रविवार, 6 अक्टूबर 2024

आज उसने दरवाजा खोलकर कुछ देर तक देखा...शायद उसकी नाराजगी कुछ कम हुई है | 5 October Diary

 स्वागत है आप सभी लोगों का मेरी डेली डायरी में, आज है 5 अक्टूबर 2024। कल की तरह आज सुबह भी मैं थोड़ा देरी से सोकर उठा क्योंकि रात मुझे सोने में फिर से देरी हो गई थी। सुबह उठने के थोड़ी देर बाद मैंने एक गिलास पानी पिया और बाहर की ओर निकल गया। बाहर जाने से मैं थोड़ा टहल भी लेता हूँ और उसके दिखने की संभावना भी रहती है लेकिन आज वह मुझे दिखाई नहीं दी। थोड़ी देर बाद मैं घर वापस आ गया। अपने दैनिक कार्यों से निवृत हुआ और नाश्ता किया। नाश्ता करने के बाद मैं एक बार फिर से बाहर की ओर चला गया। उसे देखने का मन कर रहा था, लेकिन वह अभी दिखाई नहीं दी थी तो मैं घर लौट आया। घर आने के बाद मैं पढ़ने बैठ गया। लगभग एक घंटा पढ़ने के बाद मैं दिमाग को तरोताजा करने फिर से बाहर निकल गया।

          घर आकर मैं काम कर रहा था तभी मम्मी ने खाने के लिए आवाज लगा दी। आज पिताजी बाहर गए हुए थे तो खाना जल्दी बन गया था, इसलिए आज का भोजन हम लोगों ने और दिन के मुकाबले थोड़ा जल्दी कर लिया और भोजन करने के बाद आदत के अनुसार मैं टहलने निकल गया। उसके घर के सामने से जाते हुए मैंने देखा कि तार पर अभी उसके कपड़े नहीं थे, इसका मतलब था… वह अभी नहीं नहायी थी। वह देरी से नहाती है। मैं थोड़ी देर बाद घर वापस आ गया और फिर से पढ़ने बैठ गया। जब दिमाग थकने लगा तो मैं फिर बाहर चला गया और इस बार मैंने देखा उसके कपड़े तार पर सूख रहे थे। इसका अर्थ था कि वह नहा कर घर के अंदर जा चुकी है। फिर मैं वापस घर आ गया और अपने कुछ काम करने लगा। यह संयोग था या शायद मेरा सौभाग्य कि मेरा मन थोड़ी देर बाद ही बाहर जाने का हुआ। मैं ज्यादा दूर तो नहीं गया था बस घर से बाहर जहां से उसका घर दिखता है, वहां तक गया और जैसे ही मैं वहां पहुंचा वह अपने घर से निकलकर बाहर की ओर आ रही थी। वहां एक फल बेचने वाला खड़ा था। वह उससे फल खरीदने आई थी। मैंने उसे देखा तो मुझे बहुत सुकून मिला। उसने बहुत ही हल्की निगाह से मेरी ओर देखा और तुरंत निगाह हटा ली। वह शायद यह देख रही थी कि मैं किधर देख रहा हूँ। कभी-कभी लगता है कि उसे मेरी चिंता है और वह मेरे बारे में सोचती तो जरूर होगी कि मैं बात नहीं करती तो यह कितना उदास हो जाता है। जब तक वह फल खरीद कर घर के अंदर नहीं चली गई तब तक मैं वहीं रहा।

          उसे देखकर मेरी उदासी थोड़ी कम हुई। मैं वापस घर आ गया। यह दोपहर का समय था। घर आकर मैंने थोड़ी सी पढ़ाई की और उसके बाद अपने कुछ जरूरी काम में लग गया। आज मैं दोपहर में नहीं सोया। मैंने पढ़ाई की और अपना काम किया। इसी तरह दोपहर का समय बीत गया और शाम की चाय का समय हो गया। मैंने चाय पी और फिर थोड़ी देर के लिए घर से बाहर चला गया। उसके घर के सामने जाकर मैंने देखा कि उसके कपड़े अभी भी तार पर सूख रहे हैं, इसका मतलब जब वह कपड़े उतारने आती तो दिखने की संभावना थी। आज धूप कुछ ज्यादा तेज लग रही थी तो मैं ज्यादा देर बाहर नहीं रुका और जल्दी घर आ गया। घर आकर मैं अपने काम में लग गया और जब बाद में बाहर पहुंचा तब तक वह कपड़े उतार कर घर के अंदर जा चुकी थी।

           शाम के समय रोज की तरह मैं जाकर अपने उसी नियत स्थान पर बैठ गया। उसका दरवाजा खुला हुआ था लेकिन थोड़ी देर बाद ही दरवाजा बंद हो गया। मैं वहां बैठकर मोबाइल में अपना काम कर रहा था। थोड़ी देर बाद वहां दो लड़के और आ गए। हम बैठकर बातें करने लगे। थोड़ी देर बाद अचानक दरवाजा खुला और मुझे दरवाजे में वह दिखाई दी। वह थोड़ी देर खड़ी होकर देखती रही। उसके बाद दरवाजा थोड़ा सा बंद किया और दरवाजे की ओट लेकर वह अभी भी देख रही थी। मैंने उसे देखा लेकिन मैं ज्यादा देर तक उसे नहीं देख सकता था क्योंकि मेरे साथ बैठे लड़के को शक हो जाता कि मैं उधर क्यों देख रहा हूँ। उसने जब दरवाजा खोलकर बाहर की ओर देखा तो मुझे बहुत अच्छा महसूस हुआ। मुझे लगा कि वह बात करना चाहती है। उसे शायद एहसास हो रहा है कि मैं उसके बात न करने से उदास रहता हूँ। थोड़ी देर बाद मैं किसी काम से घर वापस आ गया। 

           अब रात हो चुकी थी। रात का भोजन लेने के बाद रोज की तरह मैं बाहर टहलने निकल गया और जाकर अपने नियत स्थान पर थोड़ी देर बैठने के बाद टहलने लगा। मैंने उसकी छत की ओर देखा जहां कोई नहीं था। पता नहीं फिर से वह छत पर कब आएगी। मैं उसकी रोज प्रतीक्षा करता हूँ। थोड़ी देर टहलने के बाद मैं बैठकर मोबाइल चलाने लगा। तभी मेरे साथी वहां आ गए। हम सब बैठकर बातें करने लगे। थोड़ी देर बाद मैं घर वापस आ गया क्योंकि आज मुझे नींद आ रही थी। मैं दोपहर में नहीं सोया था और रात को मेरी नींद पूरी नहीं हो रही है इसलिए मैंने सोचा कि जाकर अभी मुझे थोड़ा काम भी करना है, इसलिए जल्दी काम निपटाकर उसके बाद जल्दी सो जाता हूँ और फिर सुबह जल्दी उठूंगा। घर आने के बाद मैंने अपना काम किया और उसके बाद डायरी लिखने बैठ गया। अभी रात के 10:45 बजने वाले हैं तो अब मैं चलता हूँ सोने, आपसे मिलूंगा कल फिर से एक और नई पोस्ट के साथ… शुभ रात्रि।

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