स्वागत है आप सभी लोगों का मेरी डेली डायरी में, आज है 11 अक्टूबर 2024। कुछ दिनों से मेरा मन बड़ा अजीब सा हो रहा है। अंदर पता नहीं किस चीज का लेकिन एक डर जैसा लग रहा है। कुछ दिनों पहले सब ठीक था, सब कुछ अच्छा जा रहा था… मेरी पढ़ाई भी और मेरा काम भी। लेकिन अब कुछ दिनों से सब कुछ बेकार हो रहा है और मन की यह उदासी लगातार बढ़ती जा रही है। आज, कल से थोड़ी और ज्यादा मन में उदासी है। सुबह उठने के बाद मैंने एक गिलास पानी पिया और थोड़ी देर बाद रोज की तरह बाहर टहलने निकल गया, लेकिन वह मुझे दिखाई नहीं दी। थोड़ी देर बाद मैं घर वापस आ गया।
नित्य कर्म से निपटकर मैं नहाया और नाश्ता किया, उसके बाद घर से बाहर निकल गया। उसके घर के सामने जाते हुए मैंने उसके घर की ओर देखा तो वह मुझे घर में ही काम करती हुई दिख गई। उसे देखकर मुझे बहुत अच्छा लगा। मैं आगे निकल गया और थोड़ी देर बाद वापस आया तो वह मुझे फिर से अपने घर में चलती हुई दिखाई दी। घर आकर मैंने थोड़ी देर पढ़ाई की और उसके बाद फिर बाहर चला गया। इस बार वह मुझे दिखाई नहीं दी। घर आने के बाद मैंने अपने कुछ काम निपटाए और उसके बाद पढ़ने बैठ गया। आज दोपहर में फिर से मैं एक बार सो गया। मैंने उस समय खाना भी नहीं खाया था, फिर मुझे मम्मी ने उठाया क्योंकि खाने का समय हो चुका था। मैं उठा और सुस्ती उतारने के बाद मैंने खाना खाया। खाना खाने के बाद रोज ही की तरह फिर से बाहर टहलने निकल गया। दोपहर का समय था इसलिए उसके दिखने की कोई भी संभावना नहीं थी। मैं घर वापस आ गया।
घर आने के बाद मैं थोड़ी देर ही पढ़ा था कि मुझे उसकी याद आने लगी और फिर मेरा पढ़ने का मन नहीं किया। मैंने अपने दूसरे काम करने की कोशिश की लेकिन उसमें भी वही हाल था। मैंने थोड़ा सा काम किया और फिर से उसके विचार मेरे मन में आने लगे। आज पता नहीं क्यों मुझे उसकी बहुत याद आ रही थी। मैंने बहुत दिनों से उससे बात नहीं की है। पिछले दिनों मुझे लगा था कि अब सब कुछ ठीक है और वह मुझसे बात करेगी लेकिन पिछले दो दिनों से उसे देखकर ऐसा लग रहा है कि फिर से कुछ ना कुछ बात हो गई है। मेरे लिए एक परेशानी यह भी है कि जब ऐसी वैसी कोई बात होती है तो मुझे उसका पता नहीं चल पाता। एक तो हमारी वैसे ही बहुत कम बात होती है और ऊपर से वह थोड़ी नाराज हो जाती है तो बोलती भी नहीं… तो मुझे किसी भी बात का पता नहीं चल पाता। मुझे पता नहीं रहता कि वह किस बात पर नाराज है या उसके घर वालों ने उसे क्या कहा है। अगर वह बताए तो आगे का रास्ता निकले और यह भी पता चले कि अब आगे क्या करना है… किस तरह से सावधानी बरतनी है…।
मैंने शाम की चाय पी और उसके बाद किसी काम से बाहर गया। मैं जब उधर से लौट रहा था तो रास्ते में एक मोड़ पर मुझे वह मिली। मैं मोड़ के दूसरी ओर था, मुझे नहीं पता था कि मोड़ के इस तरफ से वह आ रही है। जैसे ही मैं मोड़ पर पहुंचा तो वो मेरे ठीक सामने से आ गई। यह सब इतनी तेजी से हुआ कि मैं कुछ समझ नहीं पाया और आज इतने दिनों में पहली बार वह मेरे इतने करीब से निकली। मैंने उससे कहा कि “मेरा मन बिल्कुल भी नहीं लग रहा है”, लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया और सीधे घर की ओर निकल गई। उस समय मुझे उसके चेहरे पर एक अजीब सा डर और परेशानी जैसा भाव नजर आया। ऐसा लगता है कि जरूर फिर से कोई ना कोई बात हुई है। मैं घर आ गया लेकिन उसकी याद मुझे अब और ज्यादा आने लगी।
शाम के समय मैं रोज की तरह बाहर गया और जैसे ही वहां पहुंचा, मैंने देखा वह अपनी छत पर है। वह किसी काम से आई थी। उसके साथ उसकी भाभी भी थीं। जब मैं रास्ते में था तो मैंने देखा वह अपनी छत से किनारे पर जाकर नीचे की ओर देख रही है जहां मैं बैठता हूँ। जब मैं वहां पहुंचा तो थोड़ी देर बाद वह नीचे आ गई। मैं वहां काफी देर बैठा रहा लेकिन फिर वह मुझे नजर नहीं आई। मैं घर आ गया। थोड़ी देर बाद किसी काम से बाहर उसके घर की ओर गया। काम निपटाकर मैं बातें कर रहा था क्योंकि वहां और भी काफी लोग थे। थोड़ी देर बाद वह घर से निकल कर आई उसने एक बार भी मेरी ओर नहीं देखा। हालांकि वह मजबूर भी थी क्योंकि उसके परिवार के सदस्य भी वहां थे और उन सभी लोगों की निगाहें हम दोनों के ऊपर रहती हैं कि हम दोनों किधर देख रहे हैं। एक बार को मुझे लगा कि उसने हल्का सा मेरी ओर देखा। थोड़ी देर बाद वह वापस घर चली गई। मैं भी घर वापस आ गया।
रात का भोजन करने के बाद रोज की तरह टहलने मैं बाहर निकल गया। मैं थोड़ी देर बैठा और उसके बाद टहलने लगा। उसकी छत आज भी सूनी थी। वह आज भी छत पर नहीं आई और ना ही दरवाजे पर उसकी कोई आहट हुई लेकिन थोड़ी देर बाद मुझे उसकी आवाज जरूर आई। वह घर के अंदर कुछ काम कर रही थी, शायद बर्तन साफ कर रही थी क्योंकि बर्तन खड़कने की आवाज आ रही थी। थोड़ी देर बाद किसी ने दरवाजा तो खोल कर देखा लेकिन मुझे ठीक से पहचान नहीं पड़ी कि वह कौन था। लेकिन वह निश्चित तौर पर उसका भाई होगा क्योंकि उसकी लंबाई इतनी नहीं है। टहलने के बाद मैं वहीं बैठकर मोबाइल में काम करने लगा। थोड़ी-थोड़ी देर बाद मैं उसकी छत की ओर देख लेता था, वहां कोई नहीं था। वह आज भी नहीं आई। एक बार फिर से मुझे उसकी प्रतीक्षा करते-करते सुबह से दोपहर, दोपहर से शाम और शाम से अब रात हो चुकी है। उससे मेरी कोई बात नहीं हुई है, ना ही वह मुझे ठीक से देखने को मिली है। इस समय मुझे उसकी बहुत ही ज्यादा याद आ रही है… इतनी कि अगर मेरा वश चले तो मैं अभी उसके घर पहुंच जाऊं और जाकर उससे लिपट जाऊं।
आज शाम से तो मुझे उसकी याद बहुत ही ज्यादा आ रही है और अभी मेरा मन भी रोने का कर रहा है। पता नहीं वह मुझसे कब बात करेगी… कभी-कभी मन करता है कि बहुत जोर से उसका नाम चिल्लाउँ लेकिन ऐसा करना ठीक नहीं है। इससे सब कुछ खराब हो जाएगा। अभी काफी रात हो चुकी है तो चलिए मैं चलता हूँ सोने, आपसे मिलूंगा कल फिर से एक और नई पोस्ट के साथ… शुभ रात्रि।
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