गुरुवार, 24 अक्टूबर 2024

वो मेरे बिल्कुल पास आ गई थी लेकिन फिर भी मैं उसे नहीं देख पाया | 23 October 2024 Diary

 स्वागत है आप सभी लोगों का मेरी दैनिक डायरी में, आज है 23 अक्टूबर 2024। आज मैंने उसे सुबह थोड़ी देर के लिए देखा था और उसके बाद वह मुझे शाम को बहुत ही कम समय के लिए देखने को मिली। आज दिन भर में वह मुझे देखने को नहीं मिली। सुबह उठने के बाद जब मैं बाहर गया तो वह मुझे दिखाई दी, वह भी सामने से नहीं पीछे से क्योंकि वह एक घर से निकल कर अपने घर जा रही थी और मैं उसके पीछे खड़ा था। घर आने के बाद मैं फिर से उसे देखने बाहर गया और इस बार वह मुझे सामने से देखने को मिली लेकिन उसने मेरी ओर देखकर अपनी निगाह हटा ली। इस समय वह मुझे दो-तीन बार देखने को मिली थी लेकिन उसका व्यवहार रुखा था, पता नहीं उसे क्या हो गया है। आजकल ना तो वह कोई बात बताती है कि क्या हुआ है और ना ही बात करती है। मैंने दो-तीन चक्कर लगाए और हर बार उसे देखा, उसके बाद मैं घर आ गया क्योंकि बार-बार जाना ठीक नहीं था।

            आज मेरे माता-पिता बाहर गए हुए थे इसलिए मैं सारा दिन घर पर ही रहा। हालांकि बीच-बीच में मैंने उसके घर के चक्कर लगाए लेकिन वह मुझे देखने को नहीं मिली। मैं वापस घर आकर अपना काम करने बैठ गया। दोपहर के बाद मेरे माता-पिता घर आ गए। उसके बाद मैं फिर से बाहर गया लेकिन वह मुझे अभी भी देखने को नहीं मिली थी। उसके कपड़े तार पर पड़े थे। मैं घर वापस आ गया। मैंने अपना बचा हुआ काम निपटाया और उसके बाद बाहर गया। इस बार उसके कपड़े तार पर नहीं थे। वह कपड़े उतार कर रख चुकी थी लेकिन मुझे दिखाई नहीं दी। उसे देखने का मेरा बहुत मन कर रहा था। एक बार को उसकी आवाज मुझे सुनाई दी। मैंने उसे देखने की कोशिश की लेकिन वह दिखाई नहीं दी।

          शाम के समय मैं बाहर गया तो वह मुझे हल्की सी दिखाई पड़ी। इतनी हल्की कि मैं यह भी नहीं पहचान पाया कि उसने कौन से कपड़े पहने हैं। उसका दरवाजा थोड़ा खुला हुआ था। उसमें से वह मुझे नजर आई। अब मेरी बेचैनी बढ़ रही थी क्योंकि मुझे उसे देखना था। मैं वहीं बैठ गया और मोबाइल चलाने लगा। बीच-बीच में उसके दरवाजे और छत की ओर देख लेता था कि कहीं वह छत पर या अपने दरवाजे पर तो नहीं आई, लेकिन उसका दरवाजा बंद था। थोड़ी देर बाद मुझे उसकी आवाज उसके घर के बाहर से आई। मुझे लगा वह थोड़ा और आगे आएगी लेकिन वह आगे नहीं आई और थोड़ी देर बाद घर के अंदर चली गई। आज मुझे उसका व्यवहार बहुत ही अजीब लग रहा था। आज उसने मुझे देखने की कोई भी कोशिश नहीं की। जब रात होने लगी तो मैं अपने घर आ गया।

           थोड़ी देर बाद मैं किसी काम से उसके घर की ओर गया। मैंने देखा कि वह अपने घर से निकल कर आ रही है। उसने घर से निकलते हुए एक सेकंड के लिए मेरी ओर देखा और उसके बाद निगाह नीचे कर ली। उसने शायद इसलिए देखा होगा कि मैं वहां खड़ा हूँ और अगर उसे पता होता कि मैं वहां हूँ तो वह आती नहीं। लेकिन वह घर से निकल चुकी थी इसलिए उसे आना पड़ा। उसने अपना काम समाप्त किया और वापस चली गई। हालांकि उस समय उसके घर के सदस्य भी वहां थे इसलिए वह अगर देखना चाहती तब भी नहीं देख पाती और मैंने भी उसकी ओर नहीं देखा। यहां से मेरा मन दुखी हो रहा था। मैंने उसे आज ठीक से नहीं देखा है और वह बहुत अच्छा मौका था। वह मेरे बिल्कुल पास आ गई थी लेकिन उसके घर वालों की वजह से मैं उसकी ओर नहीं देख पाया। मैं घर वापस आ गया। घर वापस आने के बाद मैंने दो-तीन चक्कर और लगाए उसे देखने के लिए लेकिन मैं उसे नहीं देख पाया।

            रात का भोजन करने के बाद मैं बाहर गया। उसका दरवाजा बंद था। मैं थोड़ी देर टहलने के बाद वहीं बैठ गया। आज मेरे साथ मेरे साथी भी थे। मैं बीच-बीच में उसके दरवाजे और छत की ओर देख रहा था लेकिन वह ना तो छत पर आई और ना ही उसने दरवाजा खोल कर देखा। हम लोग काफी देर तक वहां बातें करते रहे। अचानक उसके दरवाजे पर आहट हुई। उसने दरवाजा खोला और कुछ बाहर की ओर फेंक कर हमारी ओर देखते हुए दरवाजा बंद कर लिया। वह शायद देख रही होगी कि यहां कौन-कौन हैं। मैंने उसकी काफी प्रतीक्षा की… ना तो वह अपनी छत पर आई और ना ही उसके बाद उसकी कोई आवाज सुनाई दी। कुछ समय बाद हम भी अपने-अपने घर आ गए। आज मेरा मन उसकी ओर से इतना दुखी है कि मुझे यह समझ में नहीं आ रहा है कि अब मैं क्या करूं… पता नहीं वह किस बात से नाराज है या उसके घर वालों ने उससे क्या कहा है… अगर वह बताएगी तभी तो समस्या का हल निकलेगा। अगर ज्यादा दिनों तक ऐसे ही चलता रहा तो हो सकता है मैं गुस्से में आकर कुछ कर ना बैठूँ। अब फिर से कल का इंतजार करना होगा। रोज ऐसे ही दिन निकलते जा रहे हैं। अभी रात के 11:45 बज चुके हैं तो अब मैं चलता हूँ सोने, आपसे मिलूंगा कल फिर से एक और नई पोस्ट के साथ… शुभ रात्रि।

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