स्वागत है आप सभी लोगों का मेरी दैनिक डायरी में, आज है 16 अक्टूबर 2024। कल रात देरी से सोने की वजह से आज सुबह उठने में थोड़ी दिक्कत हुई लेकिन मैंने अलार्म लगा रखा था इसलिए मैं उठ गया क्योंकि मुझे एक काम से बाहर जाना था और यहां उसके दिखने की संभावना रहती है। मैं सुबह उठने के बाद बाहर गया लेकिन वह मुझे नहीं दिखी। पता नहीं उस समय वह सोकर उठी भी होगी या नहीं, वैसे तो उठ जाती है लेकिन आज मुझे लग रहा था कि शायद ना उठी हो। मैं घर वापस आ गया। थोड़ी देर बाद मैं फिर से बाहर गया और इस बार जब उसके घर के सामने से जा रहा था तो वह मुझे घर में चलती हुई दिखाई दी। उसे देखकर मुझे अच्छा लगा। मैं आगे निकल गया और थोड़ी ही देर बाद लौट कर फिर से आया लेकिन वह अब मुझे नहीं दिखी। आज पूरे दिन वह मुझे बहुत कम दिखाई दी। सुबह को मुश्किल से तीन-चार सेकेंड के लिए मैंने उसे देखा था और उसके बाद तीन-चार सेकेंड के लिए ही मुझे वह शाम को दिखाई दी। सुबह से शाम तक वह मुझे नहीं दिखी।
आज मेरे माता-पिता बाहर गए हुए थे इसलिए घर में मैं अकेला था। मेरा मन भी नहीं लग रहा था। जब मैं घर में अकेला होता हूँ तो मेरा मन नहीं लगता। नहा-धोकर नाश्ता करने के बाद मैं फिर से बाहर गया लेकिन वह मुझे नहीं दिखी। थोड़ी देर बाद मैं वापस घर लौट आया। मैं थोड़ी-थोड़ी देर बाद कई बार उसे देखने की आस में बाहर जाता रहा लेकिन वह मुझे दिखाई नहीं दी। दोपहर के समय जब मैं बाहर गया तो उसके कपड़े तार पर सूख रहे थे। मैं समझ गया कि वह नहा कर घर के अंदर होगी। मैंने कोशिश की उसे देखने की लेकिन वह दिखाई नहीं दी।
आज दोपहर में मैं दो-तीन बार थोड़ी-थोड़ी देर के लिए सोया। मेरी आंख खुल जाती थी क्योंकि मैं अकेला था और घर के भी काम मुझे ही करने थे। मेरा पूरा दिन आज ऐसे ही बीत गया। मैं थोड़ी देर के लिए पढ़ा भी था लेकिन उतना नहीं जितना मैंने सोचा। दोपहर के बाद मेरे माता-पिता घर आ गए। दोपहर के बाद मुझे उतना बाहर जाने को नहीं मिला जितना मैं बाकी दिन जाता हूँ। उनके आने के बाद मैं किसी काम से पड़ोस के गांव गया था और जब वहां से लौटा तो काफी वक्त हो चुका था। उसके बाद मुझे कुछ और काम भी करने थे लेकिन मैं समय निकालकर शाम के समय बाहर चला गया। उसका दरवाजा खुला हुआ था। मैं वहां जाकर बैठ गया। वह मुझे दरवाजे में से चलती हुई तो दिखाई दी लेकिन मुझे उसके पैर दिख रहे थे, उसका चेहरा नजर नहीं आ रहा था। थोड़ी देर बाद उसका दरवाजा बंद हो गया। मैं भी उठकर अपने घर आ गया।
रात का भोजन करने के बाद रोज की तरह मैं टहलने बाहर चला गया। आज भी बाकी दिनों जैसा ही हाल था। ना ही वह छत पर आई… ना ही उसने दरवाजा खोल कर देखा। मैं अकेला वहां बैठा रहा और उसकी प्रतीक्षा करता रहा। मुझे उसकी याद लगातार आ रही थी। उसकी आवाज भी मुझे सुनाई नहीं दी। मैं कुछ देर वहां टहला और उसके बाद बैठ गया। थोड़ी देर मोबाइल चलाया और फिर यूं ही बैठा रहा। पता नहीं अब वह छत पर कब आएगी। मेरा उससे बात करने और देखने का बहुत मन कर रहा है। आज वह मुझे ना के बराबर दिखी थी… वह भी काफी दूर से। उसे देखने की आस में पूरा दिन ऐसे ही बीत जाता है। जब रात हो जाती है और वह मुझे देखने को नहीं मिलती तो मैं अंदर से बुरी तरह टूट जाता हूँ। मुझे बहुत गुस्सा आता है। कभी-कभी लगता है कि वह मुझसे प्यार नहीं करती… मैं ही उसके पीछे पगलाया फिरता हूँ। जब उसके आने की उम्मीद समाप्त हो गई तो मैं वहां से उठकर अपने घर आ गया। घर आकर मैंने थोड़ा सा काम किया और उसके बाद डायरी लिखने बैठ गया। आज एक बार फिर से मेरा मन डायरी लिखने का नहीं हो रहा था, लेकिन फिर मैंने मन को पक्का किया और डायरी लिखने बैठ गया। अभी रात के 11:15 बजने वाले हैं तो अब मैं चलता हूँ सोने, आपसे मिलूंगा कल फिर से एक और नई पोस्ट के साथ… शुभ रात्रि।
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