गुरुवार, 8 अगस्त 2024

अगर वो दुखी होती है तो मेरा मन भी दुखी हो जाता है | Daily Diary Blog | Personal Diary Writing | 7 August 2024

 स्वागत है आप लोगों का फिर से एक और नए ब्लॉग पोस्ट में और आज है 7 अगस्त 2024। यह ब्लॉग पोस्ट मैं काफी दिनों बाद लिख रहा हूँ। मैं काफी दिनों से कोई भी पोस्ट नहीं लिख पा रहा था क्योंकि कभी-कभी कुछ ऐसा हो जाता है कि मन नहीं लगता। मेरे साथ भी काफी दिनों से कुछ ऐसा ही चल रहा था, फिलहाल सब कुछ ठीक है। ऐसा नहीं था कि लगातार मन ठीक नहीं था, बीच-बीच में सब कुछ ठीक हो जाता था लेकिन फिर से कुछ ना कुछ ऐसा हो जाता था कि मन फिर से खराब हो जाता था। बीच में कई बार मैंने पोस्ट लिखने की कोशिश की लेकिन मन ने साथ नहीं दिया। कभी घर में चल रही कुछ दिक्कतों की वजह से मन खराब हो जाता, तो कभी उसकी वजह से मन नहीं लगता।

               पिछले दिनों उसके घर में कुछ दिक्कत हो गई थी और जब भी उसके साथ या उसके घर कोई समस्या होती है तो मेरा मन परेशान हो जाता है और फिर किसी भी काम में मेरा मन नहीं लगता। अगर वह खुश रहती है तो मेरा मन भी खुश रहता है और अगर वह किसी भी वजह से दुखी हो जाती है तो मेरा मन भी दुखी हो जाता है। पिछले काफी दिनों से यही सब कुछ चल रहा था, खैर अब कोई समस्या नहीं है उसके साथ, तो अब सब कुछ ठीक चल रहा है। कुछ दिनों के लिए हमारी बातचीत भी बंद हो गई थी और उसका मेरी ओर देखना भी बंद हो गया था, तो मैं काफी परेशान सा हो गया था। जब समस्याएं समाप्त हुईं तो सब कुछ ठीक हो गया। जब घर में कोई समस्या होती है तो किसी का भी मन परेशान हो जाता है और यही उसके साथ हो रहा था।

             रोज की तरह आज सुबह जैसे ही मैं अपने समय पर उठा और कमरे से बाहर निकल कर मैंने देखा कि तेज बारिश हो रही थी। बारिश की वजह से आज मैं मॉर्निंग वॉक पर नहीं जा पाया। यह बारिश कल रात लगभग 8 बजे से हो रही थी और आज दोपहर के 1 बजे तक बारिश होती रही। सुबह उठने के बाद बाहर बारिश होती देख मैं एक बार फिर से सो गया और जब बाद में उठा तब भी बारिश हो रही थी। अपने दैनिक कार्य निपटाने के बाद मैंने नाश्ता किया और अपने कमरे में चला गया। वहां कुछ देर काम किया और उसके बाद मुझे सुस्ती आने लगी थी, क्योंकि बाहर बारिश हो रही थी इसलिए मौसम ठंडा था तो मुझे कुछ देर के लिए झपकी लग गई। बीच में मेरी आँख खुली तो अभी तक बारिश हो ही रही थी। फिर दोपहर का खाना खाने के बाद मैं फिर से कमरे में जाकर लेट गया और मुझे नींद आ गई उसके बाद जब मेरी आँख खुली तो बारिश रुक चुकी थी।

             कल से हो रही इस बारिश की वजह से कल शाम से मैं उसे नहीं देख पाया और आज भी पूरा दिन हो गया था। बारिश रुकने के बाद शाम के समय मैं बाहर गया तो उसकी हल्की सी झलक मुझे दिखाई दी। अभी मेरे घर के अन्य काम मुझे निपटाने थे इसलिए मैं ज्यादा देर बाहर नहीं रुक सका। घर के कार्य समाप्त करने के बाद मैंने शाम की चाय पी और उसके बाद फ्री होकर बाहर चला गया। उसके घर के सामने से गुजरते हुए मुझे वह अच्छी तरह दिखाई दे गई और उसे देखकर मेरा मन खुश हो गया। अपने घर के बाहर जब वह अपना काम कर रही थी तो मैंने उससे बात करने की कोशिश की लेकिन ऐसा संभव नहीं हो पाया क्योंकि कुछ दूरी पर और भी लोग थे जो आपस में बातें कर रहे थे। तो मैंने भी उसके पास जाकर ज्यादा बात करने की कोशिश नहीं की क्योंकि वैसे ही कुछ लोग हमारे पीछे पड़े हैं, इससे उसे भी खतरा हो सकता था और उसे कोई दिक्कत हो यह मुझे मंजूर नहीं।

           रात का भोजन लेने के बाद रोज की तरह मैं टहलने के लिए बाहर चला गया, तब तक मेरे और भी दोस्त आने वाले थे। जैसे ही मैं उसके घर के सामने से निकल रहा था वह अपने घर का गेट बंद कर रही थी। मैंने उसे देख लिया था और मैं रोशनी में खड़ा हो गया ताकि वह भी मुझे देख सके और शायद उसने भी मुझे देखा, मैं उसके बाद आगे निकल गया। थोड़ी देर बाद वह अपने घर की छत पर आ गई, शायद उसने मुझे जाते हुए देख लिया था और वह समझ गई थी कि मैं कहाँ जाने वाला हूँ। जब वह अपने घर की छत पर आई तो मैंने उससे बात करने की कोशिश की लेकिन वह ज्यादा देर नहीं रुकी। शायद आसपास की छत पर कोई और व्यक्ति होगा या उसके घर से कोई और छत पर आ रहा होगा। उसके बाद मैंने उसकी काफी देर प्रतीक्षा की लेकिन फिर वह नहीं आई तो मैं समझ गया कि कल तक मुझे फिर से प्रतीक्षा करनी होगी। उसके बाद हम लोग टहलने चले गए वापस आकर कुछ देर हमने गपशप की और उसके बाद अपने-अपने घर आ गए। अभी रात के 12:00 बज चुके हैं तो अब मैं चलता हूँ सोने, अब आपसे मुलाकात होगी कल फिर से एक और नई ब्लॉग पोस्ट में… शुभ रात्रि।

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