स्वागत है आप लोगों का मेरी दैनिक डायरी में, आज है 17 अक्टूबर 2024। आज मैं एक फंक्शन में गया था। मुझे पता था कि फंक्शन में जाने की वजह से वह मुझे पूरे दिन देखने को नहीं मिलेगी क्योंकि मैं सुबह गया था और लौटते हुए मुझे रात हो चुकी थी। इसलिए सुबह जाने से पहले मैं उसे देखने बाहर गया लेकिन वह मुझे देखने को नहीं मिली। मुझे अंदर से ठीक नहीं लग रहा था क्योंकि अगर वह देखने को मिल जाती तो मुझे अच्छा लगता क्योंकि मुझे पता था आज वह मुझे देखने को नहीं मिलने वाली है। लेकिन मैं क्या करता, वापस आ गया और तैयार हुआ। मेरे साथ मेरा भाई और मेरी माता जी भी गई थीं। हम सभी लोग अपनी कार में बैठकर घर से निकले ही थे और जैसे ही उसके घर के सामने पहुंचे, वह मुझे अपने घर के बाहर दिखाई दी। उसे देखते ही मुझे ऐसा लगा मानो मुझे कितनी कीमती चीज मिल गई हो। जब हमारी कार घूम कर दूसरी ओर आयी तो वह थोड़ी और आगे आ गई और हमारी तरफ देख रही थी। मुझे उसे देखकर ऐसा लगा जैसे उसके मन में प्रश्न हो कि मैं कहां जा रहा हूँ।
एक बार को मैंने सोचा कि मैं नहीं जाऊंगा क्योंकि जाने की वजह से उसे देखने से वंचित रह जाऊंगा लेकिन फिर मुझे जाना पड़ा। जाते-जाते मैं सोच रहा था कि आज फिर से वह मुझे पूरे दिन देखने को नहीं मिलेगी लेकिन क्या हो सकता था। हम लोग समय से पहले ही वहां पहुंच गए थे। जब खाने की बारी आई तो हमने खाना खाया और वहां के सभी व्यंजन बहुत स्वादिष्ट थे। कई बार फंक्शन में ऐसा होता है कि जल्दबाजी की वजह से कुछ चीजों में स्वाद नहीं आता लेकिन वहां सभी चीजें स्वादिष्ट थीं। आलू टिक्की जो मेरी पसंदीदा है और मैं हर फंक्शन में जरूर खाता हूँ, वह मुझे बहुत ही अच्छी लगी। ऐसा दूसरी बार हुआ है जब मुझे आलू टिक्की अच्छी लगी। इससे पहले कई साल पहले मैंने एक फंक्शन में आलू टिक्की खाई थी और वह मुझे इतनी स्वादिष्ट लगी कि मुझे अभी तक याद है। आज दूसरी बार मुझे आलू टिक्की पसंद आई। हमने वहां एंजॉय किया और फंक्शन समाप्त होने पर हम लोग घर आ गए। घर आते-आते हमें रात हो चुकी थी।
वहां बैठे-बैठे मुझे उसका बार-बार ध्यान आ रहा था। मुझे कई बार उसकी याद आई। मैं सोच रहा था कि वह क्या कर रही होगी, कैसी होगी, अगर यहां मेरे साथ होती तो क्या होता, वह कैसी लगती…! ऐसे ही कई तरह के प्रश्न मेरे दिमाग में थे। आज फिर से मुझे उसका नाम कई जगह लिखा हुआ दिखाई दिया और उसका नाम देखते ही उसकी याद इतनी तेजी से आती है जैसे दो चुंबक एक दूसरे की ओर खिंची चली जाती हैं। मैं सोच रहा था कि अगर यहां से जल्दी जा पाए तो मैं शाम को उसे देख सकता हूँ लेकिन ऐसा संभव नहीं हो सका। कार्यक्रम में भी थोड़ी देरी हो गई, जिसकी वजह से हमें वहां थोड़ा ज्यादा रुकना पड़ा और हमें लौटते हुए रात हो गई। अब मुझे उसे देखने के लिए कल सुबह तक का इंतजार करना पड़ेगा। पता नहीं उसे आज मेरी याद आई होगी या नहीं। मुझे ऐसा लगता है कि उसने मुझे आज याद तो किया होगा।
फंक्शन से लौट कर जब हम आए तो काफी रात हो चुकी थी इसलिए आज मैं बाहर नहीं गया। आज भूख भी उतनी ज्यादा नहीं थी तो हम लोगों ने थोड़ा-थोड़ा खाना खाया और बाहर जाने के लिए तब तक काफी देर हो चुकी थी। मैं घर में ही थोड़ा टहल लिया और उसके बाद अपने कुछ काम करने बैठ गया क्योंकि दिन भर कुछ भी काम नहीं हुआ था। थोड़ी थकान भी हो रही थी और मुझे नींद भी आ रही थी लेकिन अगर मैं अपने कुछ काम ना करूं तो थोड़ा खराब सा लगता है। इसलिए मैंने थकान और नींद को एक ओर रखकर अपना जो सबसे ज्यादा जरूरी काम था वह मैंने निपटा लिया और उसके बाद डायरी लिखने बैठ गया। डायरी लिखते-लिखते अभी रात के 11:00 बजने वाले हैं और मुझे सुबह भी जल्दी उठना है तो अब मैं चलता हूँ सोने, आपसे मिलूंगा कल फिर से एक और नई पोस्ट में… शुभ रात्रि।
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