बुधवार, 16 अक्टूबर 2024

आज वो पूरे एक दिन के बाद दिखी... और मेरे आते ही अंदर चली गई | 15 October 2024 Diary

 स्वागत है आप सभी लोगों का मेरी दैनिक डायरी में, आज है 15 अक्टूबर 2024। कल मैं अपनी डायरी नहीं लिख पाया था क्योंकि कल मैं बाहर गया हुआ था। सुबह जाने के बाद मैं रात को घर लौटा और काफी थक चुका था इसलिए कल मैं कोई भी काम नहीं कर पाया। आज सुबह उठने के बाद जब मैं बाहर गया तो वह अपने घर के बाहर कुछ काम कर रही थी। कल मैंने पूरे दिन उसे नहीं देखा था। पूरे 1 दिन के बाद आज सुबह जब मैंने उसे देखा तो मैं बहुत खुश हुआ। वह अपना काम करती रही, उसने मेरी ओर नहीं देखा क्योंकि मेरे आस-पास और भी लोग खड़े थे। मैं लौट कर घर आ गया और थोड़ी देर बाद ही फिर से गया ताकि उसे देख सकूं लेकिन तब तक वह काम निपटाकर अपने घर के अंदर जा चुकी थी।

          कल जब मैं बाहर गया हुआ था तो मुझे कई जगह उसका नाम देखने को मिला। उसका नाम देखते ही उसकी याद और ज्यादा तेजी के साथ आती है। जब मैं वहां से लौटा तो रात हो चुकी थी इसलिए मुझे सुबह का इंतजार करना पड़ा और फिर आज सुबह वह मुझे दिखाई दी। नहा धोकर नाश्ता करने के बाद मैं जब बाहर गया तो उसके घर के पास पहुंचा ही था कि वह अपने घर के बाहर कुछ खरीद रही थी। उसके साथ उसके परिवार की और भी महिलाएं थी इसलिए मैं थोड़ी देर रुक कर वापस आ गया। थोड़ी देर बाद मैं फिर से ऐसी जगह खड़ा हो गया जहां से वह अगर अपने घर के बाहर आती तो मुझे दिख जाती। मुझे खड़े हुए कुछ ही देर हुई थी कि वह अपने घर से निकलकर किसी काम से अपने पड़ोस के घर में गई। मैं सोच रहा था कि मैं भी वहां पहुंच जाऊं लेकिन मैंने थोड़ी देर इंतजार करना उचित समझा और यह सही निर्णय था। वह थोड़ी देर बाद ही वहां से वापस आ गई। अगर मैं चला जाता तो कोई फायदा नहीं होता। मैं वहीं खड़ा था, वह एक बार फिर से अपने घर से बाहर आई और उसी घर में गई। अब की बार वह और भी जल्दी वहां से लौट आई। उसके बाद मैंने कोशिश की कि उसे फिर से देखूं। मैं उसके घर के सामने गया लेकिन फिर वह मुझे नहीं दिखी। मैं घर वापस आ गया।

          दोपहर का समय हो चुका था। मैं घर जाकर पढ़ने बैठ गया। पढ़ते-पढ़ते मुझे सुस्ती आने लगी तो मैंने एक छोटी सी झपकी ली और फिर से पढ़ाई शुरू कर दी। आज मैं ज्यादा नहीं पढ़ पाया था। आज मेरा मन थोड़ा सा विचलित हो रहा था। उसे देखने और उससे बात करने का मन कर रहा था। मैं उसके बारे में सोचता रहा। मैंने दोपहर का खाना खाया और आराम करने लेट गया। ऐसे ही उसके बारे में सोचते-सोचते काफी समय हो गया। मुझे मम्मी ने चाय के लिए आवाज लगा दी। मैंने चाय पी और फिर घर से बाहर चला गया। जब उसके घर के सामने से जा रहा था तो मैंने उसे देखने की कोशिश की लेकिन वह मुझे नहीं दिखी। जैसे ही मैं उसके पड़ोस के घर के पास पहुंचा तो मुझे वह उस घर के दरवाजे पर उस घर की महिला से बात करते हुए दिख गई। वह मेरे बहुत नजदीक थी। मैं उसी रास्ते पर था जहां उस घर का दरवाजा था। मुझे वहां देखकर वह घर के अंदर चली गई। इससे मैं समझ गया कि उसके अंदर अभी भी किसी बात को लेकर नाराजगी है। मुझे लगा कि वह अपने घर चली जाएगी लेकिन वह वहीं रुकी रही। आज हिम्मत करके मैं भी उस घर के अंदर चला गया। वह वहां कुछ सेकंड्स और रुकी, उसके बाद अपने घर चली गई और जाते-जाते बोली “मैं थोड़ी देर में आऊंगी, मुझे अभी काम याद नहीं आ रहा है भूल गई… घर जाकर काम याद करके फिर आऊंगी” और यह कहकर अपने घर चली गई। उसके बाद मैंने काफी देर उसकी प्रतीक्षा की, मैं वहीं रहा लेकिन वह फिर नहीं आई। मैं अपने घर लौट आया।

           उसके बाद मैं काम से बाहर गया तो वह मुझे अपने घर के दरवाजे पर खड़ी हुई दिखाई दी। मैंने एक दो चक्कर और लगाए। वह मुझे एक बार और मिली लेकिन उसने मुंह दूसरी तरफ घुमा लिया। उसके बाद वह मुझे फिर नहीं दिखी। शाम के समय मैं बाहर गया तो उसका दरवाजा बंद था। मैं कुछ देर वहां रुका और उसके बाद घर वापस आ गया। रात का भोजन करने के बाद मैं रोज की तरह बाहर टहलने निकल गया। उसकी छत आज भी सूनी थी। वह आज भी छत पर नहीं आई और ना ही उसका दरवाजा खुला था, बल्कि उस समय तक आज वह अपना सारा काम निपटा चुकी थी और शायद अपने घर के अंदर आराम कर रही थी क्योंकि आज मुझे उसके घर से कोई भी आवाज नहीं आई। मैं टहलकर बैठ गया और उसके दरवाजे की ओर देखता रहा। जब काफी समय हो गया और उसके आने की उम्मीद समाप्त हो गई तो मैं घर आ गया। इस समय मुझे उसकी बहुत ज्यादा याद आ रही थी। मैं एक बार फिर से अपना कोई भी काम नहीं कर पाया जबकि मैंने उसे बता रखा है कि अगर वह मुझसे नहीं बोलती है और नाराज रहती है तो मैं कुछ भी नहीं कर पाता हूँ। एक बार को तो मेरा मन डायरी लिखने का भी नहीं किया लेकिन फिर मैंने डायरी लिखनी शुरू की और आज मैं काफी लेट हो गया। अभी रात के 12:15 बजने वाले हैं, तो अब मैं चलता हूँ सोने आपसे मिलूंगा कल फिर से एक और नई पोस्ट के साथ… शुभ रात्रि।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

मेरा आज का दिन कल से भी ज्यादा उदासी भरा रहा...| 26 October 2024 Diary

स्वागत है आप लोगों का मेरी दैनिक डायरी में, आज है 26 अक्टूबर 2024। मेरा आज का दिन बहुत ही खराब रहा जैसे कि मैंने आपको कल बताया था कि कल उसने...