शनिवार, 5 अक्टूबर 2024

अगर वो किसी बात से नाराज है तो मुझे बताना तो चाहिए कि क्या गलती हुई है... बताती भी नहीं है | 4 October Diary

 स्वागत है आप सभी लोगों का मेरी डेली डायरी में, आज है 4 अक्टूबर 2024। कुछ दिनों से मैं रात में काफी देरी से सो रहा हूँ इसलिए मुझे सुबह उठने में थोड़ी परेशानी हो रही है। आज भी वैसा ही हुआ, आज मेरी आंख खुली तो उठने का मन नहीं कर रहा था तो मैं एक बार फिर से सो गया। लेकिन सुबह एक बार आंख खुलने के बाद फिर उतनी अच्छे से नींद नहीं आती इसलिए मैं कुछ देर के बाद उठ गया। उठने के बाद काफी सुस्ती आ रही थी। मैं उठा और थोड़ी देर यूं ही बैठा रहा। कुछ देर बाद मैंने एक गिलास पानी पिया और टहलने बाहर की ओर निकल गया। जैसे ही मैं बाहर पहुंचा, वह अपने घर के बाहर एक बच्चे को खिला रही थी। मैं वहां थोड़ी देर रुकता लेकिन तभी मैंने देखा कि पीछे से कोई आ रहा है तो मैं ना रुक कर सीधा निकल गया और जब थोड़ी ही देर बाद वापस आया तो वह वहां नहीं थी। वह घर के अंदर जा चुकी थी। मैं वापस घर आ गया।

            मैं अपने दैनिक कार्यों से निवृत हुआ और नाश्ता करके फिर बाहर चला गया लेकिन इस बार वह दिखाई नहीं दी। मैं थोड़ी देर के बाद वापस घर आ गया और पढ़ने बैठ गया। कुछ देर पढ़ने के बाद मैंने अपने दूसरे काम किये और उसके बाद फिर पढ़ा। जब मुझे पढ़ते हुए काफी देर हो गई और दिमाग थकने लगा तो मैं उठकर बाहर चला गया और जैसे ही मैं उसके घर के सामने पहुंचा वह अपने घर के बाहर पानी भर रही थी। उस समय उसकी नजर मेरी ओर नहीं थी। मैं वहीं खड़े होकर उसे देखने लगा। कुछ ही सेकंड बाद उसने नजर घुमाई और मेरी तरफ देखकर अपनी निगाह हटा ली और पानी भरकर घर के अंदर चली गई। उसके बाद मैंने थोड़ी देर उसकी प्रतीक्षा की और उसे दूसरी तरफ से जाकर देखना चाहा लेकिन फिर वह नजर नहीं आई। कुछ समय बाद मैं घर वापस आ गया। उसने जिस तरह से मुझे देखकर अपनी नज़रें हटाईं, मुझे लगा… वह किसी बात पर गुस्सा है। लेकिन कम से कम बताए तो सही कि बात क्या है।

             आज दोपहर में फिर से मुझे सुस्ती आने लगी और ना चाहते हुए भी मैं आज फिर से सो गया। आज मैं उम्मीद के मुताबिक नहीं पढ़ पाया। जितना मैंने सोचा था उससे कम ही पढ़ाई हुई। आज मन भी कुछ अजीब सा हो रहा था। शाम की चाय के वक्त मम्मी ने मुझे उठाया। मैं उठा और थोड़ी देर बाद मैंने चाय पी। उसके बाद मेरी पढ़ाई नहीं हुई, फिर मैं अपने दूसरे कामों में लग गया। मैं बैठकर मोबाइल में कुछ काम कर रहा था तभी वह मुझे दुकान पर जाती हुई दिखाई दी। मैं उठकर बाहर आ गया और रास्ते पर ऐसी जगह खड़ा हो गया जहां वह मुझे वापसी में मिलती। मैंने उसे आज बहुत दिनों के बाद इतने करीब से देखा। दुकान से आते हुए उसने मेरी ओर नहीं देखा और नज़रें नीचे करके आगे निकल गई। उसने आगे जाकर भी पलट कर नहीं देखा। इससे मुझे लग गया कि कोई ना कोई तो बात है जिससे वह परेशान है और मुझसे नाराज है। लेकिन मैं करूं तो क्या करूं वह कुछ बताती भी तो नहीं है। वह घर के अंदर चली गई। मैं थोड़ी देर रुका और वापस घर आ गया।

           शाम के समय मैं बाहर गया। आज मैं काफी देर से बाहर गया था इसलिए ज्यादा समय तक बाहर नहीं रुका। उसका दरवाजा बंद था और आज मैं कहीं बैठा भी नहीं। जब मैं वहां पहुंचा तो मेरे साथी वहां पहले से मौजूद थे। उनसे थोड़ी देर बातें करके वापस घर आ गया। आज मेरा मन फिर से उदास हो रहा था। कल जैसे उसने मुझे देखा तो मुझे लग रहा था कि अब सब कुछ ठीक होने वाला है, वह मुझसे बात करेगी। लेकिन आज जिस तरह से उसने मुझे देखकर अपनी नजर हटाई तो मुझे लगा कि वह मुझसे अभी भी नाराज है या हो सकता है फिर से कोई बात हुई हो जिसने उसे परेशान कर दिया है। जब वह दुकान से वापस घर जा रही थी तो मैंने उससे पूछा था कि आखिर बात क्या है, मैंने ऐसा क्या किया है…? लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया और सीधी घर चली गई। मुझे उस पर बहुत गुस्सा आया कि मैं तो इसकी इतनी परवाह करता हूँ और इतना प्यार करता हूँ लेकिन उसे मेरी चिंता नहीं है। घर जाकर मैं काफी देर उदास रहा और उसके बारे में सोचता रहा।

            रात का खाना खाने के बाद रोज की तरह मैं बाहर टहलने निकल गया। जब मैं वहां पहुंचा तो मेरे साथी पहले से मौजूद थे। हम लोग कुछ देर वहीं बैठे और उसके बाद गांव से बाहर टहलने निकल गए। आज हम काफी दूर तक टहलने के लिए निकल गए थे। वहां से वापस आकर हम लोग फिर से वहां बैठकर बातें करने लगे। जब घर आने का समय हुआ तो हम घर की ओर चल दिए। घर आने के बाद मेरा मन आज बिल्कुल भी ठीक नहीं था। ना तो पढ़ने का मन कर रहा था, ना ही कुछ और काम करने का। आज डायरी लिखने का भी मन नहीं था। आज मैंने अपना कोई काम नहीं किया है। लेकिन मैं अपने आप को समेट कर डायरी लिखने बैठ गया। उसे अच्छी तरह से पता है कि जब वह नाराज होती है तो मेरा मन कुछ भी करने का नहीं करता, लेकिन वह फिर भी ऐसा करती है। मुझे उस पर बहुत झुंझलाहट आ रही है। पता नहीं यह सब कब ठीक होगा। अभी रात के 11:15 बज रहे हैं तो चलिए अब मैं चलता हूँ सोने (नींद भी पता नहीं कब आएगी), आपसे मिलूंगा कल फिर से एक और पोस्ट के साथ… शुभ रात्रि।

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