सोमवार, 14 अक्टूबर 2024

आज का सारा दिन बहुत ही ज्यादा मायूसी में बीता | 13 October Diary

 स्वागत है आप लोगों का मेरी दैनिक डायरी में, आज है 13 अक्टूबर 2024। आज सुबह उठने के बाद रोज की तरह मैंने एक गिलास पानी पिया और बाहर की ओर निकल गया। जैसे ही मैं उसके घर के सामने पहुंचा, वह अपने घर के बाहर पानी भर रही थी। मैंने थोड़ी देर उसे देखा, फिर मैं आगे चला गया। आज मैंने उसे सुबह पहली बार जब से देखा है तब से आज मैं अंदर से बहुत ही ज्यादा उदास महसूस कर रहा हूँ। मुझे पता नहीं कि यह सब क्यों है और क्या है लेकिन आज मुझे अंदर से बहुत ही ज्यादा खराब लग रहा है। थोड़ी देर बाद मैं घर वापस आ गया। घर आकर नित्य-कर्म से निपट कर मैंने नाश्ता किया। आज मेरे माता-पिता बाहर गए हुए थे और मैं घर पर अकेला था। नाश्ता करने के बाद मैं फिर से बाहर की ओर चला गया। मैं रास्ते में खड़ा हुआ किसी से बात कर रहा था कि तभी मुझे उसकी आवाज सुनाई दी। वह अपने पड़ोस के घर में आई थी। मैं उसी घर के सामने था। आते ही वह उस घर के दरवाजे पर आई जिसके बाहर मैं खड़ा हुआ बातें कर रहा था। जैसे ही उसने दरवाजे से बाहर देखा कि मैं किसी से बातें कर रहा हूँ, वह दूसरी तरफ देखकर तुरंत पीछे हट गई। मुझे लग रहा है शायद उसने मुझे आते हुए देख लिया होगा। मैं अक्सर वहां कुछ देर के लिए रुक जाता हूँ क्योंकि वहां उसके आने की संभावना रहती है, तो हो सकता है उसने मुझे देख लिया हो और वह तुरंत उस घर में आ गई हो और उसने दरवाजे से बाहर की ओर देखा कि कहीं मैं खड़ा तो नहीं हूँ… लेकिन वहां मेरे साथ किसी और को देखकर वह वापस चली गई हो।

         थोड़ी देर बाद मुझे उस घर में जाने का मौका मिला और मैं घर के अंदर चला गया। वह वहां बातें कर रही थी। मैं किसी काम से गया था। जब मैं घर के अंदर गया तो उसका मुंह मेरी ओर था और वह जिनसे बातें कर रही थी उनका मुंह सामने की ओर था। मैंने उससे अपनी झुँझलाहट व्यक्त की। उसके चेहरे पर मुझे थोड़ा डर का भाव लगा जैसे कोई अचानक चिंतित हो जाता है। मेरे पहुंचने के थोड़ी ही देर बाद वह उठकर जाने लगी। मैंने उससे कहा “बैठो… और बातें करो”। उसने जाते हुए जवाब दिया “अब समय नहीं है घर बहुत काम है”, और वह अपने घर चली गई। थोड़ी देर बाद मैं भी अपने घर वापस आ गया।

        आज सुबह से ही मेरा मन बहुत खराब था। इस वजह से आज मैं बिल्कुल भी नहीं पढ़ पाया और ना ही अपना कोई काम कर पाया। कुछ भी करने का मन नहीं कर रहा था। पता नहीं आज क्या हो गया था। जो भी था… मुझे इतना पता है कि यह सब उसी की वजह से है। मैं ऐसे ही बैठा रहा… ना पढ़ाई की… ना कुछ काम किया। दोपहर को खाना खाने के बाद मैं फिर से बाहर गया लेकिन वह अब दिखाई नहीं दी। मैं घर वापस आ गया। उसकी याद आज बहुत ज्यादा आ रही थी। एक बार तो मैं रोने ही वाला था कि मैंने खुद को संभाल लिया। आज का पूरा दिन मेरे लिए बहुत ही खराब था। आज का पूरा दिन एक अजीब सी उदासी में बीता।

        शाम के समय मैं बाहर गया लेकिन वह मुझे दिखाई नहीं दी। उसका दरवाजा भी बंद था। मैंने काफी देर उसकी प्रतीक्षा की, जब वह दिखाई नहीं दी तो मैं घर वापस आ गया। थोड़ी देर बाद फिर किसी काम से उसके घर के पास गया। वहां मैंने काफी देर उसका इंतजार किया। उस समय उसके घर से बाहर आने की संभावना रहती है लेकिन वह नहीं आई। मैं घर वापस आ गया। मेरा मन नहीं माना तो मैं एक बार फिर से बाहर चला गया। बाहर जाने के बाद मुझे उसके घर के पास ही खड़े होने का मौका मिला। वहां मेरे साथ एक व्यक्ति और था। जहां हम खड़े थे वहां ज्यादा रोशनी नहीं थी। इस बार मैं उसके घर के बिल्कुल पास खड़ा था। वह घर से बाहर आई और उसने पानी भरा और पानी भरकर वह घर के अंदर चली गई। वह एक बार और बाहर आई। उसने देखा कि मैं वहां खड़ा हूँ और घर के अंदर चली गई।

         रात का भोजन करने के बाद रोज की तरह मैं बाहर टहलने चला गया। आज भी उसकी छत सूनी थी। मैं वहां काफी देर बैठा रहा। कभी उसकी छत की ओर देखता तो कभी उसके दरवाजे की ओर। ना तो वह छत पर आई और ना ही दरवाजे पर। उसके घर में काम करने की कुछ आवाजें मुझे सुनाई दीं। आज का दिन भी उसका इंतजार करते-करते ऐसे ही निकल गया। ना तो वह इतने अच्छे से देखने को मिली और ना ही उससे कोई बात हुई। जब घर आने का समय हुआ तो मैं घर आ गया। आज मेरे अंदर जो उथल-पुथल मची है, मैं किसी को समझा नहीं सकता। शायद कोई नहीं समझ पाएगा… लेकिन आज मैं जितना परेशान रहा हूँ अगर कोई और होता तो इतनी परेशानी में उसका दिमाग फट जाता। आज दिन भर मुझे ऐसा लगा जैसे कि कुछ बहुत गलत होने वाला है… जैसे कि मैं मरने वाला हूँ। पता नहीं आज क्या हो गया था मुझे, कुछ समझ में नहीं आया। आज घर आकर मैंने कुछ नहीं किया बस आने के बाद डायरी लिखने बैठ गया। अभी रात के 11:00 बजने वाले हैं तो चलिए अब मैं चलता हूँ सोने, आपसे मिलूंगा कल फिर से एक और नई पोस्ट के साथ… शुभ रात्रि।

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