स्वागत है आप सभी का मेरे ब्लॉग पर और आज है 4 जुलाई 2024। मेरा आज का दिन कुछ खास नहीं रहा। अभी शाम के 4:30 रहे हैं और सुबह से आज कुछ खास नहीं किया। आज सुबह जब मैं अपने समय पर सो कर उठा तो एक बात अच्छी थी कि बारिश नहीं हो रही थी और मैं मॉर्निंग वॉक पर चला गया। जब मैं जा रहा था तो रोज की तरह दिल में एक आस थी कि वह मिलेगी, हालॉंकि इधर से जाते हुए तो वह नहीं मिली लेकिन जब मैं उधर से आ रहा था तो वह मुझे अपने घर के पास ही रास्ते में मिल गई और उसे देखते ही मन इतना खुश हुआ कि मैं शब्दों में नहीं बता सकता क्योंकि कल पूरे दिन वह मुझे दिखाई नहीं दी थी। मैंने उससे कुछ पूछा लेकिन उसने जवाब नहीं दिया और निगाहें नीचे करके वह आगे बढ़ गई, हालॉंकि मुझे बुरा तो लगा कि उसने मेरी बात का कोई जवाब नहीं दिया और वह मुझसे बोली नहीं लेकिन मुझे इस बात की खुशी है कि वह मुझे देखने को मिल गई। वैसे बाहर वह अक्सर कम ही बोलती है या नहीं ही बोलती है क्योंकि उसे ज्यादा डर रहता है आसपास के लोगों का कि कहीं कोई देख ना ले और कुछ ऐसा वैसा ना सोचे। मैं उसकी यह मजबूरी समझता हूँ लेकिन क्या करुँ मेरा मन नहीं मानता जब तक कि मैं उससे बोल ना लूँ।
मॉर्निंग वॉक से आने के बाद में नहा धोकर और नाश्ता करने के बाद एक बार फिर से उसके घर की तरफ चल दिया उसे एक बार फिर से देखने की आस में, और मैं इसमें सफल रहा। वह मुझे अपने घर के बाहर काम करते हुए मिल गई। वह मुझे जब भी मिलती है कुछ ना कुछ काम करते हुए ही मिलती है, बेचारी पता नहीं कितना काम करती है। मुझे उसका बहुत ख्याल आता है। उसे देखकर एक बार फिर मैं खुश हो गया और जब तक वो अपने घर के बाहर अपना काम करती रही मैं उसके आसपास ही रहा और उसे देखता रहा। काम समाप्त करके उसके घर जाने के बाद मैं भी वापस अपने घर आ गया और अपने कमरे में जाकर लेट गया। कुछ देर बाद मेरे और दोस्त भी मेरे पास आ गए। आज गाँव में ही एक दावत थी जिसमें हम सभी को शामिल होना था तो जब तक दावत का बुलावा नहीं आया मैं और मेरे दोस्त कमरे में गपशप करते रहे। कुछ देर के बाद जब दावत का बुलावा आया तो हम सभी वहाँ चले गए और वहाँ से आने के बाद एक बार फिर से हम सभी मेरे घर वापस आ गए और काफी देर तक हम लोग यूँ ही बातचीत करते रहे।
कुछ देर बातें करने के बाद वे सब अपने-अपने घर चले गए उसके बाद मैं भी अपना कुछ काम करने लगा। शाम की चाय पीने के बाद मैं रोज की तरह एक बार फिर से उसके घर की ओर चल दिया। मुझे उम्मीद थी कि वह मुझे देखने को मिल सकती है और यह उम्मीद सही साबित हुई जब मैं उसके घर के पास पहुंचा तो वह रोज की तरह ही अपना काम कर रही थी और एक बार फिर से उसे देखकर मेरा मन खुश हो गया। कुछ देर बाद जब उसका काम समाप्त हो गया तो वह भी घर के अंदर चली गई और मैं भी अपने घर वापस लौट आया। मैंने घर के कुछ काम निपटाए और अब शाम हो चुकी थी। शाम के समय जैसे कि हम सभी दोस्त मिलते हैं और बातें करते हैं तो मैं एक बार फिर से बाहर चला गया। उसे देखने का सौभाग्य एक बार फिर से मुझे मिला लेकिन इस बार वह अपने भतीजे को खिला रही थी गोद में और उसके आसपास ही उसके घर के और भी सदस्य थे तो ना तो उसने मेरी तरफ देखा और ना ही हममें बातें हुईं और ऐसे में कुछ हो भी नहीं सकता था।
दोपहर को जहाँ गाँव की दावत थी वहीं रात को जागरण का कार्यक्रम था तो मुझे उम्मीद थी कि वह जागरण में आएगी लेकिन कहीं ना कहीं मन के अंदर यह संदेह भी था कि शायद ना भी आए क्योंकि उसके घर वालों को हमारे बारे में शक हो गया है और वह रात में उसे ना भेजें। लेकिन उसके घर के कुछ सदस्य आए थे और वह नहीं आई। उसके ना आने की कोई और वजह भी हो सकती है क्योंकि अपनी मम्मी के साथ आने में तो उसे कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। मैं और मेरे दोस्तों ने कुछ देर जागरण का प्रोग्राम देखा और उसके बाद हम लोग घर वापस आ गए क्योंकि अब रात काफी हो चुकी थी। अभी रात के 12:00 बज रहे हैं और सभी लोग सो चुके हैं तो अब मैं भी सोने जा रहा हूँ। अब आपसे मुलाकात होगी कल एक नए ब्लॉग पोस्ट में, तब तक के लिए…. शुभ रात्रि।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें