स्वागत है आप सभी लोगों का मेरी डेली डायरी में, आज है 24 सितंबर 2024। आज सुबह एक बार फिर से कल की तरह मेरी आंख उठने के नियत समय से पहले ही खुल गई और मुझे नींद नहीं आ रही थी लेकिन फिर भी मैं आंखें बंद करके लेटा रहा। जब मेरी आंख खुली तो मुझे एक और नई चिंता ने घेर रखा था शायद इसी वजह से मेरी आंख जल्दी खुल गई। मैंने कोशिश की कि मुझे फिर से नींद आ जाए लेकिन ऐसा नहीं हुआ। थोड़ी देर बाद मेरे उठने का समय हो गया। मैं उठा और थोड़ी देर बाद काम से बाहर गया। उसके घर की ओर जाते हुए मैंने उसे देखने की कोशिश की लेकिन वह मुझे दिखाई नहीं दी, मैं काम समाप्त करके घर वापस आ गया।
नहा धोकर मैंने नाश्ता किया और बाहर निकल गया। रास्ते में उसके घर के सामने जाते हुए मैंने एक बार फिर से कोशिश की कि वह मुझे दिख जाए लेकिन फिर से मैं उसे नहीं देख पाया। जब वह मुझे काफी देर तक नहीं दिखती है तो मुझे उसके बारे में चिंता होने लगती है। थोड़ी देर बाद मैं वापस आ गया और पढ़ने बैठ गया। कुछ देर पढ़ने के बाद मैं उठा और बाहर चला गया क्योंकि आज मुझे लग रहा था कि वह मुझे इस समय दिख जाएगी। यह उसके घर के सारे काम धंधे निपटा कर नहा धोकर आराम करने का वक्त था तो मुझे लग रहा था कि वह नहाने जाते हुए या उसके बाद कपड़े धोकर तार पर डालते हुए कभी ना कभी तो मुझे दिखेगी। इसी आस में मैं बाहर निकल गया और सौभाग्य से मैं उसके घर के सामने जैसे ही पहुंचा वह मुझे दिख गई। वह अभी-अभी नहा कर आई थी। जैसा मैंने सोचा था ठीक वैसा ही हुआ। मैं उसे देखकर खुश हो गया। जब उसे लगा कि मैं कहीं दूर से उसे देख रहा हूँ तो उसने थोड़ा सा मेरी और देखा और अपनी निगाह हटा ली। अभी भी वह घर की बातों से परेशान है और उसके व्यवहार में यह साफ झलकता है। थोड़ी देर बाद वह अंदर चली गई। मैंने उसके बाद थोड़ी और प्रतीक्षा की कि वो फिर से बाहर आए लेकिन वह नहीं आई। कुछ देर बाद मैं घर वापस आ गया।
अब दोपहर हो चुकी थी। मैंने कुछ देर पढ़ाई की और उसके बाद जब दोपहर के खाने का समय हो गया तो मैं खाना खाकर एक बार फिर से बाहर टहलने निकल गया। लेकिन अब उसके दिखने की कोई उम्मीद नहीं थी। मैं कुछ देर बाद घर वापस आ गया और पढ़ने बैठ गया। थोड़ी देर पढ़ने के बाद मैंने अपने दूसरे काम किये। 2 दिन से मुझे ठीक से नींद नहीं आ रही थी, इसकी वजह से मेरी नींद पूरी नहीं हो पा रही थी तो आज दोपहर में मैं कुछ देर के लिए सो गया। जब मैं सो कर उठा तो चाय बन चुकी थी। मैंने चाय पी और थोड़ी देर मोबाइल में कुछ काम किया। उसके बाद मैं बाहर निकल गया और उसके घर के पास ही एक जगह जाकर खड़ा हो गया, जहां से उसके दिखने की उम्मीद थी। मुझे खड़े हुए कुछ देर हो गई थी और मेरी निगाहें उसी के इंतजार में थीं। थोड़ी देर बाद वह किसी काम से अपने घर के बाहर आई। मैंने उसे देखा तो मुझे काफी अच्छा लगा लेकिन उसने मेरी ओर नहीं देखा। शायद उसके आसपास कोई और होगा। वह घर के अंदर चली गई। मैं कुछ देर तक वहीं खड़ा रहा, जब मुझे लगा कि अब वह बाहर नहीं आएगी तो मैं भी घर वापस आ गया।
शाम का समय था। मैं रोज की तरह उसी जगह जाकर बैठ गया जहां हम सभी लोग शाम के समय मिलते हैं। हम सभी लोग बैठकर बातें कर रहे थे। थोड़ी देर बाद मैंने देखा कि उसका दरवाजा थोड़ा सा खुला हुआ है और उसमें से वह मुझे अपने घर काम करते हुए दिख रही थी, लेकिन इतनी अच्छी तरह से नहीं। बस मुझे उसकी पहचान पड़ रही थी कि वही है। वह अपने घर काम कर रही थी और काम करते मैं उसे देख रहा था। मुझे इतने में ही बड़ी खुशी मिल रही थी। थोड़ी देर बाद दरवाजा बंद हो गया। कुछ देर बाद हम सभी लोग गांव से बाहर टहलने निकल गए और जब वहां से लौटे तो शाम हो चुकी थी, फिर मैं घर वापस आ गया।
रात का भोजन लेने के बाद मैं टहलने निकल गया। मैं टहलते हुए ही मोबाइल में कुछ काम कर रहा था और साथ ही साथ उसके दरवाजे की ओर भी देख रहा था कि काश वो दरवाजा खोलकर बाहर देखे। मुझे इतना तो पता चल रहा था कि वह अपने घर कुछ काम कर रही है क्योंकि यह खाने का समय होता है तो खाना खाने के बाद शायद बर्तन साफ कर रही थी। मुझे टहलते हुए कुछ देर हो गई थी। थोड़ी देर बाद अचानक दरवाजा खुला और यह वही थी। उसने देखा और तुरंत दरवाजा बंद कर लिया। इससे मुझे एहसास हो गया कि वह काफी डरी हुई है। लेकिन मुझे इस बात की खुशी है कि कम से कम उसने आज दरवाजा खोल कर देखा तो… कुछ दिनों में सब ठीक हो जाएगा। उसके बाद जैसे कि मुझे उम्मीद थी, वह छत पर नहीं आई।
कुछ समय बाद मेरे अन्य साथी भी वहां आ गए फिर हम वहां बैठकर बातें करने लगे। जब रात काफी होने लगी तो हम अपने-अपने घर आ गए। घर आकर मैंने अपना बाकी बचा काम निपटाया और मुझे काम करते-करते 11 बज गए थे। अभी रात के 11:30 बज चुके हैं और मुझे नींद भी आने लगी है तो अब मैं चलता हूँ सोने, आपसे मिलूंगा कल फिर से एक और नई पोस्ट के साथ… शुभरात्रि।
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