बुधवार, 18 सितंबर 2024

वो मुझे चिढ़ाने का कोई मौका नहीं छोड़ती...| Daily Diary | 17 September 2024 Diary

 स्वागत है आप सभी लोगों का मेरी आज की डेली डायरी में, आज है 17 सितंबर 2024। सुबह उठने के बाद रोज का जो मेरा काम होता है मैंने वह किया और इस काम के बहाने मुझे उसके घर की ओर जाना होता है। यहीं मौका मिलता है उसे देखने का, लेकिन आज वह मुझे दिखाई नहीं दी और मैं काम समाप्त करके वापस घर आ गया। उसके बाद नित्य कर्म से निपट कर नहा-धोकर मैंने नाश्ता किया और एक बार फिर से उसे देखने के लिए बाहर की ओर चल दिया लेकिन इस बार भी वह दिखाई नहीं दी। मैं फिर से वापस आ गया और पढ़ने बैठ गया। लगभग एक घंटा पढ़ने के बाद मैं फिर से उठा और बाहर की ओर चल दिया और इस बार भी मेरा यह प्रयास विफल रहा। वह अभी भी घर के अंदर ही थी और उसे बिना देखे ही मैं फिर से वापस आ गया। घर आने के बाद मैंने घर का कुछ काम किया और फिर से पढ़ने बैठ गया।

           दोपहर हो चुकी थी। मैंने दोपहर का भोजन किया और रोज की तरह फिर से बाहर चला गया। वह मुझे अभी भी दिखाई नहीं दी थी लेकिन घर के आंगन में उसके कपड़े सूख रहे थे, इसका मतलब था कि वह थोड़ी देर पहले ही नहा कर आई होगी और गीले कपड़े सूखने के लिए तार पर डालकर घर के अंदर चली गई होगी। मैं वापस आ गया और फिर से पढ़ने बैठ गया। मैं पढ़ ही रहा था कि मम्मी ने मुझे किसी काम के लिए आवाज लगा दी तो मैं उठकर अपने कमरे से बाहर आ गया। मैं अपना काम कर ही रहा था कि मुझे उसकी आवाज सुनाई दी। मैंने तुरंत पलट कर पीछे देखा तो सामने से वह आ रही थी। वह अपने घर आए हुए मेहमान के किसी बच्चे को दुकान से कुछ सामान दिलाने जा रही थी। उसके घर से दुकान का रास्ता हमारे घर के सामने से होकर जाता है। उसने मुझे चिढ़ाते हुए कुछ कहा… वह अक्सर ऐसा करती है, मुझे चिढ़ाने का कोई मौका नहीं छोड़ती और उसका चिढ़ाना मुझे बहुत अच्छा लगता है। जब भी मुझे मौका मिलता है तो मैं भी उसे चिढ़ाता रहता हूँ।

             दोपहर का समय था इसलिए हमारे आसपास और कोई नहीं था तो मैंने उससे बात करने की कोशिश की। हम दोनों एक जगह रुक कर बातें नहीं कर सकते थे क्योंकि किसी के भी आने का खतरा था तो उसके चलते-चलते ही मैंने उससे बातें कीं। जब तक वह दुकान से वापस अपने घर नहीं चली गई, मैं वहीं खड़ा रहा और वह दुकान पर जाते हुए मेरी ओर देख रही थी। उसके जाने के बाद मैं घर के अंदर आ गया। अब मैं फिर से पढ़ने बैठ रहा था लेकिन मेरा मन नहीं कर रहा था। बार-बार उसी की याद आ रही थी, ऐसा लग रहा था जैसे वो अभी आ जाए और मैं उससे ढेर सारी बातें करूं। वह मुझे दोबारा से देखने को मिले लेकिन ऐसा संभव नहीं था, मैंने मन को समझाया और पढ़ने बैठ गया। पढ़ाई के बाद मैंने अपने कुछ दूसरे काम किये और तब तक शाम होने वाली थी।

           शाम के समय चाय पीने के बाद मैं बाहर निकल गया। उसके घर के सामने से जाते हुए मुझे उसकी आवाज सुनाई दी। मैंने उसकी ओर देखना चाहा लेकिन वहां उसके घर के कुछ सदस्य और कुछ मेहमान खड़े थे तो मुझे अपनी नजर वहां से हटानी पड़ी। मैं वहां नहीं देख सकता था और सीधा निकल गया। कुछ समय बाद मैं वापस आया तब भी वह लोग वहीं खड़े थे तो मुझे बिना कोई हरकत किये घर वापस आना पड़ा। आज शाम के समय अचानक बारिश आ गई जबकि दिनभर तेज धूप खिली थी। इस बारिश ने सब कुछ बिगाड़ दिया क्योंकि शाम के समय ही उसके दिखाई देने का मौका बढ़ जाता है लेकिन इस बारिश ने सारा खेल बिगाड़ दिया और शाम तक बारिश होती रही। शाम के समय जब बारिश थोड़ी हल्की हुई तो मैं बाहर निकल गया लेकिन वह मुझे दिखाई नहीं दी तो मैं वापस आया और घर का कुछ काम किया।

           रात का खाना खाने के बाद रोज ही की तरह मैं बाहर टहलने निकल गया। आज मेरे साथ कई और लोग भी थे, जैसे ही मैं अपने नियत स्थान पर पहुंचा वे लोग वहीं बैठे थे। मुझे लग रहा था कि जब वह छत पर आएगी तो मैं उससे कैसे बातें करूंगा लेकिन आज वह छत पर आई ही नहीं क्योंकि बारिश का मौसम था। ऐसे में उसके घर वाले उससे सवाल करते कि ऐसे मौसम में छत पर क्यों जा रही है इसलिए वह आज नहीं आई। इस तरह से आज वह मुझे दिन भर में मात्र एक बार देखने को मिली, वह भी बहुत थोड़ी देर के लिए। कुछ देर बातें करने के बाद हम लोग अपने-अपने घर आ गए। घर आकर मैंने अपना कुछ काम किया। अभी रात के 11:30 बजने वाले हैं तो अब मैं चलता हूँ सोने, आपसे मुलाकात होगी कल फिर से एक और नई पोस्ट के साथ… शुभ रात्रि।

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