बुधवार, 23 अक्टूबर 2024

मुझे पता था कि वो आज अपने पड़ोस में गीत-संगीत में जाएगी लेकिन उसके जाने से पहले ही मुझे घर आना पड़ा | 22 October 2024 Diary

 स्वागत है आप सभी लोगों का मेरी दैनिक डायरी में, आज है 22 अक्टूबर 2024। सुबह मैं किसी काम से उसके घर की ओर गया। मैं वहां खड़ा था और थोड़ी देर बाद ही वह अपने घर से बाहर आई। वह शायद अंदर कुछ काम कर रही थी और बाहर हाथ धोने आई थी। उसने हाथ से कुछ तो इशारा किया था, मुझे चिढ़ाया था। वह घर के अंदर चली गई, मैं वहीं बातों में लग गया। थोड़ी ही देर बाद वह फिर से बाहर आई अपने भतीजे को गोद में लेकर। आज वह मुझे खुश लग रही थी। उसने इधर देखा जहां मैं खड़ा था। मेरे साथ और भी लोग थे। वह अपने भतीजे को खिलाते हुए थोड़ा सा बनकर चल रही थी। थोड़ी देर बाद वह घर के अंदर चली गई। मैं भी घर वापस आ गया।

          नहा धोकर मैंने नाश्ता किया और गेहूं पिसवाने पड़ोस के गांव चला गया। हमारे गांव में भी गेहूं पीसने की चक्की है लेकिन गांव के काफी लोग पड़ोस के गांव में गेहूं पिसवाने जाते हैं क्योंकि वहां गेहूं पिसवाना सस्ता पड़ता है। वह चक्की सौर ऊर्जा से चलती है इसलिए उसमें तेल का कोई खर्चा नहीं होता और जबकि गांव की चक्की तेल इंजन से चलती है तो वहां ज्यादा रुपए लगते हैं और गेहूं पिसाई में भी अंतर है। पड़ोस के गांव की चक्की वाला थोड़ा बेहतर पीसता है। वहां से आने के बाद मैं अपने काम में लग गया। दोपहर का समय हो चुका था। मैंने दोपहर का भोजन किया और बाहर चला गया। मुझे पता था कि अब तक वह नहा कर घर के अंदर चली गई होगी और ऐसा ही हुआ। वह मुझे नहीं दिखी। थोड़ी देर में मैं घर वापस आ गया और आराम करने लेट गया। मुझे थोड़ी ही देर हुई थी तभी मेरे दोस्त का फोन आया। उसने बताया कि वह दुकान पर गई है। मैं जल्दी से उठा और दुकान की ओर चला गया लेकिन जब तक मैं वहां पहुंचा वह वापस अपने घर चली गई थी। मैं उसे अब भी नहीं देख पाया। सुबह से अब तक वह मुझे दिखाई नहीं दी थी और मुझे पता भी नहीं था कि आज उसने नहाने के बाद कौन से कपड़े पहने हैं। मैं वापस आ गया और अपने काम में लग गया।

          आज मैं दोपहर में नहीं सोया, अपना काम करता रहा। जब शाम की चाय का समय हुआ तो मैंने चाय पी और बाहर का एक चक्कर लगाया लेकिन वह मुझे नहीं दिखी। मैं घर वापस आ गया और फिर से काम करने बैठ गया। काम करते-करते शाम होने वाली थी। मुझे अपने खेतों पर भी जाना पड़ा। वहां से आने के बाद मैं शाम के समय बाहर गया। उसका दरवाजा आधा खुला हुआ था और आखिरकार सुबह के बाद अब शाम को वह मुझे थोड़ी सी दिखाई दी थी। आज उसने नीला सूट पहना हुआ था, हालांकि उतनी अच्छी तरह से मैं उसे अभी भी नहीं देख पाया था लेकिन मुझे इतने से ही खुशी मिल रही थी। मैं वहीं बैठा रहा। कुछ समय बाद मेरे दोस्त भी आ गए। हम सभी वहीं बैठ कर बातें करते रहे। थोड़ी-थोड़ी देर बाद वह मुझे दिखाई देती रही। कुछ समय बाद मेरे दोस्त उठ कर चले गए लेकिन मैं वहीं बैठा रहा। मैं उसके दरवाजे और छत की ओर देख रहा था, इस आस में कि वह आ जाए। थोड़ी देर बाद मेरी निगाह उसकी छत पर गई तो मैंने उसे वहां देखा। उसे वहां देखकर मुझे बहुत खुशी हुई। उसने मेरी ओर देखा तो मुझे बहुत अच्छा लगा। थोड़ी देर बाद वह छत की दूसरी तरफ चली गई। अब मैं उसे नहीं देख पा रहा था। मैंने इधर-उधर जाकर देखने की कोशिश की लेकिन वह नहीं दिखाई दी। थोड़ी देर बाद वह फिर मेरी तरफ आई और नीचे चली गई। उसके बाद वह छत पर नहीं आई। मैं अभी भी वहीं बैठा था।

           मुझे उम्मीद थी कि वह दरवाजे में आकर मुझे देखे या किसी और तरह से कहीं से भी आ जाए। इस उम्मीद में मैं वहीं बैठा था जबकि थोड़ी देर बाद रात होने वाली थी। मुझे उसकी आवाज आई। वह अपने घर के बाहर थी और यूं ही टहलते हुए ऐसी जगह आयी जहां से वह मुझे देख सकती थी। वह मुझे देखने आई और उसने देखा कि मैं अभी भी वहीं बैठा हूँ। वह देखकर वापस चली गई क्योंकि वह वहां नहीं रुक सकती थी। एक तो वह घर के बाहर थी और उसके घर के कुछ सदस्य भी उसके आसपास थे। वह देखकर अंदर चली गई। मैंने थोड़ी देर और प्रतीक्षा की, जब वह नहीं आई तो मैं अपने घर आ गया। रात का भोजन करने के बाद मैं बाहर टहलने चला गया। उसका दरवाजा बंद था। मैं वहीं टहल रहा था। थोड़ी देर बाद मुझे किसी काम से घर आना पड़ा। आज उसके पड़ोस के घर में गीत-संगीत का कार्यक्रम था और मुझे पूरी उम्मीद थी कि वह वहां जाएगी लेकिन दुर्भाग्य से जिस समय मैं काम से घर आया था उसी समय वह वहां गई थी और जब तक मैं काम समाप्त करके वापस वहां पहुंचा, वह वहां जा चुकी थी। लेकिन मैंने उसकी प्रतीक्षा की क्योंकि वह वापस भी आती, हालांकि कोई फायदा नहीं होने वाला था क्योंकि उसके साथ उसके परिवार की और महिलाएं भी होतीं। लेकिन अंधेरे में ही सही मुझे वह परछाईं की तरह तो दिखती और उसकी आवाज भी सुनने को मिल जाती। मुझे इतने से ही बहुत खुशी मिलती।

           उसके वापस आने तक मैं उसकी प्रतीक्षा करता रहा। जब वह काफी समय तक नहीं आई तो मेरा मन हुआ कि मैं घर आ जाऊं क्योंकि समय भी काफी हो चुका था लेकिन पता नहीं क्यों मैंने सोचा थोड़ी देर और रुक जाता हूँ। मैं उसकी प्रतीक्षा कर रहा था कि तभी मुझे कुछ महिलाओं की आवाज आई और उनमें से एक मीठी सी आवाज भी आई जो कि उसी की थी। मेरा वहां रुकना सफल हो गया। उसकी आवाज सुनकर मुझे बहुत अच्छा लगा, हालांकि वह मुझे दिखाई नहीं दी क्योंकि अंधेरा था। लेकिन मुझे उम्मीद है कि उसने वहां जरूर देखा होगा कि मैं वहां हूँ या नहीं क्योंकि यह तो अनुमान उसने भी लगाया होगा कि आज गीत-संगीत में उसके जाने का मुझे पता होगा। वह बातें करते हुए अपने घर चली गई। अभी काफी रात हो चुकी थी इसलिए उसके अब छत पर आने की कोई संभावना नहीं थी। मैं थोड़ी देर बाद घर वापस आ गया। अभी रात के 11:00 बज चुके हैं तो अब मैं चलता हूँ सोने, आपसे मिलूंगा कल फिर से एक और नई पोस्ट के साथ… शुभ रात्रि।

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