी। मैंने उसे देखा और फिर से अपनी झुँझलाहट उसके सामने रखी लेकिन उसे कोई फर्क नहीं पड़ा। उसकी इस हरकत से मन बहुत उदास हो जाता है लेकिन इससे यह भी पता चलता है कि उसे उसके घर वालों ने काफी कुछ कहा है। मैं वहीं आसपास टहलता रहा और उसे काम करते हुए आते जाते देखता रहा। उसके सामने उसके परिवार के और भी सदस्य थे इसलिए उसने मेरी ओर नहीं देखा और वह काम करती रही। थोड़ी देर बाद मुझे लगा कि यहां और ज्यादा रुकना ठीक नहीं है तो मैं घर वापस आ गया।
वापस आने के बाद मैंने कुछ देर पढ़ाई की और मुझे फिर से नींद आने लगी क्योंकि मेरी नींद पूरी नहीं हो पा रही है। रात को मैं देर से सोता हूँ और सुबह जल्दी उठ जाता हूँ। जब मुझे लगा कि अब पढ़ने का कोई फायदा नहीं है तो मैं सो गया। वैसे तो मैं सो रहा था लेकिन बीच-बीच में मेरी नींद खुल रही थी क्योंकि मेरे कुछ काम अधूरे पड़े हुए थे और उनकी चिंता मेरे दिमाग में थी। आखिरकार मैं उठ ही गया और अपने अधूरे पड़े काम निपटाए, उसके बाद फिर से पढ़ाई की।
मैं शाम की चाय पी रहा था कि मुझे उसकी आवाज सुनाई दी। वह दुकान की ओर जा रही थी। मैंने जल्दी-जल्दी चाय पी और बाहर आकर खड़ा हो गया। थोड़ी देर बाद वह दुकान से वापस आ रही थी और मेरे पास आने पर मुझसे दूर सड़क की दूसरी तरफ हो गई। मुझे बहुत बुरा लगा, हालांकि मैंने उससे पूछा कि आखिर मैंने ऐसा क्या कर दिया है जो तुम मुझसे नहीं बोल रही लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया और सीधी घर की ओर चली गई। उसके बाद मैं भी अपने घर के अंदर आ गया। थोड़ी देर बाद मैं बाहर की ओर निकल गया और जैसे ही मैं थोड़ा आगे पहुंचा उसके पड़ोस के घर से मुझे उसकी आवाज आ रही थी। मैं वहीं रुक गया। जैसे ही उसने मुझे देखा थोड़ी देर बाद वहां से उठकर अपने घर चली गई। वह शायद किसी काम से आई होगी और इतनी जल्दी ना भी जाती पर थोड़ी देर बाद तो चली ही जाती लेकिन मुझे देखकर और जल्दी चली गई। उसे लगा होगा कहीं मैं उसके पास तक ना आ जाऊं और फिर से कोई नई मुसीबत खड़ी ना हो जाए। जैसे ही वह उस घर से निकली, मैं उसके घर के सामने पहुंच गया और उसे घर के अंदर जाते हुए देखता रहा। उसके बाद मैं अपने घर वापस आ गया।
शाम के समय मैं बाहर गया और मैंने देखा उसका दरवाजा खुला हुआ था और उसमें से वह अपने घर के अंदर काम करती हुई मुझे दिख रही थी। मैंने कुछ देर उसे देखने की कोशिश की लेकिन थोड़ी देर बाद वहां मेरे अन्य साथी भी आ गए। उसके बाद हम सब लोग वहीं बैठकर बातें करने लगे। जब रात होने लगी तो मैं किसी काम से घर वापस आ गया और मैंने वह काम निपटाया उसके बाद फिर से बाहर की ओर चला गया। तब तक वहां कोई नहीं था। उसका दरवाजा अभी थोड़ा खुला हुआ था। मैं वहीं बैठ गया। अभी रात हो चुकी थी। मैं बैठा रहा और उसके दरवाजे की ओर देखता रहा। वह मुझे आते-जाते दिख रही थी लेकिन वह दरवाजे पर नहीं आई और ना ही उसने इधर की ओर देखा। कुछ समय बाद मैं उठकर अपने घर आ गया। आज मेरे मन में फिर से एक उदासी थी। उससे बात करने का बहुत मन कर रहा है। आज दोपहर में उसने जिस तरह से मुझसे दूर हटने की कोशिश की, मैं बहुत उदास हो गया। मुझे लगा कि वह मुझसे नाराज है लेकिन कम से कम यह भी तो बताए कि मैंने किया क्या है… मेरी वजह से शायद उसके घर वालों ने उसे डांटा है लेकिन इसमें मेरी क्या गलती है… मैं तो हर परेशानी में उसके साथ हूँ।
रात का खाना खाने के बाद रोज की तरह मैं टहलने निकल गया और आज की रात भी पहले की तरह खाली-खाली सी गुजर रही थी। उसके छत पर आने की वैसे तो मुझे कोई उम्मीद नहीं थी लेकिन आज दिन में उसने जो बर्ताव किया उससे मुझे यह महसूस हो गया कि वह अब काफी दिन तक छत पर नहीं आएगी, हालांकि मैं उसकी छत की ओर देखता रहा था। मुझे अच्छा लगता है उसकी प्रतीक्षा करना… कभी ना कभी तो आएगी। वह आज भी नहीं आई। मैं वहीं बैठा रहा और उसके बारे में सोचता रहा। जब रात काफी होने लगी तो मैं उठकर घर आ गया। घर आने के बाद मैंने अपने बाकी बचे काम निपटाए और उसके बाद डायरी लिखने बैठ गया। अभी रात के 12:00 बजने वाले हैं तो अब मैं चलता हूँ सोने, आपसे मिलूंगा कल फिर से एक और नई पोस्ट के साथ… शुभ रात्रि।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें