गुरुवार, 11 जुलाई 2024

आज खेत पर ही सारा समय निकल गया जबकि उसे देखने का बहुत मन कर रहा था | Story of my Life | Daily Diary Blog | 10 July 2024

 स्वागत है आप लोगों का मेरे ब्लॉग पर, आज है 10 जुलाई 2024। रोज की तरह आज के दिन की भी शुरुआत हुई मॉर्निंग वॉक से। आज जाते हुए जब मैं उसके घर के सामने पहुँचा तो मैंने देखा वो झाड़ू लगा रही थी। उसकी थोड़ी सी झलक पाकर मैं आगे बढ़ गया। आज मुझे थोड़ी सुस्ती महसूस हो रही थी, इसकी वजह शायद रात को नींद पूरी ना होना थी। मैं मॉर्निंग वॉक से वापस आया और नहा धोकर नाश्ता करने के बाद उसे देखने बाहर आ गया। अभी उसका बाहर का काम बाकी था तो मुझे लगा कि वह दिखाई दे जाएगी लेकिन मेरे कोशिश करने के बाद भी वह दिखाई नहीं दी। मैं वहाँ कुछ देर और रुकता और उसे देखकर ही जाता लेकिन फिर से मेरे घर से बुलावा आ गया और मुझे खेत पर जाना पड़ा और मेरे खेतों पर जाने का मतलब था उसका ना दिखाई देना यानि कि जब तक मैं खेतों से लौट कर आता वह अपना काम समाप्त करके अपने घर चली जाती और वैसा ही हुआ।

           आज हमारे खेतों पर धान लगाए जा रहे थे तो मुझे वहाँ खाना लेकर जाना था। मैं घर से खाना लेकर चल पड़ा और पिछले दिनों हुई लगातार बारिश की वजह से गांव से खेत तक जाने का रास्ता इतना खराब हो चुका था कि मुझे चप्पल निकाल कर अपने हाथों में लेनी पड़ी और इतनी ज्यादा कीचड़ थी कि मेरे पैर टखने तक कीचड़ में सन गए। हालांकि गांव से खेत की दूरी ज्यादा नहीं है और 10 से 15 मिनट में वहां पहुंचा जा सकता है लेकिन रास्ते में इतनी कीचड़ थी कि मुझे बहुत धीरे-धीरे चलना पड़ा क्योंकि रास्ते पर चिकनी मिट्टी थी जिसमें फिसलने का डर था और मैं वहां आधे घंटे से भी ज्यादा समय में पहुंचा। मैंने वहाँ खाना दिया और वापस आ गया। मैं वहाँ से आने की जल्दी कर रहा था क्योंकि मेरा मन तो यहीं था और मैं वहाँ से जब वापस आया तो मैंने देखा कि वह अपना काम समाप्त करके घर के अंदर जा चुकी है तो मुझे बहुत निराशा हुई कि वह आज मुझे फिर से देखने को नहीं मिली।

            मैं कुछ समय के बाद फिर से उसके घर की ओर गया और संयोग से इसका एक छोटा सा काम अभी बाकी था और वह बस उसे निपटा ही रही थी कि मैं पहुंच गया। मुझे बहुत खुशी हुई लेकिन मेरी यह खुशी पल भर की थी क्योंकि जब मैंने गौर से देखा तो उसके आसपास उसके घर के कई सारे लोग मौजूद थे तो मैंने उसे बहुत हल्की नजर से देखा और निगाह दूसरी तरफ घुमा ली और आगे निकल गया क्योंकि मुझे पता था कि अगर मैं उसे गौर से देखूंगा तो उसके घर के सदस्यों की निगाह मुझ पर रहेगी क्योंकि उन लोगों को पहले से ही मुझ पर शक है और मैं नहीं चाहता कि अब आगे और कोई बात बिगड़े। थोड़ा आगे जाकर मैं कुछ देर वहां रुका और फिर वापस आ गया। अब दोपहर हो चुकी थी और उसके घर के बाहर रहने का कोई मौका नहीं था तो मैं घर आकर अपने कमरे में चला गया और फिर मैंने अपने कुछ काम किये और उसके बाद दोपहर का खाना खाया फिर कुछ देर आराम किया और फिर से अपने बाकी काम निपटाए।

          आज आसमान में दोपहर के बाद बादल छाए हुए थे। मैंने शाम की चाय पी और बाहर आ गया और जैसे ही मैं उसके घर के पास पहुंचा तो मैंने देखा कि वह इस समय जो काम करती है वह पहले ही समाप्त करके घर जा चुकी है तो मुझे एक धक्का सा लगा कि यह मौका मेरे हाथ से निकल गया उसे देखने का लेकिन मैंने कुछ देर प्रतीक्षा की कि क्या पता वो फिर से बाहर आए और देखने को मिले। और मेरी यह कोशिश थोड़ी सी सफल हुई क्योंकि वह बाहर तो आई थी लेकिन उस समय मैं काफी दूर था और जैसे ही मैं वापस उसकी ओर आया तो वह फिर से घर के अंदर चली गई। अब मुझे मजबूरी में घर वापस आना पड़ा क्योंकि अब वह कुछ समय बाद ही दिखाई देती।

               अब शाम हो चुकी थी और शाम के समय जैसे कि हम लोग रोज की तरह बाहर मिलते हैं, मैं और मेरे दोस्त, तो मैं घर से बाहर की ओर चल दिया। मैं रास्ते में जा ही रहा था कि मैंने देखा मुझसे कुछ दूरी पर आगे वह भी जा रही थी तो मुझे बहुत खुशी हुई कि आज देखने को भी मिलेगी और उससे कुछ बात भी कर पाऊंगा लेकिन फिर से यह खुशी कुछ पल के लिए थी क्योंकि जैसे ही मैं कुछ आगे बढ़ा रास्ते में उसका भाई खड़ा था। मैं वहाँ रुक तो गया लेकिन उसे ना तो ठीक से देख पाया और बात करना तो संभव ही नहीं था। फिर मैं वहीं बैठ गया और हम लोग बातें करने लगे थोड़ी देर बाद वह चला गया और मैं अकेला ही वहां था। कुछ देर बाद वह फिर से आई और तब मैंने उसे दिखा लेकिन हमने ना तो निगाहें मिलाईं और ना ही कोई बातचीत हुई क्योंकि आसपास कुछ और लोग भी मौजूद थे। वह अपना काम निपटाकर सीधे घर चली गई और मैं वहीं बैठा रहा। कुछ समय पश्चात मैं भी उठकर अपने घर आ गया।

             आज वह मुझसे ज्यादा नहीं मिली और आज मेरा बहुत मन कर रहा था उसे देखने का। शाम के समय मैं अचानक से अपनी छत पर गया तो मैंने देखा वह भी अपने घर की छत पर थी तो मुझे बहुत अच्छा लगा। वह कुछ देर वहाँ रुकी, उसने मेरी ओर देखा और कुछ देर बाद वो नीचे चली गई। उसकी इस हरकत से मुझे बहुत बुरा लगा मुझे लगा मानो वह मुझे देखकर नीचे चली गई और मुझे इग्नोर कर रही है लेकिन वह नीचे इसलिए गई होगी ताकि उसके घर का कोई सदस्य ऊपर ना आ जाए और जब वह मुझे अपनी छत पर और उसे उसकी छत पर देखता तो वह और ज्यादा शक करता कि यह दोनों ही अपने-अपने छत पर क्या कर रहे हैं। या शायद दूसरी वजह होगी कि उसकी कुछ डांट पड़ गई होगी। उसके बाद वह मुझे देखने को नहीं मिली।

            रात का खाना खाने के बाद रोज ही की तरह हम लोग फिर से अपनी नियत जगह पर इकट्ठे हुए और टहलने के लिए निकल गए। कुछ दूर जाकर हम लोग बैठ गए और हमने बातें की और फिर अपने-अपने घर वापस आ गए। अभी रात के 11:45 बजने वाले हैं और अब नींद आने लगी है तो अब मैं चलता हूँ सोने, आपसे मुलाकात होगी कल फिर से एक और नए ब्लॉग पोस्ट के साथ, तब तक के लिए… शुभ रात्रि।

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