स्वागत है आप सभी लोगों का मेरी दैनिक डायरी में, आज है 20 अक्टूबर 2024। आज मैं थोड़ी देरी से सो कर उठा क्योंकि कल मैं देरी से सोया था और कल मैं थका हुआ भी था। सुबह उठने के बाद आज घर पर काफी काम था। मैंने घर की धुलाई की, पोंछा लगाया यानी काम में मम्मी का हाथ बँटाया। घर के काम से निपट कर मैं खेतों पर चला गया। वहां थोड़ा सा काम था जो मैंने किया। वहां से आने के बाद मैं नहाया और नाश्ता किया। उसके बाद मैं बाहर की ओर चला गया। रास्ते में जाते हुए जैसे ही उसके घर के सामने पहुंचा तो वह अपने दरवाजे पर कुछ काम कर रही थी। मैंने नजर घुमाकर उसकी ओर देखा लेकिन तुरंत मुझे अपनी नजर हटानी पड़ी क्योंकि उसके साथ उसकी भाभी खड़ी थीं। मैं आगे चला गया और जब थोड़ी देर बाद वापस आया तो वह वहां नहीं थी। मैं अपने घर वापस आ गया।
घर आने के बाद मैं काम करने बैठ गया। जब दोपहर का समय हुआ तो मम्मी ने खाने के लिए आवाज लगा दी। मैंने खाना खाया और बाहर टहलने चला गया। आज मैंने खाना थोड़ा जल्दी खा लिया था। बाहर जाने के बाद मैंने उसे देखने की कोशिश की। मैं उसके घर के पास भी गया जहां मैं शाम को जाता हूँ लेकिन वह मुझे दिखाई नहीं दी। हालांकि उसका दरवाजा खुला था लेकिन वह मुझे एक बार भी नजर नहीं आई। कुछ समय बाद मैं घर वापस आ गया। मैंने थोड़ी देर आराम किया और उसके बाद अपना काम करने बैठ गया। मुझे दोपहर में सुस्ती तो आ रही थी लेकिन मैं सोया नहीं। अगर मैं दिन में सो जाता हूँ तो फिर उठने के बाद मन कुछ अच्छा नहीं रहता, इसलिए मैं दिन में सोने से बचता हूँ।
शाम की चाय पीने के बाद मैं उसे देखने बाहर चला गया। जैसे ही मैं उसके घर के सामने पहुंचा, वह अपने घर के बाहर ही अपने भतीजे को खिला रही थी। मैं वहीं रुक गया और उसे देखता रहा। उसने मेरी ओर देखा और कुछ देर देखती रही। मैं वहीं खड़ा रहा। थोड़ी देर बाद वह अंदर की ओर चली गई। मैंने थोड़ा और आगे जाकर उसे देखने की कोशिश की। वह अपने घर के अंदर थी लेकिन उसके साथ में उसकी भाभी भी थीं तो मैंने अपनी नजर तुरंत हटा ली। जब मैं थोड़ी देर बाद वापस आया तब भी वह वहीं थी। उसे देखते हुए मैं अपने घर आ गया। थोड़ी देर बाद मैं यूं ही अपने घर के बाहर खड़ा हो गया और जैसे ही मैं घर से बाहर आया, वह मुझे दुकान पर जाते हुए दिखाई दी। मैंने सोचा कि काश मैं 1 मिनट पहले आ जाता तो मुझे जाते हुए मिल जाती लेकिन मुझे इस बात का संतोष था कि वह वापस आएगी तो जरूर मिलेगी। मैं वहीं खड़ा रहा। थोड़ी देर बाद वह वापस आई तो मैंने उससे कहा कि “अब मैं किस गलती की माफी माँगूं, मैंने क्या किया है… तू कुछ बताती क्यों नहीं”। उसने कोई जवाब नहीं दिया और घर चली गई। मैं उसके पीछे-पीछे गया और उसे उसके घर जाते हुए देखता रहा। जब वह घर के अंदर चली गई तो मैं वापस अपने घर के बाहर आकर खड़ा हो गया।
मुझे खड़े हुए थोड़ी ही देर हुई थी कि मेरी निगाह अचानक अपने दाएं और गई। मैंने देखा वह दोबारा से दुकान पर जा रही है लेकिन दुर्भाग्य से उस समय मेरे पास एक व्यक्ति खड़ा था, इसलिए वह निगाह नीचे करके दुकान पर चली गई और जब उधर से वापस आई तब भी मैं अकेला नहीं था। मुझे मन मार कर रहना पड़ा। मैं उससे कुछ नहीं कह पाया और वह अपने घर चली गई। शाम के समय जब मैं बाहर जा रहा था और उसके घर के पास पहुंचा तो वह अपने घर के बाहर काम कर रही थी। मैंने उसे देखा तो मैं वहीं रुक गया और उसकी ओर देखने लगा। काम समाप्त करके वह घर के अंदर जाने लगी। घर के अंदर जाने से पहले उसने मेरी ओर देखा और फिर घर के अंदर चली गई। जब उसने मुझे देखा तो मुझे बहुत अच्छा लगा, मुझे लग रहा है कि वह मेरे बारे में सोच रही है। उसे कुछ तो एहसास होगा मेरी परेशानी का, उसे लगता तो होगा कि मैं इससे ना बोलकर ठीक नहीं कर रही। मैं काफी देर वहीं बैठा रहा लेकिन उसके बाद वह दिखाई नहीं दी। जब रात होने लगी तो मैं उठकर अपने घर आ गया।
रात का भोजन करने के बाद मैं हमेशा की तरह बाहर टहलने चला गया। मैं टहल रहा था और टहलते-टहलते उसके दरवाजे और छत की ओर देख रहा था। वह छत पर नहीं आई और ना ही उसने दरवाजा खोल कर देखा। मैं टहलता रहा और थोड़ी देर बाद वहीं बैठ गया। मैंने काफी देर उसकी प्रतीक्षा की। जब उसके आने की संभावना समाप्त होने लगी तो मैं वहां से उठकर अपने घर आ गया। घर आने के बाद मैंने अपने बचे हुए काम पूरे किये और उसके बाद अपनी डायरी लिखने बैठ गया। अभी रात के 11:15 बज चुके हैं तो अब मैं चलता हूँ सोने, आपसे मिलूंगा कल फिर से एक और नई पोस्ट के साथ… शुभ रात्रि।
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