स्वागत है आप सभी लोगों का मेरी डेली डायरी में, आज है 12 अक्टूबर 2024। आज सुबह उठने के थोड़ी देर बाद मैंने रोज की तरह एक गिलास पानी पिया और उसके बाद बाहर घूमने निकल गया। वह मुझे दिखाई नहीं दी। थोड़ी देर बाद मैं घर आ गया। घर आकर नित्य-कर्म से निपटा और नहा कर नाश्ता किया। नाश्ता करने के बाद मैं फिर से बाहर गया। जब उसके घर के सामने पहुंचा तो वह अपने घर में काम कर रही थी। मैंने उसे देखा और आगे बढ़ गया। उसने मुझे नहीं देखा था। थोड़ी देर बाद फिर से वापस आया। वह अभी भी वहीं थी। मैंने थोड़ी देर रुक कर देखना चाहा लेकिन किसी के अचानक आने के डर से मैं नहीं रुका और आगे निकल आया। मैं घर आ गया और पढ़ने बैठ गया। पढ़ने के बाद मैं फिर से बाहर चला गया। इस बार भी जब मैं उसके घर के सामने था तो वह घर में कुछ काम कर रही थी। इस बार उसने मुझे देखा। मैं आगे बढ़ गया और जाकर उसके घर के पास ही एक जगह बैठ गया। वहां मेरे साथ मेरे और भी साथी थे।
उसका दरवाजा खुला हुआ था तो मुझे उम्मीद थी कि वह मुझे दिखेगी और ऐसा ही हुआ। वह अपने घर में काम करती हुई चलते-फिरते मुझे कई बार दिखाई दी। उस समय मैं सोच रहा था कि मैं यहीं बैठा रहूं और उसे यूं ही देखता रहूं। उसने भी दरवाजे में से मेरी ओर देखा कि मैं सामने बैठा हूँ। वह कुछ खरीदने अपने घर के बाहर भी आई लेकिन उस समय उसके साथ उसके घर की महिलाएं भी थीं। वह थोड़ी देर बाद घर के अंदर चली गई। कुछ देर बाद वह किसी काम से अपनी छत पर भी आई लेकिन उसने मेरी ओर नहीं देखा और नीचे चली गई। मैं काफी देर वहां बैठा रहा। आज लगभग दोपहर का सारा समय मैंने वहीं बिता दिया था, हालांकि तब तक उसका दरवाजा बंद हो चुका था और वह घर के अंदर आराम कर रही होगी। जब दोपहर ढलने वाली थी तो हम अपने अपने घर आ गए। घर आने के बाद मैंने अपने काम किये। आज करने को काम थोड़ा ज्यादा था तो आज मैं पढ़ा नहीं, अपना काम करता रहा।
शाम की चाय का समय हो चुका था। मम्मी ने चाय के लिए आवाज लगा दी। मैंने चाय पी और कुछ देर के लिए बाहर खड़ा हो गया। उसके बाद घर के अंदर जाकर फिर से काम किया। काम करते-करते मुझे शाम हो चुकी थी। शाम के समय मैं बाहर चला आया और जैसे ही उसके घर के सामने पहुंचा वह अपने घर में काम कर रही थी। उस समय उसका मुंह बाहर की ओर ही था उसने मेरी ओर देखा। मैंने थोड़ी देर उसे देखा और आगे निकल आया और जाकर उसके घर के पास बैठ गया। उसका दरवाजा खुला हुआ था, उसमें से वह मुझे अंदर बैठी दिख रही थी लेकिन उसका मुंह दूसरी तरफ था। मैंने कुछ देर उसे देखा और फिर एक जगह आकर बैठ गया। मुझे वह एक-दो बार और अपने घर में चलते-फिरते दिखाई दी, उसने बाहर मेरी ओर देखा। थोड़ी देर बाद मेरे पास घर से फोन पहुंच गया किसी काम के लिए तो मैं वहां से उठकर घर आ गया।
रात का भोजन करने के बाद रोज की तरह मैं बाहर टहलने निकल गया। आज मुझे उम्मीद थी कि शायद वह छत पर आए या दरवाजा खोलकर देखे लेकिन दोनों में से कुछ भी नहीं हुआ। ना तो उसने दरवाजा खोल कर देखा और ना ही वह छत पर आई। कुछ देर टहलने के बाद मैं वहीं बैठ गया। कुछ समय बाद मेरे अन्य साथी भी आ गए। हम सभी लोग वहां बैठकर बातें करते रहे। आज मुझे नींद आ रही थी और मेरे कुछ काम भी बाकी थे तो मैं वहां से जल्दी आ गया और मेरे बाकी साथी वहीं बैठे रहे। मैंने उसका काफी देर तक इंतजार किया लेकिन वह छत पर नहीं आई। जब उसके आने की उम्मीद समाप्त हो गई तो मैं अपने घर आ गया। घर आकर मैंने अपने बाकी बचे काम निपटाए और उसके बाद डायरी लिखने बैठ गया। अभी रात के 11:15 बज चुके हैं तो अब मैं चलता हूँ सोने, आपसे मिलूंगा कल फिर से एक और नई पोस्ट के साथ… शुभ रात्रि।
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