मंगलवार, 6 अगस्त 2024

आज किसी काम में मन नहीं लग रहा है...उसकी याद भी ज्यादा आ रही है आज | Personal Life Blog | Personal Diary | 13 July 2024 Blog

 आज है 13 जुलाई 2024 और अभी रात के 11:15 बज रहे हैं। आज सुबह मैं अपने नियत समय पर सो कर उठा और जैसे ही अपने कमरे से बाहर निकला तो बाहर का माहौल कुछ गीला सा हो रहा था। इसका मतलब यह था कि रात में बारिश पड़ी थी, लेकिन उस समय मौसम ठीक था तो मैं मॉर्निंग वॉक पर निकल गया। रात की बारिश की ताकत का अंदाजा तब लगा जब गांव से बाहर मैंने खेतों में देखा। खेतों में फसलें बिछ गई थीं, इसका अर्थ यह था कि रात में बहुत तेज आंधी चली थी। आंधी और बारिश ने मिलकर तूफान का रूप ले लिया था, कई जगह कुछ पेड़ भी टूटे हुए पड़े थे।

               मैं मॉर्निंग वॉक से वापस आया। वह ना तो मुझे इधर से जाते हुए मिली और ना ही जब मैं उधर से आ रहा था, तब ही उसके दर्शन हुए। मैं घर वापस आ गया और थोड़ी देर बाद किसी काम से बाहर की ओर गया जैसे ही उसके घर के सामने पहुंचा, उसके दरवाजे के झरोखे से उसका चेहरा मुझे दिखाई दिया। जैसे ही मैंने उसे देखा, मेरा मन एकदम से खिल उठा। वापस आकर मैं नहा-धोकर नाश्ता करने के बाद एक बार फिर से बाहर की ओर चला गया।

             पता नहीं क्यों, आज उसे जी भर कर देखने का मन कर रहा था… शायद इसलिए क्योंकि कई दिन से हमारी बात नहीं हो पा रही है और ना ही हम एक दूसरे को ठीक से देख पा रहे हैं। जब मैं बाहर गया तो वह मुझे अपने घर के बाहर ही मिल गई और मैं उसे निहारते हुए आगे की ओर निकल गया क्योंकि ऐसे रुकना ठीक नहीं था। मैं थोड़ी देर बाद उसी रास्ते से वापस आया और एक बार फिर उसकी और देखा लेकिन इस बार उसके पास उसके परिवार के सदस्य भी थे तो मैं सीधा अपने घर चला आया। लेकिन मेरा मन कहाँ मानने वाला था… कुछ समय बिताने के बाद मैं एक बार फिर से बाहर की ओर गया और इस बार भी वह मुझे घर के बाहर ही काम करते हुए दिख गई, लेकिन उसके बिल्कुल पास उसके घर का एक सदस्य कुछ काम कर रहा था। मैं ना तो वहाँ जा पाया और ना ही किसी जगह खड़ा हो पाया। मैं दूसरी ओर निकल गया और थोड़ी देर बाद जब वापस आया तो वह अपना काम समाप्त करके घर के अंदर जा चुकी थी। मैं समझ गया कि अब वह दिखाई नहीं देगी तो मैं घर वापस आ गया।

            रात आंधी और बारिश होने की वजह से बिजली की लाइन में कई जगह फॉल्ट बन गए थे, कुछ खंभे भी टूटे थे और लाइट आने की कोई संभावना नहीं थी। आज मन थोड़ा अजीब सा हो रहा था। कभी-कभी ऐसा होता है… पता ही नहीं चलता कि मन क्या चाह रहा है, बस थोड़ा उदास, थोड़ा परेशान सा रहता है। कुछ ऐसा ही आज मेरे साथ हो रहा था और मेरे लिए यह कोई नई बात नहीं है, कभी भी मेरे साथ ऐसा हो जाता है। आज उसकी याद भी कुछ ज्यादा आ रही थी। उससे मिलने का बहुत मन था लेकिन इस समय हम दोनों के ही साथ ऐसी स्थिति है कि हमें एक-एक कदम बहुत संभाल कर रखना पड़ रहा है। आज मैं अपना कोई काम नहीं कर पाया, मन ही नहीं लग रहा था किसी काम में… पूरी दोपहर ऐसे ही निकल गई, कभी लेटता तो कभी बैठता और ना ही सोने का मन कर रहा था। शाम की चाय पीने के बाद मैं बाहर की ओर गया और संयोग से जब मैं बाहर पहुंचा, उसी समय वह अपने घर से बाहर आ रही थी कुछ काम करने के लिए। तो जब तक वह अपना काम करती रही मैं वहीं खड़े होकर उसे देखता रहा। मेरे लिए एक अच्छी बात यह भी थी कि इस समय मेरे पास किसी का फोन आया और मैं फोन पर बात करते-करते वहीं टहल रहा था, जहां से वह मुझे अच्छी तरह साफ-साफ दिखाई दे रही थी। जब तक उसने अपना काम समाप्त किया मैं उसे देखता रहा लेकिन उससे कुछ ही दूरी पर उसके घर के सदस्यों की आवाज भी आ रही थी तो वह मेरी ओर नहीं देख सकती थी और ना ही हम इशारों में कुछ बात कर सकते थे। जब वह काम समाप्त करके घर के अंदर चली गई तो मैं अपने घर वापस आ गया।

             शाम के समय मैं किसी काम से उसके घर के नजदीक था तो मुझे उसकी आवाज तो आ रही थी लेकिन वह दिखाई नहीं दे रही थी। मैंने काफी कोशिश की कि वह मुझे दिख जाए लेकिन ऐसा हो नहीं सका, फिर मैं घर वापस आ गया। शाम का समय आज यूं ही निकल गया, कुछ खास नहीं हुआ। रात का खाना खाने के बाद रोज ही की तरह मैं और मेरे दोस्त टहलने के लिए गांव से बाहर निकल गए। कुछ समय वहां बिताया, बातें कीं और उसके बाद घर वापस आ गए। जैसे ही हम गांव में पहुंचने वाले थे तभी लाइट आ गई जो कि पूरे दिन गायब रही थी। ऐसा लग रहा था जैसे आज आएगी ही नहीं लेकिन गनीमत रही की लाइट सोने से पहले आ गई। अभी रात के 11:45 बज रहे हैं और मुझे नींद आ रही है तो मैं चलता हूँ सोने, अब आपसे मुलाकात होगी कल फिर से एक और नए ब्लॉग पोस्ट के साथ… शुभ रात्रि।

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