स्वागत है आप सभी लोगों का मेरी दैनिक डायरी में, आज है 24 अक्टूबर 2024। आज सुबह उठने के बाद मैं काम से बाहर गया। मैं उसके घर के पास खड़ा था, तभी वह पानी भरने अपने घर से बाहर आई। उस समय मैं उसे ठीक से नहीं देख पाया क्योंकि मैं काम में था और मेरे सामने उसके घर का एक सदस्य था। मैंने तिरछी निगाह से देखा, वह पानी भर रही थी। उसने मेरी ओर नहीं देखा और वह पानी भरकर घर के अंदर चली गई। थोड़ी देर बाद मैं वापस घर आ गया। घर आकर मैंने नहा धोकर नाश्ता किया और बाहर की ओर चला गया। उसके घर के सामने पहुंचकर मैंने उसे देखने की कोशिश की लेकिन वह दिखाई नहीं दी। उसके बाद मैंने एक-दो चक्कर और लगाए लेकिन वह मुझे अब भी नहीं दिखी थी। ज्यादा चक्कर लगाने भी ठीक नहीं थे क्योंकि रास्ते में एक घर के बाहर कुछ लोग काम कर रहे थे। अगर मैं ज्यादा चक्कर लगाता तो वह सोचते कि मैं इतनी बार क्यों आ रहा हूँ… और किसी न किसी की निगाह मुझ पर पड़ ही जाती कि मैं उसके घर की ओर क्यों देख रहा हूँ।
मैं घर वापस आ गया और अपना काम करने बैठ गया। आज पूरी दोपहर मैं काम करता रहा और थोड़ा सा पढ़ा। दोपहर में भोजन करने के बाद मैं बाहर गया था लेकिन उसे नहीं देख पाया। काफी देर काम करने के बाद मेरा मन ऊब गया, फिर मैं थोड़ी देर पढ़ा और उसके बाद थोड़ा और काम किया। फिर मेरा मन कुछ भी करने का नहीं किया। मैं ऐसे ही लेटा रहा और उसके बारे में सोचता रहा। मुझे उसकी याद आ रही थी। शाम की चाय पीने के बाद मैं उसे देखने की आस में फिर एक बार बाहर चला गया लेकिन वह मुझे अब भी दिखाई नहीं दी थी। मैं थोड़ा परेशान सा हो रहा था। मैं वापस घर आ गया और थोड़ी देर बाद मैं फिर से बाहर चला गया क्योंकि मेरा मन नहीं मान रहा था। मुझे उसे देखना था। जब मैं बाहर जा रहा था तो उसके घर के सामने पहुंचकर मैंने देखा कि वह अपने घर में है। मैं उसे देखते हुए आगे चला गया और जैसे ही मैं वहां पहुंचा वह अपने घर के दरवाजे से निकल रही थी। वह दुकान पर जा रही थी। मैं बिल्कुल ठीक समय पर वहां पहुंचा। इस बार मैं उसे देखकर थोड़ा पीछे रुक गया ताकि वह दुकान पर जाए और मुझे देखकर वापस ना लौटे क्योंकि कल वह वापस लौट गई थी। जब उसने आधे से ज्यादा रास्ता तय कर लिया तो मैं आगे बढ़ गया। वह काफी देर दुकान पर रही।
मैं सोच रहा था कि मैं रास्ते में किस जगह खड़ा होऊँ ताकि उससे कुछ बात कर सकूं और उसे अच्छे से देख सकूं। लेकिन मुझे यह भी डर था कि अगर मैं किसी जगह खड़ा हो जाता हूँ तो कहीं वह मुझे देखकर रास्ता बदलकर दूसरी ओर से ना चली जाए, इसलिए मैं ऐसी जगह खड़ा था जहां से होकर उसे जाना ही पड़ता। मैं याद कर रहा था कि मुझे उससे क्या कहना है। आस-पास कुछ लोग थे जिनकी वजह से मैं उससे बात नहीं कर पाया। मैंने कोशिश की कि उससे अपने दिल की बात कह दूं लेकिन पता नहीं आज क्या हो गया, मुझे कुछ याद ही नहीं आया कि मुझे उससे क्या कहना है। वह दुकान से वापस आई। मैं उसे देख रहा था और देखता रहा। वह अपने घर की ओर चली गई। मैं उससे कुछ भी नहीं कह पाया। अगर वे लोग वहां ना होते तो शायद कुछ कह पाता, लेकिन एक तो मुझे उनका डर था कि कहीं उन्हें आवाज ना पहुंच जाए और ऐसी स्थिति में वह भी बात करने से डरती है। मैं उसे घर जाते हुए देखता रहा। उसके जाने के बाद मैं दुकान पर पहुंच गया, जहां वह खड़ी थी। मैंने उसके दरवाजे की ओर देखा वह दरवाजे में से जाते हुए पीछे देख रही थी कि मैं अब कहां हूँ… और दरवाजा बंद करके अंदर चली गई।
मैं अपने नियत स्थान पर जाकर बैठ गया। थोड़ी देर बाद मुझे उसकी आवाज आई। वह अपने घर के बाहर थी और अपने भतीजे को खिला रही थी। वह अपने पड़ोस के घर के दरवाजे पर आई। मैं सोच रहा था कि उसके पास तक चला जाऊं लेकिन आसपास के लोग देख लेते, इस वजह से मैं नहीं गया। थोड़ी देर बाद वह वापस चली गई और जाते हुए उसने मेरी ओर देखा कि मैं कहां बैठा हूँ। कुछ समय बाद वह फिर से बाहर आई। मैंने उससे इशारों में कुछ कहने की कोशिश की। पता नहीं उसे समझ में आया होगा या नहीं। वह वापस घर के अंदर चली गई। मैं काफी देर वहां बैठा रहा और जब रात होने लगी तो मैं उठकर घर आ गया।
रात का भोजन करने के बाद रोज की तरह मैं बाहर टहलने चला गया। उसका दरवाजा बंद था। आज उसके पड़ोस के घर में फिर से गीत संगीत का कार्यक्रम था और मुझे उम्मीद थी कि वह आज भी जाएगी लेकिन वह आज नहीं गई। वह एक बार दरवाजे पर आई। उसका भाई मेरे आस-पास खड़ा था और उसने खाना नहीं खाया था तो वह उसे आवाज लगाने आई थी। उसने दरवाजा खोलकर उसे आवाज लगाई और उसके बाद मेरी ओर देखा और दरवाजा बंद करके अंदर चली गई। वह सोच रही होगी कि मैं रोज यहीं आता हूँ क्योंकि यह तो उसे भी पता है कि रात को यह हमारे मिलने का स्थान है। वह अपनी छत पर आती थी और मैं वहां नीचे खड़ा रहता था। उसने सोचा होगा कि ये अब भी मेरा इंतजार करता है। उसके बाद वह मुझे दिखाई नहीं दी। मुझे ऐसा लगा जैसे वह आज अपनी छत पर आई हो लेकिन उसके साथ कोई और भी था क्योंकि ऊपर से बातों की आवाज आ रही थी लेकिन मैंने उसे देखा नहीं। मैं काफी देर तक वहां बैठा रहा और उसकी प्रतीक्षा करता रहा… हो सकता है वह छत पर आए। लेकिन वह ना तो छत पर आई और ना ही उसके बाद उसने दरवाजे से देखा। जब उसके आने की संभावना समाप्त हो गई तो मैं वहां से उठकर अपने घर आ गया। घर आने के बाद मैंने थोड़ा काम किया और उसके बाद अपनी डायरी लिखने बैठ गया। अभी रात के 11:15 बजने वाले हैं तो मैं चलता हूँ सोने, आपसे मिलूंगा कल फिर से एक और नई पोस्ट के साथ… शुभ रात्रि।
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