स्वागत है आप लोगों का मेरी डेली डायरी में, आज है 25 सितंबर 2024। रोज की तरह आज सुबह मैं अपने समय पर उठा लेकिन आज कोई काम नहीं था इसलिए उस समय मैं बाहर नहीं गया। सुस्ती उतारने के लिए मैंने एक कप चाय पी और फिर थोड़ी देर बाद बाहर की ओर निकल गया। रास्ते में मुझे उसकी आवाज सुनाई दी, मैंने गौर से सुना तो वह अपने पड़ोस के घर में किसी काम से आई थी। मैं वहीं रुक गया। मैंने उसे देखने की कोशिश की लेकिन वह पता नहीं कहां खड़ी थी, मुझे दिखाई नहीं दे रही थी लेकिन उसकी आवाज बराबर आ रही थी। मैं वहीं खड़ा रहा। थोड़ी देर बाद जब वह अपने घर जाने लगी तो मुझे दिखाई दी। मैं तुरंत वापस हो गया क्योंकि मुझे उसके घर के सामने पहुंचना था ताकि वह अपने घर जाते हुए दिखाई दे। जैसे ही मैं उसके घर के सामने पहुंचा, वह अपने घर जा रही थी। मैं तो उसे देख रहा था लेकिन उसने मुझे नहीं देखा और उसे पता भी नहीं चला कि मैं यहां हूँ। वह अपने घर के अंदर चली गई, उसके बाद मैंने थोड़ी देर और प्रतीक्षा की फिर मैं घर वापस आ गया।
घर आकर मैंने घर के कुछ काम किये और उसके बाद मैं अपने घर के बाहर यूं ही खड़ा था कि तभी मुझे किसी ने कुछ काम से बुला लिया। तो इस तरह से मुझे एक बार फिर उसके घर के सामने से जाने का मौका मिला और जैसे ही मैं उसके घर के सामने पहुंचने ही वाला था कि वह मुझे अपने घर से बाहर निकलती हुई दिखाई दी। कुछ कदम चलने के बाद में जैसे ही उसके घर के सामने पहुंचा तो मैंने उसकी ओर देखा तो वह मेरी ओर ही देख रही थी। मैं सीधा आगे निकल गया और जिसने मुझे बुलाया था उसके पास जाकर उसका काम किया। मुझे घर लौटने में थोड़ी देर हो गई थी। घर आकर मैं नहाया धोया और उसके बाद नाश्ता किया। थोड़ी देर बाद मुझे किसी काम से फिर बाहर की ओर जाना पड़ा और इस बार भी जैसे ही मैं उसके घर के सामने पहुंचा तो वह मुझे अपने घर के बाहर ही कुछ काम करते हुए दिख गई। उसने मेरी ओर देखा तो मैंने यह महसूस किया कि वह थोड़ी परेशान सी है। मैंने उससे इशारों में पूछना चाहा कि क्या परेशानी है… लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया और घर के अंदर चली गई। वह काफी दुखी है। मैं आगे बढ़ गया और काम समाप्त करके वापस घर आ गया।
वापस आकर मैं पढ़ने बैठ गया। थोड़ी देर पढ़ने के बाद मुझे सुस्ती आने लगी तो मैं लेट गया और मुझे नींद आ गई। थोड़ी देर बाद मेरी आंख खुली तो मैं फिर से पढ़ने बैठ गया। दोपहर का समय हो चुका था। मैंने खाना खाया और इस बार मुझे बाहर जाने का मौका नहीं मिला क्योंकि आज बारिश हो रही थी। सुबह से मौसम साफ था लेकिन अचानक बादल आए और बारिश शुरू हो गई तो मैं अपने कमरे में जाकर आराम करने लगा। अब मैं बाहर तो नहीं जा सकता था क्योंकि बारिश हो रही थी तो मैंने कुछ देर आराम करने के बाद पढ़ाई की और उसके बाद अपने कुछ काम किये। शाम तक यूं ही चलता रहा। जब शाम की चाय का समय हो गया तो मैंने चाय पी और उसके बाद फिर से अपने काम में लग गया।
अब शाम हो चुकी थी और मेरे बाहर जाने का समय हो चुका था तो मैं बाहर की ओर निकल गया। जब मैं बाहर पहुंचा तो मुझे थोड़ी देर ही हुई थी कि मैंने देखा वह अपनी छत पर है। लेकिन मुझसे पहले शायद उसने मुझे देख लिया था और वह तभी नीचे चली गई। उसके बाद मैंने उसे छत पर देखने की काफी कोशिश की लेकिन वह नजर नहीं आई। आज मेरा मन उदास हो रहा था। कुछ समय बाद मैं घर वापस आ गया।
अब रात हो चुकी थी। मैंने रात का खाना खाया और रोज की तरह टहलने निकल गया और जाकर अपने नियत स्थान पर थोड़ी देर के लिए बैठा, उसके बाद टहलने लगा। अब कुछ दिन तक उसके छत पर आने की कोई उम्मीद नहीं है और आज भी कुछ ऐसा ही हुआ, वह छत पर नहीं आई। मैं कुछ देर टहलता रहा, उसके बाद वहीं बैठ गया। मैंने सोचा कि थोड़ी देर उसकी प्रतीक्षा ही कर लेता हूँ, क्या पता आ ही जाए। हालांकि मुझे उसके आने की कोई भी उम्मीद नहीं थी लेकिन मुझे उसकी प्रतीक्षा करना अच्छा लग रहा था। जब रात काफी होने लगी तो मैं घर वापस आ गया। घर आकर मैं अपने काम में लग गया और आज मुझे काफी रात हो चुकी है। अभी रात का 1:00 बजने वाला है और अभी मुझे नींद नहीं आ रही है। लेकिन अगर मैं देर तक जागता रहा तो सुबह नहीं उठ पाऊंगा इसलिए अब मैं चलता हूँ सोने, आपसे मिलूंगा कल फिर से एक और नई पोस्ट के साथ… शुभ रात्रि।
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