स्वागत है आप लोगों का मेरी डेली डायरी में, आज है 9 अक्टूबर 2024। पता नहीं क्यों, कुछ दिन से मेरी दिनचर्या टूटती जा रही है… ना तो मैं उतना पढ़ पाता हूँ जितना सोचता हूँ और ना ही कोई और काम ढंग से हो पता है। एक अजीब सा मन हो रहा है। आज सुबह भी मैं थोड़ी देरी से सो कर उठा। उठने के थोड़ी देर बाद एक गिलास पानी पिया और उसके बाद बाहर टहलने निकल गया। वहां से वापस आने के बाद नित्य-कर्म से निपट कर नहाया और नाश्ता किया। उसके बाद फिर बाहर गया। जैसे ही मैं उसके घर के सामने पहुंचा वह अपने घर के बाहर बाल्टी में पानी भर रही थी। आज उसने पीले रंग का सूट पहन रखा था जिसमें वह मुझे आज बहुत ज्यादा प्यारी लग रही थी। यह सूट शायद नया था क्योंकि इससे पहले मैंने उसे यह सूट पहने हुए नहीं देखा था। आज मुझे वह बहुत अच्छी लग रही थी और यह बात मैं उससे कहना चाहता था लेकिन कह नहीं पाया। मैंने सोचा बाद में मौका मिलेगा लेकिन आज पूरे दिन मुझे कोई मौका नहीं मिला।
थोड़ी देर बाद मैं घर वापस आ गया। मैंने कुछ देर पढ़ाई की और उसके बाद अपने दूसरे काम किये। दोपहर का भोजन करने के बाद मैं रोज की तरह फिर से बाहर गया लेकिन वह मुझे दिखाई नहीं दी। आज शाम तक वह मुझे नहीं दिखी थी। पता नहीं घर के अंदर क्या कर रही थी। मैं वापस घर आ गया। घर आने के बाद मैं आराम करने लेट गया और फिर थोड़ी देर बाद मुझे झपकी लग गई लेकिन मैं जल्दी ही उठ गया और अपना काम पूरा किया। उसके बाद कुछ देर पढ़ा। शाम की चाय पीने के बाद मैं फिर से बाहर गया। इस बार वह मुझे हल्की सी दिखाई दी लेकिन उसके आसपास उसके घर के लोग थे इसलिए मैं उधर नहीं देख सकता था। मैं आगे निकल गया और थोड़ी देर बाद वापस घर आ गया। घर आने के बाद मैं फिर से कुछ देर पढ़ा।
शाम के समय रोज की तरह मैं बाहर गया। उसके घर के सामने से गुजरते हुए वह मुझे अपने घर के अंदर बैठी हुई दिखाई दी। फिर से उसके आसपास उसके घर के सदस्य थे इसलिए ना तो मैं उसे इशारों में कुछ कह सका और ना ही उसे ठीक से देख सका, मैं आगे निकल गया। मैं अपने नियत स्थान पर पहुंच गया जहां पहले से मेरे और भी साथी बैठे हुए थे। उसका दरवाजा खुला हुआ था लेकिन थोड़ी देर बाद उसने दरवाजा बंद कर लिया। मुझे वह दिख गई थी, वह खुद से आई थी दरवाजा बंद करने। मुझे लगा शायद मेरे आने की वजह से उसने दरवाजा बंद किया है क्योंकि पहले से खुला हुआ था। उस समय मुझे बहुत ज्यादा बुरा लगा, एकदम से उदासी मेरे अंदर भर गई। पता नहीं वह मुझे कभी समझ पाएगी या नहीं। वह ऐसा क्यों कर रही है। मैंने कुछ देर वहां बातें कीं लेकिन मेरा मन थोड़ा उदास था। जब रात होने वाली थी तो मैं वापस घर आ गया। घर आने के बाद उसके बारे में सोचता रहा कि वह ऐसा क्यों कर रही है। कभी-कभी मुझे लगता है कि वह मेरे बारे में उतनी गंभीर नहीं है जितना कि मैं उसके बारे में हूँ क्योंकि अगर वह मेरी तरह गंभीर होती तो मिलने या बात करने का कोई ना कोई रास्ता जरूर निकालती और मुझसे बात करना बंद नहीं करती।
रात का भोजन करने के बाद मैं बाहर टहलने निकल गया। वहां मेरे अन्य साथी पहले से मौजूद थे। मैं थोड़ी देर टहलता रहा और टहलने के बाद उनके पास जाकर बैठ गया। हम लोग बातें करते रहे। वह आज भी छत पर नहीं आई और ना ही आज मुझे उसकी कोई आवाज उसके घर से आई। मैं बार-बार उसके दरवाजे और छत की ओर देख रहा था, लेकिन वह नहीं आई। हम लोग वहां बातें करते रहे। जब रात ज्यादा होने लगी तो हम अपने-अपने घर आ गए। घर आकर मैंने अपने दिन के बचे कुछ काम निपटाए और उसके बाद डायरी लिखने बैठ गया। अभी रात के 11:30 बजने वाले हैं तो अब मैं चलता हूँ सोने, आपसे मिलूंगा कल फिर से एक और नई पोस्ट के साथ… शुभ रात्रि।
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