स्वागत है आप लोगों का मेरी डेली डायरी में, आज है 30 सितंबर 2024। आज सुबह उठने के बाद मैं बाहर नहीं गया क्योंकि ऐसा कोई काम नहीं था जिसके लिए मैं बाहर जाता, इसलिए मैं आज घर पर ही रहा। नहा धोकर मैंने नाश्ता किया और उसके बाद बाहर गया। जब मैं रास्ते में उसके घर के सामने पहुंचा तो वह अपने घर के बाहर थी। वह बाल्टी में पानी भर रही थी। मैंने उसे देखा तो मुझे बहुत अच्छा लगा। उसकी निगाह भी उसी तरफ थी जिधर से मैं जा रहा था। उसने भी मुझे देखा तो मुझे लगा शायद अब वह मुझसे बात कर लेगी। मेरे पीछे एक और व्यक्ति आ रहा था इसलिए मैं रुक नहीं सका और सीधा आगे चला गया। आगे जाकर मैंने दूसरे रास्ते की ओर से उसे देखना चाहा लेकिन फिर वह नहीं दिखी, वो घर के अंदर चली गई थी। मैं वहां से वापस आ गया।
घर आकर मैं घर के दूसरे कामों में लग गया और उसके बाद एक-दो बार और बाहर गया लेकिन वह मुझे दिखाई नहीं दी। आज मैं पढ़ाई का अपना लक्ष्य पूरा नहीं कर पाया। आज मैं बिल्कुल भी नहीं पढ़ पाया। आज दोपहर में मैं आराम करने के लिए लेटा था और मुझे नींद आ गई। खाना खाने से पहले नींद आए या ना आए लेकिन खाना खाने के बाद नींद जरूर आ जाती है। बस थोड़ी देर आंखें बंद करके लेट जाओ और उसके बाद पता नहीं कब नींद आ जाती है। नींद की वजह से मैं अपना एक जरूरी काम दोपहर में पूरा नहीं कर पाया और जब मेरी आंख खुली तब तक काफी समय हो चुका था।
शाम की चाय का समय हो चुका था। मैंने चाय पी और अपने अधूरे बचे कामों को पूरा किया। मैंने कोशिश की कि मैं थोड़ा सा ही सही लेकिन पढ़ लूं ताकि मेरी दिनचर्या ना टूटे लेकिन ऐसा नहीं हो सका। उसके बाद मैं बाहर चला गया। जब मैं उसके घर के सामने पहुंचा तो वह मुझे दिखाई दी। वह तार पर से कपड़े उतार रही थी जो सूख चुके थे। मैं थोड़ी देर उसके सामने रुका और उसे देखता रहा लेकिन तभी उसके घर से उसके परिवार का एक और सदस्य निकल कर आ गया और मैं वहां से आगे की ओर चल दिया। थोड़ी देर बाद जब मैं लौट कर आया तो वह घर के अंदर जा चुकी थी। मैं वापस घर आ गया। उसे देखकर उससे बात करने और मिलने की चाहत और ज्यादा बढ़ जाती है। लेकिन पता नहीं परेशानी का यह समय कब समाप्त होगा और हम लोग पहले की तरह बातचीत कर पाएंगे।
शाम के समय मैं रोज की तरह बाहर गया और जाकर अपने स्थान पर बैठ गया। मैंने उसके दरवाजे की ओर देखा जो कि बंद था। मैं थोड़ी देर वहां रुका। आज मैं वहां से जल्दी घर वापस आ गया। जब मैं घर आ रहा था तो उसके घर के सामने मैंने देखा कि वह बाहर से अपने घर के अंदर की ओर जा रही है। तो मुझे लगा कि मुझे थोड़ी देर वहां और रुकना चाहिए था, पता नहीं वह बाहर कब आ गई… लेकिन तब तक मैं काफी आगे आ चुका था इसलिए मैं घर वापस आ गया। दोपहर से मुझे लग रहा था कि मैं अपनी डायरी आज नहीं लिख पाऊंगा। मन कुछ अजीब सा हो रहा था और कह रहा था कि आज डायरी नहीं लिखते हैं कल लिखेंगे। लेकिन मैंने दृढ़ निश्चय किया कि मैं डायरी लिखने के लिए कम से कम आधा घंटा जरूर निकालूँगा।
रात का खाना खाने के बाद मैं रोज की तरह बाहर टहलने निकल गया मैं थोड़ी देर अपने उस स्थान पर बैठा रहा और उसके बाद मैंने टहलना शुरू किया। मैंने उसकी छत की ओर देखा जहां कोई नहीं था और मुझे उसकी छत सूनी सी लग रही थी। जब मैं वहां बैठा था तो उसने दरवाजा खोलकर बाहर की ओर देखा। वह थोड़ी देर देखती रही और उसके बाद दरवाजा बंद कर लिया। थोड़ी देर बाद वह फिर से आई और दरवाजा खोलकर देखा और फिर से बंद कर लिया। पता नहीं वह क्या सोच रही थी। उसके बाद मुझे उसकी आवाज अंदर से आ रही थी। एक बार उसके किसी घर के सदस्य ने दरवाजा खुला छोड़ दिया था तो उसमें से वह मुझे घर के अंदर ही आते जाते दो-तीन बार दिखाई दी। टहलने के बाद वहीं बैठकर मैं अपना कुछ काम करने लगा और थोड़ी-थोड़ी देर बाद उसके दरवाजे और छत की ओर देख लेता था कि काश वो आ जाए… लेकिन वह नहीं आई। मैं थोड़ी देर बाद वहां से उठकर घर आ गया। घर आकर मैंने दिन में जो मेरे काम बचे थे वह मैंने पूरे किये और उसके बाद डायरी लिखने बैठ गया। इस समय रात के 11:00 बजने वाले हैं तो अब मैं चलता हूँ सोने, आपसे मिलूंगा कल फिर से एक और नई पोस्ट के साथ… शुभ रात्रि।
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