स्वागत है आप लोगों का मेरी डेली डायरी में, आज है 1 अक्टूबर 2024। कल मेरा जो नुकसान पढ़ाई में हुआ था वह मैंने आज पूरा करने की कोशिश की और मैं उसमें सफल भी रहा। कल मैं बिल्कुल भी नहीं पढ़ पाया था लेकिन आज मैंने उसकी भरपाई की। सुबह उठने के बाद मुझे अक्सर नहाने और नाश्ता करने में देर हो जाती है लेकिन आज मैं जल्दी नहा लिया और नाश्ता करने के बाद आज मैं बाहर नहीं गया, जैसे कि मैं रोज जाता हूँ, और मैं पढ़ने बैठ गया। मैंने तब तक पढ़ाई की जब तक मेरा दिमाग थक नहीं गया। उसके बाद मैं उठा और अपने दूसरे काम में लग गया। इससे यह फायदा हुआ कि मेरा दिमाग भी तरोताजा हो गया और मेरा दूसरा काम भी हो गया। उसके बाद मैं फिर से पढ़ने बैठ गया।
अब दोपहर का समय हो गया था तो मम्मी ने खाने के लिए आवाज लगा दी। मैंने खाना खाया और रोज की तरह बाहर निकल गया। जब मैं रास्ते में जा रहा था तो उसके घर के सामने जैसे ही पहुंचा, मुझे उसके घर से कुछ इस तरह की आवाज़ आ रही थी जैसे कोई झगड़ रहा हो। मैं वहीं रुक कर देखने लगा तो मुझे उसकी आवाज आई… उसका भाई उससे झगड़ रहा था। मैंने थोड़ी देर रुक कर यह समझने की कोशिश की कि उनमें लड़ाई क्यों हो रही है लेकिन मुझे पता नहीं चल पाया। मैं ज्यादा देर वहां रुक भी नहीं सकता था तो मैं आगे बढ़ गया। मैंने दूसरी ओर जाकर सुनने की कोशिश की तो यह तो समझ में आ रहा था कि उन दोनों में आपस में कहासुनी हो रही है लेकिन बात का पता नहीं चला कि आखिर मामला क्या है। उसका भाई बहुत नालायक है। वह कुछ काम भी नहीं करता और उससे कभी सीधे मुंह बात नहीं करता। मुझे उस पर बहुत गुस्सा आता है।
थोड़ी देर बाद मैं वहां से वापस आ गया। मुझे उस पर बहुत ख्याल आ रहा था… पता नहीं क्या बात थी, बेचारी परेशान हो रही होगी। घर आकर मैं उसके बारे में सोचता रहा। जब मेरा मन नहीं माना तो थोड़ी देर बाद मैं फिर से उसके घर की ओर गया। तब तक लड़ाई शांत हो चुकी थी और वह नहा भी चुकी थी क्योंकि उसके कपड़े तार पर सूख रहे थे जबकि पहले वह कल वाले कपड़ों में ही थी। मैंने उसे देखना चाहा लेकिन वह नजर नहीं आई। थोड़ी देर बाद मैं वापस आ गया और पढ़ने बैठ गया। एक घंटा पढ़ने के बाद मैं अपने दूसरे काम में लग गया और वह काम पूरा करने के बाद फिर से पढ़ने बैठ गया। पढ़ते-पढ़ते मुझे सुस्ती आने लगी थी तो मैं थोड़ी देर के लिए सो गया। आज मैं जल्दी उठ गया था और उसके बाद फिर से पढ़ने बैठ गया।
अब शाम की चाय का वक्त हो चुका था। मैंने चाय पी और थोड़ी देर के लिए घर के बाहर खड़ा हो गया। आज मैंने ज्यादा उसके घर की ओर जाने की कोशिश नहीं की क्योंकि मुझे उस पर गुस्सा आ रहा है कि वह मुझसे बात क्यों नहीं कर रही। आज मेरा मन उसकी तरफ से थोड़ा उदास हो गया है। आज मैं ज्यादातर घर पर ही रहा, अपनी पढ़ाई की और बाकी काम किया। आज मैंने अपना लक्ष्य पूरा किया। मैं शाम के समय बाहर गया, मैंने देखा कि उसका दरवाजा खुला हुआ है। मैं जाकर अपने स्थान पर बैठ गया। मैंने उसके दरवाजे की ओर देखा तो, लेकिन इतनी उम्मीद से नहीं जैसे बाकी दिन देखता हूँ। आज मैंने ज्यादा देखने की कोशिश नहीं की, हालांकि एक बार वह मुझे दिख गई। मैं उदास सा बैठा था। उसने मुझे देख तो लिया ही होगा। कुछ देर बैठने के बाद मैं वापस घर आ गया।
रात का खाना खाने के बाद रोज की तरह मैं बाहर टहलने निकल गया। मैंने उसकी छत की ओर देखा तो वहां कोई नहीं था। मैं थोड़ी देर वहां टहलता रहा और उसके बाद बैठकर मोबाइल चलाने लगा। थोड़ी देर बाद मेरे अन्य साथी वहां आ गए और हम सब वहां बैठकर बातें करने लगे। मुझे उसकी बहुत याद आ रही थी। आज मेरा मन किसी से भी ज्यादा बोलने का नहीं कर रहा था, तो मैं अधिकतर समय शांत ही रहा। मन में उसी का ख्याल चल रहा था। मैंने काफी दिनों से उसे ठीक से देखा भी नहीं है। एक बार को तो मुझे लगा कि उसे याद करके मैं कहीं रो ही ना जाऊँ। पता नहीं उसे मेरी याद आती होगी या नहीं… आज हम लोग वहां और दिन के मुकाबले कुछ ज्यादा देर रुके और जब समय काफी हो गया तो उठकर अपने-अपने घर आ गए। अभी रात के 12:00 बजने वाले हैं तो अब मैं चलता हूँ सोने, आपसे मिलूंगा कल फिर से एक और नहीं पोस्ट के साथ… शुभ रात्रि।
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