मंगलवार, 22 अक्टूबर 2024

वो दुकान पर आ रही थी लेकिन मुझे देखकर वापस लौट गई... उसने मुझे फिर से उदास कर दिया | 21 October 2024 Diary

 स्वागत है आप सभी लोगों का मेरी दैनिक डायरी में, आज है 21 अक्टूबर 2024। मेरा आज का दिन सुबह से दोपहर के बाद तक सामान्य था, ना ज्यादा अच्छा ना ज्यादा बुरा लेकिन उसके बाद से ठीक नहीं रहा। मेरा मन उदास हो रहा था। चलिए सुबह से शुरू करते हैं— आज सुबह उठने के बाद मैंने एक गिलास पानी पिया और थोड़ी देर बाद बाहर चला गया। बाहर मैं रास्ते पर पहुंचा ही था कि वह अपने घर से निकल कर अपने खेतों की ओर जा रही थी। उसने मुझे नहीं देखा क्योंकि वह आगे जा रही थी और मैं पीछे खड़ा था। मैं उसे जाते हुए देखता रहा। थोड़ी देर बाद मैं घर वापस आ गया। घर आने के बाद मैं नहाया, नाश्ता किया और उसके बाद फिर से बाहर चला गया। वह मुझे दिखाई नहीं दी। मैंने काफी कोशिश की, कई चक्कर लगाए लेकिन वह मुझे नहीं दिखी। आखिरकार मैं घर लौट आया और अपना काम करने बैठ गया।

           मैं काम कर रहा था। थोड़ी ही देर बाद मुझे किसी ने एक काम से बुला लिया। मुझे बाहर जाना पड़ा। मैंने जाते हुए भी उसे देखने की कोशिश की लेकिन वह दिखाई नहीं दी। थोड़ी देर बाद जब मैं लौट कर आ रहा था तो रास्ते में एक जगह रुक गया। वहां से उसका दरवाजा दिख रहा था। अचानक मेरी निगाह उसके दरवाजे पर गई। वहां वह खड़ी थी। वह नहा कर आयी थी क्योंकि सर पर उसने तौलिया बांधा हुआ था। वह थोड़ी देर वहां रुकी, बाहर की ओर देखा और उसके बाद दरवाजा बंद करके अंदर चली गई। मैं थोड़ी देर वहां और रुका रहा ताकि अगर वह फिर से आए तो मैं उसे देख सकूं लेकिन फिर वह नहीं आई। मैं घर वापस आ गया। अब दोपहर का समय हो चुका था। मैंने खाना खाया और एक बार फिर से बाहर की ओर गया लेकिन वह मुझे दिखाई नहीं दी। मैं घर वापस आ गया और फिर से अपने काम में लग गया। आज मैं थोड़ी देर के लिए दोपहर में सो गया और उठने के बाद फिर से मैंने अपने काम पूरे किए।

           शाम के समय जब मैं बाहर गया और वहां पहुंचा ही था कि मैंने देखा वह दरवाजा खोलकर बाहर आ रही है। लेकिन मुझे देखते ही वह वहीं रुक गई। वह दुकान पर जाने के लिए निकलने वाली थी लेकिन मुझे देखकर उसने दरवाजा बंद कर दिया और वापस चली गई। उसके बाद वह अपने दूसरे दरवाजे से निकल कर दूसरी दुकान की ओर चली गई। मैं समझ गया कि वह मेरी वजह से इधर नहीं आई। इस समय मुझे बहुत गुस्सा आया, मेरा दिमाग बहुत खराब हो गया और मेरा मन उदास होने लगा। जब वह ऐसी कोई हरकत करती है तो मुझे लगता है कि वह मुझसे प्यार नहीं करती। अगर नहीं भी करती है तो मुझे बता दे, कम से कम आगे का रास्ता साफ हो जाएगा… और एक मैं हूँ जो उसके बारे में दिन-रात सोचता रहता हूँ। उसे इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि उसके ऐसा करने से मैं कुछ भी नहीं कर पाता, मेरा कोई भी काम नहीं हो पता, ना ही मैं पढ़ पाता हूँ। इसी बात को लेकर शाम से मेरा दिमाग बहुत परेशान है और मैं कुछ भी नहीं कर पा रहा हूँ। मुझे पता था कि वह दूसरे दरवाजे से दूसरी दुकान की ओर जाएगी और मैंने उसे जाते हुए देख लिया था तो मैं वापस जाकर उसी रास्ते पर खड़ा हो गया जहां से वह वापस आती। वह वापस आई लेकिन उस समय मेरे आस-पास और भी लोग थे। हालांकि वह जिस बच्चे को लेकर आई थी अपनी गोद में, उससे बोलते हुए जा रही थी और वह मुझ पर ढालकर बोल रही थी। वह अपने घर चली गई। मैं भी वापस उसी जगह चला गया जहां मैं बैठता हूँ।

           मैं वहां जाकर बैठ गया लेकिन उसके बाद ना तो वह दरवाजे पर आई और ना ही मुझे दिखाई दी। मैं काफी देर वहां बैठा रहा। जब रात होने लगी तो मैं उठकर अपने घर आ गया। घर आने के बाद किसी काम से मैं फिर उसके घर की ओर गया। मैंने उसे देखने की कोशिश की लेकिन वह मुझे नहीं दिखी। काम समाप्त करके मैं घर वापस आ गया। रात का भोजन करने के बाद रोज की तरह मैं फिर से बाहर टहलने निकल गया और जैसे कि मुझे उम्मीद थी वैसा ही हुआ। ना तो वह छत पर आई और ना ही उसने दरवाजे से देखा। कुछ देर तक उसकी आवाज भी नहीं आई लेकिन बाद में बर्तनों के खड़कने के साथ उसकी आवाज आई और बर्तन साफ करके वह अंदर चली गई। मैं वहां अकेला उदास बैठा रहा। मुझे उसकी बहुत याद आ रही थी। मेरे साथी भी वहीं थे लेकिन मैं सबसे अलग अकेला बैठा था और उसी के बारे में सोच रहा था। मुझे शाम से बहुत बुरा लग रहा है। मैं उससे ज्यादा कुछ नहीं चाहता लेकिन क्या वह मेरे लिए इतना भी नहीं कर सकती। लेकिन कभी-कभी मुझे लगता है कि वह मुझे चिढ़ाती है और चिढ़ाने के लिए ऐसी वैसी हरकतें करती रहती है। लेकिन कभी-कभी मुझे ऐसा भी लगता है कि वह मुझसे प्यार नहीं करती। उसे मेरी कोई परवाह नहीं है। आज बहुत सारी नकारात्मक बातें मेरे दिमाग में घूमती रहीं। मैं अकेला गुमसुम सा बैठा था। एक बार मेरा रोने का भी मन किया लेकिन मैंने अपने आप को संभाल लिया। आज मैं थोड़ा जल्दी वहां से अपने घर आ गया।

           घर आने के बाद भी मेरा मन ठीक नहीं था। घरवाले टीवी पर समाचार देख रहे थे। वैसे तो मेरा कोई मन नहीं था लेकिन मैं भी वहीं बैठ गया और थोड़ी ही देर बाद समाचारों में मुझे उसका नाम सुनाई दिया। कई बार उसका नाम मेरे सामने आता रहा। मैं वहां से उठकर अलग चला गया। आज मुझे ऐसा लग रहा है जैसे मेरा मन उससे धीरे-धीरे भरने लगा है क्योंकि वह बिल्कुल भी सहयोग नहीं करती। मैं ही उसे देखने की आस लगाए रहता हूँ। वह अपनी तरफ से कोई भी कोशिश नहीं करती। मैं अपनी तरफ से कब तक कोशिश करता रहूं… लेकिन अगली बार जब मैं उसे देखता हूँ तो फिर से वही कहानी शुरू हो जाती है और मैं पिछला गुस्सा भूल जाता हूँ। पता नहीं ऐसा क्यों होता है। अब कल उससे बात करने की कोशिश करूंगा कि कम से कम वह कुछ बताए तो सही कि आखिर दिक्कत कहां है…? अभी काफी रात हो चुकी है और रात के 11:30 बजने वाले हैं। तो अब मैं चलता हूँ सोने, आपसे मिलूंगा कल फिर से एक और नई पोस्ट के साथ… शुभ रात्रि।

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