मंगलवार, 9 जुलाई 2024

एक बार फिर वो मुझे पूरे दिन नहीं दिखी...ये मेरे लिए काफी कष्टकारी होता है | My Personal Life Story | Daily Diary | 8 July 2024

 स्वागत है आप सभी लोगों का मेरे इस ब्लॉग पर और आज है, 8 जुलाई 2024। आज सुबह भी वही हुआ जो रोज हो रहा है कुछ दिनों से यानि आज सुबह भी जब मैं सो कर उठा तो बाहर बारिश हो रही थी और एक बार फिर से मैं मॉर्निंग वॉक पर नहीं जा सका और उसे देखने की उम्मीद फिर से समाप्त हो गई। मन मार कर मैं दोबारा से सो गया और कुछ देर बाद उठा तो उस समय भी बारिश हो रही थी। कई दिन से लगातार बारिश हो रही है, रुकने का नाम ही नहीं ले रही। हालांकि मैं बाद में उठने के बाद बारिश में ही बाहर चला गया। मैंने उसे देखने की काफी कोशिश की लेकिन वह दिखाई नहीं दी क्योंकि बारिश में वह घर के बाहर नहीं आ सकती थी। थोड़ी देर बाद मैं वापस घर आ गया और नहा धोकर नाश्ता करके अपने कमरे में चला गया।

          बारिश की वजह से बाहर जाना संभव नहीं था तो मैं काफी देर तक अपने कमरे में ही रहा और अपने कुछ काम निपटाए। थोड़ी देर बाद बारिश कुछ हल्की हुई तो बाहर जाने की आस जागी लेकिन बारिश पूरी तरह से रुकी नहीं थी तो उसके बाहर आने की उम्मीद भी नहीं थी। मैंने घर पर ही रहना उचित समझा। अब दोपहर का समय हो चुका था और भूख भी लग रही थी तो मैंने दोपहर का खाना खाया और फिर से अपने कमरे में वापस आ गया। अब बारिश थोड़ी तेज हो गई थी, एक बार को तो लगा कि यह बारिश शाम तक रुकेगी भी या नहीं लेकिन लगभग 1 घंटे बाद बारिश रुक गई हालांकि आसमान में बादल अभी भी थे और बारिश कभी भी हो सकती थी। कुछ देर बाद आसमान में छाए बादल भी छँटने लगे और मौसम साफ होने लगा तो मुझे बहुत खुशी हुई और मेरी यह खुशी तब और बढ़ गई जब कुछ देर बाद धूप भी निकल आई। जैसे ही मौसम साफ हुआ मैं तुरंत बाहर की ओर गया और उसके घर के पास जाकर देखा तो बाहर कोई भी नहीं था। अब मुझे शाम तक और इंतजार करना पड़ा।

           मुझे अपने बाल कटवाने थे जो कि कई दिनों से बारिश की वजह से नहीं कट पा रहे थे क्योंकि रोज इतनी बारिश हो रही थी कि नाई की दुकान तक जाने का मौका ही नहीं मिल पा रहा था और जब कुछ देर के लिए बारिश रुकती थी तो फिर बाल कटवाने का मन नहीं होता था, क्योंकि नहाने से पहले तो बाल कटवाना सही लगता है ताकि उसके बाद सर धोया जा सके लेकिन जब एक बार नहा लो तो फिर बाल कटवाने का मन नहीं होता। आज मैंने शाम की चाय कुछ जल्दी पी ली थी और लगभग 3:30 बजे मैं बाल कटवाने चला गया क्योंकि कई दिनों से बारिश हो रही थी और आज भी कुछ समय पहले ही बारिश रुकी थी। तो जैसे ही मैं नाई की दुकान पर पहुंचा, वहां भीड़ ज्यादा थी और मुझे वहां काफी समय लग गया। मैं शाम को 5:30 बजे वापस घर आया, जैसे ही मैं घर आया उसी समय घर का एक काम मेरी प्रतीक्षा कर रहा था। फिर मैंने वह काम निपटाया और जल्दी-जल्दी बाहर की ओर गया। जैसे ही मैं उसके घर के पास पहुंचा तो वह मुझे कहीं भी दिखाई नहीं दी लेकिन मैं उसके घर से थोड़ा ही निकला था कि उसकी आवाज मुझे पीछे से सुनाई दी। इस समय मेरे साथ ऐसी विकट परिस्थिति थी कि मैं वापस पलट कर नहीं आ सकता था क्योंकि मैं पहले ही देख चुका था कि उसके आसपास उसका घर का एक सदस्य बैठा है। तो मुझे मन मार कर आगे की ओर जाना पड़ा और उसकी आवाज सुनकर ही संतोष करना पड़ा।

         हालांकि अभी भी उसे देखने का मौका बाकी था लेकिन जैसे ही मैं वहां पहुंचा मेरे और दोस्त भी वहीं बैठे थे और हम लोग शाम को गांव से बाहर घूमने चले गए। हम जब तक वहां से लौटे तब तक काफी देर हो चुकी थी। हालांकि जब मैं इधर से जा रहा था तो मात्र दो-तीन सेकंड के लिए वह मुझे दिखाई तो दे गई लेकिन इतनी अच्छी तरह से नहीं जिससे कि मन खुश हो सके। शाम को घूम कर वापस लौटते समय काफी देर हो गई थी और जैसे ही मैं उसके घर के पास पहुंचा तो वह उस समय घर के बाहर जो काम करती है, वह काम निपटाकर घर के अंदर जा चुकी थी। यह देखकर मेरा मन बहुत उदास हो गया क्योंकि अब उसके दिखाई देने का कोई भी मौका नहीं था। मैं मन मार कर घर वापस आया और रात का खाना खाकर फिर बाहर चला गया। अब उसके दिखाई देने की कोई आस नहीं थी तो हम सभी लोग इकट्ठे हुए रोज ही की तरह और फिर से गांव के बाहर टहलने के लिए निकल गए जैसे कि रोज जाते हैं खाना खाने के बाद।

            अगर मुझे नाई की दुकान पर देर ना हुई होती या वापस आकर मुझे वह काम ना करना पड़ता या शाम के समय हम लोग गांव से बाहर टहलने नहीं जाते तो शायद मैं उसे देख पाता लेकिन ऐसा नहीं हो सका और आज एक बार फिर उसे बिना देखे ही रहना पड़ेगा जो कि मेरे लिए काफी कष्टकारी है। अब सुबह तक और प्रतीक्षा करनी होगी और अगर कल बारिश नहीं हुई तो शायद मैं उसे देख पाऊं। अभी रात के 11:30 बज चुके हैं और मुझे नींद आ रही है अब आपसे मुलाकात होगी कल फिर से एक और नए ब्लॉग पोस्ट में, तब तक के लिए… शुभ रात्रि।

          

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