शुक्रवार, 11 अक्टूबर 2024

रतन टाटा जी जैसा महान व्यक्ति किसी भी देश की अमूल्य धरोहर है | Ratan Tata | 10 October 2024 Diary

 स्वागत है आप लोगों का मेरी डेली डायरी में, आज है 10 अक्टूबर 2024। आज सुबह मैं सो कर उठा तो श्री रतन टाटा जी के निधन की सूचना मिली। यह सूचना मुझे मिली थी एक व्हाट्सएप ग्रुप से, लेकिन मैंने उस पर विश्वास नहीं किया क्योंकि सोशल मीडिया पर लोग फर्जी खबरें बहुत ज्यादा फैलाते हैं। मैंने विश्वसनीय स्रोत से पता किया और यह खबर सही निकली। रतन टाटा जी के लिए भारत के प्रत्येक व्यक्ति के दिल में सम्मान है और यह सम्मान ऐसे ही नहीं है… वह थे ही इतने महान। जब मैंने उनके निधन की खबर पढ़ी तो मुझे लगा जैसे भारत से एक बहुत जरूरी चीज छीन ली गई है। भारत का प्रत्येक व्यक्ति उनसे जुड़ाव महसूस करता है। ऐसा लगता है जैसे कोई अपना इस दुनिया को छोड़कर चला गया हो। लेकिन समय के आगे किसी की नहीं चलती… जिसके जाने का समय आ गया हो उसे जाना ही पड़ता है। भारतीय उद्योग जगत के लिए यह एक अपूरणीय क्षति है।

           सुबह उठने के बाद नित्य कर्म से निपट कर मैं नहाया और उसके बाद नाश्ता किया। रोज की तरह मैं बाहर निकल गया लेकिन वह मुझे दिखाई नहीं दी। मैं वापस घर आ गया। घर आकर मैं पढ़ने बैठ गया लेकिन थोड़ी देर बाद ही किसी काम से मुझे फिर बाहर जाना पड़ा और जैसे ही मैं उसके घर के सामने से जा रहा था, वह अपने घर के बाहर कुछ खरीद रही थी। उसका मुंह दूसरी तरफ था। उसने मुझे नहीं देखा लेकिन मुझे उसे देखकर बहुत अच्छा लगा। जब मैं काम समाप्त करके वापस आया तो वह वहां नहीं थी। वह घर के अंदर जा चुकी थी। घर आकर मैं पढ़ने बैठ गया। उसके बाद मैंने एक-दो चक्कर बाहर के और लगाए लेकिन वह मुझे दिखाई नहीं दी।

            मैं दोपहर के थोड़ा बाद यूं ही घर के बाहर खड़ा था कि तभी मेरी निगाह अपने बाईं ओर गई, सामने से मुझे वह दुकान पर से आती हुई दिखाई दी। पहली बार में मुझे लगा कि शायद कोई और है लेकिन जब मैंने गौर से देखा तो वह यही थी। मैं बिल्कुल ठीक समय आकर खड़ा हुआ था, अगर मैं थोड़ा भी लेट हो जाता तो वह मुझे नहीं मिलती। जब वह मेरे सामने आई तो मैंने उससे कहा कि “तू कल बहुत अच्छी लग रही थी”, क्योंकि कल मैं उससे यह नहीं कह पाया था और मैंने उससे बोला कि तू मुझसे बोल क्यों नहीं रही है लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया और निगाह नीचे करके आगे चली गई। मुझे उसके चेहरे पर कुछ परेशानी नजर आई… जैसे वह किसी बात से परेशान हो। जब वह थोड़ा आगे निकल गई तो मैं उसके पीछे गया। वह देख रही थी कि मैं पीछे हूँ या नहीं, या कहीं उसके पीछे तो नहीं आ रहा। मैंने उसे हल्की सी आवाज भी दी, उसे सुनाई तो पहुंच गई होगी लेकिन वह रुकी नहीं क्योंकि उस समय तक वह अपने घर के बाहर पहुंच चुकी थी और उसके बाद सीधे घर के अंदर चली गई। उसके बाद मैंने थोड़ा आगे जाकर उसे और देखने की कोशिश की लेकिन फिर वह नहीं दिखी। मैं घर वापस आ गया।

           उसके बाद से वह मुझे अभी तक नहीं दिखी है। मैं शाम के समय बाहर गया तो उसका दरवाजा तो खुला हुआ था लेकिन वह मुझे उसमें नजर नहीं आई। मैं वहां काफी देर बैठा रहा। उसके घर के और सदस्य तो नजर आ रहे थे लेकिन वह नजर नहीं आई। जब रात होने को आई तो मैं वहां से उठकर घर आ गया। उसे देखने और बात करने का बहुत मन कर रहा था लेकिन वह मुझे उसके बाद से दिखाई नहीं दी। मैंने रात का खाना खाया और बाहर टहलने निकल गया। रोज की तरह आज भी वह छत पर नहीं आई लेकिन घर में से मुझे उसकी आवाज जरूर सुनाई दी। मैं थोड़ा आगे जाकर उसे देखना चाहता था लेकिन मेरे साथ कुछ और लोग भी थे इसलिए मैं नहीं जा सका। मैं बहुत उदास हो जाता हूँ, जब शाम को उसके दिखने का इंतजार करूं और वह दिखाई ना दे। टहलने के बाद हम वहां बातें करने लगे और जब घर आने का समय हुआ तो हम अपने-अपने घर आ गए। घर आकर मैंने अपने बचे हुए काम किये और उसके बाद डायरी लिखने बैठ गया। अभी रात के 11:00 बजने वाले हैं तो अब मैं चलता हूँ सोने, आपसे मिलूंगा कल फिर से एक और नई पोस्ट के साथ… शुभ रात्रि।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

मेरा आज का दिन कल से भी ज्यादा उदासी भरा रहा...| 26 October 2024 Diary

स्वागत है आप लोगों का मेरी दैनिक डायरी में, आज है 26 अक्टूबर 2024। मेरा आज का दिन बहुत ही खराब रहा जैसे कि मैंने आपको कल बताया था कि कल उसने...