स्वागत है आप लोगों का मेरी डेली डायरी में, आज है 3 अक्टूबर 2024। आज का दिन भी रोज की तरह ऐसे ही गुजर गया। आज मैं ज्यादा नहीं पढ़ पाया, बहुत थोड़ा सा पढ़ा। सुबह उठने के बाद मैं बाहर की ओर गया अपने रोज के काम से। मुझे वहाँ खड़े हुए थोड़ी ही देर हुई थी कि वह अपने घर से बाहर आई कुछ काम करने के लिए और आज वह काफी देर तक बाहर ही रही। मैं भी वहीं खड़ा था और कभी-कभी उसे देख लेता था क्योंकि आसपास और भी कई लोग थे। मैं वहां ज्यादा देर नहीं रुका और जल्दी घर वापस आ गया। आज मैं उसके घर के अंदर जाने से पहले ही आ गया। घर आकर मैं अपने दैनिक कार्यों से निवृत हुआ और उसके बाद मैंने चाय के साथ चिप्स खाए क्योंकि आज से नवरात्रि शुरू हो गई हैं इसलिए रोज की तरह नाश्ता नहीं किया। चाय के साथ घर पर बने आलू के चिप्स खाए।
थोड़ी देर बाद मैं बाहर की ओर निकल गया। मुझे उम्मीद थी कि आज वह मंदिर जाते हुए मुझे मिल सकती है। मैं उसी की प्रतीक्षा में था। मैं एक ऐसी जगह बैठ गया जहां से रास्ता साफ दिखता है और वहीं से होकर मंदिर जाया जाता है। मुझे थोड़ी देर हुई थी कि वह मुझे मंदिर की ओर जाते हुए दिखी। उसे देखकर मेरा मन प्रसन्न हो गया। हालांकि मैं वहां अकेला नहीं था और ना ही उसने मुझे देखा था। मैंने उसे देख लिया था। वह किसी के साथ जा रही थी। मैं वहां तब तक बैठा रहता जब तक कि वह मंदिर से वापस अपने घर की ओर नहीं आ जाती लेकिन मुझे घर से एक काम के लिए बुलावा आ गया और मुझे घर जाना पड़ा, इसलिए वह मुझे वापसी में देखने को नहीं मिली। मैं घर आया और वह काम निपटाया। जब मैं काम समाप्त करके घर आ रहा था तो वह मुझे दुकान पर जाते हुए मिली। उसे देखकर मैंने रुकना चाहा लेकिन मेरे आस-पास एक महिला थी जिसकी निगाह मुझ पर ही थी इसलिए मैं वहां रुक नहीं सका और घर आ गया। लेकिन घर की ओर मुड़ते हुए मैंने उसकी ओर देखा तो वह मेरी ओर ही देख रही थी। इससे मुझे आज ऐसा लगा कि अब उसके मन में कोई नाराजगी नहीं है। उसके बाद मैंने कोशिश की कि मैं घर के बाहर आऊं और उसे वापस अपने घर जाते हुए देखूं लेकिन वह बहुत थोड़ी देर के लिए मुझे दिखाई दी और अपने घर की ओर चली गई। उसके थोड़ी देर बाद मैं फिर से बाहर गया लेकिन उसके बाद वह मुझे देखने को नहीं मिली। मैं वापस घर आ गया।
घर आने के बाद मैं थोड़ी देर पढ़ा और पढ़ते-पढ़ते मुझे आज फिर से सुस्ती आने लगी। मैं एक बार फिर से सो गया, हालांकि आज मैं ज्यादा देर के लिए नहीं सोया था। मैं जल्दी उठ गया और अपना अधूरा पड़ा काम निपटाया, उसके बाद फिर से कुछ देर पढ़ा। मेरे दोपहर का समय कुछ इसी तरह बीता। उसके बाद शाम की चाय का समय हो गया। मैंने चाय पी और बाहर की ओर निकल आया। मैंने देखा कि उसके कपड़े अभी भी तार पर पड़े हुए हैं तो मुझे लगा कि वह मुझे देखने को मिल सकती है। मैं थोड़ा सा आगे पहुंचा ही था कि मुझे उसकी आवाज उसके पड़ोस के घर से आई। मैं वहीं रुक गया। मैंने उसे देखने की कोशिश की लेकिन वह मुझे नहीं दिखी। मैं उस घर में नहीं जा सकता था क्योंकि वहां घर के और भी सदस्य थे, इसलिए जाने का कोई फायदा भी नहीं होता। उसे देखने की कोशिश करते हुए मैंने देखा कि दरवाजे में थोड़ी सी जगह थी जिसमें से वह मुझे हल्की सी दिखाई दी। उसका मुंह मेरी ओर ही था। मुझे ऐसा लगा जैसे कि उसने मुझे देखा हो। मैं बाहर सड़क पर ही था। थोड़ी देर बाद उसकी आवाज आनी बंद हो गई। इसका मतलब था कि वह वहां से चली गई थी। थोड़ी देर बाद मैं भी घर वापस आ गया।
शाम के समय मैं बाहर जाकर अपने उसी नियत स्थान पर बैठ गया। उसका दरवाजा आधा खुला हुआ था। मैं कभी मोबाइल में अपना काम करता तो कभी उसके दरवाजे की ओर देखता। वह मुझे अपने घर के अंदर ही आते-जाते दरवाजे में से दिख रही थी। आज वह मुझे बहुत अच्छी लग रही थी। अब मुझे उससे कैसे भी करके मिलना है और बात करनी है। थोड़ी देर बाद वह दरवाजे की ओर आयी। मैंने उसे देखा और वह दरवाजे की ओट लेकर थोड़ी सी छिपकर खड़ी हो गई क्योंकि जहां मैं बैठा था उसके पास ही कुछ और लोग भी थे जो आपस में बातचीत कर रहे थे। थोड़ी देर बाद मैं वहां से उठकर घर आ गया।
आज घर में हम सभी का व्रत था तो दिन में ज्यादा कुछ खाया नहीं था इसलिए रात का भोजन मैंने जल्दी कर लिया और बाहर निकल गया रोज की तरह टहलने के लिए। मैं अपने उसी स्थान पर जाकर बैठ गया। थोड़ी देर बाद मुझे उसकी आवाज तो आ रही थी लेकिन वह दिख नहीं रही थी। शायद उसने भी थोड़ी देर पहले ही खाना खाया होगा और वह बर्तन साफ करने की तैयारी में थी, क्योंकि बर्तन खड़कने की आवाज आ रही थी। मैं थोड़ी देर वहां बैठा और उसके बाद टहलने लगा। मैंने उसकी छत की ओर देखा, वहां कोई नहीं था। आज पता नहीं क्यों मुझे लग रहा था कि वह छत पर आ सकती है लेकिन यह मेरा भ्रम था, वह नहीं आई। थोड़ी देर बाद मैं और मेरे साथी गांव से बाहर टहलने के लिए निकल गए। हम वापस आकर थोड़ी देर बैठे और कुछ ही देर बाद घर की ओर चल दिए। घर आकर मैंने अपने बाकी अधूरे पड़े काम निपटाए और उसके बाद डायरी लिखने बैठ गया। अभी रात के 12:10 हो रहे हैं तो अब मैं चलता हूँ सोने, आपसे मिलूंगा कल फिर से एक और नई पोस्ट के साथ… शुभ रात्रि।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें