स्वागत है आप सभी लोगों का मेरी डेली डायरी में, आज है 2 अक्टूबर 2024। आज एक बार फिर से मैं पढ़ाई का अपना लक्ष्य पूरा नहीं कर पाया। आज मैं एक बार फिर बिल्कुल भी नहीं पढ़ पाया। मेरा आज का दिन भी कोई ज्यादा अच्छा नहीं था। अंदर ही अंदर एक उदासी रह-रह कर उठ रही थी। एक तो आज मेरी बिल्कुल भी पढ़ाई नहीं हुई और इस बात का पछतावा दिन भर रहा क्योंकि जब कोई बना बनाया नियम टूटता है तो फिर से पटरी पर आने में कुछ दिक्कत तो आ ही जाती है। और दूसरी वजह उसकी तरफ से है जो कि कई दिन से वह मुझसे बात नहीं कर रही है, इसकी वजह से कभी-कभी दिमाग बहुत ज्यादा खराब हो जाता है और फिर कुछ भी करने का मन नहीं करता।
आज सुबह सोकर उठने के बाद मैं बाहर नहीं गया। आज श्राद्ध का अंतिम दिन था इसलिए घर पर काम और दिन के मुकाबले कुछ ज्यादा था तो आज बाहर जाने का मौका नहीं मिला। घर का काम करते-करते काफी समय हो गया। पूरे घर की साफ-सफाई और धुलाई हुई। इस सब में बहुत समय लग गया। काम से निपटने के बाद मैं नहाया और नाश्ता किया, उसके बाद मैं बाहर गया। बाहर जाने के बाद मैंने उसे देखने की कोशिश की लेकिन वह आज भी नहीं दिखी। थोड़ी देर बाद मैं वापस आ गया। घर आने के बाद मैंने थोड़ा और काम किया क्योंकि आज पिताजी घर पर नहीं थे इसलिए सारा काम मुझे ही करना था। उसके बाद मैं अपने कमरे में चला गया। मैंने थोड़ी देर मोबाइल चलाया और फिर आराम करने लेट गया। मैं लेटा तो यह सोचकर था कि थोड़ी देर आराम करने के बाद मैं पढ़ूंगा और उसके बाद अपना एक जरूरी काम मुझे करना था, लेकिन लेटने के बाद जब मैंने आंखें बंद कीं तो कुछ ही समय बीता था और मुझे नींद आ गई।
नींद के चक्कर में ना तो मैं अपना काम ही कर पाया और ना ही पढ़ पाया। जब मैं उठा तो काफी समय बीत चुका था। मेरा एक जरूरी काम जो अधूरा था वह मैंने पूरा किया और उसके बाद घर के अन्य कामों में लग गया। शाम के समय मैं बहुत थोड़ी देर के लिए बाहर गया। मैंने उसे आज सुबह से नहीं देखा था। जब मैं बाहर गया तो उसका दरवाजा बंद था। मैं वहीं खड़ा था लेकिन आज मेरा मुंह दूसरी ओर था। अचानक जब मेरी नजर उसके दरवाजे की ओर गई तो दरवाजा थोड़ा खुला हुआ था और वहां वह खड़ी थी। रास्ते में उसकी एक सहेली जा रही थी। वह उससे कुछ बात कर रही थी। थोड़ी देर बाद उसने दरवाजा बंद कर दिया। मैं कुछ देर वहां और खड़ा रहा। वहां मेरे साथ और भी मेरे साथी थे। थोड़ी देर उनसे बात करने के बाद मैं घर वापस आ गया और फिर घर के कामों में लग गया।
रात हो चुकी थी। मैंने रात का खाना खाया और बाहर टहलने चला गया। जब मैं जा रहा था तो उसके घर के सामने जैसे ही पहुंचा, वह मुझे अपने घर के बाहर ही दिख गई। वह पानी भर रही थी… शायद बर्तन धोने के लिए। मैंने थोड़ी देर खड़े होकर उसे देखा। उसने भी मुझे देख लिया था। पानी भरकर वह अंदर चली गई। मैं आगे बढ़ गया और अपने नियत स्थान पर पहुंच गया। मैं वहां पहुंचा ही था कि उसने दरवाजा खोलकर बाहर की ओर देखा और धीरे से कुछ कहा। मेरी समझ में नहीं आया कि उसने क्या कहा लेकिन मुझे पूरी उम्मीद है कि उसने कुछ ताना ही मारा होगा या गुस्से से कुछ कहा होगा। जब उससे बात होगी तो पूछूंगा कि उसने क्या कहा था। उसने दरवाजा बंद कर लिया और अपने काम में लग गई। मैं वहां थोड़ी देर बैठा और उसके बाद टहलने लगा। लगभग आधा घंटा टहलने के बाद मैं बैठकर मोबाइल में कुछ काम करने लगा। थोड़ी देर बाद मेरे अन्य साथी भी वहां आ गए। हम वहां बातें करते रहे और जब घर आने का समय हुआ तो हम अपने-अपने घर आ गए।
आज मैंने उसकी याद को अपने दिमाग से दूर रखने की कोशिश की। जैसे ही उसका ख्याल आता, मैं अपना मन दूसरी ओर हटा लेता। लेकिन यह बहुत मुश्किल था। ऐसा कैसे हो सकता है कि उसकी याद ना आए, लेकिन मैंने आज पूरी कोशिश की कि मैं उसके बारे में ज्यादा ना सोचूं। लेकिन उसका नाम मुझे कहीं ना कहीं देखने और सुनने को आखिरकार मिल जाता था। आज मेरा पूरा दिन एक अजीब सी उदासी में बीता और यह सब उसी की वजह से हो रहा है। एक बात मेरे समझ में नहीं आती कि जब घर पर ऐसा कुछ होता है उसके साथ, तो वह मुझसे बात करना क्यों बंद कर देती है जबकि उसे मुझे सब कुछ बता देना चाहिए ताकि यह पता चल सके कि अब आगे क्या करना है… लेकिन वह ऐसा नहीं करती और मुझे उसकी इसी बात पर बहुत गुस्सा आता है। चलिए अब ज्यादा उसके बारे में बात नहीं करते हैं। अभी रात के 11:30 बज चुके हैं तो अब मैं चलता हूँ सोने, आपसे मिलूंगा कल फिर से एक और नई पोस्ट के साथ… शुभ रात्रि।
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